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    वाराणसी की नूर फातिमा ने बनवाया रुद्रेश्वर महादेव का मंदिर:नमाज के साथ करती हैं पूजा, बोली - पति की मौत के बाद टूट गयी थी, भोलेनाथ ने संभाला

    1 hour ago

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    ‘मै साल 1993 से वाराणसी के दीवानी न्यायलय में वकील हूं। जब मै अपने पति के साथ इस कालोनी में रहने आयी तो यहां लगातार अकस्मात मौतें हो रही थीं। लोग परेशान थे। इसी बीच मुझे कई बड़े-बड़े मंदिरों के सपने आने लगे। इसपर कालोनी के लोगों ने कहा की आप महामृत्युंजय मंदिर या बाबा विश्वनाथ का दर्शन कर लीजिये पर मैंने कहा मै मुस्लिम हूं क्यों जाऊं। इधर मौत का सिलसिला जारी रहा। मेरे पति मुराद अली बीएलडब्ल्यू में इंजिनियर थे। एक दिन वो भी घर से निकले और उनका भी एक्सीडेंट हुआ और वो मर गए। उसके बाद मै कुछ दिन डिप्रेशन में रही। फिर यह मंदिर बनवाया। जहां रोजाना जल चढाने आती हूं। पति की मौत के बाद भगवान शंकर ने ही मुझे संभाला है।’ ये कहना है वाराणसी की रहने वाली सीनियर एडवोकेट नूर फातिमा का; नूर फातिमा का मकान बीएलडब्ल्यू के पास स्थित गणेशपुर कालोनी में है। नूर फातिमा ने साल 2004 में यहां एक शिव मंदिर बनवाया है। इसपर पूरे कालोनी के लोग पूजा-पाठ के लिए यहां पहुंचते हैं। खुद नूर फातिमा यहां सुबह और शाम में रोजाना भगवान शिव को जल चढाने आती हैं। साथ ही वह सफेद माला भी चढाती हैं। जो उन्हें सपने में दिखाई दी थी। नूर फातिमा वाराणसी की सीनियर एडवोकेट्स में से एक हैं। मुसलमान होते हुए भी उन्होंने यह मंदिर क्यों बनवाया? इसमें उनकी कितनी आस्था है और आस-पास के लोगों का कैसा सहयोग है। इन सबपर दैनिक भास्कर ने वाराणसी के गणेशपुर कालोनी में पहुंचकर रुद्रेश्वर महादेव मंदिर, नूर फातिमा और गंगा जमुनी तहजीब की इस जिंदा मिसाल को करीब से जाना। पढ़िए रिपोर्ट… रुद्रेश्वर महादेव मंदिर की देखिए तस्वीरें… सबसे पहले जानिए मंदिर बनवाने का सच ?… सपने में अक्सर मंदिर दिखाई देते थे नूर फातिमा ने बताया - साल 2002 की बात होगी। हम लोग नए-नए इस कालोनी में आये थे। यहां के लोग काफी मिलनसार हैं। यहां आने के बाद मुझे अक्सर ख्वाब में बड़े-बड़े शिवालय दिखाई देने लगे। जहां मै जाती और शिवलिंग पर सफेद माला चढ़ाती। ऐसे ही कई महीनों तक चला तो मैंने अपने पड़ोस के लोगों को इस बात की जानकारी दी। उन्होंने पहले कहा कि कोई बात नहीं होता है। लेकिन यह सपना आना बंद नहीं हुआ। बाबा विश्वनाथ या महामृत्युंजय का कर लीजिए दर्शन नूर फातिमा ने बताया - इसके बाद जब मैंने चर्चा की तो लोगों ने कहा आप हमारे साथ महामृत्युंजय मंदिर चलिए। वहीं हम लोग दर्शन को जाते हैं क्योंकि बाबा विश्वनाथ के दरबार में बहुत भीड़ होती है। इसपर मैंने नाराज होते हुए कहा कि मै क्यों मंदिर जाऊं मै तो मुसलमान हूं। मै पांच वक़्त की नमाजी हूं तो मंदिर में दर्शन को क्यों जाना। अकस्मात मौते बढ़ गयीं तो होने लगी चिंता नूर फातिमा ने बताया - इसी दौरान हमारे कालोनी में आकस्मिक मौत अचानक से बढ़ गयी। बुड्ढा, जवान और बच्चे अचानक से मरने लगे। कब किसकी मौत हो जाएगी ये पता नहीं था। रोजाना शाम होने के बाद सभी लोग एक जगह इकठ्ठा होते और इस बात पर चर्चा होती और लोग अपनों को याद करके रोने लगते। ऐसे ही दिन बीतता गया और मुझे सपने भी आते रहे। पति की भी हुई आकस्मिक मौत नूर ने बताया - 10 अप्रेल 2004 की मनहूस सुबह को मेरे पति मुराद अली घर से कुछ काम से निकले और 20 मिनट बाद मुझे फोन आया कि उनका एक्सीडेंट हो गया है। हम लोग वहां पहुंचे तो उन्हें अस्पताल ले जाया गया था। जहां उनकी मौत हो गई। उनके जाने के बाद मै डिप्रेशन में चली गई थी क्योंकि मेरे पास सिर्फ दो बेटियां ही थीं। इस डिप्रेशन में भी मुझे मंदिर के सपने आते रहे। कह सकती हूं की बाबा भोलेनाथ ने हमें पति की मौत के बाद संभाला। कालोनी के लोगों से बातचीत कर बनवाया मंदिर नूर फातिमा ने बताया - इसके बाद कालोनी के लोगों से इस विषय पर बात की और मंदिर का निर्माण कार्य 27 नंवबर 2004 में पहली ईंट स्वयं रखकर शुरू किया। यह मंदिर तीन महीने में बनकर तैयार हुआ। मंदिर के बनने के बाद अब रोजाना यहां दर्शन को आती हूं। साथ ही पूरा मोहल्ला यहां पूजा करने आता है। तब से आज तक रोजाना सुबह शाम यहां बाबा भोलेनाथ को जल चढाने आती हूं। नमाज और रमजान के रोजों के साथ दर्शन रोजाना नूर ने बताया - मैंने इस्लाम धर्म छोड़ा नहीं है। मै पांचो वक़्त की नमाजी हूं और रमजान में सारे रोजे भी रखती हूं। लेकिन मेरा जो शिव आराधना का टाइम है वह बदलता नहीं। मै रोजाना सुबह और शाम यहां मंदिर में जल और माला चढाने के लिए आती हूं। अब जानिए मोहल्ले के लोगों ने एडवोकट नूर फातिमा और मंदिर के बारे में क्या बताया ?… हमारी ही तरह दर्शन-पूजन करती हैं नूर गणेशपुर कालोनी की रहने वाली सुमन राय ने बताया - ये रुद्रेश्वर महादेव का मंदिर हैं। जिसे एडवोकेट नूर फातिमा ने बनवाया है। वो रोजाना हम हिंदू भाइयों के तरह ही दर्शन पूजन करने आती हैं। कभी ऐसा नहीं लगा कि नूर फातिमा हम लोगों से अलग हैं आया मुसलमान हैं। हमारे मोहल्ले में यह मंदिर और नूर फातिमा यह सन्देश दे रहीं हैं कि हम सब एक हैं। ये अलगाव सिर्फ राजनीतिक है। हम सब एक हैं और सदा ही एक रहेंगे। नेता चाहते हैं कि हम लोग आपस में लड़ते रहें राजेंद्र सिंह भी गणेशपुर कालोनी में रहते हैं। उन्होंने बताया कि वो पिछले 20 साल से यहां रह रहे हैं। लोगों ने यहां सोचा था कि शिव मंदिर बनवाया जाए पर बनवा नहीं सके। नूर फातिमा जी को सपने में शिव मंदिर आया। उन्होंने हमसे बता की और फिर चंदा लगाकर हम लोगों ने यह मंदिर बनवाया जिसमें नूर का योगदान सबसे अधिक है। देश के माहौल पर उन्होंने कहा - नेतागिरी वाली बात है ये सब और वो अपना उल्लू सीधा करने के लिए चाहते हैं कि हम लोग आपस में लड़ते रहें हर समय। अब जानिए कौन है एडवोकट नूर फातिमा ? बीएलडब्ल्यू में इंजीनियर मुराद से हुई थी शादी एडवोकट नूर फातिमा फैजाबाद की रहने वाली हैं। साल 1986 में उनकी शादी वाराणसी के बीएलडब्ल्यू जो उस समय डीएलडब्ल्यू था में कार्यरत इंजिनियर मुराद अली से हुई थी। शादी के बाद वो जल्द ही वाराणसी आ गयीं। यहां रहते समय ही उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से वकालत की डिग्री ली। 1993 से हैं दीवानी की वकील नूर फातिमा ने बताया - साल 1993 से मैंने वाराणसी की कचहरी में जाना शुरू कर दिया था। दीवानी के कई केस मैंने लड़े और आज एक सफल अधिवक्ता हूं। पति ने रिटायर होने के पहले बीएलडब्ल्यू के कंदवा गेट के बाद स्थित गणेशपुर कालोनी के पास एक जमीन ली थी। लखनऊ वापस लौटना था पर उस समय भुज का भूकंप आया था तो मैंने ही कहा कि यहां मकान बनवा लीजिये यहीं रहेंगे। इसके बाद यहां मकान बनवा लिया। उनकी दो बेटियां हैं। एक अमेरिका में और एक इलाहबाद हाईकोर्ट में अधिवक्ता है।
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