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    राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर आरजी पीजी कॉलेज में अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार:7 राज्यों के 200 प्रतिभागियों ने लिया भाग, विकसित भारत 2047 में भारतीय ज्ञान परंपरा की भूमिका पर मंथन

    5 hours ago

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    राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के अवसर पर गुरुवार, 26 फरवरी को रघुनाथ गर्ल्स पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज के वनस्पति विज्ञान विभाग द्वारा एक दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया गया। सेमिनार का विषय था— “प्राचीन ज्ञान से आधुनिक नवाचार की ओर: विकसित भारत 2047 के निर्माण में भारतीय ज्ञान परंपरा की भूमिका”। कार्यक्रम महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो. निवेदिता कुमारी के निर्देशन में संपन्न हुआ। संगोष्ठी का प्रायोजन वनस्पति विज्ञान पुरातन छात्र संगठन, चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय द्वारा किया गया। कार्यक्रम आईक्यूएसी, आईकेएस, आरडीसी सेल, इनोवेशन काउंसिल एवं प्लांट कंजरवेशन सोसायटी के सहयोग से आयोजित हुआ। सेमिनार में देश के सात राज्यों से लगभग 200 प्रतिभागियों ने ऑनलाइन और ऑफलाइन माध्यम से सहभागिता की। सेमिनार का प्रथम सत्र प्रख्यात वनस्पतिशास्त्री प्रो. वी. पुरी की पावन स्मृति तथा द्वितीय सत्र प्रो. वाई.एस. मूर्ति की स्मृति को समर्पित रहा। मुख्य अतिथि डीन-साइंस प्रो. हरे कृष्णा ने भारतीय ज्ञान परंपरा की देश के विकास में भूमिका पर प्रकाश डाला। प्रथम सत्र में मुख्य वक्ता प्रो. संजीव कुमार शर्मा (भौतिकी विभाग, चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय) ने ‘सतत विकास एवं स्वस्थ जीवन हेतु स्वदेशी तकनीक’ विषय पर व्याख्यान देते हुए कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा स्वास्थ्य और प्रकृति के संतुलन पर आधारित है। उन्होंने भस्म के औषधीय गुणों की चर्चा करते हुए विकसित भारत 2047 के संदर्भ में इसकी प्रासंगिकता बताई। दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रो. अभिनीत श्रीवास्तव ने भारतीय ज्ञान परंपरा को विकसित भारत 2047 का उत्प्रेरक बताया। ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त डॉ. राहुल अरोड़ा ने ‘न्यूरोडीजेनेरेशन में होस्ट माइक्रोबायोम अंतःक्रिया हेतु आयुर्वेदिक सूचना विज्ञान’ विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने पार्किंसन और अल्जाइमर जैसी मस्तिष्क संबंधी बीमारियों के समाधान में भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक तकनीक की उपयोगिता पर प्रकाश डाला। साथ ही हल्दी को देसी घी और काली मिर्च के साथ सेवन करने के वैज्ञानिक आधार भी प्रस्तुत किए। द्वितीय तकनीकी सत्र में 110 शोध पत्र एवं शोध पोस्टर प्रस्तुत किए गए। सत्र की अध्यक्षता प्रो. अश्विनी गोयल (पूर्व जॉइंट सेक्रेटरी, हायर एजुकेशन) ने की। जूरी में प्रो. राजेश कुमार शर्मा (पूर्व प्राचार्य, एसएसवी कॉलेज, हापुड़), प्रो. संजीव कुमार शर्मा (वनस्पति विज्ञान विभागाध्यक्ष, मुजफ्फरनगर) एवं डॉ. सुशील कुमार (सह-आचार्य, चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय) शामिल रहे। अंतिम सत्र की अध्यक्षता प्रो. विजय मलिक (वनस्पति विज्ञान विभाग, चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय) ने की तथा प्रतिभागियों को सम्मान पत्र प्रदान किए। उद्घाटन सत्र में सेमिनार की सारांश पत्रिका का विमोचन भी किया गया। कार्यक्रम के सफल आयोजन में महाविद्यालय के प्राध्यापकों, आयोजन समिति, तकनीकी टीम एवं एल्युमनी बॉटनी एसोसिएशन का विशेष योगदान रहा। अंत में प्रो. अमिता शर्मा ने सभी अतिथियों, प्रतिनिधियों एवं प्रतिभागियों का धन्यवाद ज्ञापित किया।
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