Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    रिटायर्ड IAS के बाद पूर्व मंत्री की गिरफ्तारी लगभग तय:भर्ती घोटाला- फाइलों में उन्हीं के साइन, मनमानी भर्ती के लिए नियम बदले

    12 hours ago

    1

    0

    सपा सरकार में पशुधन मंत्री रहे राजकिशोर सिंह गिरफ्तार हो सकते हैं। 14 अक्टूबर को रिटायर्ड प्रमुख सचिव योगेश कुमार को आर्थिक अपराध शाखा (EOW) गिरफ्तार कर चुकी है। दरअसल, साल- 2014 के 1198 पशुधन प्रसार अधिकारी के पदों पर भर्ती हुई थी। उस वक्त राजकिशोर सिंह मंत्री थे। योगेश कुमार विभाग में प्रमुख सचिव थे। दिसंबर, 2017 से ईओडब्ल्यू इस घोटाले की जांच कर रही है। 2022 में पूर्व मंत्री और प्रमुख सचिव के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए शासन से अनुमति मांगी गई थी। योगेश के लिए शासन ने अनुमति दी, लेकिन पूर्व मंत्री राजकिशोर के लिए अभी ईओडब्ल्यू के पास कोई संकेत नहीं आए हैं। ऐसे में ईओडब्ल्यू को अब शासन के इशारे का इंतजार है। सपा के पूर्व मंत्री घोटाले में कैसे फंसे, रिपोर्ट में पढ़िए… राजकिशोर ने परीक्षा सेंट्रलाइज करवाई, 3 स्टेप पर गड़बड़ी डीजी ईओडब्ल्यू जय नारायण सिंह ने दैनिक भास्कर को बताया कि पशुपालन विभाग ने प्रदेश के 17 मंडलों में पशुधन प्रसार अधिकारियों के 1198 पदों पर भर्ती की प्रक्रिया शुरू की थी। इसके लिए 2 फरवरी, 2014 को लिखित परीक्षा आयोजित की गई थी। भर्ती परीक्षा की गड़बड़ी 3 लेवल पर हुई। इसको समझ लेते हैं- 1. पशुधन प्रसार अधिकारी पद पर भर्ती मंडल स्तर पर अपर निदेशक ग्रेड-2 स्तर के अधिकारी से होनी थी। लेकिन, बिना शासन की अनुमति के नियम में बदलाव करके मंडलीय चयन समितियों के अधिकार खत्म कर दिए गए। 2. मंत्री स्तर से अनुमोदन लेकर परीक्षा के बाद इसे सेंट्रलाइज कर दिया गया। यानी भर्ती शुरू हुई मंडल स्तर पर, लेकिन पूरी हुई राज्य मुख्यालय स्तर पर। इसके लिए फाइल चली। जिस पर नीचे से लेकर डिप्टी डायरेक्टर, एडीशनल डायरेक्टर, डायरेक्टर और प्रमुख सचिव के साथ तत्कालीन मंत्री राजकिशोर सिंह के भी हस्ताक्षर हैं। 3. बिना शासन से अनुमति लिए नियमों में बदलाव किए गए। लिखित परीक्षा 100 नंबर के बजाए 80 नंबर की कराई गई। 20 नंबर इंटरव्यू के रखे गए। इसके बाद OMR शीट का मूल्यांकन नियमों के अनुसार नहीं किया गया और मुख्यालय स्तर पर उसमें छेड़छाड़ की गई। इस भास्कर पोल में हिस्सा लेकर अपनी राय दीजिए- रायबरेली के इंस्टीट्यूट से मूल्यांकन कराया, मनमाने नंबर दिलाए डीजी ईओडब्ल्यू जय नारायण सिंह बताते हैं- भर्ती परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाएं (OMR शीट) चेक करने के लिए अधिकारियों ने 2 बहाने बनाए। पहला- पैसों की कमी है। दूसरा- हर जिले या मंडल स्तर पर कॉपियां जांचने में दिक्कत आ रही है। इन कारणों का हवाला देकर उन्होंने नियम बदल दिए। अलग-अलग जगह निष्पक्ष तरीके से कॉपियां चेक कराने के बजाय, सभी कॉपियां 'फिरोज गांधी इंस्टीट्यूट' को दे दिया गया। आरोप यह भी है कि संस्थान को काम सौंपने में निर्धारित नियमों का पालन नहीं हुआ और अनुबंध बैकडेट से किए गए। जांच एजेंसी को इस बात पर भी संदेह हुआ कि मूल्यांकन और अंक देने में हेरफेर करके मनमाने चयन किए गए थे। डीजी ईओडब्ल्यू कहते हैं कि मामला पुराना होने के चलते पूरी भर्ती प्रक्रिया को निरस्त नहीं किया गया। यानी जो लोग सेटिंग से जॉब में आए थे, वो अब भी नौकरी कर रहे हैं। उनको लेकर सरकार का अभी रुख साफ नहीं है। ‘राजकिशोर भाजपा में, इसलिए केस की इजाजत नहीं मिली’ राजकिशोर के खिलाफ ईओडब्ल्यू ने सबूत जुटा लिए हैं। इसके बाद दोनों के खिलाफ केस चलाए जाने के लिए शासन से अनुमति मांगी गई। हाल ही में योगेश कुमार के खिलाफ सरकार ने स्वीकृति दे दी, लेकिन राजकिशोर का मामला लंबित रखा। अगर सरकार केस चलाने की इजाजत दे देती, तो राजकिशोर भी अरेस्ट हो जाते। विभागीय सोर्स कहते हैं- राजकिशोर इस वक्त भाजपा के साथ हैं। 2017 के चुनाव में सपा सरकार जाने के बाद लोकसभा चुनाव 2019 से ठीक पहले उन्होंने कांग्रेस का दामन थाम लिया था। इस दौरान वे हरैया से चुनाव भी लड़े, लेकिन हार गए। 2024 में राज किशोर कांग्रेस छोड़कर भाजपा के साथ चले गए। उन्हें संगठन में कोई पद नहीं मिला है, लेकिन वह दोबारा चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। विधानसभा चुनाव से पहले कार्रवाई, क्या सियासी फायदा होगा भर्ती समाजवादी पार्टी सरकार के कार्यकाल में हुई थी। योगी सरकार लगातार अखिलेश सरकार में हुई भर्तियों में एक खास वर्ग को फायदा पहुंचाने और गड़बड़ियों के आरोप लगाती रही है। चुनाव से पहले इन गिरफ्तारियों से सपा और अखिलेश यादव खुद-ब-खुद घिरते हैं। ऐसे में भाजपा को माइलेज मिल सकता है। हालांकि, इस वक्त राजकिशोर सिंह भाजपा में शामिल हैं। उनके खिलाफ अगर सबूत होने के बाद भी केस चलाने की इजाजत नहीं दी जाती, तो सरकार पर भी सवाल उठेंगे। --------------------------- यह खबर भी पढ़ें- मिर्जापुर में दिव्या मित्तल की जीत आसान नहीं, NDA से मिलेगी कड़ी टक्कर, 2 बड़ी चुनौतियां सामने होंगी पूर्व IAS अधिकारी दिव्या मित्तल मिर्जापुर में अपनी राजनीतिक बिसात बिछा रही हैं। चर्चा है, 2027 का विधानसभा चुनाव यहीं से लड़ेंगी। लेकिन, निर्दलीय चुनाव लड़कर जीत हासिल करना आसान नहीं होगा। सियासी जानकार इसकी 2 बड़ी वजह बताते हैं। पढ़िए पूरी रिपोर्ट….
    Click here to Read more
    Prev Article
    मुस्कान-साहिल को सजा-ए-मौत लिख जज ने पेन फेंका:लिखा- फांसी पर तब तक लटकाओ, जब तक मौत न हो; महाभारत का श्लोक पढ़ा
    Next Article
    सपा के बागी 3 विधायकों का भाजपा से टिकट पक्का:बाहुबली अभय के खिलाफ संगठन; विनोद की कालपी सीट पर ‘निषाद कोटे’ का पेंच

    Related न्यूज Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment