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    सनातनी-अंबेडकरवादी झंडे से वर्चस्व दिखाने पर बढ़ा बवाल:भगवा हटाकर नीला झंडा लगाने पर आमने-सामने, बुजुर्ग-महिलाएं घरों में कैद युवा गांव छोड़कर भागे

    1 hour ago

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    वाराणसी के नहिया चोलापुर गांव में सनातनी और अंबेडकरवादी विचारधारा ने बवाल और संघर्ष को जन्म दिया। चोलापुर पुलिस की निष्क्रियता और इंस्टेलीजेंस के फेल्योर ही दूसरे दिन अफसरों पर पथराव का कारण बना। जहां पुलिस पहले अंबेडकरवादियों पर नरम दिखी तो दूसरे दिन भगवा झंडा धारकों को वाकओवर दे दिया। आक्रोश तब बढ़ा जब आयोजन के लिए सड़क पर उतरे अंबेडकरवादियों ने पहले 'बाबा बटुक भैरव धाम' के द्वार से भगवाझंडा उतारकर नीला झंडा लगाया। गांव के लोगों को जब नागवार गुजरा तो विरोध जताया फिर कुछ युवा चढ़े और नीले झंडे को उतारकर भगवा फहरा दिया। सोशल मीडिया के जरिए दूसरे गांव से भी युवाओं को बुलाया गया। अब कुछ ग्रामीणों ने रास्ता रोका और बवाल किया तो पुलिस मामले गंभीर हुई तो केस दर्ज कर लीपापोती की कोशिश की गई। शुक्रवार को सुबह फिर दोनों पक्ष आमने सामने आ गए। विवाद को शांत कराने पहुंची पुलिस ने जब लाठियां पटकी तो भीड़ आक्रोशित हो गई और पथराव कर दिया। बवाल के बाद गांव सन्नाटा और खौफ के साए में है। पथराव में एसीपी, दरोगा और सिपाहियों के घायल होने के बाद नहिया की दलित बस्तियों में बूटों की धमक गूंज रही है। बुजुर्ग और महिलाएं घरों में ताला लगाकर कैद हैं और जरा सी आहट पर सहम जा रहे हैं। वहीं सैकड़ों युवा घर छोड़कर भाग गए हैं जिनकी तलाश में रातभर पुलिस दबिश देती रही। पहले जानिए गांव में पसरा मंजर, बाहरी भीड़ ने बिगाड़ा नहिया गांव का भाईचारा वाराणसी मुख्यालय से करीब 30 किलोमीटर की दूर नहिया गांव दो दिनों से बवाल और हिंसक आग में जल रहा है। गांव के लोग दहशत के साये में है, चप्पे-चप्पे पर पुलिस का पहरा है। महज एक झंडे को लेकर शुरू हुई मामूली सी बहस ऐसा तूल पकड़ा कि दो पक्ष आमने-सामने आ गए और जमकर पत्थर चले। गांव का मंजर ऐसा कि आईपीएस, पीपीएस, एसीपी, इंस्पेक्टर समेत 7 थानों की फोर्स को गांव में डेरा डाले है और पीएसी की तैनाती से पूरा गांव छावनी बना है। गिरफ्तारी के डर से नहिया गांव में स्थित दलित बस्ती के ज्यादातर नौजवान घर छोड़कर भाग गए हैं। गांव में शुक्रवार शाम तक सिर्फ बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे ही दिखाई दे रहे थे। इतना ही नहीं वह लोग भी किसी भी अजनबी से बात करने में कतराते नजर आ रहे हैं। फिलहाल, गांव में भारी फोर्स तैनात है और छह संदिग्धों से पूछताछ चल रही है। पुलिस का कहना है कि आधा दर्जन लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। मामले में मुकदमा दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जाएगी। पथराव के बाद गांव में सन्नाटा पसरा है और दलित बस्ती के लोगों में पुलिस का खौफ साफ देखने को मिल रहा है। प्रवेश द्वार पर झंडा लगाने से शुरू हुआ था विवाद यह पूरा विवाद बाबतपुर-चौबेपुर मार्ग पर गांव में प्रवेश करने के लिए बनाए गए प्रवेश द्वार से जुड़ा है। प्रवेश द्वार पर 'बाबा बटुक भैरव धाम' लिखा हुआ है। वहीं गांव में गांव में हाईवे से करीब आधा किलोमीटर दूरी पर संत रविदास मंदिर और डॉ. भीमराव अंबेडकर तथा हाईवे से करीब करीब 800 मीटर दूरी पर बाबा बटुक भैरव का मंदिर है। हिंदू संगठनों का दावा है कि गांव के प्रवेश द्वार पर जब से निर्माण हुआ है तब से रामनवमी पर भगवा झंडा लगाया जाता रहा है। इस साल भी झंडा लगा था लेकिन 14 अप्रैल को डॉ भीमराव अंबेडकर जयंती के जुलूस के दौरान किसी ने उसे हटाकर वहां डॉ भीमराव अंबेडकर का झंडा लगा दिया। 15 अप्रैल को तोड़ा अंबेडकर का झंडा और पोस्टर फाड़ा आरोप है कि 15 अप्रैल को इसकी सूचना मिलने के बाद शाम या रात के समय हिंदू धर्म संगठन के लोगों ने उस झंडे को तोड़कर हटा दिया। अगले दिन इस मामले की जानकारी मिलने के बाद काफी संख्या में दलित समुदाय के लोग वहां पहुंच गए उसके बाद लोग नारेबाजी करने लगे। दलित समुदाय का तर्क था कि जब गेट पर एक विशेष झंडा लग सकता है, तो संत रविदास और बाबा साहेब का झंडा क्यों नहीं? वहीं दूसरा पक्ष इसे मंदिर का प्रवेश द्वार बताकर अपनी पुरानी परंपरा पर अड़ा रहा। इसी बात को लेकर तनाव हुआ और गुरुवार को डेढ़ घंटे हाईवे जाम रहा। गांव के लोग दबी जुबान में कह रहे हैं कि अगर पुलिस और प्रशासन ने शुरुआत में ही इस बात को गंभीरता से लिया होता तो शायद आज हालात इतने खराब नहीं होते। शुक्रवार दोपहर से लेकर देर रात तक गांव में सन्नाटा पसरा रहा। अब हर कोई यही चर्चा कर रहा है कि आखिर एक प्रवेश द्वार पर झंडा लगाने की जिद ने गांव का नाम खराब कर दिया। बाहरी लोगों ने सुलगाई नफरत की आग गांव के लोगों का कहना है कि यह झगड़ा असल में गांव वालों का था ही नहीं। इसे बाहरी लोगों और सोशल मीडिया की पोस्ट ने बड़ा बना दिया। हिंदू संगठनों और कुछ पार्टी विशेष से जुड़े लोगों ने इंटरनेट पर वीडियो डालकर भीड़ जुटाना शुरू कर दिया। जिसके चलते शुक्रवार को काफी संख्या में लोग वहां पहुंच गए। पुलिस को लगा था कि बातचीत से मामला सुलझ जाएगा लेकिन शुक्रवार दोपहर में भीड़ बेकाबू हो गई। जब पुलिस ने लोगों को वापस जाने को कहा तो अचानक पत्थरबाजी शुरू हो गई। पत्थरबाजी में एसीपी और पुलिसकर्मी घायल हो गए। पुलिस को अंत में लाठियां पटककर भीड़ को खदेड़ना पड़ा।
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