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    संभल जामा मस्जिद के बगल 8 बीघे का कब्जा हटेगा:कब्रिस्तान में बनी 18 मकान-दुकान तोड़े जाएंगी, कोर्ट ने खुद लगाई रोक को हटाया

    10 hours ago

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    संभल के विवादित धार्मिक स्थल जामा मस्जिद से सटे कब्रिस्तान की 8 बीघा जमीन पर बने अवैध निर्माणों को तोड़ा जाएगा। इसके लिए सिविल कोर्ट ने प्रशासन की ओर से की जा रही कार्रवाई पर लगे अपने ही स्टे को खारिज कर दिया है। अब तहसील कोर्ट से अंतिम निर्णय के बाद प्रशासन की ओर से अवैध निर्माणों को हटाने की कार्रवाई की जएएगी। बता दें कि पूरा विवाद कोतवाली क्षेत्र की गाटा संख्या 32/2 की करीब 8 बीघा कब्रिस्तान भूमि को लेकर है। डीएम को एक शिकायत में कहा गया था- कब्रिस्तान की इस 8 बीघा जमीन पर अवैध रूप से बने मकानों-दुकानों की छतों से ही संभल हिंसा के दौरान सर्वे टीम और पुलिस पर पत्थर फेंके गए थे। राजस्व प्रशासन ने 30 दिसंबर, 2023 को जमीन की पैमाइश कराई थी। इसके बाद प्रशासनिक कार्रवाई के खिलाफ कुछ लोग इलाहाबाद हाईकोर्ट पहुंचे, लेकिन वहां से राहत नहीं मिली और मामला तहसीलदार न्यायालय वापस भेज दिया गया। प्रशासन के नोटिस मिलने के बाद अतिक्रमणकारियों ने सिविल कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। जिस पर कोर्ट ने सुनवाई पूरी होने तक प्रशासनिक कार्रवाई पर स्टे लगाते हुए यथास्थिति रहने के आदेश दिए थे। कब्रिस्तान की 8 बीघा जमीन पर बने हैं 18 मकान-दुकानें… अब पूरा मामला विस्तार से पढ़िए… 1990 से पहले कब्रिस्तान होने का दावा 12 दिसंबर 2025 को जिलाधिकारी को शिकायत देते हुए सुभाष त्यागी (श्रीकल्कि सेना) ने दावा किया था कि 1990 से पहले यह पूरी जमीन कब्रिस्तान थी और बाद में इस पर अवैध निर्माण हुआ। उन्होंने दावा किया था, इन्हीं अवैध मकानों की छतों से संभल हिंसा के दौरान पुलिस पर पत्थर फेंके गए थे। इसके बाद एसडीएम के आदेश पर तहसीलदार, नायब तहसीलदार और 26 कानूनगो-लेखपालों की टीम गठित कर 30 नवंबर 2025 को जमीन की पैमाइश कराई गई थी। प्रशासनिक नोटिस मिलने के बाद अवैध अवैध कब्जेदारों ने प्रशासनिक कार्रवाई के खिलाफ जनवरी 2026 में इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की। पर हाईकोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए तहसीलदार न्यायालय जाने को कहा। 30 दिसंबर को हुई थी मापी, तस्वीरें… इसके बाद 18 में से सलमा रानी पत्नी शहाबुद्दीन सहित कुल 15 अवैध कब्जेदारों ने जनवरी 2026 में संभल सिविल कोर्ट में वाद दायर कर दिया। इसमें प्रमुख 3 प्रतिवादी बनाए। जिनमें नगर पालिका परिषद संभल के अधिशासी अधिकारी, यूपी सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के सीईओ और उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से जिलाधिकारी और तहसीलदार संभल शामिल थे। 15 में से चार ने बाद में अपनी याचिका वापस ले ली। याचिका को संज्ञान में लेते हुए सिविल कोर्ट के जज ललित कुमार ने 27 फरवरी 2026 को केस की सुनवाई पूरी होने तक प्रशासनिक कार्रवाई पर स्टे लगाते हुए यथास्थिति बनाए रखने के आदेश दिए थे। 27 मार्च को नगर पालिका के सरकारी वकीलों ने कोर्ट ऑर्डर की प्रति रिसीव की। 9 मार्च को डीजीसी प्रिंस शर्मा अदालत में उपस्थित हुए और याचिका की प्रति प्राप्त की। इसके बाद 9 मार्च, 16 मार्च, 23 मार्च, 30 मार्च और 10 मार्च की डेंटें लगीं। 16 मार्च को हड़ताल के कारण कोई जिरह नहीं हो सकी। आज 10 मार्च को कोर्ट ने नगरपालिका की ओर से रखे गए सभी सबूतों और गवाहों के बिना पर अंतिम फैसला सुनाया। कोर्ट ने प्रशासनिक कार्रवाई पर खुद की ओर से लगाया गया स्टे खारिज कर दिया। नगर पालिका अधिवक्ता बोले- कोर्ट के सामने सच आया तो हटा स्टे नगर पालिका परिषद संभल के अधिवक्ता नलीन जैन ने कहा- संभल के शहर के मौहल्ला कोट पूर्वी स्थित विवादित स्थल धार्मिक स्थल के बराबर में कब्रिस्तान था। उसमें कुछ लोगों ने अवैध कब्जा कर लिया और न्यायालय सिविल जज संभल में न्यायालय से बात छुपाकर स्टे प्राप्त कर लिया था। उस पर नगरपालिका की ओर से मेरे द्वारा जवाब दाखिल किया गया, बहस की गई। आज न्यायालय ने सत्यता जानते हुए उनका स्टे ख़ारिज कर दिया है, अब जो कब्रिस्तान है जिस पर अवैध मकान बने हुए हैं, उस पर सिविल जज जूनियर डिवीज़न संभल से कोई भी स्टे किसी प्रकार का नहीं है, समाप्त हो गया है। स्टे ख़ारिज करके 04-05-2026 अगली कार्यवाही के लिए लगी है।न्यायालय को मिसलीड करके स्टे लिया गया था जो जिन्होंने ने अवैध मकान बना रखे हैं। न्यायालय के आगे सत्य बात आई। न्यायालय बात मानकर नगर पालिका की ओर से जो तथ्य आए उनका जो स्टे का आर्डर था वो निरस्त कर दिया गया है। अब 11-11 केसों में कोई भी स्टे नहीं है जो कब्रिस्तान पर लिए गए थे। ---------------------------- ये खबर भी पढ़ें… सुप्रीम कोर्ट बोला-मेरठ का मामला देश के लिए चेतावनी:कहा- जिंदगी की कीमत पर व्यवसाय नहीं चलेगा, 859 संपत्तियों को तोड़ने के आदेश सुप्रीम कोर्ट ने मेरठ में अवैध निर्माण के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने गुरुवार को 859 संपत्तियों पर बने अवैध सेटबैक को दो महीने के भीतर तोड़ने का आदेश दिया है। अवैध सेटबैक यानी इमारत के चारों ओर छोड़ी जाने वाली अनिवार्य खाली जगह में किया गया निर्माण। पूरी खबर पढ़ें…
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