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    सीपीआर देकर जान बचाने वाले सिपाही लखनऊ में सम्मानित:बरेली जंक्शन पर 90 सेकंड में लौटे सांसें, पुलिस मुख्यालय में सम्मान

    3 hours ago

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    बरेली रेलवे जंक्शन पर एक जीआरपी सिपाही हरिओम ने अपनी सूझबूझ और प्रशिक्षण से एक यात्री की जान बचाई। प्लेटफॉर्म नंबर 2 पर अचानक गिरे 50 वर्षीय यात्री को सिपाही ने तुरंत सीपीआर दिया, जिससे 90 सेकंड के भीतर उनकी सांसें लौट आईं। इस कार्य के लिए हरिओम को लखनऊ में सम्मानित किया गया है। घटना 21 फरवरी की है, जब हावड़ा-दिल्ली अमृत भारत ट्रेन से उतरे 50 वर्षीय यात्री दिनेश मोनिया बरेली जंक्शन के प्लेटफॉर्म नंबर 2 पर अचानक गिर पड़े। उन्हें सीने में तेज दर्द हुआ था। परिवार के सदस्यों ने मदद के लिए गुहार लगाई। ड्यूटी पर तैनात जीआरपी सिपाही हरिओम तुरंत मौके पर पहुंचे। उन्होंने देखा कि दिनेश की नब्ज और सांसें लगभग रुक चुकी थीं। सिपाही हरिओम ने बिना समय गंवाए दिनेश को कार्डियो पल्मोनरी रिससिटेशन (सीपीआर) देना शुरू किया। उन्होंने तीन बार 30-30 सेकंड तक सीपीआर दिया, जिसके लगभग 90 सेकंड बाद दिनेश की सांसें वापस आ गईं। इसके बाद उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने बताया कि यदि समय पर सीपीआर न मिलता तो स्थिति गंभीर हो सकती थी। सिपाही हरिओम को उनके इस कार्य के लिए 27 फरवरी को पुलिस मुख्यालय लखनऊ में सम्मानित किया गया। एडीजी रेलवे प्रकाश डी और आईजी रेलवे आर के भारद्वाज ने उन्हें प्रशस्ति पत्र और नगद पुरस्कार प्रदान किया। अधिकारियों ने इस घटना को पुलिसकर्मियों द्वारा आपात स्थिति में निभाई जाने वाली जीवनरक्षक भूमिका का प्रमाण बताया। हरिओम ने बताया कि वे पहले मेडिकल साइंस के छात्र रह चुके हैं और उन्होंने पुलिस विभाग के 'कर्मयोगी' ऐप पर सीपीआर का प्रशिक्षण भी लिया था। उनका कहना है कि यही प्रशिक्षण इस संकटपूर्ण स्थिति में उनके काम आया। विशेषज्ञों के अनुसार, हार्ट अटैक या कार्डियक अरेस्ट के मामलों में शुरुआती 3 से 5 मिनट बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। इस दौरान सही समय पर दिया गया सीपीआर मरीज की जान बचाने के साथ-साथ मस्तिष्क को गंभीर क्षति से भी बचा सकता है।
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