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    सोने के घोड़े पर विराजमान हुए भगवान रंगनाथ:आतिशबाजी से रोशन हुआ आसमान, मंदिर पहुंचने पर भगवान को भीलों ने लूट लिया

    4 hours ago

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    वृंदावन में स्थित दक्षिण भारतीय शैली के रंगनाथ मंदिर में चल रहे दस दिवसीय ब्रह्मोत्सव के 8 वें दिन शनिवार की देर शाम भव्य आतिशबाजी हुई। भगवान रंगनाथ सोने के घोड़े पर विराजमान होकर बेशकीमती आभूषण पहनकर योद्धा की तरह निकले। एक हाथ में भाला, दुसरे हाथ में तलवार लिए भगवान की सवारी के बड़े बगीचा स्थित मैदान पर पहुंचने पर भव्य आतिशबाजी की गई। भगवान की सवारी नगर भ्रमण के बाद जब दोबारा मंदिर पहुंची तो भगवान को परकाल स्वामी के भील सेवकों ने लूट लिया। भगवान की इस लीला के दर्शन कर मंदिर जयकारों से गूंज उठा। पहले यह 3 तस्वीर देखिए… हाथ में भाला और कमर में तलवार लेकर निकले भगवान रंगनाथ देर शाम भगवान रंगनाथ की सवारी स्वर्ण निर्मित घोड़े पर विराजमान होकर निकली। बेशकीमती आभूषण पहने भगवान रंगनाथ के एक हाथ में चांदी से बना भाला था तो दूसरे में घोड़े की लगाम। पीठ पर ढाल कमर में कसी मूठदार तलवार और रत्न जड़ित जूतियां पहने भगवान की छवि निहारते ही बन रही थी। भगवान के इस स्वरूप को देख लग रहा था कि प्रभु अश्व की लगाम कसे एक योद्धा के रूप में किसी किले से प्रस्थान कर रहे हों। एक घंटे तक चली आतिशबाजी में एक से बढ़कर एक पटाखों की रोशनी को देख लोग आनंदित हो उठे। बड़ा बगीचा पर हुई भव्य आतिशबाजी घोड़े पर विराजमान भगवान की सवारी मंदिर से निकलकर नगर भ्रमण करते हुए बड़ा बगीचा पहुंची। जहां मुख्य द्वार पर सवारी के पहुंचते ही आतिशबाजी का रोमांचकारी प्रदर्शन किया गया। आतिशबाज अपने हुनर का प्रदर्शन कर रहे थे। करीब एक घंटे तक चली आतिशबाजी में एक से बढ़कर एक पटाखों की रोशनी को देख लोग आनंदित हो उठे। आतिशबाजी में सबसे ज्यादा आकर्षक किला, हनुमान जी, मोर, श्री,राधे-राधे, गज ग्राह युद्ध के अलावा दो खिलाड़ियों के क्रिकेट खेलते हुए चलाई गई आतिशबाजी थी। पीठ पर ढाल, कमर में कसी मूठदार तलवार और रत्न जड़ित जूतियां पहने भगवान की छवि निहारते ही बन रही थी। मंदिर में हुई परकाल स्वामी भील लीला शनिवार की देर शाम आतिशबाजी खत्म होने के बाद भगवान रंगनाथ की सवारी दोबारा मंदिर पहुंची। जहां पश्चिम द्वार पर पहुंचने पर परकाल स्वामी भील लीला का आयोजन किया गया। यहां हजारों भक्तों की मौजूदगी में परकाल स्वामी ने भगवान को लूटा। भगवान को लूटने के दौरान अंत में परकाल स्वामी को भगवान ने अपने दिव्य स्वरूप में दर्शन दिए। भगवान के दिव्य स्वरूप में दर्शन कर परकाल स्वामी उनसे क्षमा मांगने लगे और शरणागत हो गए। नगर भ्रमण के बाद जब दोबारा मंदिर पहुंचे तो भगवान को परकाल स्वामी के भील सेवकों ने लूट लिया। कौन थे परकाल स्वामी परकाल स्वामी चोल देश के राजा के सेनापति थे। एक बार परकाल स्वामी ने संकल्प लिया कि एक वर्ष तक रोज 1 हजार वैष्णव संतों को भोजन कराकर उनके श्रीपद तीर्थ यानी चरण जल को ग्रहण करूंगा। इस संकल्प के साथ ही परकाल स्वामी ने वैष्णव संतों को भोजन कराना शुरू कर दिया। धन की आई समस्या तो शुरू की लूटपाट परकाल स्वामी का संकल्प पूरा होने के अंतिम समय में उनको धन की कमी आने लगी। लेकिन, परकाल स्वामी ने संकल्प को पूरा करने के लिए भीलों के साथ मिलकर लूटपाट करना कर दिया। एक दिन भगवान परीक्षा लेने के लिए भेष बदलकर आभूषण धारण कर उस रास्ते से निकले। परकाल स्वामी ने भीलों के साथ मिलकर भगवान के साथ लूटपाट शुरू कर दी। इस दौरान भगवान ने एक आभूषण पैर के नीचे दबा लिया। आभूषण लूटने के लिए पैरों में झुके परकाल स्वामी परकाल स्वामी ने भगवान को पैर के नीचे आभूषण छिपाते देख लिया। इसके बाद वह उस आभूषण को लूटने के लिए पैरों में झुके तभी भगवान ने अपना दिव्य स्वरूप उन्हें दिखा दिया। प्रभु को देख परकाल स्वामी क्षमा मांगने लगे और उनके शरणागत हो गए। इसी लीला को रंगनाथ मंदिर में भील लीला कहा जाता है। भील लीला देख भक्त हुए आनंदित भील लीला के दौरान बच्चे विचित्र तरीके का श्रृंगार कर इधर से उधर भाग रहे थे। हाथों में पीपा और शोर शराबा करते यह बच्चे भील बने थे। रंगों से अपने शरीर को इन बच्चों ने रंग रंगा था। रंगनाथ मंदिर में हुई इस भील लीला को देख भक्त आनंदित हो उठे और लगाने लगे भगवान रंगनाथ के जयकारे। आतिशबाजी से बनाया ॐ और कमल आतिशबाजी की शुरुआत ॐ के साथ की गई। इसके बाद हनुमान जी, मोर, स्वस्तिक, गज ग्राह लीला, चकई का प्रदर्शन किया। आतिशबाजी के दौरान जैसे ही स्काई शॉट और सुपर रॉकेट चलाए गए पूरा मैदान रोशनी से भर गया और भगवान रंगनाथ के जयकारों से गुंजायमान हो उठा। आधा घंटे तक चली आतिशबाजी का समापन लंका रुपी बनाये गए किले में लगे बॉम्ब को चलाने के साथ हुआ। इसके बाद भगवान की सवारी मंदिर के लिए प्रस्थान कर गई। ------------------------ ये खबर भी पढ़िए- ओवैसी बोले- सुनो संभल DSP मुल्क आपके बाप का नहीं, इजराइली प्रधानमंत्री की भाषा बोल रहे संभल में CO कुलदीप कुमार का 'जहाज में बैठकर ईरान चले जाओ' वाला बयान तूल पकड़ता जा रहा है। AIMIM नेता सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने पलटवार करते हुए कहा- ये मुल्क आपके बाप का नहीं। तुम इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की जुबान बोल रहे हो। पूरी खबर पढ़िए
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