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    यूपी में सिजेरियन डिलीवरी का ग्राफ 50% तक पहुंचा:एक्सपर्ट्स सामान्य प्रसव को बढ़ावा देने के लिए कर रहे मंथन, 3 दिवसीय कॉन्फ्रेंस का आगाज

    1 hour ago

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    प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं में कई तरह के बदलाव और बीमारियां घेर लेती है। जिसके चलते मां-बच्चा दोनों पर संकट खड़ा हो सकता है। खराब लाइफस्टाइल के चलते आज के जनरेशन में प्रेग्नेंसी के दौरान थायराइड और डायबिटीज का खतरा सबसे ज्यादा बढ़ रहा है। आंकड़ों के अनुसार 30% महिलाओं में हाइपो थायराइड और 57% मामलों में टाइप-2 डायबिटीज होने का खतरा रहता है। जो कि मां-बच्चों दोनों की सेहत के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। ऐसे में समय पर जांच करवाना बेहद जरूरी है। यह जानकारी ऑब्स्टेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजिकल सोसाइटी द्वारा तीन दिवसीय आर्ट ऑफ बर्थिंग कानक्लेव के दौरान एक्सपर्ट्स ने दी। इस कार्यक्रम का उद्घाटन करने अपर मुख्य सचिव चिकित्सा शिक्षा अमित कुमार घोष पहुंचे। इस दौरान उन्होंने प्रदेश में बढ़ती सिजेरियन डिलीवरी पर चिंता जताई। उन्होंने बताया कि पहले जहां 20 से 30% तक सिजेरियन प्रसव होते थे अब इसमें इजाफा होकर ये संख्या 40 से 50% तक पहुंच गई हैं। प्रेग्नेंसी से पहले थायराइड जांच जरूरी लखनऊ ऑब्स्टेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजिकल सोसाइटी की हेड डॉ. प्रीति कुमार ने कहा कि प्रेग्नेंसी में हालात देखकर जांच नहीं करना चाहिए। क्योंकि इससे कोई फायदा नहीं होता है। इसके लिए प्री-प्रेग्नेंसी से ही यूनिवर्सल टेस्ट करवाने चाहिए। खासतौर पर थायराइड टेस्ट बेहद जरूरी है। क्योंकि 30 फीसद एलिजिबल वीमेन फॉर प्रेग्नेंसी को हाइपो थॉयराइड की समस्या होती है। ऐसे में प्रेग्नेंसी से पहले इसकी जांच हो और समस्या मिले तो दवा से इसे नार्मल किया जा सकता है। इससे बच्चे का दिमाग सही ग्रो करेगा। क्योंकि कई बार थायराइड ग्लेंड इसे पूरा प्रोड्यूस नहीं कर पाते है और प्रेग्नेंसी के कई हार्मोन थायराइड प्रोडक्शन में प्रभाव डालते है। ऐसे में आयोडाइज्ड साल्ट खाना बेहद जरूरी है। मां से बच्चों में टाइप-2 का खतरा अधिक बेंगलुरू से आए डॉ.हेमा दिवाकर ने बताया कि प्रेग्नेंसी के दौरान जेशटेशनल डायबिटीज भी होता है। चूंकि इसके कोई लक्षण नहीं होते है इसलिए, समय पर इसका पता नहीं चलता है। इसे संभाल लिया तो बच्चा व मां दोनों सुरक्षित अन्यथा खतरा हो सकता है। अगर इसे समय पर टेस्ट एंड ट्रीट नहीं किया गया तो डिलीवरी के 2-4 साल के बाद महिला को टाइप-2 डायबिटीज हो सकती है। जोकि 57 फीसद मामलों में हो सकता है। वहीं, बच्चे में 12-14 वर्ष की उम्र में मोटापा और 20-25 में टाइप-2 डायबिटीज आ जाता है। जिसे अर्लीहुड ऑनसेट एडल्टहुड डायबिटीज कहते हैं। ऐसे में प्रेग्नेंसी के दौरान सभी को शुगर जांच करवानी चाहिए। परिवार में किसी को समस्या हो य न हो। क्योंकि एशियन वुमेंस में यह समस्या सबसे ज्यादा कॉमन होती है।
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