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    US-Israel ने कर दिया Kharg Island पर हमला, राष्ट्रपति Pezeshkian बोले- हर ईरानी जान देने को तैयार, तुर्की में Israeli Consulate के बाहर फायरिंग

    2 hours from now

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    पश्चिम एशिया में युद्ध का उबाल अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है और हालात इतने विस्फोटक हो चुके हैं कि किसी भी क्षण यह टकराव पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले सकता है। अमेरिका और इजराइल की संयुक्त सैन्य कार्रवाइयों ने ईरान के भीतर गहराई तक वार करते हुए खार्ग द्वीप, अहम पुलों और सामरिक ठिकानों को निशाना बनाया है। यह हमला सीधा संदेश है कि अब संघर्ष पीछे हटने वाला नहीं बल्कि और भयानक होने जा रहा है।इस बीच, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने जिस तरह खुलकर कहा है कि एक करोड़ चालीस लाख से अधिक लोग देश के लिए अपनी जान देने को तैयार हैं, उसने इस संघर्ष को जनयुद्ध का रूप दे दिया है। खुद राष्ट्रपति ने भी अपनी जान देने की बात कहकर यह साफ कर दिया है कि ईरान किसी भी कीमत पर झुकने को तैयार नहीं है।इसे भी पढ़ें: प्रदर्शनकारियों को हथियार! Trump के दावे पर भड़का Iran, UN Security Council से बोला- एक्शन लें।उधर, इजराइली सेना ने ईरान के नागरिकों के लिए आपात चेतावनी जारी करते हुए रेल सेवाओं से दूर रहने को कहा है। यह चेतावनी ऐसे समय आई है जब ईरान के कई हिस्सों में रेल सेवाएं ठप हो चुकी हैं और मशहद जैसे शहरों में पूरी तरह रोक लगा दी गई है। साफ है कि अब बुनियादी ढांचे को निशाना बनाया जा रहा है ताकि देश की आंतरिक व्यवस्था को पंगु किया जा सके।इसके अलावा, ईरान को सबसे बड़ा झटका तब लगा जब इजराइल ने उसके एक पेट्रो रसायन संयंत्र पर हमला किया। आरोप है कि यहां नाइट्रिक अम्ल का उत्पादन हो रहा था जो विस्फोटक और बैलिस्टिक मिसाइलों के लिए बेहद अहम माना जाता है।स्थिति और भयावह तब हो गई जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सीधी धमकी देते हुए कहा कि ईरान को एक रात में खत्म किया जा सकता है। उन्होंने पुलों और बिजली संयंत्रों को नष्ट करने की योजना दोहराते हुए यह संकेत दिया कि आने वाले दिन विनाशकारी हो सकते हैं।हम आपको बता दें कि इस संघर्ष को रोकने की कोशिशें भी नाकाम हो चुकी हैं। पैंतालीस दिन के युद्ध विराम प्रस्ताव को ईरान ने ठुकरा दिया है और साफ कहा है कि वह केवल स्थायी समाधान चाहता है। इस फैसले ने युद्ध को और तेज कर दिया है और अब कोई भी पक्ष पीछे हटने को तैयार नहीं दिख रहा।जमीनी हालात भी बेहद खतरनाक हैं। अमेरिका और इजराइल के हमलों में दर्जनों लोगों की जान जा चुकी है जबकि ईरान लगातार मिसाइल और ड्रोन हमलों से जवाब दे रहा है। नहरिया जैसे इलाकों में ईरानी हमलों के वीडियो सामने आ रहे हैं जो इस बात का सबूत हैं कि जवाबी कार्रवाई भी उतनी ही तीखी है।ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड ने तो सीधे तौर पर चेतावनी दे दी है कि अब संयम खत्म हो चुका है। उन्होंने कहा है कि यदि अमेरिका ने लाल रेखा पार की तो जवाब केवल क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि पूरी दुनिया को प्रभावित करेगा। साथ ही तेल और गैस आपूर्ति को सालों तक बाधित करने की धमकी भी दी गई है, जो वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा झटका साबित हो सकती है।इस बीच, कूम शहर के पास एक अहम पुल पर हमला किया गया है जिससे परिवहन व्यवस्था पर सीधा असर पड़ा है। वहीं किष द्वीप के पास एक कंटेनर जहाज पर भी हमला हुआ है, जो यह दिखाता है कि अब समुद्री मार्ग भी सुरक्षित नहीं रहे।साथ ही तनाव केवल ईरान और इस्राइल तक सीमित नहीं है। तुर्किये के इस्तांबुल में इजराइल दूतावास के बाहर गोलीबारी की घटना ने यह संकेत दे दिया है कि यह संघर्ष अब कई देशों में फैल सकता है। इस घटना में हमलावर मारे गए और पुलिसकर्मी घायल हुए, जिससे सुरक्षा चिंताएं और बढ़ गई हैं।लेबनान में भी इजराइल सेना ने अपनी तैनाती मजबूत कर दी है और हिजबुल्लाह के साथ संघर्ष जारी है। हालांकि सेना ने अभी बीस किलोमीटर से अधिक आगे बढ़ने का संकेत नहीं दिया है, लेकिन स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है।उधर, ईरान ने कूटनीतिक मोर्चे पर भी दबाव बनाना शुरू कर दिया है। कुवैत में उसके राजदूत ने खाड़ी देशों से अपील की है कि वह इस त्रासदी को रोकने के लिए आगे आएं। साथ ही होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क लगाने की मांग भी सामने आई है, जो वैश्विक व्यापार के लिए बड़ा झटका हो सकता है।सबसे चौंकाने वाली घटना तब हुई जब ईरान ने दावा किया कि उसने क़ेश्म द्वीप के ऊपर एक अमेरिकी ड्रोन को मार गिराया है। यह घटना इस बात का संकेत है कि अब संघर्ष आसमान में भी तेज हो चुका है। साथ ही ईरान के अलबोर्ज प्रांत में हुए हवाई हमले में अठारह लोगों की मौत ने इस युद्ध की क्रूरता को उजागर कर दिया है। आम नागरिक अब सीधे इस संघर्ष की कीमत चुका रहे हैं।बहरहाल, यह युद्ध अब एक ऐसा विस्फोटक संकट बन चुका है जिसमें हर दिन नई आग भड़क रही है। दुनिया की नजरें अब होर्मुज जलडमरूमध्य पर टिकी हैं, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति गुजरती है। यदि यह रास्ता बंद हुआ तो असर केवल इस क्षेत्र तक नहीं बल्कि पूरी दुनिया पर पड़ेगा। अब सवाल यह है कि यह युद्ध और कितना भयानक रूप लेगा।
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