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    सीतापुर में चौरासी कोसीय परिक्रमा मेला डंका बजते शुरू:नैमिषारण्य से पूजन के बाद रामादल रवाना, हजारों श्रद्धालु हुए शामिल

    23 hours ago

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    सीतापुर में बुधवार भोर सुबह से नैमिषारण्य–मिश्रिख की पौराणिक चौरासी कोसीय परिक्रमा मेला का भव्य शुभारंभ हो गया। महंत नारायण दास महाराज की अगुवाई में डंका बजते ही रामादल परिक्रमा के पहले पड़ाव कोरौना के लिए रवाना हुआ, जिसके साथ ही आस्था, श्रद्धा और भक्ति से ओतप्रोत इस ऐतिहासिक परंपरा की शुरुआत हो गई। परिक्रमा मेले में न केवल सीतापुर बल्कि उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों से आए हजारों श्रद्धालु शामिल होते हैं। यह परिक्रमा होलिका दहन के दिन तक चलती है, जिसमें लाखों श्रद्धालु सहभाग करते हैं। पौराणिक मान्यताओं से जुड़ी इस 84 कोसीय परिक्रमा के कुल 11 पड़ाव होते हैं। यह यात्रा नैमिषारण्य से प्रारंभ होकर हरदोई जनपद से गुजरते हुए मिश्रिख की पंचकोसीय परिक्रमा पूर्ण करने के बाद होलिका दहन के दिन समाप्त होती है। परिक्रमा मार्ग में 7 पड़ाव सीतापुर और 4 पड़ाव हरदोई जनपद में पड़ते हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन ने व्यापक इंतजाम किए हैं। 11 पड़ावों पर भारी पुलिस बल की तैनाती की गई है। पीएसी के साथ-साथ लखनऊ, उन्नाव और रायबरेली से करीब 200 अतिरिक्त पुलिस जवानों को भी लगाया गया है। नदी किनारे स्थित पड़ावों पर पीएसी की फ्लड यूनिट तैनात की गई है ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके। देखें 6 तस्वीरें…. मेले के दौरान श्रद्धालुओं की सहायता के लिए अस्थायी सहायता केंद्र बनाए गए हैं। वहीं स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करते हुए मेडिकल टीम और डॉक्टरों की तैनाती भी की गई है, जिससे परिक्रमार्थियों को समय पर उपचार मिल सके। इस मेले का विशेष पौराणिक महत्व भी है। मान्यता है कि देवासुर संग्राम में देवताओं की जीत सुनिश्चित करने के लिए महर्षि दधीचि ने अपनी अस्थियों का दान करने से पहले यह परिक्रमा की थी। इसके उपरान्त भगवान राम ने भी इस परिक्रमा को किया था। कहा जाता है कि भगवान राम की अगुवाई के कारण परिक्रमार्थियों को रामदल के नाम से भी पुकारा जाता है। चौरासी कोसीय और पंचकोसीय परिक्रमा पूर्ण कर लाखों श्रद्धालु मिश्रिख तीर्थ पर डेरा डालते हैं।
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