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    दैनिक भास्कर ऐप पर करें 84 घंटा माता के दर्शन:चैत्र नवरात्रि पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भारी भीड़, मंदिर में अब तक चढ़ चुके हैं 2 लाख से अधिक घंटे

    2 hours ago

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    आज से चैत्र नवरात्रि और हिंदू नववर्ष का उल्लास शुरू हो गया है। इस पावन अवसर पर हम आपको एक ऐसे सिद्ध मंदिर के दर्शन करवा रहे हैं, जहां मात्र एक घंटा चढ़ाने से भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण होती है। बरेली के बदायूं रोड स्थित प्रसिद्ध 84 घंटा मंदिर में अब तक आस्था के 2 लाख से अधिक घंटे अर्पित किए जा चुके हैं। मान्यता है कि इस दर पर भक्त रोते हुए आते हैं और खुश होकर वापस लौटते हैं। श्रद्धा का है बजता घंटा, मिटते मन के क्लेश। खाली झोली भरती मैया, हरती सकल निवेश॥" कलश स्थापना के साथ उमड़ा आस्था का सैलाब चैत्र नवरात्रि का शुभारंभ आज 19 मार्च से हो गया है। पहले दिन घरों और मंदिरों में विधि-विधान से कलश स्थापना की जा रही है। बरेली के 84 घंटा मंदिर में सुबह तड़के से ही सैकड़ों श्रद्धालु माता रानी का आशीर्वाद लेने पहुंचने लगे। यहां की सबसे खास बात यह है कि भक्त माता रानी के अत्यंत निकट जाकर उनके दर्शन और स्पर्श कर सकते हैं, जिससे उन्हें एक अद्भुत आध्यात्मिक अनुभूति होती है। "जय जय चौरासी घंटा माता। तुम हो जग की भाग्य विधाता॥ जो भी श्रद्धा सुमन चढ़ावे। मनवांछित फल निश्चय पावे॥" सूनी गोद भरती हैं और संकट हरती हैं माता भक्तों का विश्वास है कि माता रानी किसी को निराश नहीं करतीं। जिनके पास रोजगार नहीं है, उन्हें नौकरी मिलती है और जिनकी गोद सूनी है, माता उन्हें संतान सुख प्रदान करती हैं। मंदिर सुबह 5 बजे से रात 10 तक खुला रहता है। सुबह 10 बजे और शाम 5 बजे विशेष आरती का आयोजन होता है, जबकि दोपहर में बड़ी संख्या में महिलाएं भक्तिमय भजनों का आनंद लेती हैं। "रोते आए द्वार पे, हँसते जाते लोग। मैया सबको बांटती, खुशियों का ही भोग॥ गूँज रहा आकाश है, घंटों की झंकार। बरेली के धाम में, बैठा जग आधार॥" स्वप्न से शुरू हुआ मंदिर का चमत्कारिक इतिहास इस मंदिर का इतिहास बेहद दिलचस्प है। साल 1969 में माता रानी ने शकुंतला देवी को स्वप्न में दर्शन देकर यहां मंदिर निर्माण का आदेश दिया था और इसका नाम '84 घंटा मंदिर' रखने को कहा था। माता ने वचन दिया था कि जो भी भक्त यहां घंटा चढ़ाएगा, उसकी मुराद पूरी होगी। चमत्कारिक रूप से अगले ही दिन दोपहर 2 बजे तक मंदिर में 84 घंटे चढ़ गए। तब से आज तक भक्त अपनी मुराद पूरी होने पर यहां भेंट स्वरूप घंटे चढ़ाते आ रहे हैं।
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