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    सबा पर FIR कराने वाली रुकसाना खुद 420 की मुलजिम:फर्जी रसीद बनाकर संपत्ति कब्जाने की कोशिश की थी

    6 hours ago

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    पाकिस्तान मूल की महिला सबा मसूद पर धोखाधड़ी समेत कई गंभीर आरोपों में केस दर्ज कराने वाली रूकसाना धोखाधड़ी की मुलजिम है। यह दावा सबा मसूद के एडवोकेट वीके शर्मा ने किया है। उनका कहना है कि मुकदमे की तारीख पर न आने के कारण कोर्ट ने रुकसाना का NBW जारी किया था। जिस दिन वह सबा फरहत के खिलाफ देहलीगेट थाने में मुकदमा दर्ज कराने पहुंची थी, उस दिन भी वे 'फरार' थीं लेकिन पुलिस ने गिरफ्तार नहीं किया। उन्होंने पुलिस कार्रवाई पर भी सवालिया निशान लगाया है। जानिए कौन है रुकसाना रुकसाना पत्नी अयाज अहमद जलीकोठी थाना देहलीगेट की रहने वाली हैं। उन्होंने 14 फरवरी, 2026 को देहलीगेट थाने में FIR कराई कि पाकिस्तान मूल की महिला सबा मसूद उर्फ नाजी उर्फ नाजिया पत्नी फरहत मसूद गैरकानूनी तरीके से भारत में रह रही हैं। इसके लिए सबा के द्वारा फर्जी कूटरचित दस्तावेजों का प्रयोग किया गया है। FIR में सबा मसूद के अलावा उनकी बेटी ऐमन फरहत व अन्य परिवारजन को शामिल किया गया था। देहलीगेट पुलिस ने सबा मसूद को गिरफ्तार किया और न्यायालय के समक्ष पेश किया, जहां से सबा मसूद को जेल भेज दिया गया। अब एक नजर सबा पक्ष के दावे पर सबा पक्ष रुकसाना को लेकर शुरु से ही सवाल उठाता रहा है। सबसे बड़ा सवाल तो यह था कि रुकसाना कौन है और उसने उनके खिलाफ शिकायत क्यों की? छानबीन हुई तो चौकाने वाला खुलासा हुआ। सबा के एडवोकेट वीके शर्मा का दावा है कि रुकसाना, सबा मसूद पक्ष के विरोधियों के हाथ की कठपुतली है, जिनके इशारे पर यह खेल रचा गया है। उन्होंने अपनी छानबीन को आगे बढ़ाया तो पता चला कि सबा मसूद के विरोधियों ने वर्ष 2008 में रूकसाना के खिलाफ लालकुर्ती थाने में एक मुकदमा दर्ज कराया था जो न्यायालय में विचाराधीन है। मुकदमे में रूकसाना व पति मुलजिम एडवोकेट वीके शर्मा ने खुलासा किया कि वर्ष 2008 में जो मुकदमा लालकुर्ती थाने में रुकसाना व उनके पति अयाज अहमद के खिलाफ दर्ज हुआ था, उसके वादी सैयद साजिद अली थे। सैयद साजिद अली का इंतकाल हो चुका है जो उस वक्त सबा मसूद के परिवार के विरोधियों के यहां नौकरी करते थे। उन्होंने रुकसाना व अयाज अहमद पर फर्जी रसीद तैयार कर वक्फ की संपत्ति को हड़पने के प्रयास का आरोप लगाया था। इस मुकदमे में धारा 420, 467, 468, 471, 504, 506 शामिल की गई थीं। जिसके NBW, उसने दर्ज कराई रिपोर्ट एडवोकेट वीके शर्मा ने सबा मसूद के खिलाफ दर्ज मुकदमे को लेकर पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जो मुकदमा वर्ष 2008 में रुकसाना व उसके पति अयाज अहमद के खिलाफ दर्ज हुआ था, वह अभी भी कोर्ट में विचाराधीन है। उनका दावा है कि जिस दिन रुकसाना ने देहलीगेट थाने में सबा मसूद के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी, उस दिन उसके खिलाफ कोर्ट का NBW जारी था। सवाल यह है कि उसे हिरासत में लेने के बजाए पुलिस ने उसकी तहरीर पर रिपोर्ट दर्ज कैसे कर ली? हालांकि उनके सवाल उठाने के दो दिन बाद ही वारंट रिकॉल कराए गए। दावा: विरोधियों ने बनाया हथियार एडवोकेट वीके शर्मा बताते हैं कि जब उन्होंने इन कड़ियों को आपस में जोड़कर देखा तो वह दंग रह गए। सबा फरहत के परिवार, उनके विरोधियों व रुकसाना का आपस में गहरा नाता है। वह बताते हैं कि रुकसाना के खिलाफ जिन लोगों ने FIR कराई थी। उन ही लोगों ने पाकिस्तान मूल की सबा मसूद के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है। फर्क केवल इतना है कि वह सामने नहीं आए। उन्होंने पुराने मुकदमे की अपनी विरोधी रुकसाना को तैयार किया और देहलीगेट थाने में उसके नाम से सबा, एमन व अन्य परिवारजनों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा दी। रुकसाना की मजबूरी की दो वजह... वजह-1 : सबा मसूद के परिवार के विरोधियों ने रुकसाना को भरोसा दिलाया हो कि वह उसके खिलाफ चल रहा मुकदमा वापस ले लेंगे। वजह-2 : रुकसाना पर जिस प्रोपर्टी के कब्जे के प्रयास का आरोप लगा था, उस प्रोपर्टी को नाम कराने का लालच दिया गया हो। सबा पर FIR सोची समझी साजिश एडवोकेट वीके शर्मा का कहना है कि सबा मसूद व परिवार पर सोची समझी साजिश के तहत FIR कराई गई है। मकसद संपत्ति को लेकर चले आ रहे विवाद से हटाना मात्र है। अगर ऐसा नहीं है तो 35 साल से भारत में रह रही महिला अचानक से गैरकानूनी कैसे हो गई, जबकि उसके वीजा की अवधि मार्च, 2027 तक है। विरोधियों ने मुकदमा तैयार किया है। इसके लिए सबा मसूद के फर्जी वोटर आईडी तैयार कराए गए हैं। उनका दावा है कि जिस तरह इस मुकदमे की हकीकत सामने आई है, उसी तरह वह वोटर आईडी के पीछे का सच भी सामने लाकर रखेंगे।
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