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    संभल डीएम ने NCERT किताबें अनिवार्य की:निजी प्रकाशन की किताबों पर अभिभावक की अनुमति जरूरी, शासन के निर्देशों के अंतर्गत फीस बढ़ेगी

    8 hours ago

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    संभल के स्कूल-कॉलेजों में NCERT किताबों की अनिवार्यता को लेकर जिलाधिकारी ने एक महत्वपूर्ण बैठक की है। इस दौरान शासन से प्राप्त निर्देशों से अवगत कराया गया और स्पष्ट किया गया कि निजी प्रकाशन की किताबें लगाने के लिए अभिभावकों की पूर्व अनुमति आवश्यक होगी। जिलाधिकारी डॉ. राजेंद्र पैंसिया ने बताया कि जनपद के सभी इंटर कॉलेजों के साथ बैठक की गई। इसमें 25 मार्च 2026 को शासन से जारी दिशा-निर्देशों के बारे में जानकारी दी गई। उन्होंने उत्तर प्रदेश स्व-वित्तपोषित विद्यालय शुल्क विनियमन अधिनियम 2018 और उत्तर प्रदेश स्व-वित्तपोषित स्वतंत्र विद्यालय नियमन अधिनियम संशोधित 2020 का उल्लेख करते हुए कहा कि फीस वृद्धि और प्रवेश शुल्क इन्हीं नियमों के अनुरूप होगा। बैठक में यह भी बताया गया कि कक्षा 9 से 12 तक एनसीईआरटी की किताबें अनिवार्य रूप से पढ़ाई जाएंगी। इससे पहले की कक्षाओं के लिए भी एनसीईआरटी या यूपी बोर्ड की पुस्तकों को प्राथमिकता दी जाएगी। सभी विद्यालयों ने इन निर्देशों पर अपनी सहमति व्यक्त की है। नगर पंचायत गंवा के पूर्व बीजेपी चेयरमैन अखिलेश अग्रवाल के सुझाव पर डीएम ने निर्देश दिए कि सभी विद्यालयों के बाहर एक बोर्ड लगाया जाए। इस बोर्ड पर यह अंकित होगा कि विद्यालय में एनसीईआरटी की पुस्तकें पढ़ाई जाती हैं। साथ ही, जिलाधिकारी, संबंधित एसडीएम, सीडीओ, डीआईओएस और डिस्ट्रिक्ट प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग यूनिट के नंबर भी लिखे जाएंगे। इन नंबरों को लिखने का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि केवल एनसीईआरटी की पुस्तकें ही लगें और निजी प्रकाशन की किताबें न लगाई जाएं। यदि किसी संदर्भ पुस्तक की आवश्यकता होती है, तो उसे अभिभावकों की अनुमति लेने के बाद ही लगाया जा सकेगा। गौरतलब है कि जबरन एनसीईआरटी किताबों की बिक्री के मामले संज्ञान में आने के बाद उत्तर प्रदेश की माध्यमिक शिक्षा राज्यमंत्री गुलाब देवी ने तीन दिन पहले निदेशक को फोन कर ऐसे लोगों के खिलाफ अभियान चलाकर कार्रवाई करने, रिपोर्ट दर्ज करने और जेल भेजने के निर्देश दिए थे। वहीं चंदौसी व्यापारियों ने तराजू में रुपयों से NCERT किताबों को तोलकर प्रदर्शन किया था और सरकार-प्रशासन से स्कूल-कॉलेज की मनमानी पर रोक लगाने की मांग की थी।
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