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    टीचर के बेटे की UPSC में आई 250वीं रैंक:रांची से बीटेक किया, आयरलैंड में 1.2 करोड़ के पैकेज की नौकरी छोड़ी

    3 hours ago

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    कन्नौज के रहने वाले प्रांजल राय के घर में यूपीएससी एग्जाम का रिजल्ट आने के बाद से जश्न का माहौल है। मोहल्ले के लोगों ने परिजनों के साथ ढोल की थाप पर थिरकते हुए जश्न मनाया। उनके घर पहुंच कर बधाई देने वालों का तांता लगा है। प्रांजल राय ने यूपीएससी एग्जाम में 250वीं रैंक हासिल की है। उन्हें ये सफलता अपने पहले ही प्रयास में मिल गई। जिससे घर-परिवार और मोहल्ले में जश्न का माहौल है। प्रांजल के पिता अजीत राय कन्नौज जिले के नेरा गांव स्थित सुभाष इंटर कॉलेज में हिन्दी विषय के टीचर हैं। वह मूल रूप से गाजीपुर जिले के नगसर गांव के निवासी हैं। 14 फरवरी 2003 में उन्होंने कन्नौज जिले में जॉइनिंग की, जिसके बाद वह परिवार समेत कन्नौज में ही बस गए। जनपद न्यायलय के पास उन्होंने मकान बनवाया और यहां पत्नी संगीता रात, बेटा प्रांजल और बेटी अस्मिता राय के साथ रहते हैं। उन्होंने अपने बेटे प्रांजल को कक्षा 1 से 5 तक सरस्वती शिशु मंदिर कानून गोयान में पढ़ाया और फिर कक्षा 6 से इंटरमीडिएट तक प्रांजल ने कन्हैयालाल सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज में पढ़ाई की। इसके बाद राजस्थान के कोटा में रहकर 1 साल तक आईआईटी की तैयारी की। फिर रांची से बीटेक किया। इसके बाद वर्ष बंगलौर की एक कम्पनी में जॉब की। यहां करीब दो साल काम करने के बाद वह अमेजन में साफ्टवेयर इंजीनियर की के पद पर जॉब करने आयरलैंड चले गए। जहां 1.2 करोड़ के पैकेज पर काम किया। इकलौते बेटे के घर से काफी दूर होने के कारण परिजनों ने आयरलैंड से वापस बुला लिया और फिर हिंदी मीडियम से यूपीएससी की तैयारी के लिए दिल्ली भेज दिया। जहां पहले ही प्रयास में प्रांजल ने सफलता हासिल कर ली। 8 से 10 घंटे करते थे पढ़ाई, सोशल मीडिया से दूरी दैनिक भास्कर से बात करते हुए प्रांजल ने बताया कि वह दिन में 8 से 10 घण्टे पढ़ाई के लिए निकालते रहे। लक्ष्य हासिल करने के लिए सोशल मीडिया से दूरी बनाकर रखी। सोशल मीडिया के लिए एक समय तय था। उस टाइम पीरियड का मोबाइल पर अलार्म लगा के रखते थे, ताकि ज्यादा समय वहां बर्बाद न हो। प्रांजल को क्रिकेट और बैडमिंटन में रुचि है। वह दोस्तों के साथ खेलते हैं। आयरलैंड भेजना पिता के लिए सबसे कठिन निर्णय बेटे प्रांजल की उपलब्धियों के बारे में दैनिक भास्कर को बताते हुए पिता अजीत राय भावुक हो गए। उन्होंने बताया कि उन्हें भरोसा था कि बेटा एक दिन ये मुकाम जरूर हासिल करेगा। इससे पहले बेटे ने आयरलैंड में रहकर जॉब की। उसे आयरलैंड भेजने का निर्णय सबसे कठिन था। इकलौते बेटे को दिल्ली एयरपोर्ट पर विदाई देने के बाद सभी परिजन फूट-फूट कर रोये। उसकी हमेशा चिंता सताती थी, इसलिए एक साल बाद ही वापस बुला लिया और अब बेटे ने जो मुकाम हासिल किया है, उससे सभी गौरवांवित महसूस कर रहे। मां-और बहन भी हुई भावुक प्रांजुल की एक बहन है अस्मिता राय। जोकि उनसे दो साल छोटी है। अस्मिता भी मेधावी है और वह भाई के नक्शे कदम पर चलकर ये मुकाम हासिल करना चाहती है। फिलहाल अस्मिता ने एलटी ग्रेड परीक्षा दी और दिल्ली में भी टीचर भर्ती परीक्षा दी है। उसको पढ़ने में भाई से काफी सपोर्ट मिलता है। मां संगीता राय ने बताया कि बेटे का रिजल्ट आने पर कन्नौज से लेकर गाजीपुर तक खुशी का माहौल है। प्रांजल के बाबा मिल्ट्री से रिटायर हैं और वह गाजीपुर में ही रहते हैं।
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