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    उन्नाव में हजरत मौला अली की शहादत पर मातमी जुलूस:अकीदतमंदों ने अलम और ताबूत के साथ खिराज-ए-अकीदत पेश की

    12 hours ago

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    उन्नाव शहर में उर्दू महीने रमज़ान की 21वीं तारीख को हजरत मौला अली की शहादत की याद में एक मातमी जुलूस निकाला गया। इस अवसर पर अकीदतमंदों ने अलम और ताबूत के साथ गमगीन माहौल में जुलूस निकालकर हजरत अली को खिराज-ए-अकीदत पेश की। जुलूस के दौरान पूरे रास्ते मातम और नौहाख्वानी की सदा गूंजती रही। यह जुलूस शहर के ज़ेर खिड़की इलाके से शुरू हुआ, जहां बड़ी संख्या में शिया समुदाय के लोग एकत्रित हुए। जुलूस में शामिल अकीदतमंद काले कपड़े पहनकर “या अली” और “या हुसैन” के नारों के साथ मातम करते हुए आगे बढ़े। लोगों ने श्रद्धापूर्वक अलम और ताबूत उठाकर मौला अली की शहादत को याद करते हुए गम का इजहार किया। मातमी जुलूस शहर के प्रमुख मार्गों से होकर गुजरा। यह ज़ेर खिड़की से निकलकर पुरानी बाजार, चौधरना और रामनगर होते हुए तालिब सराय स्थित कर्बला पहुंचा, जहां इसका समापन हुआ। रास्ते में जगह-जगह लोगों ने सबील लगाकर जुलूस में शामिल लोगों को पानी और शरबत वितरित किया। कई स्थानों पर श्रद्धालुओं ने फूल बरसाकर जुलूस का स्वागत भी किया। धार्मिक कार्यक्रम के दौरान मौलाना और उलेमाओं ने मौला अली के जीवन, उनकी बहादुरी, इंसाफ और मानवता के संदेश पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि हजरत अली का जीवन सत्य, न्याय और भाईचारे की मिसाल है, जिससे समाज को इंसानियत और सद्भाव का संदेश मिलता है। जुलूस को शांतिपूर्ण ढंग से सम्पन्न कराने के लिए प्रशासन की ओर से सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। पुलिस बल जुलूस के साथ-साथ तैनात रहा और संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था की गई। यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए भी पुलिसकर्मियों की ड्यूटी लगाई गई थी। पूरे कार्यक्रम के दौरान माहौल शांतिपूर्ण और अनुशासित रहा। अकीदतमंदों ने पूरी श्रद्धा और अनुशासन के साथ मातमी जुलूस में भाग लिया। कर्बला पहुंचकर विशेष दुआ और मजलिस का आयोजन किया गया, जिसके बाद कार्यक्रम का समापन हुआ। मौला अली की शहादत की याद में निकाले गए इस जुलूस ने शहर में धार्मिक आस्था और आपसी भाईचारे का संदेश दिया।
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