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    सेवानिवृत्त शिक्षकों को नहीं मिला भुगतान:जीपीएफ, पेंशन पत्रावलियां जिला कार्यालयों से आगे नहीं भेजी गईं

    2 hours ago

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    जौनपुर सहित पूर्वांचल के सैकड़ों शिक्षक सेवानिवृत्ति के बाद भी अपने जीपीएफ, पेंशन और अन्य देयकों के भुगतान से वंचित हैं। 3 मार्च को शिक्षण सत्र समाप्त होने पर ये शिक्षक सेवानिवृत्त हुए थे। सरकार के स्पष्ट आदेशों के बावजूद, सेवानिवृत्ति के दिन ही इन अनिवार्य भुगतानों को सुनिश्चित नहीं किया गया, जिससे उन्हें परेशानी हो रही है। विभागीय सूत्रों के मुताबिक, अधिकांश सेवानिवृत्त शिक्षकों की जीपीएफ और पेंशन संबंधी फाइलें अभी तक जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) कार्यालयों से उप शिक्षा निदेशक (डीडीआर) कार्यालयों तक नहीं भेजी गई हैं। इसके अतिरिक्त, सामूहिक बीमा और अन्य लंबित देयकों का भुगतान भी अटका हुआ है। यह समस्या केवल जौनपुर तक सीमित नहीं है। पूर्वांचल के नौ जिलों में इस वर्ष कुल 2908 माध्यमिक शिक्षक सेवानिवृत्त हो रहे हैं। विभागीय अधिकारियों की सुस्त कार्यप्रणाली के कारण लगभग सभी जिलों में शिक्षकों को अपने हक के लिए कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। जौनपुर में इस वर्ष 80 शिक्षकों ने अवकाश ग्रहण किया है। इनमें से केवल 30 शिक्षकों की फाइलें ही वाराणसी स्थित डीडीआर कार्यालय भेजी जा सकी हैं, जबकि शेष 50 शिक्षकों की फाइलें अभी भी लंबित हैं। वाराणसी के डीडीआर/प्रभारी संयुक्त निदेशक दिनेश सिंह ने बताया कि फाइलें भेजने के मामले में जौनपुर सबसे पीछे है। उन्होंने इस लापरवाही के संबंध में जौनपुर के जिला विद्यालय निरीक्षक को पत्र लिखा है। दिनेश सिंह ने आश्वासन दिया है कि सभी शिक्षकों के लंबित भुगतानों को जल्द से जल्द सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है। माध्यमिक शिक्षक संघ के संरक्षक रमेश सिंह ने इस स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री का स्पष्ट निर्देश है कि सेवानिवृत्ति के दिन ही सभी देयकों का भुगतान सुनिश्चित किया जाए। हालांकि, विभाग के अधिकारी और कर्मचारी समय पर फाइलें न भेजकर विनियमितीकरण और सत्यापन के नाम पर लाखों रुपये के 'खेल' में शामिल हैं। उन्होंने उच्चाधिकारियों से शिकायत के बावजूद कार्रवाई न होने पर नाराजगी जताई और सरकार की छवि खराब करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
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