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    TMC में बड़ी बगावत की आहट! Mamata Banerjee के खिलाफ 'असली तृणमूल' गुट सक्रिय, क्या बंगाल में दोहराया जाएगा महाराष्ट्र का खेल?

    1 hour ago

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    पश्चिम बंगाल चुनावों में मिली करारी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर सुलग रही असंतोष की चिंगारी अब एक बड़े राजनीतिक संकट में बदलती दिख रही है। पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी द्वारा निष्कासित किए गए विधायकों ने अब पार्टी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। राजनीतिक गलियारों में इस बात की सरगर्मी तेज हो गई है कि क्या पश्चिम बंगाल में भी महाराष्ट्र जैसा सियासी उलटफेर देखने को मिल सकता है? पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष और आंतरिक कलह के बीच, बागी नेता अब ममता बनर्जी के नेतृत्व को चुनौती देने के लिए गुप्त रणनीतियाँ तैयार कर रहे हैं। हालांकि अभी तक पार्टी में किसी औपचारिक फूट की घोषणा नहीं की गई है, लेकिन पिछले कुछ दिनों में हुई घटनाओं की एक श्रृंखला ने पार्टी के भीतर बढ़ती असंतोष की अटकलों को और हवा दे दी है।इसे भी पढ़ें: दिल्ली में क्राइम आउट ऑफ कंट्रोल! न्यू उस्मानपुर में नाबालिग की चाकू मारकर हत्या, अमर कॉलोनी में 10वीं के छात्र को मारी गयी गोली गुप्त बैठकेंसूत्रों के अनुसार, पिछले कुछ हफ्तों में कई निष्कासित और असंतुष्ट नेताओं ने कोलकाता के MLA हॉस्टल में बैठकें की हैं। बताया जा रहा है कि इन चर्चाओं का मुख्य विषय TMC का भविष्य, संगठनात्मक सुधार और एक वैकल्पिक राजनीतिक मंच बनाने की संभावना थी।सूत्रों का दावा है कि कुछ बागी नेता "असली तृणमूल" (Real Trinamool) के बैनर तले एक अलग राजनीतिक संगठन बनाने के विचार पर मंथन कर रहे हैं। हालांकि अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन खबरों के मुताबिक, असंतुष्ट विधायकों का समर्थन जुटाने के प्रयास जारी हैं। इसे भी पढ़ें: दिल्ली में क्राइम आउट ऑफ कंट्रोल! न्यू उस्मानपुर में नाबालिग की चाकू मारकर हत्या, अमर कॉलोनी में 10वीं के छात्र को मारी गयी गोलीये घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आए हैं, जब इस बात के संकेत मिल रहे हैं कि TMC के लगभग 15 से 20 विधायक ऐसे नेताओं के संपर्क में हैं, जो पार्टी नेतृत्व पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं।फूट की अगुवाई कर रहे निष्कासित विधायक: कौन हैं ये?TMC द्वारा अपने दो विधायकों—ऋतब्रत बनर्जी और संदीपान साहा—को कथित तौर पर पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में निष्कासित किए जाने के बाद, यह ताजा राजनीतिक उथल-पुथल और तेज हो गई है।बताया जा रहा है कि इन दोनों विधायकों ने 'नेता प्रतिपक्ष' (Leader of the Opposition) से जुड़े एक प्रस्ताव और उस प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए थे, जिसके तहत विधायकों के हस्ताक्षर लिए गए थे। पार्टी सूत्रों के अनुसार, दोनों नेताओं को आमंत्रित किए जाने के बावजूद, वे बाद में पार्टी की एक महत्वपूर्ण बैठक में शामिल नहीं हुए।उनके निष्कासन ने पार्टी के भीतर चल रही गुटबाजी और फूट की अटकलों को और भी गहरा कर दिया है।क्या ममता का हश्र भी उद्धव जैसा होगा?राजनीतिक विश्लेषकों ने अब महाराष्ट्र की घटनाओं से इसकी तुलना करना शुरू कर दिया है। महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे ने उद्धव ठाकरे के खिलाफ बगावत का बिगुल फूंका था, जिसके परिणामस्वरूप शिवसेना में एक बड़ी फूट पड़ गई थी।कुछ खबरों में यह दावा किया जा रहा है कि ऋतब्रत बनर्जी TMC विधायकों के एक गुट का समर्थन जुटाने की कोशिश कर सकते हैं; हालांकि, फिलहाल महाराष्ट्र जैसी बड़े पैमाने की बगावत का कोई सार्वजनिक प्रमाण मौजूद नहीं है। सूत्रों का दावा है कि बनर्जी और साहा ने हाल के हफ़्तों में पार्टी की बैठकों में आना बंद कर दिया था, जिससे यह अटकलें तेज़ हो गई हैं कि वे पार्टी नेतृत्व के साथ टकराव की तैयारी कर रहे थे।इन कथित बैठकों और बढ़ती नाराज़गी ने TMC की अंदरूनी एकता पर सबकी नज़रें टिका दी हैं, ठीक ऐसे समय में जब पार्टी चुनावों में अपने निराशाजनक प्रदर्शन से उबरने की कोशिश कर रही है।हालांकि पार्टी नेतृत्व ने विरोध की आवाज़ों के ख़िलाफ़ तेज़ी से कार्रवाई की है, लेकिन आने वाले हफ़्तों में यह साफ़ हो जाएगा कि क्या यह अशांति मुट्ठी भर नेताओं तक ही सीमित रहती है, या फिर ममता बनर्जी के अधिकार के लिए एक बड़ी चुनौती बन जाती है।  Read Latest National News in Hindi only on Prabhasakshi  
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