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    ₹1600-3500 में ब्लैक में मिल रहा सिलेंडर:लखनऊ में युवक बोला- 4 दिन से खाना नहीं बना; बंद हो रहे होटल-रेस्टोरेंट

    8 hours ago

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    देश में एलपीजी सिलेंडर की किल्लत के बीच दाम भी आसमान छू रहे हैं। लखनऊ में दिन-दिनभर लाइन में खड़े के रहने के बावजूद लोगों को सिलेंडर नहीं मिल पा रहा है। किसी तरह घरेलू सिलेंडर मिल भी रहा है तो दाम 1600 रुपए है। कॉमर्शियल सिलेंडर का दाम 3500 रुपए तक पहुंच गया है। एजेंसी गोदामों के बाहर लाइन में खड़े कई लोगों ने दावा किया है कि उनके घर में 4 दिन से खाना नहीं बना है। वहीं, होटल-रेस्टोरेंट वालों का कहना है कि अब व्यापार बंद करने की नौबत आ गई है। कैटरर्स की वह स्थिति आ गई है कि शादी समारोह वाला खाना खुले में लकड़ी जलाकर पकाया जा रहा है। छोटे दुकानदारों ने तो किल्लत को देखते हुए दुकान पर कोयले और लकड़ी जलाने के लिए परमानेंट भट्ठी बनवा ली है। ठेले वालों का तो काम बंद हो गया है। दैनिक भास्कर ने इन हालातों को ग्राउंड पर जाकर जाना। आप भी देखिए गैस की किल्लत के बीच कितनी और चीजों का संकट खड़ा हो गया है। पढ़िए यह रिपोर्ट- पहले 3 तस्वीरें देखिए- अब पढ़िए आम लोगों, होटलवालों ने क्या कहा- होटल बंद करने की नौबत आ गई पिकैडली होटल के फाइनेंशियल कंट्रोलर जितेंद्र ने बताया कि- पहले गैस की किल्लत को लेकर कोई सूचना नहीं थी, लेकिन अचानक शॉर्टेज की बात सामने आने लगी। अब हालात यह हैं कि सप्लायर ने बुधवार से सिलेंडर देने के लिए हाथ खड़े कर दिए हैं। जितेंद्र के मुताबिक, गैस सिलेंडर खत्म होने के बाद बाजार की स्थिति और भी खराब हो गई है। कॉमर्शियल इंडक्शन तक बाजार में उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में कई लोग कोयले से खाना बनाने पर विचार कर रहे हैं, लेकिन यह आसान विकल्प नहीं है। किचन बंद करने की नौबत आ गई मेहता स्वीट्स के ललित मेहता ने बताया कि गैस सिलेंडर हमारी पहली जरूरत है। होली तक हमें इस बात का कोई भी अंदाजा नहीं था कि ऐसा हो सकता है। मगर जैसे ही होली की खुमारी उतरी यह मुसीबत आ गई। दुकान के सारे काम बंद पड़े है। बुधवार की सुबह किचन में कोई काम कर पाना संभव नहीं है। जो हमारा एजेंसी और डिलीवरी वाला है वो फोन तक नहीं उठा रहा हैं। बहुत ही असमंजस की स्थिति बनी है कोई भी किसी सवाल का जवाब नहीं दे रहा है। होली पर जितना माल था सब बिक गया। अब नया हम कुछ बना नहीं पा रहे हैं। एक-एक दिन हम लोगों पर भारी पड़ रहा है। छोटे दुकानदार और जो चाय बेचने वाले हैं उन्होंने तो अपनी दुकानें बंद कर दी हैं। एजेंसी में गैस खत्म, ब्लैक में 1600 रुपए का हम पहुंचे गैस एजेंसियों पर। लालबाग में सहकारी एजेंसी पर बुद्धेश्वर से सिलेंडर भरवाने आए रिंकू चौरसिया ने बताया कि उनके घर में पिछले चार दिनों से गैस खत्म है। परिवार में पांच सदस्य हैं और सभी को मजबूरी में पड़ोसियों के यहां खाना खाना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि चार दिनों से लगातार गैस एजेंसी के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन कहीं भी सिलेंडर नहीं मिल पा रहा है। एजेंसी पर गैस उपलब्ध नहीं है, जबकि ब्लैक में वही सिलेंडर तुरंत 1600 रुपए में मिल रहा है। खुलेआम कालाबाजारी हो रही है। हालात कोरोनाकाल जैसे हो गए हैं रिंकू ने कहा- सिर्फ गैस ही नहीं, बल्कि बल्कि आलू, प्याज और टमाटर जैसी जरूरी चीजों के दाम भी बढ़ा दिए गए हैं। हालात कोरोनाकाल जैसे लगने लगे हैं। उस समय ऑक्सीजन सिलेंडर ब्लैक में मिल रहा था, अब एलपीजी सिलेंडर। यहां बड़ी संख्या में लोग लाइन लगाकर खड़े हैं, लेकिन उनकी सुनने वाला कोई नहीं है। उनका कहना है कि हमला कहीं और हो रहा है, लेकिन उसका असर यहां आम लोगों पर पड़ रहा है और सिलेंडर महंगे हो रहे हैं। 10 साल में पहली बार लाइन में लगना पड़ा जानकीपुरम से करीब 10 किलोमीटर दूर से लालबाग सिलेंडर भरवाने पहुंचे विनय मौर्या ने दोपहर 2 बजे बताया कि वह पिछले पांच घंटे से लाइन में खड़े हैं, लेकिन सिलेंडर अभी नहीं मिल पाया। विनय ने कहा कि जैसे पता चला कि करीब एक हफ्ते बाद गैस की गाड़ी आई है, इसलिए इतनी लंबी लाइन लग गई। पिछले 10 साल में पहली बार गैस सिलेंडर के लिए इस तरह लाइन में लगना पड़ा है। घर में सुबह का नाश्ता मजबूरी में लकड़ी के चूल्हे पर बनाना पड़ा। बताया जा रहा है कि घरेलू 1600 और कॉमर्शियल सिलेंडर 35 रुपए में तुरंत मिल जा रहा है। लेकिन, नियम से लाइन में खड़े लोगों को मिलना मुश्किल हो रहा है। 5 मार्च से नहीं मिल रहा है सिलेंडर मनीषा ने कहा कि गैस सिलेंडर के लिए लाइन लगाना बेहद दुखद है। 5 मार्च से हमलोग सिलेंडर लेने की कोशिश कर रहे हैं, मगर नहीं मिल पा रहा है। ऑनलाइन बुकिंग हो नहीं पा रही है और अब हम लोग एजेंसी के चक्कर काट रहे हैं। एजेंसी वाले कह रहे हैं कि जब DAC नंबर आएगा तब गैस मिलेगी। वह नंबर ऑनलाइनल जनरेट नहीं हो रहा है। ब्लैक में यही सिलेंडर ₹1500 का मिल रहा है। इन्हें ज्यादा पैसे चाहिए इसलिए हमको लाइन में खड़ा कर दिया है। हम अपना घर-परिवार छोड़कर यहां खड़े हैं। हमारे छोटे बच्चे स्कूल छोड़कर गैस सिलेंडर लेकर यहां एजेंसी पर हमारे साथ हैं। कुछ समझ नहीं आ रहा है कि क्या करें। हम लोगों के पास सिलेंडर जैसा कोई विकल्प भी नहीं है। बिना सिलेंडर मुश्किल हुआ रमजान सिलेंडर लेने पहुंचे मोहम्मद शरीफ ने बताया कि रमजान के महीने में लोग घंटों लाइन में खड़े रहने को मजबूर हैं। एजेंसी के कर्मचारी कोई साफ जानकारी नहीं देते, बस इतना कहते हैं कि लाइन में खड़े रहो। शरीफ के अनुसार, उनके घर में परिवार के सभी लोगों ने रोजा रखा है। पिछले दो दिनों से घर में गैस सिलेंडर नहीं है। ऐसे में इफ्तार और खाने का सामान बाहर बाजार से खरीदकर लाना पड़ रहा है। इस वजह से बच्चे भी काफी परेशान हैं। गैस सिलेंडर की कमी से लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि यदि समय पर गैस सिलेंडर मिल जाए तो लोगों की बड़ी समस्या का समाधान हो सकता है। तीन बार लाइन में लगे नहीं मिला सिलेंडर आर्यन ने बताया कि वह एजेंसी पर करीब छह घंटे से लाइन में खड़े हैं, लेकिन इसके बावजूद अभी तक गैस नहीं मिल पाई है। उन्होंने कहा कि छह घंटे बाद जब उनका नंबर आया तो एजेंसी कर्मचारियों ने गैस की पासबुक लाने को कहा। आर्यन के मुताबिक, वह पासबुक लेकर आए और दोबारा लाइन में लगे। इसके बाद कर्मचारियों ने कहा कि जिस मोबाइल नंबर से बुकिंग हुई है, वह मोबाइल लेकर आओ। वह मोबाइल लेकर तीसरी बार लाइन में खड़े हुए, लेकिन इस बार भी उन्हें गैस नहीं मिल सकी। उन्होंने आरोप लगाया कि एजेंसी कर्मचारी एक बार में पूरा प्रोसेस नहीं बताते, इसीलिए लोगों की परेशानी और बढ़ रही है। आर्यन ने कहा कि घर वाले गैस के इंतजार में बैठे हैं और वह यहां घंटों से लाइन में धक्के खा रहे हैं। अब समझ नहीं आ रहा कि क्या करें। ------------------------------ संबंधित खबर भी पढ़िए- यूपी में सिलेंडर की किल्लत, एजेंसियों के बाहर लंबी लाइनें:लखनऊ में झड़प, 3-3 सिलेंडर लेकर पहुंचे लोग; अफसर बोले- गैस की कमी नहीं यूपी में रसोई गैस (LPG) की किल्लत हो गई है। लखनऊ, प्रयागराज, गोरखपुर समेत कई शहरों में बुकिंग के 4 से 5 दिन बाद सिलेंडर नहीं मिल रहे। गैस एजेंसियों के बाहर लाइनें लगने लगी हैं। लखनऊ की लालबाग एजेंसी में ग्राहक की पासबुक फाड़ने पर काफी देर तक हंगामा हुआ। कई लोग 3-3 सिलेंडर लेकर एजेंसी पहुंच गए। पढ़िए पूरी खबर
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