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    Uttarakhand: धामी सरकार का मजदूरों को बड़ा तोहफा, DBT से खातों में सीधे भेजे 93 करोड़ रुपये

    3 hours ago

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    उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य के गरीब और मजदूर परिवारों को आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा देने के लिए एक बहुत बड़ा फैसला लिया है। इसे राज्य के इतिहास में मजदूरों की भलाई के लिए एक बड़ा आर्थिक सहारा माना जा रहा है। सरकार ने दलालों और बिचौलियों को पूरी तरह से हटाकर 'डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर' यानी डीबीटी के जरिए सीधे मजदूरों के बैंक खातों में सहायता राशि भेजना शुरू कर दिया है।24 हजार से ज्यादा मजदूरों को सीधा लाभसरकार की अलग-अलग कल्याणकारी योजनाओं के तहत 24 हजार से ज्यादा मजदूरों को सीधे पैसे भेजे गए हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक साल में 93.06 करोड़ रुपये की रकम मजदूरों और उनके परिवारों के बैंक खातों में ट्रांसफर की गई है, जिससे हजारों परिवारों का जीवन आसान हुआ है।4400 से ज्यादा मजदूरों को मिले 11 करोड़ रुपयेमुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की मौजूदगी में हुए एक कार्यक्रम में उत्तराखंड भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड के जरिए 4,400 से अधिक मजदूरों के खातों में करीब 11 करोड़ रुपये सीधे भेजे गए। यह सारा पैसा बिना किसी देरी के एक ही बार में डीबीटी के जरिए ट्रांसफर किया गया। इसे भी पढ़ें: Prabhasakshi NewsRoom: Arunachal Pradesh में Chinese Army ने की घुसपैठ, जनजाति समुदाय के दावों से उठ रहे कई सवालहर जरूरत में मददगार बन रही सरकारयह आर्थिक मदद मजदूरों की रोजमर्रा और खास जरूरतों को देखकर दी गई है। इसमें श्रमिक परिवारों की बेटियों की शादी के लिए पैसा, किसी सदस्य की अचानक मौत होने पर मिलने वाली मदद, महिला मजदूरों के लिए मातृत्व लाभ और बच्चों की पढ़ाई के लिए मिलने वाली स्कॉलरशिप शामिल है। इस मदद से हजारों परिवारों को बिना किसी कागजी चक्कर के सही समय पर राहत मिली है।असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को सहारानिर्माण कार्य में लगे मजदूर अक्सर असंगठित वर्ग में आते हैं। उनकी कमाई बंधी-बंधाई नहीं होती। ऐसे में बीमारी, दुर्घटना, शादी, बच्चों की पढ़ाई या मौत जैसी स्थिति आने पर उनके सामने बड़ा आर्थिक संकट खड़ा हो जाता है। इसी संकट को दूर करने के लिए उत्तराखंड सरकार ने इन कल्याणकारी योजनाओं को और मजबूत किया है।दफ्तरों के चक्करों से मुक्ति, काम की जगह पर ही मिलेंगी सुविधाएंउत्तराखंड के पहाड़ी और दूरदराज के इलाकों को देखते हुए सीएम धामी ने अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि अब मजदूरों को किसी योजना का लाभ लेने या रजिस्ट्रेशन कराने के लिए दूर सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने की जरूरत नहीं है, बल्कि प्रशासन खुद मजदूरों के पास जाएगा।कार्यस्थलों पर लगेंगे विशेष कैंपइसके लिए सरकार निर्माण वाली जगहों के पास ही 'वर्कप्लेस वेलफेयर कैंप' लगाने जा रही है। इन कैंपों के जरिए दूर-दराज के इलाकों में काम करने वाले प्रवासी और स्थानीय मजदूरों को वहीं पर रजिस्ट्रेशन की सुविधा, सरकारी योजनाओं का लाभ, हेल्थ चेकअप और जरूरी सामान दिया जा रहा है। इससे मजदूरों का कीमती समय और आने-जाने का किराया दोनों बच रहा है। इसे भी पढ़ें: Ram Mandir Donation Theft Investigation | जांच में आई तेजी, चंपत राय और अनिल मिश्रा समेत कई दिग्गजों को नोटिस भेज सकती है पुलिस93 करोड़ रुपये से बदल रही है जिंदगीपिछले एक साल में उत्तराखंड सरकार ने श्रम कल्याण के मामले में एक नया रिकॉर्ड बनाया है। सिर्फ एक साल के भीतर धामी सरकार ने अलग-अलग योजनाओं के तहत कुल 93.06 करोड़ रुपये सीधे लाभार्थियों के खातों में डाले हैं। इस बड़ी मदद से राज्य के 24,323 रजिस्टर्ड मजदूरों और उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है। अब उन्हें संकट के समय किसी साहूकार से ऊंचे ब्याज पर कर्ज लेने की जरूरत नहीं पड़ती।पारदर्शिता के लिए डिजिटल सिस्टमयोजनाओं को ठीक से लागू करने के लिए तकनीक का सहारा लिया जा रहा है। सही व्यक्ति की पहचान करने और पैसे भेजने के लिए डिजिटल सिस्टम का इस्तेमाल हो रहा है। इससे यह पक्का होता है कि सरकारी मदद केवल असली और हकदार मजदूरों तक ही पहुंचे। जानकारों का मानना है कि इस डिजिटल निगरानी से धांधली रुकी है और सरकारी पैसे का सही इस्तेमाल हो रहा है।मुख्य आंकड़े24,323 मजदूरों को अलग-अलग योजनाओं का फायदा मिला। कुल 93.06 करोड़ रुपये की आर्थिक मदद बांटी गई। हाल ही में 4,400 से ज्यादा मजदूरों को करीब 11 करोड़ रुपये दिए गए। पूरी सहायता राशि सीधे बैंक खातों में ट्रांसफर की गई।किन-किन कामों के लिए मिल रही है मदद?श्रमिक परिवारों को संकट और जरूरत के समय सहारा देने के लिए ये योजनाएं चलाई जा रही हैं, बेटी की शादी के लिए सहायता राशि, परिवार में किसी की मृत्यु होने पर आर्थिक मदद, महिला श्रमिकों के लिए मातृत्व लाभ और बच्चों की अच्छी शिक्षा के लिए पढ़ाई का खर्च। इनका मुख्य उद्देश्य यह है कि पैसों की कमी के कारण किसी गरीब परिवार का भविष्य खराब न हो।डिजिटल जांच से रुकेगी धांधली, हकदार को मिलेगा हकधामी सरकार ने योजनाओं को ईमानदारी से लागू करने पर पूरा जोर दिया है। मुख्यमंत्री ने साफ कहा है कि सरकारी पैसे का एक-एक रुपया सीधे असली हकदार मजदूर को ही मिलना चाहिए। इसके लिए श्रम विभाग में आधुनिक तकनीक और सख्त डिजिटल वेरिफिकेशन सिस्टम लागू किया गया है। नियमों को इस तरह सुधारा गया है ताकि कोई भी फर्जीवाड़ा न कर सके। साथ ही जिलों में जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं ताकि कोई भी गरीब मजदूर जानकारी न होने की वजह से पीछे न छूट जाए।
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