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    TMC और घास-फूल सिंबल विवाद: Supreme Court ने दोनों गुटों को दिया 10 दिन का अतिरिक्त समय

    20 hours ago

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    सुप्रीम कोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नाम और 'घास-फूल' चुनाव चिह्न पर अपने दावों के संबंध में, चुनाव आयोग के समक्ष हलफनामे दाखिल करने के लिए दोनों गुटों को अतिरिक्त समय दिया। सुप्रीम कोर्ट ने ऋतुराज बनर्जी गुट को अपना जवाब दाखिल करने के लिए 10 दिन का समय दिया। वहीं, TMC के ममता बनर्जी गुट को भी ऋतुराज बनर्जी गुट द्वारा दाखिल हलफनामे पर जवाब देने के लिए 10 दिन का समय दिया गया। चुनाव आयोग के समक्ष जवाब दाखिल करने की आखिरी तारीख सोमवार थी। ऋतुराज बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट ने चुनाव आयोग के सामने अपना जवाब दाखिल करने के लिए सुप्रीम कोर्ट से दो हफ्ते का और समय मांगा था। ममता बनर्जी गुट ने इस मांग का विरोध किया। पिछली सुनवाई के दौरान, सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया था कि वह तीन महीने के भीतर इस मामले पर फैसला ले। इसे भी पढ़ें: Suvendu Adhikari ने CJP पर साधा निशाना, लोगों से PM Modi के साथ खड़े होने की अपील कीपश्चिम बंगाल उपचुनाव के दौरान, चुनाव आयोग ने दोनों गुटों को अस्थायी नाम और चुनाव चिह्न आवंटित किए थे। ममता बनर्जी गुट को "ममता टीएमसी" नाम और फुटबॉल खिलाड़ी का चुनाव चिह्न दिया गया, जबकि बागी गुट को "डेमोक्रेटिक टीएमसी" नाम और लिफाफे का चुनाव चिह्न मिला। इससे पहले सितंबर में, सुप्रीम कोर्ट ने उम्मीद जताई थी कि पश्चिम बंगाल विधानसभा के अध्यक्ष, संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत दल-बदल के आरोपों को लेकर ऋतुब्रत बनर्जी गुट के 10 विधायकों के खिलाफ दायर अयोग्यता याचिकाओं पर उचित समय के भीतर फैसला लेंगे। भारत के मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) की पीठ - जिसमें न्यायमूर्ति सूर्य कांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना शामिल थे। तृणमूल कांग्रेस के विधायक सोहनदेब चट्टोपाध्याय (ममता बनर्जी गुट) द्वारा दायर एक रिट याचिका का निपटारा किया। इस याचिका में अयोग्यता याचिकाओं पर जल्द फैसला लेने की मांग की गई थी। पीठ ने 'केशम मेघचंद्र सिंह बनाम मणिपुर विधानसभा अध्यक्ष' मामले में दिए गए अपने फैसले का हवाला दिया। उस फैसले में कहा गया था कि अयोग्यता याचिकाओं पर आमतौर पर एक उचित समय-सीमा के भीतर फैसला लिया जाना चाहिए, जिसे लगभग तीन महीने माना गया है। इसे भी पढ़ें: 84 साल के हैं खड़गे, PM Modi पर बयान का TMC सांसद Saugata Roy ने किया बचावइस मामले में अयोग्यता याचिकाएं 8 जुलाई को दायर की गई थीं। चट्टोपाध्याय की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि अयोग्यता याचिकाओं पर फैसला लेने में देरी करने का एक पैटर्न बन गया है, जिसमें बाद में अलग हुए गुट खुद को असली राजनीतिक दल होने का दावा करते हैं। इन याचिकाओं में अरूप रॉय, रीताब्रत बनर्जी, फिरहाद हकीम, संदीपन साहा, सेउली साहा, अखरुज्जमां, सबीना यास्मीन, रथिन घोष, बिप्लब मित्रा और जावेद अहमद खान को अयोग्य घोषित करने की मांग की गई है।
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