Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    सुप्रीम कोर्ट बोला-महिला अफसर सेना में स्थायी कमीशन की हकदार:इससे इनकार करना भेदभाव था; जिनकी सर्विस खत्म हुई, उन्हें भी पेंशन मिलेगी

    4 hours ago

    2

    0

    आर्मी, नेवी और एयर फोर्स की महिला शॉर्ट सर्विस कमीशन (SSC) अफसर, जिन्हें परमानेंट कमीशन नहीं मिला अब उन्हें पूरी पेंशन मिलेगी। सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला मंगलवार को सुनाया। कोर्ट ने कहा कि महिला अफसरों को स्थायी कमीशन न देना उनकी योग्यता की कमी नहीं, बल्कि व्यवस्था में मौजूद भेदभाव का नतीजा था। जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस उज्जवल भुईयां और जस्टिस एन कोटिश्वर सिंह की बेंच ने कहा- अब यह माना जाएगा कि इन महिला अफसरों ने पेंशन के लिए जरूरी 20 साल की सर्विस पूरी कर ली है, भले ही उन्हें पहले ही सेवा से हटा दिया गया हो। बेंच ने केंद्र सरकार को आगे के लिए साफ और पारदर्शी चयन प्रक्रिया अपनाने और मूल्यांकन के सभी नियम पहले से बताने का निर्देश दिया, ताकि भविष्य में भेदभाव न हो। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को सेना में शॉर्ट सर्विस कमीशन (SSC) में महिला अफसरों को स्थायी कमीशन देने के मामले में सुनवाई की। सुचेता ईडन समेत अन्य महिला अधिकारियों ने याचिका लगाई थीं, जिनमें 2019 की नीति और आर्मर्ड फोर्सेस ट्रिब्यूनल के फैसलों को चुनौती दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने 3 राहत दी… 1. जिन SSC अफसरों को 2020–21 में नंबर 5 सेलेक्शन बोर्ड या AFT (ट्रिब्यूनल) के फैसले के आधार पर पहले ही स्थायी कमीशन (PC) मिल चुका है, उनका स्टेटस नहीं बदला जाएगा। 2. जो महिला SSC अफसर (अपीलकर्ता) इस केस के दौरान सेवा से बाहर हो गईं, उन्हें मान लिया जाएगा कि उन्होंने 20 साल की जरूरी सेवा पूरी कर ली है। उन्हें पेंशन और उससे जुड़े सभी लाभ मिलेंगे, लेकिन पिछला वेतन (एरियर) नहीं मिलेगा। 3. वर्तमान में जो महिला अफसर सेवा में हैं, उन्हें कटऑफ पूरा करने पर परमानेंट कमीशन मिलेगा। यह आदेश उन महिला अधिकारियों पर लागू नहीं होगा जो JAG (जज एडवोकेट जनरल) और AEC (एजुकेशन कॉर्प्स) में हैं, क्योंकि उन्हें 2010 से ही स्थायी कमीशन के लिए विचार का मौका मिलता रहा है। कोर्ट रूम लाइव…. सीजेआई: आज 3 मामलों में फैसला सुनाया जा रहा है- आर्मी, नेवी और एयर फोर्स पर… इसके बाद सीजेआई ने एक-एक कर तीनों सेनाओं के मामलों पर आदेश सुनाया… आर्मी केस नेवी केस एयर फोर्स कोर्ट के फैसले पर किसने क्या कहा… दिसंबर 2025 में हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था… 23 साल पहले कोर्ट पहुंचा था यह मामला 23 साल पहले यानी 2003 में बबीता पुनिया पहली महिला वकील थीं, जिन्होंने दिल्ली हाईकोर्ट में इस मामले में याचिका दायर की थी। उनके बाद 9 महिला अफसरों ने 2009 तक हाईकोर्ट में इसी मुद्दे पर अलग-अलग याचिकाएं दायर कीं। 2010 में दिल्ली हाईकोर्ट ने इन याचिकाओं पर फैसला सुनाया और महिलाओं को सेना में स्थाई कमीशन देने का आदेश दिया। हाईकोर्ट ने कहा था कि यह साफ किया जाता है कि जो महिला अफसर रिटायरमेंट की उम्र तक नहीं पहुंचीं हैं, उन सभी को स्थाई कमीशन दिया जाए। साथ ही उन्हें प्रमोशन जैसे लाभ भी दिए जाएं। हम महिलाओं पर कोई एहसान नहीं कर रहे, हम उन्हें उनके संवैधानिक अधिकार दिला रहे हैं। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था। केंद्र ने नीति बनाई, लेकिन मार्च 2019 का क्लॉज जोड़ दिया हाईकोर्ट के फैसले के 9 साल बाद सरकार ने फरवरी 2019 में सेना के 10 विभागों में महिला अफसरों को स्थाई कमीशन देने की नीति बनाई, लेकिन यह कह दिया कि मार्च 2019 के बाद से सर्विस में आने वाली महिला अफसरों को ही इसका फायदा मिलेगा। इस तरह वे महिलाएं स्थाई कमीशन पाने से वंचित रह गईं, जिन्होंने इस मसले पर लंबे अरसे तक कानूनी लड़ाई लड़ी। केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर दलील दी थी कि पुरुष सैनिक महिला अफसरों से आदेश लेने को तैयार नहीं होंगे। सेनाओं में महिला अफसरों की अभी क्या स्थिति है 1. थलसेना : महिलाएं शॉर्ट सर्विस कमीशन के दौरान आर्मी सर्विस कोर, ऑर्डनेंस, एजुकेशन कोर, जज एडवोकेट जनरल, इंजीनियर, सिग्नल, इंटेलिजेंस और इलेक्ट्रिक-मैकेनिकल इंजीनियरिंग ब्रांच में ही एंट्री पा सकती हैं। उन्हें कॉम्बैट सर्विसेस जैसे- इन्फैंट्री, आर्मर्ड, तोपखाने और मैकेनाइज्ड इन्फैंट्री में काम करने का मौका नहीं दिया जाता। हालांकि, मेडिकल कोर और नर्सिंग सर्विसेस में ये नियम लागू नहीं होते। इनमें महिलाओं को परमानेंट कमीशन मिलता है। वे लेफ्टिनेंट जनरल पद तक भी पहुंची हैं। 2. वायुसेना और नौसेना : यहां महिला अफसरों को स्थाई कमीशन का विकल्प है। वायुसेना में महिलाएं कॉम्बैट रोल, जैसे- फ्लाइंग और ग्राउंड ड्यूटी में शामिल हो सकती हैं। शॉर्ट सर्विस कमीशन के तहत महिलाएं वायुसेना में ही हेलिकॉप्टर से लेकर फाइटर जेट तक उड़ा सकती हैं। नौसेना में भी महिलाएं लॉजिस्टिक्स, कानून, एयर ट्रैफिक कंट्रोल, पायलट और नेवल इंस्पेक्टर कैडर में सेवाएं दे सकती हैं।
    Click here to Read more
    Prev Article
    क्या Pakistan रोकेगा US-Iran युद्ध? Fuel संकट के बीच इस Diplomatic पहल पर टिकीं दुनिया की निगाहें
    Next Article
    दिल्ली के लिए 1,03,700 का बजट पेश:10वीं की मेरिट में आने वाले स्टूडेंट्स को मिलेंगे लैपटॉप, PWD के लिए 5,921 करोड़ रुपए आवंटित

    Related न्यूज Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment