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    देवरिया में शिक्षकों ने बायोमैट्रिक उपस्थिति से छूट मांगी:बिजली-संसाधनों की कमी और प्रशिक्षण का अभाव बताया

    2 hours ago

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    देवरिया में मंगलवार को समाज कल्याण विभाग से अनुदानित प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षकों ने बायोमैट्रिक उपस्थिति प्रणाली से छूट की मांग की। जिला पंचायत सभागार में आयोजित एक बैठक में शिक्षकों ने इस प्रणाली से जुड़ी विभिन्न समस्याओं पर विस्तार से चर्चा की। बैठक का नेतृत्व शिक्षक कासिम खान और सर्वेश सिंह ने किया। कासिम खान ने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में बायोमैट्रिक उपस्थिति को अनिवार्य करना व्यावहारिक नहीं है। उन्होंने बताया कि जनपद के अधिकांश विद्यालयों में बिजली, भवन और अन्य आवश्यक संसाधनों का अभाव है। ऐसी स्थिति में डिजिटल उपस्थिति प्रणाली लागू करना शिक्षकों पर अतिरिक्त दबाव डालने जैसा है। उन्होंने मांग की कि सरकार पहले आधारभूत सुविधाएं और प्रशिक्षण उपलब्ध कराए, उसके बाद ही इस व्यवस्था को लागू किया जाए। वहीं, सर्वेश सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि बिना किसी पूर्व प्रशिक्षण और स्पष्ट दिशा-निर्देश के बायोमैट्रिक प्रणाली लागू कर दी गई है। इससे शिक्षकों को कई व्यावहारिक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि कई विद्यालय दूरदराज क्षेत्रों में संचालित हो रहे हैं, जहाँ बिजली जैसी मूलभूत सुविधाएँ भी उपलब्ध नहीं हैं। साथ ही, निजी प्रबंधन इस व्यवस्था पर आने वाले खर्च को उठाने के लिए तैयार नहीं है। अधिकांश विद्यालय जिला समाज कल्याण अधिकारी (विकास) के नियंत्रण में हैं, जबकि कुछ निजी प्रबंधन के अधीन संचालित होते हैं। इन विद्यालयों में संसाधनों की भारी कमी है, कई में बिजली कनेक्शन, भवन और चहारदीवारी तक की व्यवस्था नहीं है। इसके अलावा, बायोमैट्रिक प्रणाली लागू करने से पहले शिक्षकों को किसी प्रकार का प्रशिक्षण भी नहीं दिया गया है। शिक्षकों ने एकल शिक्षक वाले विद्यालयों में अवकाश स्वीकृति को लेकर भी समस्या उठाई। उन्होंने कहा कि इस संबंध में कोई स्पष्ट व्यवस्था नहीं है। बायोमैट्रिक प्रणाली के नियम-कानून को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है। अंत में, शिक्षकों ने शासन से मांग की कि पहले सभी आवश्यक संसाधन, प्रशिक्षण और निगरानी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उन्होंने यह भी मांग की कि जब तक पूरी व्यवस्था लागू नहीं हो जाती, तब तक मई 2026 का वेतन न रोका जाए, ताकि शिक्षकों और उनके परिवारों का भरण-पोषण प्रभावित न हो।
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