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    रिश्तेदारों ने कहा- फिल्मों में जाएगी तो शादी नहीं होगी:‘हीरोइन जैसी नहीं दिखती’ कहकर ऑडिशन में हुईं रिजेक्ट, ‘एनिमल’ से नेशनल क्रश बनीं तृप्ति डिमरी

    3 hours ago

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    दिल्ली के वसंत विहार की एयर इंडिया कॉलोनी में पली-बढ़ीं तृप्ति डिमरी के सपनों की उड़ान घर के सांस्कृतिक माहौल से शुरू हुई। पिता दिनेश डिमरी रामलीला मंच के सक्रिय कलाकार रहे, लेकिन हालातों ने उनके अभिनय के सपने को पेशे में बदलने नहीं दिया। शायद वही अधूरा सपना तृप्ति की आंखों में आकार लेने लगा। दिल्ली पब्लिक स्कूल से पढ़ाई और श्री अरबिंदो कॉलेज से समाजशास्त्र में ग्रेजुएशन की डिग्री के दौरान मॉडलिंग का एक छोटा-सा मौका मिला, जिसने उन्हें मुंबई तक पहुंचा दिया। संतूर के विज्ञापन से शुरुआत हुई, लेकिन आगे का रास्ता आसान नहीं था। रिश्तेदारों ने ताना मारा कि एक्ट्रेस बनने के बाद कोई शादी नहीं करेगा। इंडस्ट्री में उनके लुक और अपीयरेंस को लेकर जज किया गया। ऑडिशन में रिजेक्शन झेले, टिपिकल हीरोइन न दिखने की टिप्पणी की गई। कई बार आत्मविश्वास टूटा, मगर माता-पिता का साथ उनकी ताकत बना रहा। ‘पोस्टर बॉयज’ से डेब्यू के बाद भी संघर्ष खत्म नहीं हुआ। ‘लैला मजनू’ जैसी संवेदनशील फिल्म ने अभिनय की पहचान दी, पर व्यावसायिक असफलता ने फिर शून्य पर ला खड़ा किया। ‘बुलबुल’ और ‘कला’ में कंटेंट-ड्रिवन सिनेमा की मजबूत अभिनेत्री के रूप में सराहना मिली, लेकिन व्यापक लोकप्रियता दूर थी। 2023 में ‘एनिमल’ ने तस्वीर बदल दी। सीमित स्क्रीन टाइम के बावजूद उनका किरदार चर्चा का केंद्र बना और वे रातोंरात ‘नेशनल क्रश’ कहलाने लगीं। आज बड़े बैनर और बड़े सितारों के साथ काम कर रहीं हैं। आज की सक्सेस स्टोरी में जानते हैं तृप्ति डिमरी की लाइफ और करियर से जुड़ी कुछ ऐसी ही कुछ और खास बातें.. रामलीला से मिला अभिनय का संस्कार तृप्ति डिमरी का जन्म 23 फरवरी 1994 को दिल्ली में हुआ। उनका परिवार मूल रूप से उत्तराखंड के गढ़वाल से है, लेकिन पिता दिनेश डिमरी की एयर इंडिया में नौकरी के कारण परिवार दिल्ली में बस गया। वे वसंत विहार स्थित एयर इंडिया कॉलोनी में रहते हैं। तृप्ति के पिता को अभिनय और मंच से खास लगाव था। वे हर साल 10 दिनों तक रामलीला और दशहरा समारोह आयोजित करते थे और करीब 30 साल तक रामलीला कमिटी के सदस्य रहे। बचपन में उन्होंने राम और रावण जैसे किरदार भी निभाए। फिल्मफेयर को दिए इंटरव्यू में तृप्ति ने बताया था कि घर में कला और संस्कृति का माहौल था, जिसने उनके अंदर अभिनय के प्रति झुकाव पैदा किया। पढ़ाई और मॉडलिंग की शुरुआत तृप्ति डिमरी ने 12वीं तक की पढ़ाई दिल्ली पब्लिक स्कूल से की। इसके बाद उन्होंने नई दिल्ली के श्री अरबिंदो कॉलेज से समाजशास्त्र में ग्रेजुएशन किया। कॉलेज के दौरान उनके भाई के एक दोस्त ने पार्क में उनका फोटोशूट किया और तस्वीरें एक मॉडलिंग एजेंसी को भेज दीं। एजेंसी ने उन्हें ऑडिशन के लिए बुलाया और वे सिलेक्ट हो गईं। मुंबई का सफर और फिल्मों में एंट्री तृप्ति को पहला मौका संतूर साबुन के विज्ञापन में मिला, जिसकी शूटिंग मुंबई में हुई। इस प्रोजेक्ट के बाद उन्होंने मुंबई में ही रुकने का फैसला किया और फिल्मों के लिए ऑडिशन देने लगीं। इसी दौरान उन्हें श्रीदेवी स्टारर फिल्म ‘मॉम’ में एक छोटा सा किरदार निभाने का अवसर मिला। यहीं से उनके फिल्मी सफर की शुरुआत हुई। रिश्तेदारों ने कहा कि शादी नहीं होगी इस दौरान तृप्ति के रिश्तेदारों को पता चल गया कि वो एक्टिंग के लिए कोशिश कर रही हैं। रिश्तेदारों ने तृप्ति के पेरेंटस को ताना मरने लगे। तृप्ति कहती हैं- ‘कुछ रिश्तेदारों ने मेरे पेरेंट्स से कहा था कि अगर आपकी बेटी फिल्मों में जाएगी, तो उसकी शादी नहीं हो पाएगी। ऐसे कमेंट्स मेरे पेरेंट्स के लिए आसान नहीं थे, लेकिन फिर भी उन्होंने मेरा साथ दिया। 'पोस्टर बॉयज' ने मेरे पेरेंट्स को भरोसा दिलाया 2017 में 'पोस्टर बॉयज' से डेब्यू किया। उस समय मुंबई नई-नई आई थी, तब पता नहीं था कि क्या करना है। मुंबई शहर अजनबी लगता था। इस फिल्म के लिए पहली बार ऑडिशन में रिजेक्ट हो गई थी। फिर मुझे दोबारा ऑडिशन के लिए बुलाया गया और सेलेक्ट हो गई। पहली ही फिल्म में सनी देओल, बॉबी देओल और श्रेयस तलपड़े के साथ काम करने का मौका मिला। उस समय बहुत घबराहट थी, लेकिन उत्साह भी था। इंडस्ट्री में जगह बनाना मुश्किल था, फिर भी गर्व महसूस हुआ। इस फिल्म ने परिवार को भरोसा दिलाया। कैमरे के सामने खड़े होने का आत्मविश्वास मिला। पहले बहुत शर्मीली थी, लेकिन रोज सौ लोगों के सामने परफॉर्म करने से डर दूर हुआ। फैसला लिया कि कभी रुकूंगी नहीं। आउटसाइडर के लिए इंडस्ट्री में जगह बनाना मुश्किल लेकिन एक आउटसाइडर के रूप में अपनी जगह बनाना आसान नहीं था। ऑडिशन का सिलसिला करीब डेढ़ साल तक चला। कभी-कभी एक ही दिन में तीन-चार ऑडिशन देने पड़ते थे। ऑडिशन के बारे में बहुत कम जानकारी दी जाती थी, लेकिन उम्मीद होती थी कि आप किरदार को पूरी तरह जीवंत कर दें। इतने सारे लोगों के सामने सिर्फ एक या दो मौके मिलते थे। लुक और अपीयरेंस को लेकर ताने मिले शुरू में मेरे लुक और अपीयरेंस को लेकर जज किया गया। मुझसे कहा गया कि तुम बहुत सिंपल हो, तुम टिपिकल हीरोइन जैसी नहीं लगतीं, तुम ग्लैमरस नहीं हो। ऐसे कमेंट्स ने कई बार आत्मविश्वास तोड़ा। उस दौर ने मुझे बहुत कुछ सिखाया कि धैर्य, निरंतरता और खुद को हर बार नया बनाए रखने की जरूरत है। काम मिलने के बाद भी चुनौती खत्म नहीं होती। आपको हर बार कुछ नया लाना पड़ता है, ताकि न दर्शक ऊबें और न आप खुद। 'लैला मजनू' की शूटिंग के दौरान रो पड़ी 2018 में रिलीज फिल्म 'लैला मजनू' मेरे लिए बहुत खास थी। क्योंकि यह मेरी पहली लीड भूमिका वाली फिल्म थी। इस फिल्म की शूटिंग के दौरान एक्टिंग की बारीकियां सीखने को मिली। उस फिल्म ने मुझे बहुत कुछ सिखाया। हालांकि फिल्म की शूटिंग के दौरान कई चुनौतियां थीं क्योंकि हम कश्मीर की घाटियों में लगातार 20 या 24 घंटे तक शूटिंग करते थे। कई बार उस दौरान मैं रो पड़ी, यह सोचकर कि मैं क्या कर रही हूं, क्योंकि कुछ भी आसान नहीं था। हम स्थानीय लोगों के घरों में जाते और वहीं खाना खाते थे, और मुझे कश्मीर से गहरा लगाव हो गया। जब फिल्म अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाई, तो मुझे बहुत निराशा हुई क्योंकि हम फिर से शून्य पर आ गए थे। और फिर हमने दोबारा ऑडिशन देना शुरू किया। ‘बुलबुल’ और ‘कला’ में काम करते वक्त डरी हुई थी 'बुलबुल' में काम करते वक्त मन में शंका थी कि पता नहीं लोगों को मेरा किरदार पसंद आएगा कि नहीं। लेकिन लोगों को फिल्म पसंद आई। फिर 'कला' का ऑफर आया। मुझे डर था कि किरदार एक जैसे न लगें, क्योंकि 'कला' की भी निर्देशक अनविता दत्त थीं। लेकिन उन्होंने भरोसा दिलाया कि दोनों अलग किरदार है। दोनों फिल्मों को दर्शकों का प्यार मिला। ‘एनिमल’ से बनी नेशनल क्रश तृप्‍त‍ि की पॉपुलैरिटी साल 2023 में उस वक्‍त आसमान छूने लगी, जब वह रणबीर कपूर और रश्‍म‍िका मंदाना के साथ फ‍िल्‍म 'एनिमल' में सपोर्टिंग रोल में नजर आईं। फिल्म में उनका किरदार भले ही स्क्रीन टाइम के लिहाज से सीमित था, लेकिन प्रभाव इतना गहरा था कि दर्शकों ने उन्हें हाथोंहाथ लिया। उनकी सहज मुस्कान, आंखों की मासूमियत और किरदार की भावनात्मक परतों को उन्होंने जिस तरह निभाया, उसने उन्हें रातोंरात चर्चा के केंद्र में ला दिया। रिलीज के बाद उनके इंस्टाग्राम फॉलोअर्स में जबरदस्त उछाल आया और ब्रांड्स की कतार लग गई। इस फिल्म लिए उन्हें बेस्‍ट सपोर्टिंग एक्‍ट्रेस का फिल्‍मफेयर नॉमिनेशन भी मिला। इस किरदार के बाद उन्‍हें उनके चाहने वालों ने 'भाभी 2' पुकारना शुरू कर दिया। तृप्‍त‍ि को देश की नई 'नेशनल क्रश' भी बताया गया। ‘एनिमल’ से बदली किस्मत, बढ़ी मार्केट वैल्यू ‘एनिमल’ से पहले तृप्ति डिमरी को कंटेंट-ड्रिवन फिल्मों की अभिनेत्री के रूप में देखा जाता था। वह आलोचकों की पसंद थीं, लेकिन बड़े पैमाने पर लोकप्रियता अभी दूर थी। इस फिल्म ने उन्हें कमर्शियल सिनेमा के दर्शकों तक पहुंचा दिया। यही वजह है कि अब उन्हें बड़े बैनर और स्टार-कास्ट वाली फिल्मों के ऑफर मिल रहे हैं। इंडस्ट्री में उनकी मार्केट वैल्यू और पहचान दोनों में बड़ा बदलाव आया है। बड़े बैनर, बड़े स्टार्स और लगातार नई फिल्में ‘एनिमल’ के बाद तृप्ति अनीज बजमी की ‘भूल भुलैया 3’, राजकुमार राव के साथ ‘विक्की विद्या का वो वाला वीडियो’, धर्मा प्रोडक्शन की ‘बैड न्यूज’ और ‘धड़क 2’ में नजर आईं। विशाल भारद्वाज की फिल्म ‘ओ रोमियो’ में वह शाहिद कपूर के अपोजिट हैं। इसके अलावा वह संदीप रेड्डी वांगा की मच-अवेटेड फिल्म ‘स्पिरिट’ में प्रभास के साथ काम कर रही हैं। पॉपुलैरिटी के साथ जिम्मेदारी भी बढ़ी तृप्ति कहती हैं, “मैंने हमेशा अपने काम पर भरोसा रखा। ‘एनिमल’ के बाद जो प्यार मिला, वह मेरे लिए बेहद खास है। यह सिर्फ पॉपुलैरिटी नहीं, बल्कि जिम्मेदारी भी है कि मैं आगे भी दर्शकों की उम्मीदों पर खरी उतरूं। मेरे लिए हर फिल्म एक नई शुरुआत होती है। मैं चाहती हूं कि लोग मुझे मेरे किरदारों से याद रखें, न कि सिर्फ किसी एक टैग से।” उतार-चढ़ाव ही सिखाते हैं जिंदगी के असली सबक तृप्ति मानती हैं कि जिंदगी में उतार-चढ़ाव आते रहेंगे। वह कहती हैं, “सबसे जरूरी है यह समझना कि आप सही कर रहे हैं और खुद का ध्यान रख रहे हैं। अगर जिंदगी में सिर्फ चढ़ाव ही हों, तो सीखने का मौका नहीं मिलता। असली सबक तब मिलते हैं जब आप नीचे के दौर में होते हैं। तभी पता चलता है कि आपमें क्या कमी है। वरना हम खुद से सही सवाल ही नहीं पूछते। वह खामोशी बहुत जरूरी है, जो आपको खुद के करीब लाती है। आज भी मैं गलतियां कर रही हूं, जो कल सीख में बदलेंगी। यही तो जिंदगी है, बिना उतार-चढ़ाव के मजा ही क्या?” _________________________________________________ पिछले हफ्ते की सक्सेस स्टोरी पढ़िए... शाहिद कपूर के पास कपड़े खरीदने के पैसे नहीं थे:बैकग्राउंड डांसर बने, लोगों ने कहा- हीरो मटेरियल नहीं, बॉलीवुड के सबसे सफल सितारों में शामिल बॉलीवुड में सफलता की चमक अक्सर संघर्ष की लंबी छाया को छुपा देती है, लेकिन कुछ कहानियां ऐसी होती हैं, जो न सिर्फ प्रेरित करती हैं बल्कि यह भी सिखाती हैं कि हालात कितने भी कठिन क्यों न हों, अगर इरादे मजबूत हों तो मंजिल मिल ही जाती है। अभिनेता शाहिद कपूर की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। एक ऐसा सफर जिसमें बचपन का अकेलापन, करियर की अनिश्चितता और लगातार रिजेक्शन मिले।पूरी खबर पढ़ें..
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