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    सबसे ज्यादा भाजपा विधायक पलटूराम की सीट पर नाम कटे:बलरामपुर में भाजपा के तीनों सीटों पर सबसे ज्यादा असर, सपा क्षेत्र रहा सुरक्षित

    9 hours ago

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    बलरामपुर में विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण-2026 के बाद सामने आए आंकड़ों ने सियासी हलकों में हलचल तेज कर दी है। सबसे बड़ा असर उन विधानसभा क्षेत्रों में दिखा, जहां भाजपा के विधायक काबिज हैं। सदर सीट से भाजपा विधायक पलटूराम के क्षेत्र में सर्वाधिक 87,850 मतदाता सूची से बाहर हुए। इसी तरह उतरौला से विधायक राम प्रताप वर्मा के क्षेत्र में 86,576 और तुलसीपुर से विधायक कैलाशनाथ शुक्ला के क्षेत्र में 51,999 नाम कटे। इसके उलट गैसड़ी, जो सपा विधायक का क्षेत्र है, वहां सबसे कम 45,847 मतदाता सूची से हटे। 166 दिनों तक चले इस व्यापक पुनरीक्षण अभियान के बाद प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची में जिले में कुल 13,10,755 मतदाता दर्ज किए गए हैं। पुनरीक्षण से पहले यह संख्या 15,83,027 थी, यानी कुल मिलाकर 17.20% मतदाता सूची से बाहर हो गए। दिलचस्प यह है कि जहां भाजपा का प्रभाव मजबूत माना जाता है, वहीं सबसे ज्यादा नाम विलोपित हुए, जबकि सपा क्षेत्र अपेक्षाकृत सुरक्षित रहा—जिससे इस प्रक्रिया के राजनीतिक निहितार्थों पर चर्चा तेज हो गई है। चारों विधानसभा क्षेत्रों के आंकड़े भी इस बदलाव की कहानी बयान करते हैं। तुलसीपुर में मतदाता संख्या 3,77,387 से घटकर 3,25,388 रह गई, गैसड़ी में 3,57,518 से घटकर 3,11,671, उतरौला में 4,26,213 से घटकर 3,39,637 और बलरामपुर (अजा) में 4,21,909 से घटकर 3,34,059 हो गई। हालांकि प्रशासन का कहना है कि यह कटौती डुप्लीकेट नामों और गैर-निवासी मतदाताओं को हटाने के कारण हुई है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों की नजर में यह बदलाव आने वाले चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या यह महज तकनीकी सुधार है या फिर इसके पीछे सियासी असर भी देखने को मिलेगा। भाजपा के गढ़ में मतदाताओं की संख्या में आई यह गिरावट क्या चुनावी परिणामों को बदल देगी, या फिर सभी दलों के लिए यह समान चुनौती बनकर उभरेगी—इसका जवाब आने वाले चुनाव में ही मिलेगा।
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