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    विराट और अनुष्का संत प्रेमानंद से मिलने पहुंचे:अक्षय तृतीया पर्व पर सत्संग में शामिल हुए; दोनों की उनसे यह छठवीं मुलाकात

    10 hours ago

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    क्रिकेटर विराट कोहली और उनकी पत्नी अभिनेत्री अनुष्का शर्मा ने सोमवार को अक्षय तृतीया पर अपने गुरु संत प्रेमानंद महाराज के दर्शन किए और उनका आशीर्वाद लिया। दोनों ने प्रेमानंद महाराज का सत्संग भी सुना। यह उनकी छठवीं मुलाकात थी। IPL 2026 के बिजी शेड्यूल के बीच विराट और अनुष्का रविवार देर शाम ही वृंदावन पहुंच गए थे। दोनों होटल रेडिसन में ठहरे थे। सोमवार सुबह करीब 6 बजे संत प्रेमानंद महाराज के आश्रम केलीकुंज पहुंचे। यहां वे करीब ढाई घंटे रहे। आश्रम से निकलकर वापस होटल पहुंचे। सुबह करीब 10 बजे विराट और अनुष्का होटल से बाहर आए और संत प्रेमानंद महाराज के गुरु संत हित गौरांगी शरण महाराज के वराह घाट स्थित आश्रम पहुंचे। यहां गुरु के दर्शन कर वापस होटल गए और करीब 11 बजे रवाना हो गए। विराट-अनुष्का को प्रेमानंद ने क्या-क्या सत्संग सुनाया आश्रम में विराट और अनुष्का बेहद साधारण वेशभूषा और सादगी भरे अंदाज में नजर आए। किसी वीआईपी तामझाम के बिना दोनों ने आम श्रद्धालुओं की तरह जमीन पर बैठकर काफी देर तक महाराज जी के सत्संग को सुना। दोनों शांत रहे। कोई सवाल भी नहीं पूछा। सत्संग में आए लोगों ने संत प्रेमानंद से सवाल पूछे। जिसका जवाब विराट-अनुष्का सुनते दिखे। इस दौरान प्रेमानंद जी महाराज ने निर्मल मन और भक्ति के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया- शुद्ध अंतःकरण ही ईश्वर प्राप्ति का एकमात्र मार्ग है। 3 सवाल और संत प्रेमानंद के जवाब जानिए… सवाल- गुरुदेव भगवान ने मांग की है, ‘निर्मल मन जन सो मोहि पावा, मोहि कपट छल छिद्र न भावा’। गुरुदेव क्या केवल निर्मल मन हो जाने से भगवान की प्राप्ति हो जाएगी और निर्मल मन कैसे होता है? प्रेमानंद महाराज का जवाब- निर्मल मन होने पर भगवान की प्राप्ति नहीं, निर्मल मन ही भगवान हो जाएगा। इन्द्रियाणां मनश्चास्मि, इंद्रियों में मैं मन हूं। भगवान श्री कृष्ण कहते हैं, जब दर्पण मलीन होता है तो हमें उसमें कुछ दिखाई नहीं देता। लेकिन जैसे ही दर्पण साफ हुआ तो अपना प्रतिबिंब दिखाई देने लगता है। ऐसे जहां निर्मल मन हुआ तो उसी निर्मल मन में भगवान विराजमान हैं। योग, कर्म योग, भक्ति योग, अष्टांग योग ये सब मन को निर्मल करने का साधन है। ऋषि मुनियों से, साधु महात्माओं से मिलो। उनकी शरण में जाओ। उनके बताए हुए साधन को करो। आपका मन धीरे-धीरे निर्मल होने लगेगा। सवाल- महराज जी, ‘हूं तो नीच सवन नीचनि में, अब तुम ही आन ढरो री, कब हूं तो श्री लाडली ऐसी कृपा करो री’ यह पंक्ति हमें भीतर तक विचलित कर देती है। प्रेमानंद महाराज का जवाब- जब भक्ति का रंग चढ़ता है, तो अहंकार नष्ट हो जाता है। हर जीव में महानता दिखाई देने लगती है, जबकि अपने अंदर केवल नीचता दिखाई देती है। सूरदास जी महाराज जैसे महान संतों का उदाहरण भी यही दर्शाता है कि जब वे भगवान के समक्ष पद गाते हैं। स्वयं भगवान भी भावविभोर होकर “वाह-वाह, और सुनाओ” कहते हैं। उनकी रचनाओं में भक्ति का ऐसा रस है कि भगवान भी उसकी अनुभूति करते हैं। भक्त की विशेषता यही है कि वह स्वयं को सबसे तुच्छ मानता है और हर जीव में भगवान का स्वरूप देखता है। यह भक्ति का वास्तविक रंग है। यदि किसी में अपने गुणों का अहंकार और दूसरों में दोष देखने की प्रवृत्ति हो, तो वह सांसारिक व्यक्ति है, भक्त नहीं। सवाल- हमारा मन निर्मल हो रहा है। महाराज जी, इसकी कोई पहचान है? प्रेमानंद महाराज का जवाब- हां, जब विषयों के प्रति प्रियता धीरे-धीरे समाप्त होने लगे, तो समझ लेना चाहिए कि यह मन के निर्मल होने का संकेत हैं। जब सब विषय-विलास से वैराग्य उत्पन्न हो जाए, तभी जीव वास्तव में जागृत होता है। जब हम पर सत्संग का प्रभाव पड़ने लगे और विषयों की प्रियता अच्छी न लगे, मान-सम्मान अच्छा न लगे, भीड़ और जय-जयकार आकर्षित न करें, तब यह समझना चाहिए कि मन में परिवर्तन हो रहा है। ऐसी अवस्था में व्यक्ति एकांत में रहना पसंद करने लगता है। उसे किसी के जानने या पहचानने की इच्छा नहीं रहती। वह केवल “राधा-राधा” का जप करना चाहता है और प्रभु के लिए भाव-विभोर होकर रोने लगता है। जब ऐसा जीवन जीने की इच्छा उत्पन्न होने लगे, तो समझना चाहिए कि यह भगवान और गुरु की विशेष कृपा है। यह आश्चर्य की बात है कि जिन भोग-विलासों के लिए लोग परेशान रहते हैं, उनके प्रति स्वयं ही त्याग का भाव उत्पन्न होने लगता है, और व्यक्ति यह निश्चय कर लेता है कि वह अब इन भोगों का सेवन नहीं करेगा। यह सब साधु-संगति का फल है और भगवान की असीम कृपा का परिणाम है। जब विषय-विलास से वैराग्य उत्पन्न होने लगे, तो समझ लेना चाहिए कि जीव सचेत हो गया है। ऐसे व्यक्ति के पास सभी भोग उपलब्ध होने के बावजूद भी वह उनमें रुचि नहीं लेता। उसका मन निरंतर एकांत की ओर आकर्षित होने लगता है। यही संतों की कृपा है, यही गुरु-कृपा है और यही अध्यात्म का वास्तविक रंग है, जो मनुष्य को संसारिक आसक्तियों से हटाकर भगवान की ओर प्रवृत्त करता है। मैच ब्रेक में आध्यात्मिक यात्रा आईपीएल 2026 में रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर के लिए खेल रहे विराट कोहली ने अपने व्यस्त शेड्यूल से समय निकालकर यह दौरा किया। हाल ही में उन्होंने दिल्ली कैपिटल्स के खिलाफ 13 गेंदों में 19 रन बनाए थे। आगामी मैच गुजरात टाइटंस के खिलाफ होने से पहले मिले ब्रेक का उन्होंने आध्यात्मिक यात्रा के लिए उपयोग किया। जैसे ही विराट कोहली के वृंदावन पहुंचने की खबर शहर में फैली, उनके प्रशंसकों की भारी भीड़ आश्रम के बाहर जमा हो गई। अपने पसंदीदा खिलाड़ी और अभिनेत्री की एक झलक पाने के लिए लोग घंटों सड़कों पर इंतजार करते दिखे। छठवीं बार प्रेमानंद से मिलने पहुंचे विराट और अनुष्का विराट और अनुष्का ने अब तक 6 बार संत प्रेमानंद से मुलाकात की है। पहली बार 4 जनवरी, 2023 को दोनों संत प्रेमानंद से मिले थे। बीते 16 महीने में दोनों की यह 5वीं मुलाकात है। 16 फरवरी को बेटे अकाय के जन्मदिन के बाद भी दोनों यहां आए थे। साल 2025 में भी यह कपल तीन बार आश्रम पहुंचा था, जनवरी में बच्चों के साथ, मई में और फिर दिसंबर में। 4 जनवरी, 2023 को पहली बार प्रेमानंदजी से मिलने पहुंचे थे विराट-अनुष्का 4 जनवरी, 2023 को पहली बार प्रेमानंद महाराज से मिलने पहुंचे। दोनों सत्संग में शामिल हुए और महाराज जी का आशीर्वाद लिया। इस दौरान प्रेमानंदजी ने सीख दी कि जीवन में विपरीतता या कष्ट आना ईश्वर की कृपा का संकेत है। ऐसे समय में ईश्वर का नाम जपते रहना चाहिए। जीवन में यश और प्रसिद्धि की भावना को त्यागकर आंतरिक चिंतन में बदलाव लाना चाहिए। ------------------------------------------- विराट कोहली से जुड़ी हुई ये खबर भी पढ़ें- कोहली का इंस्टाग्राम अकाउंट 6 घंटे बंद रहा , सर्च करने पर लिखा आ रहा था- प्रोफाइल उपलब्ध नहीं विराट कोहली का इंस्टाग्राम अकाउंट गुरुवार रात अचानक बंद हो गया था, जो करीब 6 घंटे बाद फिर से दिखाई देने लगा है। इस दौरान सर्च करने पर उनकी प्रोफाइल नहीं दिख रही थी और डायरेक्ट लिंक से भी अकाउंट नहीं खुल रहा था। पढ़ें पूरी खबर
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