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    तमिलनाडु में प्रधानमंत्री ने दिया बड़ा सियासी संदेश, दीपम मुद्दे पर जान देने वाले श्रद्धालु के घर जाकर परिजनों से मिले PM

    3 hours from now

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    तमिलनाडु विधानसभा चुनाव की आहट के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दौरा राजनीतिक और सांस्कृतिक दोनों दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मदुरै और तिरुपरंकुंड्रम में आयोजित कार्यक्रमों के दौरान उन्होंने जहां राज्य की सत्तारुढ़ द्रमुक सरकार पर तीखा हमला बोला, वहीं दीपम अधिकार के मुद्दे को उठाने वाले एक श्रद्धालु के घर जाकर बड़ा संदेश भी दिया। इस कदम ने पूरे राज्य में व्यापक चर्चा को जन्म दिया है।हम आपको बता दें कि प्रधानमंत्री ने तिरुपरंकुंड्रम स्थित श्री सुब्रह्मण्य स्वामी मंदिर में पूजा अर्चना की। यह मंदिर तमिल आस्था का प्रमुख केंद्र है और कार्तिगई दीपम पर्व के समय यहां विशेष महत्व होता है। पिछले वर्ष दीप प्रज्वलन अधिकार को लेकर हुए विवाद के दौरान एक युवा श्रद्धालु ने अपना जीवन समाप्त कर लिया था। इस घटना ने राज्य भर में भावनात्मक प्रतिक्रिया उत्पन्न की थी। प्रधानमंत्री ने उसी श्रद्धालु के घर जाकर उनके परिजनों से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि उनका मन भारी है और किसी भी परिवार को ऐसी पीड़ा से नहीं गुजरना चाहिए। इस मुलाकात को प्रतीकात्मक रूप से उस भावना से जोड़ा जा रहा है कि केंद्र सरकार तमिल संस्कृति और धार्मिक परंपराओं के प्रति सम्मान रखती है। चुनावी माहौल में यह संदेश विशेष महत्व रखता है, क्योंकि द्रमुक पर आरोप लगते रहे हैं कि वह परंपरागत धार्मिक मुद्दों के प्रति संवेदनशील नहीं है।इसे भी पढ़ें: Gulf के हालात को देखते हुए India सतर्क, PM Modi ने की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक, लिये गये कई बड़े फैसलेसाथ ही मदुरै की जनसभा में प्रधानमंत्री ने द्रमुक पर कई घोटालों में लिप्त होने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सामान्यतः मंत्री अच्छे कार्यों में प्रतिस्पर्धा करते हैं, परंतु यहां मंत्री घोटालों में प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं। उन्होंने स्थानांतरण, नौकरी, ठेका और बालू खनन से जुड़े कथित घोटालों का उल्लेख करते हुए कहा कि यह सरकार गरीबों, युवाओं और किसानों के अधिकारों की अनदेखी कर रही है। प्रधानमंत्री ने पूर्व मुख्यमंत्री के. कामराज का उल्लेख करते हुए उनकी ईमानदारी को आदर्श बताया और कहा कि आज की सत्ता उस परंपरा से भटक चुकी है। उन्होंने दावा किया कि राज्य की जनता परिवर्तन का मन बना चुकी है और आगामी चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन को अवसर देगी, जिसमें अन्नाद्रमुक प्रमुख सहयोगी है।प्रधानमंत्री ने साथ ही कच्चातीवु द्वीप का मुद्दा उठाते हुए कहा कि कच्चातीवु को श्रीलंका को सौंपे जाने पर तमिल हितों की अनदेखी हुई थी। उन्होंने यह भी कहा कि जल्लीकट्टु पर जब प्रतिबंध लगा था, तब केंद्र ने अध्यादेश के माध्यम से उसे जारी रखने का मार्ग प्रशस्त किया। जल्लीकट्टु तमिल पहचान का महत्वपूर्ण प्रतीक माना जाता है। उन्होंने संसद भवन में सेंगोल की स्थापना का उल्लेख करते हुए कहा कि तमिल परंपरा को राष्ट्रीय सम्मान दिया गया है। इन उदाहरणों के माध्यम से उन्होंने यह संदेश देने का प्रयास किया कि केंद्र सरकार तमिल संस्कृति के गौरव को सुदृढ़ कर रही है।प्रधानमंत्री ने साथ ही राज्य के उपमुख्यमंत्री उदयनीधि स्टालिन के उस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कि उन्हें किसी से भय नहीं है। प्रधानमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र में भय का स्थान नहीं होता। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता का प्रमाण बताया। साथ ही उन्होंने कानून व्यवस्था, महिला सुरक्षा और मादक पदार्थों की समस्या का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि गठबंधन सत्ता में आता है तो अपराध और मादक जाल पर कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री जे जयललिता को स्मरण करते हुए कहा कि राज्य को सुशासन की दिशा में पुनः अग्रसर करना आवश्यक है।देखा जाये तो तमिलनाडु लंबे समय से द्रविड़ राजनीति का गढ़ रहा है। ऐसे में प्रधानमंत्री का सीधे एक श्रद्धालु के घर जाकर संवेदना प्रकट करना केवल मानवीय पहल नहीं, बल्कि सांस्कृतिक जुड़ाव का संकेत भी है। इससे धार्मिक भावनाओं को सम्मान देने का संदेश गया है, जो ग्रामीण और पारंपरिक मतदाताओं को प्रभावित कर सकता है। आगामी विधानसभा चुनाव में यह विमर्श महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है, क्योंकि सांस्कृतिक पहचान और भ्रष्टाचार के आरोप दोनों ही प्रमुख चुनावी विषय बनने जा रहे हैं। समग्र रूप से देखा जाए तो यह दौरा केवल विकास परियोजनाओं के शिलान्यास या जनसभा तक सीमित नहीं रहा। श्रद्धालु के घर की यात्रा ने इसे भावनात्मक आयाम दिया है, जिसने चुनावी परिदृश्य को नई दिशा देने की संभावना पैदा कर दी है।
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