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    वाराणसी में 5MM बारिश हुई, पेड़ उखड़ कर गिरे:60km प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चली हवा, BHU ट्रामा सेंटर के गेट पर जलजमाव

    12 hours ago

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    पूर्वांचल समेत वाराणसी में पश्चिमी विक्षोभ का असर गुरुवार देर रात से ही दिखाई देने लगा। शुक्रवार सुबह करीब 4 बजे से मौसम ने अचानक करवट ली और 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने लगीं। इसके बाद शुरू हुई तेज बारिश ने शहर से लेकर गांव तक जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया। कई स्थानों पर पेड़ गिर गए, बिजली आपूर्ति बाधित हो गई और सड़कों पर जलजमाव की स्थिति बन गई। मौसम विभाग ने अगले 36 घंटे को बेहद चुनौतीपूर्ण बताते हुए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। मौसम की 3 तस्वीरें देखिए… गांव-गांव पहुंची राजस्व टीम, प्रशासन अलर्ट मौसम विभाग की चेतावनी के बाद जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गया है। प्रशासन ने गांव-गांव राजस्व टीमों को भेजकर लोगों को जागरूक करने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी है। अधिकारियों ने नागरिकों से अपील की है कि वे अनावश्यक रूप से घरों से बाहर न निकलें। मौसम विभाग की चेतावनियों पर विशेष ध्यान दें। प्रशासन की ओर से यह भी कहा गया है कि बिजली के टूटे तारों, कमजोर पेड़ों और जलभराव वाले इलाकों से दूर रहें। आपात स्थिति में तुरंत संबंधित विभागों को सूचना देने की अपील की गई है। बंगाल की खाड़ी और अरब सागर से आ रही नम हवाओं का असर मौसम विभाग के अनुसार बंगाल की खाड़ी और अरब सागर से लगातार नम हवाएं उत्तर भारत की ओर बढ़ रही हैं, जिसके कारण मौसम तेजी से बदल रहा है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश और तराई क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है। विभाग का अनुमान है कि कुछ इलाकों में हवाओं की रफ्तार 80 से 100 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है।विशेषज्ञों का कहना है कि मई महीने में इस प्रकार का सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ सामान्य से अधिक प्रभावशाली माना जा रहा है, जिसका असर पूर्वी उत्तर प्रदेश में भी व्यापक रूप से दिखाई दे रहा है। बीएचयू ट्रॉमा सेंटर के बाहर जलजमाव, मरीजों को परेशानी बारिश के बाद शहर की जलनिकासी व्यवस्था की पोल भी खुल गई। बीएचयू ट्रॉमा सेंटर के मुख्य गेट पर भारी जलजमाव हो गया, जिससे मरीजों और उनके परिजनों को अस्पताल आने-जाने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। स्थिति को लेकर समाजवादी पार्टी के नेताओं ने नगर निगम के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। नेताओं ने आरोप लगाया कि नगर निगम बड़े-बड़े दावे करता है, लेकिन हल्की बारिश में ही अस्पताल जैसे महत्वपूर्ण स्थान के बाहर पानी भर जाना व्यवस्था की विफलता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि यदि अभी यह स्थिति है तो मानसून में शहर की हालत और खराब हो सकती है। पेड़ गिरने से बिजली व्यवस्था चरमराई तेज हवाओं के कारण शहर और ग्रामीण इलाकों में दर्जनों पेड़ धराशायी हो गए। कई जगह पेड़ बिजली के तारों पर गिर पड़े, जिससे बिजली व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो गई। सुबह से ही कई इलाकों में बिजली आपूर्ति ठप रही। बिजली विभाग के अधिकारियों के अनुसार कहीं फाल्ट आने तो कहीं तार टूटने की सूचना मिली है। विभाग की टीमें लगातार मरम्मत कार्य में जुटी हुई हैं ताकि जल्द से जल्द बिजली आपूर्ति बहाल की जा सके। छावनी स्थित लाल चर्च के पास तेज आंधी के दौरान एक विशाल पेड़ उखड़ गया। पेड़ की चपेट में वहां खड़ा एक टेंपो क्षतिग्रस्त हो गया। चर्च की दीवार को भी नुकसान पहुंचा। मिंट हाउस स्टेशन मार्ग पर भी नीम का पेड़ गिर गया। सूचना मिलते ही छावनी प्रशासन मौके पर पहुंचा और पेड़ हटवाकर बाधित मार्ग को बहाल कराया। किसानों के लिए राहत बनी मई की बारिश जहां एक ओर आंधी और बारिश ने शहरी व्यवस्था को प्रभावित किया, वहीं किसानों के लिए यह बारिश राहत लेकर आई है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि मई महीने की यह बारिश गर्मी के मौसम में उगाई जाने वाली फसलों के लिए किसी अमृत से कम नहीं है। सब्जियों को मिला फायदा लौकी, तोरई, कद्दू, भिंडी, करेला, खीरा और ककड़ी जैसी सब्जियों की फसलों को इस बारिश से काफी लाभ मिलेगा। खेतों में नमी बढ़ने से उत्पादन बेहतर होने की संभावना है।तरबूज और खरबूजा की फसल को भी बारिश से फायदा होगा। हालांकि विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अत्यधिक तेज आंधी या ओलावृष्टि होने पर फसल को नुकसान पहुंच सकता है, लेकिन सामान्य और मध्यम बारिश लाभकारी साबित होती है। आम और लीची उत्पादकों के चेहरे खिले कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार मई की बारिश आम की फसल के लिए सबसे अधिक लाभकारी मानी जाती है। इससे पेड़ों की प्राकृतिक सिंचाई हो जाती है, गर्मी से फल गिरने की समस्या कम होती है और आम का आकार तथा मिठास बेहतर होती है। वहीं लीची की फसल भी इस समय पकने के अंतिम चरण में है। हल्की बारिश से लीची के फलों में रस की मात्रा बढ़ती है और फल फटने की संभावना कम हो जाती है।
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