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    Shaurya Path: Indian Army को सौंपी गई देश में बनी सबसे घातक Prahar Light Machine Guns, LoC और LAC पर अब बदलेगा खेल

    3 hours from now

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    भारत की सैन्य ताकत को नई धार देने वाली एक बड़ी खबर ने रक्षा क्षेत्र में हलचल मचा दी है। हम आपको बता दें कि देश में बनी प्रहार हल्की मशीन गन की पहली खेप भारतीय सेना को सौंप दी गई है और यह कदम केवल एक आपूर्ति नहीं बल्कि भारत की सामरिक स्वतंत्रता की दिशा में निर्णायक प्रहार है। देखा जाये तो इस उपलब्धि के केंद्र में अडानी डिफेंस जैसी निजी कंपनियों की निरंतर मेहनत है, जिसने यह साबित कर दिया है कि जब निजी क्षेत्र को अवसर और नीतिगत समर्थन मिलता है तो भारत रक्षा निर्माण में चमत्कार कर सकता है। ग्वालियर स्थित अत्याधुनिक संयंत्र से करीब दो हजार प्रहार मशीन गन जब सेना को सौंपी गई तो एक तरह से भारतीय रक्षा क्षेत्र में नया इतिहास रचा गया। खास बात यह भी है कि यह आपूर्ति तय समय से ग्यारह महीने पहले पूरी कर ली गई। यह केवल गति नहीं बल्कि भारत की रक्षा उत्पादन क्षमता का खुला ऐलान है कि अब देश किसी पर निर्भर नहीं रहने वाला।यह मशीन गन सीधे उन इलाकों में तैनात होगी जहां भारत की सबसे बड़ी चुनौतियां मौजूद हैं जैसे वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) और नियंत्रण रेखा (LoC)। देखा जाये तो इन संवेदनशील मोर्चों पर तैनात सैनिकों को अब पहले से कहीं अधिक ताकतवर और भरोसेमंद हथियार मिलेगा। हम आपको बता दें कि प्रहार मशीन गन 7.62 मिलीमीटर क्षमता की है और इसकी प्रभावी मारक दूरी करीब एक हजार मीटर है। लगभग आठ किलोग्राम वजन वाली यह बंदूक हल्की होने के साथ बेहद घातक है। इसका डिजाइन इस तरह तैयार किया गया है कि उच्च तनाव वाले इलाकों में सैनिक इसे आसानी से इस्तेमाल कर सकें।इसे भी पढ़ें: Iran के लिए चंदा एकत्रित करते करते Kashmiri Women ने Indian Army का किया अपमान, जवानों को शराबी बतायाइस परियोजना की सबसे बड़ी खासियत इसका स्वदेशी स्वरूप है। इस हथियार के नब्बे प्रतिशत से अधिक पुर्जे देश में ही बने हैं। यह सीधे तौर पर आत्मनिर्भर भारत की नीति को जमीन पर उतारने का उदाहरण है। हम आपको बता दें कि छह साल की लंबी प्रक्रिया के बाद यह उपलब्धि हासिल हुई है जिसमें निविदा से लेकर निर्माण तक का सफर शामिल है। लेकिन जिस तेजी से पहला बैच तैयार हुआ है उसने यह साफ कर दिया है कि भारत अब रक्षा निर्माण में पिछड़ने वाला देश नहीं बल्कि आगे बढ़ने वाला देश है।अब योजना है कि इसी महीने से हर महीने करीब एक हजार मशीन गन बनाई जाएं। कुल चालीस हजार से ज्यादा हथियारों का लक्ष्य तीन साल में पूरा करने की तैयारी है जबकि पहले इसके लिए सात साल का समय तय था। देखा जाये तो यह बदलाव भारत की औद्योगिक और सामरिक सोच में आए बदलाव का संकेत है। तेजी से उत्पादन का मतलब है कि किसी भी संकट की स्थिति में सेना को हथियारों की कमी नहीं होगी।हम आपको बता दें कि ग्वालियर का यह सौ एकड़ में फैला संयंत्र अब भारत की रक्षा क्रांति का केंद्र बन चुका है। यहां सीएनसी मशीनिंग, रोबोटिक्स, उन्नत धातु विज्ञान और परीक्षण प्रणाली जैसी अत्याधुनिक तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। इस संयंत्र की क्षमता हर साल एक लाख आग्नेयास्त्र और तीस करोड़ छोटे कैलिबर के गोला बारूद बनाने की है। गुणवत्ता का स्तर इतना उच्च है कि दोष दर आधे प्रतिशत से भी कम बताई जा रही है।हम आपको बता दें कि इस परियोजना में इजराइली हथियार उद्योग के साथ साझेदारी भी की गई है, लेकिन खास बात यह है कि अब यह व्यवस्था धीरे धीरे पूरी तरह स्वदेशी ढांचे में बदल रही है। भविष्य में यह संयंत्र खुद एक स्वतंत्र उत्पादन केंद्र के रूप में काम करेगा जो किसी भी वैश्विक संकट के बावजूद भारत की जरूरतों को पूरा कर सकेगा।इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा सामरिक पहलू यह है कि भारत अब युद्ध की तैयारी केवल खरीद पर आधारित नहीं रखेगा बल्कि खुद निर्माण करेगा। इससे पहला बड़ा असर यह होगा कि सेना को समय पर और पर्याप्त मात्रा में हथियार मिलेंगे। साथ ही विदेशी आपूर्ति बाधित होने का खतरा खत्म होगा। इसके अलावा, भारत अब हथियारों के निर्यातक देश के रूप में भी उभर सकता है। देखा जाये तो सीमाओं पर तैनात सैनिकों के लिए इसका मतलब है ज्यादा भरोसेमंद हथियार और बेहतर जवाबी क्षमता। खासकर पहाड़ी और कठिन इलाकों में जहां हर सेकंड और हर गोली का महत्व होता है वहां यह मशीन गन निर्णायक साबित हो सकती है।देखा जाये तो यह कदम भारत की दीर्घकालिक रणनीति का हिस्सा है क्योंकि भारत रक्षा उत्पादन में वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनना चाहता है। इसके लिए निजी क्षेत्र को रक्षा निर्माण में बड़ी भूमिका दी जा रही है जिससे नवाचार और गति दोनों बढ़ेंगे। इसके अलावा, भारत अपने मित्र देशों को भी भविष्य में हथियार निर्यात कर सकता है जिससे उसकी कूटनीतिक ताकत बढ़ेगी। इसके अलावा यह भी स्पष्ट संकेत है कि भारत अब केवल खरीदार नहीं बल्कि निर्माता और निर्यातक बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।देखा जाये तो प्रहार मशीन गन के बाद अब हमला राइफल, स्नाइपर सिस्टम, कार्बाइन और नजदीकी युद्ध हथियारों के उत्पादन की भी योजना है। इसका मतलब है कि आने वाले समय में भारतीय सेना के पास पूरी तरह स्वदेशी हथियारों का विशाल भंडार होगा। यह परिवर्तन केवल सैन्य शक्ति तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि रोजगार, तकनीकी विकास और औद्योगिक वृद्धि को भी गति देगा।बहरहाल, प्रहार मशीन गन की पहली खेप का सेना को मिलना भारत की रक्षा क्रांति की शुरुआत है। यह दिखाता है कि देश अब न केवल अपनी जरूरतें पूरी कर सकता है बल्कि दुनिया को भी चुनौती देने के लिए तैयार है। सीमा पर खड़े सैनिक के हाथ में अब केवल एक बंदूक नहीं बल्कि आत्मनिर्भर भारत की ताकत है। और यही वह बदलाव है जो आने वाले वर्षों में भारत को सैन्य महाशक्ति बनाने की दिशा में निर्णायक साबित होगा।
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