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    Sabarimala Women Entry Controversy | केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में परंपरा का किया बचाव, कहा- 'ब्रह्मचर्य' है आधार, भेदभाव नहीं

    3 hours from now

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    केरल चुनावों से ठीक पहले, केंद्र सरकार ने सबरीमाला मंदिर मामले के संबंध में सुप्रीम कोर्ट में अपना लिखित जवाब दाखिल किया है। सरकार ने स्पष्ट किया कि 10 से 50 वर्ष की आयु की महिलाओं के मंदिर में प्रवेश पर लगी रोक किसी तरह की 'अशुद्धि' की धारणा या महिलाओं के प्रति भेदभाव के कारण नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य भगवान अयप्पा की "नैष्ठिक ब्रह्मचारी" (आजीवन ब्रह्मचारी) परंपरा और मंदिर की स्थापित रीतियों को बनाए रखना है।इस जवाब में कहा गया है कि इस आयु वर्ग की महिलाओं को मंदिर में प्रवेश की अनुमति देने से पूजा-अर्चना के मूल तरीके और देवता के पारंपरिक स्वरूप में बदलाव आ सकता है, जिससे संविधान के तहत संरक्षित धार्मिक बहुलवाद पर भी असर पड़ सकता है। सुप्रीम कोर्ट की नौ जजों वाली संवैधानिक पीठ आज से इस मामले की सुनवाई शुरू करेगी। इसे भी पढ़ें: सावधान! आपके बच्चों पर है ISIS आतंकियों की नज़र! Rizwan Ahmed की 'बम किट' ने खोली खौफनाक आतंकी साजिश की पोल! राजनीतिक और सामाजिक महत्वकेरल में चुनावों से ठीक पहले केंद्र का यह हलफनामा काफी मायने रखता है। सबरीमाला का मुद्दा राज्य में हमेशा से एक संवेदनशील और भावनात्मक मुद्दा रहा है। 2018 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले (जिसमें सभी आयु की महिलाओं को प्रवेश की अनुमति दी गई थी) के बाद बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए थे। इसे भी पढ़ें: Mojtaba Khamenei Unconscious | ईरान के सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई अस्पताल में बेहोश, शासन चलाने में असमर्थअब, केंद्र सरकार द्वारा परंपराओं के पक्ष में खड़े होने से इस कानूनी लड़ाई में एक नया मोड़ आ गया है। कोर्ट को अब यह तय करना है कि 'व्यक्तिगत समानता का अधिकार' और 'धार्मिक संस्थाओं की अपनी परंपराएं बनाए रखने की स्वतंत्रता' के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। 
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