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    धमाका और धुआं, फिर दिखा मौत का मंजर:कौशांबी ब्लास्ट के प्रत्यक्षदर्शी बोले- उड़कर आए लोहे के एंगल, ईंट-सीमेंट के टुकड़े

    3 hours ago

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    सुबह करीब 11 से 12 बजे के बीच का वक्त था। गांव के लोग रोज की तरह अपने काम में व्यस्त थे। तभी अचानक इतनी तेज धमाके की आवाज हुई कि कुछ पल के लिए किसी को कुछ समझ ही नहीं आया। आसपास के लोगों को लगा कि शायद बिजली की लाइन में कोई बड़ा फाल्ट हुआ है। लेकिन अगले ही पल आसमान में धुएं का गुबार उठने लगा। देखते ही देखते चारों तरफ अंधेरा-सा छा गया। इसके साथ ही हवा में लोहे के एंगल, ईंट और सीमेंट के टुकड़े उड़ते दिखाई दिए। कुछ ही सेकंड में चीख-पुकार मच गई। जब धुआं कुछ छंटा तो सामने तबाही का मंजर था।’ दैनिक भास्कर ने घटनास्थल के आसपास रहने वाले ग्रामीणों से बातचीत की तो सामने आया कि विस्फोट इतना तेज था कि फैक्ट्री के आसपास का मलबा दूर-दूर तक जा गिरा। किसी के घर तक ईंट पहुंची तो किसी को लोहे और कंक्रीट के टुकड़ों ने घायल कर दिया। महमूदपुर गांव की सरिता देवी जब यह बातें कह रही थीं, तब कौशाम्बी पटाखा फैक्ट्री ब्लास्ट की घटना को चार घंटे बीत चुके थे। इसके बावजूद उनके चेहरे पर दहशत साफ दिखाई दे रही थी। वह बार-बार उस वक्त को याद कर रही थीं, जब अचानक धमाके की आवाज से पूरा इलाका दहल उठा। ‘पहले लगा बिजली की लाइन में फाल्ट हुआ है’ विस्फोट वाली जगह से करीब 500 मीटर दूर रहने वाली 70 वर्षीय ननकी उस वक्त अपने काम में व्यस्त थीं। उन्होंने बताया कि अचानक बहुत जोर की आवाज हुई। पहले तो कुछ समझ नहीं आया। कुछ ही पल में चारों तरफ धुआं फैल गया। ननकी के मुताबिक, धुआं इतना ज्यादा था कि कुछ देर के लिए आसपास कुछ दिखाई देना बंद हो गया। इसके बाद ईंट, पत्थर और कंक्रीट के टुकड़े हवा में उड़कर तेजी से नीचे गिरने लगे। इसी दौरान एक ईंट का टुकड़ा उनके माथे पर आकर लगा। वह डरकर चीखते हुए घर के भीतर भाग गईं। उन्होंने बताया कि कुछ देर बाद जब वह बाहर निकलीं तो आसपास मलबा बिखरा पड़ा था। नाली में सरिया और सीमेंट से बना क्षतिग्रस्त पिलर पड़ा था। ननकी कहती हैं कि 70 साल की उम्र में उन्होंने इस तरह का हादसा पहली बार देखा है। धमाके के बाद सिर्फ चीख-पुकार सुनाई दे रही थी ग्रामीणों के मुताबिक, धमाके के बाद कुछ देर तक पूरे इलाके में अफरा-तफरी मची रही। किसी को अपने परिजन की तलाश थी तो कोई घायल लोगों को सुरक्षित जगह पहुंचाने में जुटा था। चारों तरफ धुआं और मलबा था। लोग यह समझने की कोशिश कर रहे थे कि आखिर हुआ क्या है। इसी बीच किसी ने बताया कि पटाखा फैक्ट्री में विस्फोट हुआ है। इसके बाद ग्रामीण घटनास्थल की तरफ दौड़ पड़े। कुछ लोग घायलों को तलाशने लगे तो कुछ अपने घरों और आसपास के लोगों को सुरक्षित करने में जुट गए। पैदल काम पर निकले थे राजेश, रास्ते में ही आ गिरा मलबा इस हादसे में गंभीर रूप से घायल होकर अस्पताल भेजे गए राजेश कुमार भी इसी बस्ती के रहने वाले हैं। उनकी बेटी रवीना ने बताया कि रोज की तरह उनके पिता करीब 11:30 बजे घर से काम पर जाने के लिए निकले थे। वह पैदल ही जा रहे थे। इसी दौरान अचानक तेज धमाके होने लगे। रवीना के मुताबिक, धमाके की आवाज सुनकर वह और उनकी मां माला घर से बाहर निकलीं। तभी आसपास चीख-पुकार सुनाई देने लगी। किसी ने बताया कि पटाखा फैक्ट्री में ब्लास्ट हुआ है। उनकी मां राजेश को तलाशने के लिए संपर्क मार्ग की तरफ भागीं। तभी एक बड़ा मलबे का टुकड़ा उनके पैर में आकर लगा और वह घायल हो गईं। रवीना ने बताया कि वह भागकर अपनी मां के पास पहुंचीं। इसी दौरान सामने खेत में उनके पिता राजेश खून से लथपथ पड़े दिखाई दिए। उन्होंने शोर मचाया तो गांव के लोग भी वहां पहुंच गए। इसके बाद ग्रामीणों की मदद से राजेश और उनकी पत्नी को अस्पताल ले जाया गया। रवीना का कहना है कि परिवार को अभी तक यह ठीक से पता नहीं चल पाया है कि उनके पिता की हालत कैसी है और उन्हें कहां इलाज के लिए ले जाया गया है। वह बार-बार पुलिसकर्मियों से जानकारी मांग रही हैं, लेकिन उनके मुताबिक उन्हें सिर्फ इतना बताया जा रहा है कि उनके पिता ठीक हैं। ‘कई बार विरोध किया, लेकिन फैक्ट्री बंद नहीं हुई’ राजेश के घायल होने की जानकारी मिलने के बाद उनकी बहन पार्वती भी मौके पर पहुंचीं। उन्होंने आरोप लगाया कि गांव में पटाखा फैक्ट्री को लेकर पहले भी विरोध किया गया था। लोगों ने शिकायत की, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। पार्वती ने कहा कि उनका भाई परिवार में इकलौता कमाने वाला है। अगर उसे कुछ हो गया तो परिवार का क्या होगा, यह सोचकर ही डर लग रहा है। धमाके ने कुछ ही पलों में बदल दिया गांव का माहौल इसी तरह गांव के अंकित ने बताया, धमाका हुआ तो वह दौड़कर फैक्ट्री की ओर गया। वहां एक के बाद एक धमाके होते देख, तुरंत ही वापस आने लगा। इसी दौरान एक ईंट सिर पर आकर लगा और में नाली में गिर पड़ा। फिर किसी तरह उठकर आया और अस्पताल जाकर मरहम-पट्टी कराई। इस तरह प्रत्यक्षदर्शियों ने जो बयां किया उससे साफ है कि विस्फोट के बाद कुछ ही पलों में गांव का माहौल मातम और अफरा-तफरी में बदल गया। पहले तेज धमाका, फिर धुएं का गुबार और उसके बाद हवा से गिरते ईंट-पत्थर और लोहे के टुकड़े। लोग कुछ समझ पाते, उससे पहले कई लोग इसकी चपेट में आ चुके थे। घटना के करीब चार घंटे बाद भी गांव में दहशत का माहौल था। कई ग्रामीण घटना को याद करते हुए सहम जा रहे थे। किसी को अपने घायल परिजन की चिंता थी तो कोई हादसे में जान गंवाने वालों के बारे में जानकारी जुटा रहा था।
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