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    सिद्धार्थनगर के रंगकर्मी विजित सिंह राज्यपाल द्वारा सम्मानित:भारतेन्दु नाट्य अकादमी के स्वर्ण जयंती समारोह में सम्मान

    6 hours ago

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    सिद्धार्थनगर के युवा रंगकर्मी विजित सिंह को लखनऊ में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने सम्मानित किया। उन्हें भारतेन्दु नाट्य अकादमी के स्वर्ण जयंती समारोह में प्रदेश की 15 विशिष्ट विभूतियों में चुना गया। यह सम्मान सिद्धार्थनगर की सांस्कृतिक विरासत और रंगमंचीय परंपरा के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। अकादमी की स्थापना के 50 वर्ष पूरे होने पर यह समारोह आयोजित किया गया था। इसमें प्रदेश के विभिन्न जिलों से चुनिंदा कलाकारों, रंगकर्मियों, साहित्यकारों और सांस्कृतिक हस्तियों को आमंत्रित किया गया। इन विभूतियों ने समाज में जागरूकता, संवेदनशीलता और रचनात्मकता को बढ़ावा देने में योगदान दिया है। समारोह में रंगमंच की परंपरा, भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों और आधुनिक अभिव्यक्ति पर भी चर्चा हुई। विजित सिंह ने सीमित संसाधनों के बावजूद रंगमंच के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाई है। वे लंबे समय से अभिनय, निर्देशन, पटकथा लेखन और मंच संचालन में सक्रिय हैं। उन्होंने सांस्कृतिक आयोजनों के माध्यम से समाज के विभिन्न पहलुओं को मंच पर प्रस्तुत किया है। उनकी प्रस्तुतियाँ सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण जीवन की वास्तविकताओं और समसामयिक मुद्दों पर केंद्रित होती हैं। इन नाटकों और प्रस्तुतियों को स्थानीय तथा प्रदेश स्तर पर सराहना मिली है। विजित सिंह रंगमंच को केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं मानते, बल्कि इसे समाज में जागरूकता लाने और सकारात्मक बदलाव लाने का सशक्त मंच मानते हैं। विजित सिंह की यह उपलब्धि विशेष रूप से इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सिद्धार्थनगर जैसे सीमांत जनपद में संसाधनों की कमी के बावजूद रंगकर्म को जीवित रखना और उसे आगे बढ़ाना आसान नहीं होता। इसके बावजूद उन्होंने अपनी लगन, मेहनत और सांस्कृतिक प्रतिबद्धता से यह साबित किया कि प्रतिभा किसी भी परिस्थिति की मोहताज नहीं होती। राज्यपाल के हाथों प्राप्त यह सम्मान उनके अब तक के रचनात्मक और सांस्कृतिक सफर का महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है। यह सम्मान न केवल उनके आत्मविश्वास को बढ़ाएगा, बल्कि उन्हें भविष्य में और बेहतर कार्य करने के लिए प्रेरित भी करेगा। साथ ही, यह उपलब्धि जनपद के अन्य युवा कलाकारों, रंगकर्मियों और साहित्य प्रेमियों के लिए एक नई दिशा और ऊर्जा प्रदान करेगी। सांस्कृतिक और साहित्यिक जगत से जुड़े लोगों ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह सम्मान वास्तव में उस सतत साधना, समर्पण और संघर्ष का सम्मान है, जो वर्षों से रंगमंच और कला के माध्यम से समाज को दिशा देने का कार्य कर रहा है। उनका मानना है कि विजित सिंह की सफलता से सिद्धार्थनगर में रंगमंचीय गतिविधियों को नई गति मिलेगी और आने वाले समय में यहां से और भी प्रतिभाएं उभरकर सामने आएंगी। जनपद के बुद्धिजीवियों, कलाकारों और सामाजिक संगठनों ने भी इस उपलब्धि को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह क्षण सिद्धार्थनगर की सांस्कृतिक पहचान को प्रदेश स्तर पर मजबूती प्रदान करने वाला है। विजित सिंह ने अपनी उपलब्धि से यह सिद्ध कर दिया है कि यदि समर्पण सच्चा हो और लक्ष्य स्पष्ट, तो छोटे जनपद से भी बड़ी पहचान बनाई जा सकती है।
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