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    शहीद की पत्नी को मिले ₹21 लाख, माता-पिता नाराज:कहा- बेटे को बरगलाकर कोर्ट मैरिज की; असम में एयरफोर्स प्लेन क्रैश में मौत हुई थी

    1 day ago

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    असम के जोरहाट में 13 जून को वायुसेना के विमान हादसे में जहानाबाद के लेफ्टिनेंट शुभम कुमार शहीद हो गए थे। उनकी शहादत के बाद परिवार में सरकार की ओर से मिली सहायता राशि को लेकर विवाद शुरू हो गया है। शहीद के पिता अमरेंद्र शर्मा का आरोप है कि शुभम की पत्नी श्रेया ने अधिकारियों से मिलीभगत कर ₹21 लाख का चेक हड़प लिया है। वो चेक लेकर अपने घर चली गई। उन्होंने कहा, बिहार सरकार की इस मदद की जानकारी हमें नहीं दी गई। अगर श्रेया राय मेरे बेटे की पत्नी थी तो उसे अंतिम संस्कार से श्राद्ध तक परिवार के साथ रहना चाहिए था। दरअसल, पिता का कहना है कि दोनों की शादी तय हो चुकी थी, लेकिन दादी की मौत की वजह से एक साल टाली गई थी। इस बीच श्रेया के परिवार वालों ने शुभम को बरगलाकर अहमदाबाद में कोर्ट मैरिज करा दी थी। जिसका उन्हें पता नहीं था। शुभम और श्रेया की शादी कब हुई, पैसे को लेकर विवाद कैसे बढ़ा, पिता ने क्या-क्या आरोप लगाए हैं। सिलसिलेवार तरीके से पढ़िए……… शुभम और श्रेया की मुलाकात कैसे हुई 25 साल की उम्र में शहीद हुए शुभम के पिता अमरेंद्र शर्मा ने बताया, 2017 में शुभम ने पहली ही कोशिश में NDA एग्जाम क्लियर कर लिया था। उसके बाद उन्हें 2018 से 2021 तक ट्रेनिंग के लिए पुणे भेजा गया। ट्रेनिंग के बाद पहली पोस्टिंग हैदराबाद में हुई, जहां वह 11 महीने तक फ्लाइट लेफ्टिनेंट के तौर पर रहे। 2025 में हमने शुभम के लिए एक रिश्ता देखा। शादी की बात चलने के दो दिन बाद ही उसने मां से कहलवाया कि वह एक लड़की को पसंद करता है और वह भी सेना में लेफ्टिनेंट है। यह सुनकर हमें खुशी हुई। हमलोगों ने उसकी मर्जी वाली लड़की से शादी की बातचीत आगे बढ़ाई। लड़की के परिजनों से मिले। दोनों परिवारों में सबकुछ खुशी-खुशी तय हो गया। दिसंबर 2025 में शादी की तारीख भी तय कर दी गई थी, लेकिन इसी बीच मेरी मां, यानी शुभम की दादी का निधन हो गया। इसके बाद हमलोगों ने शादी एक साल के लिए टाल दी। अंतिम संस्कार वाले दिन श्रेया पैसे लेकर कैसे गई अमरेंद्र शर्मा बताते हैं कि शुभम के अंतिम संस्कार के दिन श्रेया मास्क लगाकर वहां पहुंची थी। ना तो उसके चेहरे पर कोई शिकन थी और ना ही शुभम को खोने का कोई दर्द ही दिख रहा था। वह अंतिम संस्कार के दौरान एक कोने में अपने पिता के साथ चुपचाप खड़ी थी। सीओ से सेटिंग कर ₹21 लाख का चेक लिया अमरेंद्र शर्मा बताते हैं कि जहानाबाद के हुलासगंज के सीओ अंचल अधिकारी ने अंतिम संस्कार वाले दिन ही श्रेया को चुपचाप बुलाकर ₹21 लाख रुपए का चेक दे दिया था। इस चेक के बारे में सीओ ने ना तो मुझे कोई जानकारी दी, ना ही मेरे परिवार को। यही नहीं, श्रेया ने भी इसका जिक्र हमलोगों से नहीं किया। वो चुपचाप पैसे लेकर अपने पिता और भाई के साथ आजमगढ़ चली गई। पिता बोले- श्रेया ने मेरे बेटे को फंसाकर की कोर्ट मैरिज अमरेन्द्र शर्मा ने बताया कि जब श्रेया ₹21 लाख का चेक लेकर चली गई तो हमने पता लगाया कि चेक उसे किस आधार पर मिला। तब पता चला कि श्रेया, उसके भाई और पिता ने बरगलाकर मेरे बेटे से अहमदाबाद में कोर्ट मैरिज करवा दी थी। हालांकि, भास्कर ने जब इस मामले में हुलासगंज सीओ से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन संपर्क नहीं पाया। घर के लिए बैंक से लोन लिया, अभी भी काम अधूरा है ग्रामीणों के मुताबिक, शुभम का परिवार बेहद सामान्य है। परिवार की आर्थिक स्थिति भी बहुत मजबूत नहीं थी। बेटे के वायुसेना में चुने जाने के बाद परिवार ने नया घर बनाने के लिए बैंक से लोन लिया था, लेकिन मकान का निर्माण अभी पूरा नहीं हो सका है। गांव वालों ने बताया कि फिलहाल परिवार कर्कट (टीन की छत) वाले मकान में रह रहा है। शुभम की शादी और नए घर का सपना, दोनों ही अधूरे रह गए। गयाजी में शहीद शुभम का हुआ था अंतिम संस्कार 13 जून को जोरहाट में वायुसेना के ट्रांसपोर्ट विमान क्रैश में शुभम कुमार शहीद हो गए थे। 14 जून को उनका अंतिम संस्कार गयाजी के विष्णुपद श्मशान घाट पर किया गया था। शहीद के छोटे भाई ने मुखाग्नि दी थी। दादा बोले- उसको सरकार ने मारा शुभम की शहादत को लेकर दादा ने केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा, मेरे पोते को सरकार ने मारा है। सरकार 40 साल पुराना विमान रखकर जवानों की जान ले रही है। सरकार को हमारी पेंशन बंद कर देनी चाहिए, लेकिन जवानों की सुविधा में कोई कमी नहीं रखनी चाहिए। उनको उड़ाने के लिए नए विमान देने चाहिए। उन्होंने बताया, "मेरा पोता जिस विमान में था, वह करीब 40 साल पुराना था। उसकी हालत ठीक नहीं थी, फिर भी उसका इस्तेमाल किया जा रहा था। यह पूरी तरह सिस्टम की लापरवाही है।" नाना बोले- 25 साल की उम्र में शुभम ने बहुत कुछ हासिल किया वहीं, शहीद के नाना सरजू शर्मा ने कहा, "मेरा बच्चा बहुत प्यारा था। वह हर किसी का सम्मान करता था। महज 25 साल की उम्र में उसने बहुत कुछ हासिल कर लिया था। उसका नाम लेते ही हमारा सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है।" अब पढ़िए शुभम की मैट्रिक से लेकर वायुसेना में लेफ्टिनेंट बनने की कहानी मैट्रिक-इंटर में 90 पर्सेंट से ऊपर, पहले अटेम्प्ट में NDA पास फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम कुमार जहानाबाद के हुलासगंज थाना क्षेत्र के बनवरिया गांव के रहने वाले थे। वह दो भाइयों में बड़े थे। शुभम कुमार के पिता अमरेंद्र आनंद किसान हैं और मां हाउस वाइफ हैं। पिता अमरेंद्र ने कहा कि घर के बड़े बेटे होने के नाते वह बहुत जल्दी जिम्मेदारियां समझ गए थे। छठीं कक्षा में ही शुभम का आंध्र प्रदेश के सैनिक स्कूल में एडमिशन हुआ। वहीं से उन्होंने मैट्रिक और इंटर की पढ़ाई पूरी की। दोनों परीक्षाओं में 90 प्रतिशत से अधिक अंक मिले। हादसे की कैसे मिली थी जानकारी शुभम के छोटे भाई छोटू ने बताया कि 13 जून की सुबह करीब 9 बजे भैया से वीडियो कॉल पर बात हुई थी। वह कह रहे थे कि बारिश तेज हो रही है। अभी जल्दबाजी में हूं, फ्री होने के बाद कॉल करूंगा। उस समय वह बिल्कुल सामान्य और खुश नजर आ रहे थे। इसके बाद सुबह 11 बजे एक अधिकारी का फोन आया। उन्होंने घटना की जानकारी दी और बताया कि भैया का भी निधन हो गया है। शुुरू में हमलोगों को विश्वास नहीं हुआ। इसके बाद दोबारा मेरे मोबाइल पर कॉल आया, जिसके बाद हादसे की पुष्टि हुई। यह सुनते ही मां बेहोश होने लगीं। पिता, दादा और पूरा परिवार सदमे में चला गया। ऐसा लगा जैसे पूरा परिवार टूट गया हो। -------------------------- ये खबर भी पढ़ें… एयरफोर्स का ट्रांसपोर्ट विमान क्रैश, 5 की मौत:इनमें राजस्थान, बिहार, यूपी के जवान, तीनों की शादी की बात चल रही थी; लैंडिंग के दौरान हादसा असम में जोरहाट के रौरिया इंडियन एयरबेस पर शनिवार सुबह 10 बजे लैंडिंग के दौरान वायुसेना का विमान क्रैश हो गया। हादसे में पायलट समेत 5 जवानों की मौत हो गई। हादसे के बाद उसमें आग लग गई और दो हिस्से में टूट गया। यह AN-32 मालवाहक विमान था, जिसका इस्तेमाल सैनिकों और सामान की ढुलाई के लिए किया जाता है। हादसे की वजह सामने नहीं आई है। पूरी खबर पढ़ें…
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