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    राम मंदिर के बाद केदारनाथ-बद्रीनाथ से चढ़ावा चोरी का आरोप:कर्मचारियों को नोटिस, तीन दिन में जवाब मांगा; जांच के लिए CCTV सुरक्षित रखा

    13 hours ago

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    अयोध्या के राम मंदिर के बाद अब केदारनाथ और बद्रीनाथ मंदिर से भी चढ़ावा चोरी का आरोप लग रहा है। धार्मिक संगठन भैरव सेना के अध्यक्ष संदीप खत्री ने बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) को पत्र लिखकर BKTC अध्यक्ष के निजी सहायक पर चोरी के गंभीर आरोप लगाए हैं। शिकायत मिलने के बाद BKTC के सीईओ सोहन सिंह रांगड़ ने निजी सहायक समेत सभी ड्यूटी कर्मचारियों को नोटिस जारी कर तीन दिन के अंदर जवाब मांगा है। मंदिर के सीसीटीवी फुटेज को जांच के लिए सुरक्षित रख लिया गया है। BKTC अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कहा कि मंदिर समिति इस मामले को गंभीरता से ले रही है। जिन कर्मचारियों पर आरोप लगाए गए हैं, उन्हें स्पष्टीकरण देने के लिए नोटिस जारी कर दिया गया है। यदि कोई कर्मचारी दोषी पाया जाता है, तो सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। मामले पर सीएम पुष्कर सिंह धामी की तरफ से अभी कोई बयान सामने नहीं आया है। सरकार मामले में मंदिर समिति की रिपोर्ट का इंतजार कर रही है। 5 पॉइंट में पूरी खबर… 1. वीडियो वायरल होने के बाद उठी आवाज- यह विवाद तब शुरू हुआ जब सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो वायरल हुए, जिनमें मंदिर की दान व्यवस्था और दानपात्रों से निकाली जाने वाली राशि को लेकर सवाल उठाए गए। इसके बाद धार्मिक संगठन भैरव सेना के संस्थापक अध्यक्ष संदीप खत्री ने BKTC को एक पत्र सौंपा। इसमें BKTC अध्यक्ष के कथित निजी सहायक (PA) और अन्य ऑन-ड्यूटी कर्मचारियों पर दान के रुपए में गड़बड़ी करने के गंभीर आरोप लगाए गए। 2. अंदर से ही हुई मुखबिरी- संदीप खत्री के मुताबिक, इस कथित गड़बड़ी की खबर मंदिर समिति के अंदरूनी सूत्र ने भैरव सेना संगठन तक पहुंचाई थी। सूचना यह थी कि पिछले कुछ समय से दान की गिनती के दौरान हेरफेर किया जा रहा है। 2 जुलाई 2026 को जैसे ही सीसीटीवी कैमरे में एक कर्मचारी की स्थिति संदिग्ध दिखाई दी, इसकी सूचना तुरंत भैरव सेना को दी गई, जिसके बाद संगठन ने तुरंत एक्शन लेते हुए BKTC के मुख्य कार्याधिकारी (सीईओ) को ज्ञापन सौंप दिया। 3. BKTC के कर्मचारियों को नोटिस जारी- बीकेटीसी के मुख्य कार्याधिकारी (सीईओ) सोहन सिंह रांगड़ ने संज्ञान लेते हुए आरोपी निजी सहायक समेत सभी ड्यूटी पर तैनात 4 कर्मचारियों को नोटिस जारी कर 3 दिन के अंदर जवाब मांगा है। बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने मामले की निष्पक्ष और तथ्यपरक जांच के लिए विशेष चार सदस्यीय जांच समिति गठित की है। समिति में विधि अधिकारी शिशुपाल सिंह बर्तवाल, वित्त नियंत्रक हेम कांडपाल और मुख्य प्रशासनिक अधिकारी राजन नैथानी शामिल हैं। 2 जुलाई की संदिग्ध सीसीटीवी फुटेज को जांच के लिए सुरक्षित रख लिया गया है। हालांकि, प्रबंधन के अनुसार फुटेज को जूम करने पर तस्वीर धुंधली होने के कारण फिलहाल पहचान पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पा रही है। 4. BKTC अध्यक्ष बोले- मेरे पास कोई निजी सचिव नहीं- हल्द्वानी पहुंचे बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कहा कि सोशल मीडिया पर जिस कर्मचारी को अध्यक्ष का 'निजी सचिव' या 'निजी सहायक' बताया जा रहा है, वह दावा पूरी तरह गलत और भ्रामक है। अध्यक्ष ने साफ किया कि उनका कोई पर्सनल पीए नहीं है। संबंधित कर्मचारी बीकेटीसी का एक नियमित (परमानेंट) सरकारी कर्मचारी है, जो पूर्व में भी तीन अलग-अलग अध्यक्षों के कार्यकाल में वैयक्तिक सहायक के रूप में अपनी सेवाएं दे चुका है। अध्यक्ष ने आगे कहा कि यदि जांच के बाद आरोप सही पाए जाते हैं और कोई भी कर्मचारी दोषी मिलता है, तो उसे बिल्कुल बख्शा नहीं जाएगा और उसके खिलाफ नियमानुसार कठोर से कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि अयोध्या मामले के बाद से ही BKTC पहले से सतर्क थी और परिसर में हाई-रेजॉल्यूशन (उच्च क्षमता) के कैमरे लगाए गए हैं ताकि पूरे परिसर की साफ रिकॉर्डिंग हो सके। 5. निष्पक्ष जांच की मांग और दान की प्रक्रिया- बद्रीनाथ धाम के पूर्व रक्षा प्रवक्ता एवं तीर्थ पुरोहित समाज के अध्यक्ष अमित सती ने मांग की है कि जांच पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए। केवल कर्मचारियों पर ही नहीं, बल्कि दान-चढ़ावे की पूरी व्यवस्था की समीक्षा की जानी चाहिए ताकि श्रद्धालुओं का विश्वास न टूटे। मंदिर समिति के अनुसार, दानपात्रों से चढ़े हुए रुपए को निकालने और गिनने की एक तय पारदर्शी प्रक्रिया है। इस दौरान मंदिर के अधिकारी, बैंक के कर्मचारी और अन्य अधिकृत लोग मौजूद रहते हैं और यह पूरी प्रक्रिया सीसीटीवी कैमरों की कड़ी निगरानी में होती है। गिनती के बाद पूरी राशि को बैंक में जमा कराया जाता है और रसीदों का पूरा रिकॉर्ड सुरक्षित रहता है। BKTC का विवादों से पुराना नाता नए मामले ने BKTC की विश्वसनीयता पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। पिछले कुछ समय से समिति लगातार कई अन्य प्रमुख विवादों को लेकर भी चर्चा में रही है- क्या है BKTC और क्यों हुआ था गठन श्री बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति का गठन द यूपी श्री बद्रीनाथ और श्री केदारनाथ टेंपल एक्ट 1939 के तहत किया गया था। यह कानून मंदिरों के बेहतर प्रशासन और प्रबंधन के लिए बनाया गया था। इस अधिनियम में समिति की संरचना, उसके अधिकार, मंदिर संचालन, व्यवस्था बनाए रखने और नियम बनाने से जुड़ी बातें तय की गई हैं। यानी समिति के पास मंदिरों के प्रशासन और व्यवस्था को लेकर निर्णय लेने का अधिकार इसी कानून के तहत आता है। --------------------------------------------------------- ये खबर भी पढ़ें… प्रियंका गांधी वाड्रा की जेठानी का भूमि विवाद हाईकोर्ट पहुंचा:लोगों को हटाने, महिलाओं-बच्चों को रोकने का आरोप; SDM-SHO तलब कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा की जेठानी सायरा वाड्रा से जुड़ा किच्छा का चर्चित 8 एकड़ खान फार्म भूमि विवाद अब उत्तराखंड हाईकोर्ट पहुंच गया है। जबरन कब्जे और प्रशासन की कथित मिलीभगत के आरोपों वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने संबंधित एसडीएम और किच्छा कोतवाली के थानाध्यक्ष को 6 जुलाई को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होने का आदेश दिया है। साथ ही सिविल कोर्ट के 11 जून के आदेशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए हैं। (पढ़ें पूरी खबर)
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