Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    Shaurya Path: Pakistan, China Border पर भारत बढ़ा रहा Air Defence System, दुश्मन का हर वार होगा नाकाम

    3 hours from now

    2

    0

    भारत की सुरक्षा रणनीति में एक और जबरदस्त छलांग लग चुकी है। रूस से आ रही एस-400 त्रियुम्फ की चौथी खेप मई के मध्य तक भारत की धरती पर तैनात हो जाएगी। यह वही हथियार है जिसने पिछले साल पाकिस्तान के साथ टकराव के दौरान दुश्मन के हौसले पस्त कर दिए थे। अब इसका चौथा और फिर पांचवां चरण भारत की वायु सुरक्षा को ऐसी अभेद्य ढाल में बदलने जा रहा है जिसे भेदना किसी भी दुश्मन के लिए लगभग नामुमकिन होगा।राजस्थान और पंजाब के मोर्चे पर इसे तैनात करने का फैसला साफ बताता है कि भारत पश्चिमी सीमा पर किसी भी तरह की चूक नहीं चाहता। समतल और रेगिस्तानी इलाकों में जहां ड्रोन और मिसाइल आसानी से घुसपैठ कर सकते हैं, वहां एस-400 की मौजूदगी दुश्मन की हर चाल को हवा में ही खत्म कर देगी। एस-400 प्रणाली की सबसे बड़ी ताकत इसका लंबी दूरी का रडार और एक साथ सैंकड़ों लक्ष्यों पर नजर रखने की क्षमता है। यह प्रणाली छह सौ किलोमीटर तक के दायरे में तीन सौ तक लक्ष्यों को पहचान सकती है। यानी दुश्मन का विमान हो, ड्रोन हो या बैलिस्टिक मिसाइल, सबकी हरकत भारत की नजर से बच नहीं सकती। जैसे ही कोई खतरा सीमा के भीतर डेढ़ सौ किलोमीटर तक प्रवेश करता है, यह प्रणाली अपने आप सक्रिय होकर उसे निशाना बना लेती है।इसे भी पढ़ें: विजय पथ तक पहुँचने के लिए पश्चिम बंगाल में धर्म पथ पर खूब चले मोदी और शाहपिछले साल हुए संघर्ष में भारत ने इस प्रणाली का आक्रामक इस्तेमाल करते हुए पाकिस्तान के लड़ाकू विमानों, चेतावनी प्रणालियों और परिवहन विमानों को निशाना बनाया था। करीब ग्यारह लंबी दूरी की मिसाइलों का इस्तेमाल कर भारत ने साफ कर दिया था कि अब जवाब सिर्फ रक्षात्मक नहीं बल्कि निर्णायक होगा। यही वजह है कि अब अतिरिक्त पांच और प्रणालियां खरीदने का फैसला लिया गया है। हम आपको याद दिला दें कि 2018 में हुए पांच अरब से ज्यादा डॉलर के समझौते के तहत पांच स्क्वॉड्रन खरीदने की शुरुआत हुई थी। अब इस संख्या को दस तक ले जाने की योजना है। यह फैसला उस समय लिया गया था जब अमेरिका ने प्रतिबंधों की चेतावनी दी थी, लेकिन भारत ने साफ कर दिया था कि उसकी सुरक्षा सर्वोच्च है और किसी भी दबाव के आगे झुकना विकल्प नहीं है।यह सौदा भारत और रूस के रक्षा संबंधों को भी नई मजबूती देता है। पश्चिमी दबाव के बावजूद भारत ने अपनी स्वतंत्र रणनीतिक नीति को कायम रखा है। यह संदेश सिर्फ अमेरिका ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के लिए है कि भारत अब अपने फैसले खुद लेता है और अपने हितों के अनुसार चलता है।रणनीतिक दृष्टि से देखें तो यह तैनाती भारत को बहुस्तरीय रक्षा प्रणाली की ओर तेजी से आगे बढ़ा रही है। एस-400 लंबी दूरी की सुरक्षा देगा, बराक-8 मध्यम दूरी पर ढाल बनेगा और स्वदेशी परियोजना कुशा विस्तारित सुरक्षा प्रदान करेगी। हम आपको बता दें कि इन तीनों को मिलाकर भारत एक ऐसा सुरक्षा कवच तैयार कर रहा है जिसे सुदर्शन चक्र कहा जा रहा है। यह भारत का अपना आयरन डोम होगा जो बैलिस्टिक मिसाइल, ड्रोन और यहां तक कि हाइपरसोनिक हथियारों को भी रोकने में सक्षम होगा।लेकिन भारत सिर्फ आयात पर निर्भर नहीं रहना चाहता। इसी दिशा में रक्षा मंत्रालय ने 83 कैडेट प्रणालियों के लिए प्रस्ताव जारी किया है। यह प्रणाली आकाशतीर नेटवर्क को लेकर चलने वाले ट्रैक आधारित वाहन होंगे जो टैंक और बख्तरबंद वाहनों के साथ चलते हुए उन्हें हवाई खतरों से बचाएंगे। यह कदम बेहद अहम है क्योंकि आधुनिक युद्ध में ड्रोन और हवाई हमले सबसे बड़ा खतरा बन चुके हैं। हम आपको बता दें कि आकाशतीर प्रणाली पूरी तरह स्वदेशी है और यह अलग-अलग सेंसर और हथियारों को एक ही नेटवर्क में जोड़कर वास्तविक समय में निर्णय लेने में सक्षम बनाती है। इसे ट्रैक वाले प्लेटफार्म पर लगाने का मतलब है कि यह कठिन इलाकों में भी टैंकों के साथ कदम से कदम मिलाकर चल सकेगी। यही वह कमी थी जिसे अब दूर किया जा रहा है।इन कैडेट प्रणालियों की तकनीकी क्षमताएं भी बेहद उन्नत हैं। यह माइनस-30 से लेकर पचास डिग्री तक के तापमान में काम कर सकती हैं, तीन सौ बीस किलोमीटर तक चल सकती हैं और कठिन रास्तों पर भी प्रभावी बनी रहती हैं। इसमें जीपीएस, ग्लोनास और नाविक जैसे नेविगेशन सिस्टम का एक साथ उपयोग किया जाएगा ताकि किसी भी तरह की जामिंग को निष्प्रभावी किया जा सके। इस पूरे कार्यक्रम का एक बड़ा पहलू आत्मनिर्भरता भी है। इसे भारतीय श्रेणी के तहत खरीदा जाएगा जिसमें पैंसठ प्रतिशत से ज्यादा स्वदेशी सामग्री अनिवार्य होगी। इसका मतलब है कि भारत अब धीरे-धीरे विदेशी निर्भरता से बाहर निकलकर खुद अपनी रक्षा जरूरतों को पूरा करने की दिशा में तेजी से बढ़ रहा है।इसके रणनीतिक निहितार्थ भी बेहद स्पष्ट हैं। एक तरफ पश्चिमी सीमा पर पाकिस्तान को पूरी तरह नियंत्रण में रखने की तैयारी है, तो दूसरी तरफ पूर्वी सीमा पर चीन के लिए भी संदेश साफ है। पांचवीं एस-400 प्रणाली को चीन सीमा पर तैनात किया जाएगा, जिससे दोनों मोर्चों पर संतुलन कायम रहेगा। इसके अलावा भारत छोटे खतरों से निपटने के लिए पैंत्सिर प्रणाली खरीदने की भी योजना बना रहा है जो एस-400 बैटरियों को ड्रोन जैसे हमलों से बचाएगी। यानी भारत अब सिर्फ बड़े खतरों पर नहीं बल्कि सूक्ष्म और उभरते खतरों पर भी बराबर ध्यान दे रहा है।साफ है कि भारत अब रक्षात्मक मानसिकता से बाहर निकल चुका है। यह एक आक्रामक और तकनीकी रूप से सक्षम सैन्य शक्ति के रूप में खुद को स्थापित कर रहा है। एस-400 की नई खेप, सुदर्शन चक्र की योजना और आकाशतीर आधारित कैडेट प्रणाली मिलकर भारत को उस स्तर पर ले जा रही हैं जहां दुश्मन हमला करने से पहले सौ बार सोचेगा। यह सिर्फ हथियारों का जमावड़ा नहीं है, यह भारत की बदलती रणनीति का एलान है। अब भारत सिर्फ जवाब नहीं देगा, बल्कि हर खतरे को जन्म लेने से पहले ही खत्म करने की क्षमता हासिल कर रहा है। यही नई भारत की असली ताकत है और यही वह संदेश है जो दुनिया को समझना होगा।
    Click here to Read more
    Prev Article
    80 साल के दोस्त की खातिर महिला ने पुलिस कर्मियों से लिया लोहा, मधुमक्खियों से कटवाया
    Next Article
    बंगाल- एक एग्जिट पोल में भाजपा, दूसरे में TMC सरकार:असम में फिर भाजपा, NDA को 88-100 सीटें, कांग्रेस को 24-36 सीटों का अनुमान

    Related न्यूज Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment