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    यूपी में भाजपा के 8 राज्यसभा प्रत्याशियों का ऐलान:सभी नए; राज्यपाल गंगवार की बेटी को उतारा, मोदी के 2 मंत्रियों को टिकट नहीं मिला

    3 hours ago

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    यूपी में भाजपा ने राज्यसभा चुनाव के लिए सोमवार दोपहर 8 उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया। सभी नए उम्मीदवार हैं। इनमें 2 महिलाएं हैं। पीएम मोदी के मंत्रिमंडल में शामिल बीएल वर्मा और हरदीप सिंह पुरी का टिकट काट दिया गया है। माना जा रहा है कि इनकी मोदी मंत्रिमंडल से छुट्‌टी हो सकती है। प्रत्याशियों में 2 ब्राह्मण, 1 ठाकुर, 3 पिछड़े और 2 दलित हैं। पिछड़े वर्ग में एक लोधी, एक कुर्मी और एक पाल समाज से हैं। वहीं, दलित वर्ग में एक खटीक और एक पासी समाज से हैं। सपा के 2 उम्मीदवार प्रोफेसर राम गोपाल यादव और उद्योगपति धनराज परिमल नाथवानी ने 30 सितंबर को नामांकन दाखिल किया है। यदि सपा तीसरे और भाजपा 9वें उम्मीदवार को नहीं उतारती है तो चुनाव में सपा के 2 और भाजपा के 8 उम्मीदवारों का निर्विरोध निर्वाचन तय है। यूपी में राज्यसभा की 31 सीटें हैं। इनमें 10 सीटों पर 16 अक्टूबर को चुनाव होना है। 6 अक्टूबर को नामांकन का आखिरी दिन है। भाजपा से केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी, बीएल वर्मा और नीरज शेखर, सीमा द्विवेदी, बृजलाल, गीता शाक्य, अरुण सिंह और सपा के रामगोपाल यादव, बसपा के रामजी गौतम का कार्यकाल 25 नवंबर को खत्म हो रहा है। डॉ. दिनेश शर्मा अंडमान निकोबार बना दिए गए हैं। उन्होंने इस्तीफा दिया है। भाजा गीता शाक्य, नीरज शेखर और सीमा द्विवेदी को विधानसभा चुनाव लड़ा सकती है। लिस्ट देखिए… सभी 8 प्रत्याशियों को जानिए… 1. धर्मपाल सिंह: कैबिनेट मंत्री और आंवला से विधायक धर्मपाल सिंह बरेली की आंवला विधानसभा सीट से भाजपा विधायक और योगी कैबिनेट में पशुधन मंत्री हैं। लोधी-राजपूत समुदाय से आते हैं। 2. राधाकांत ओझा: इलाहाबाद हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता राधाकांत ओझा प्रयागराज के वरिष्ठ अधिवक्ता हैं। इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष रह चुके हैं। 2024 में फूलपुर विधानसभा उपचुनाव के दौरान भी उनका नाम भाजपा के संभावित दावेदारों में प्रमुखता से सामने आया था। 3. प्रकाश पाल: भाजपा पिछड़ा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष प्रकाश पाल भाजपा पिछड़ा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष हैं। जून 2026 में उन्हें यह जिम्मेदारी दी गई थी। वह कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र के भाजपा क्षेत्रीय अध्यक्ष भी रह चुके हैं। 4. विद्यासागर सोनकर: पूर्व सांसद विद्यासागर सोनकर जौनपुर के वरिष्ठ भाजपा नेता हैं। वे पहले लोकसभा सांसद रह चुके हैं और भाजपा संगठन में प्रदेश महामंत्री की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। 5. गोपी कृष्ण पांडेय: संगठन से जुड़े भाजपा नेता गोपी कृष्ण पांडेय का नाम भाजपा ने पहली बार इस स्तर पर राज्यसभा प्रत्याशी के तौर पर सामने रखा है। 6. प्रियंका सिंह रावत: बाराबंकी की पूर्व सांसद प्रियंका सिंह रावत बाराबंकी लोकसभा सीट से 2014 में भाजपा के टिकट पर सांसद चुनी गई थीं। वह बाराबंकी की पहली महिला सांसद बनी थीं। 2019 में भाजपा ने उनकी जगह उपेंद्र सिंह रावत को टिकट दिया। वर्तमान में वह भाजपा उत्तर प्रदेश की प्रदेश उपाध्यक्ष हैं। 7. राम प्रताप सिंह चौहान: भाजपा प्रदेश महामंत्री राम प्रताप सिंह चौहान आगरा की एत्मादपुर से भाजपा विधायक रहे हैं। जून 2026 में उन्हें भाजपा का प्रदेश महामंत्री बनाया गया। उन्हें पश्चिमी उत्तर प्रदेश का प्रभारी भी बनाया गया। वे 1991-94 के दौरान भाजपा युवा मोर्चा में मंडल अध्यक्ष रहे हैं। 8. श्रुति गंगवार: बरेली की भाजपा नेत्री श्रुति गंगवार झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार की बेटी हैं। अर्बन कोऑपरेटिव बैंक की चेयरमैन हैं। संतोष गंगवार ने 24 सितंबर को दिल्ली में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी से मुलाकात की थी। ऐसा माना जा रहा है कि इसी मुलाकात के बाद संतोष गंगवार की बेटी श्रुति का राज्यसभा जाना तय हो गया था। भाजपा ने खेला पिछड़ा कार्ड, ब्राह्मणों की नाराजगी दूर करने की कोशिश मोदी मंत्रिमंडल से 3 मंत्रियों की छुट्‌टी होने की संभावना इस लिस्ट में केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी और राज्य मंत्री बीएल वर्मा का नाम नहीं है। उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल के लिए भी BJP ने दूसरे नाम घोषित किए हैं। यानी फिलहाल उनके लिए इन चुनावों के जरिए राज्यसभा में लौटने का रास्ता बंद हो गया है। पुरी के लिए अगला संभावित रास्ता 2027 में खाली होने वाली राज्यसभा सीटें हो सकती हैं। अप्रैल 2027 में केरलम की 3 सीटों का कार्यकाल खत्म होगा, लेकिन वहां BJP के मौजूदा विधानसभा संख्या-बल को देखते हुए पुरी का वहां से राज्यसभा पहुंचना आसान नहीं माना जा सकता। पुरी का राज्यसभा कार्यकाल 25 नवंबर 2026 को खत्म हो रहा है। संविधान के अनुच्छेद 75(5) के तहत वे लगातार 6 महीने तक ही सांसद बने बिना केंद्रीय मंत्री रह सकते हैं। पीयूष गोयल को पहले ही भाजपा का राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष बनाया जा चुका है। लिहाजा मोदी मंत्रिमंडल से तीन मंत्रियों को हटना तय है। हरदीप पुरी का एप्स्टीन फाइल में भी नाम सामने आया था। हरदीप 2018 में पहली बार राज्यसभा सदस्य बने थे और बीएल वर्मा को 2020 में राज्यसभा भेजा गया था। लखनऊ से ज्यादा ताकतवर बना बाराबंकी अवध का छोटा सा जिला बाराबंकी भाजपा की राजनीति में लखनऊ को छोड़़कर अन्य किसी जिले अधिक ताकतवर हो गया है। भाजपा में प्रदेश महामंत्री उपेंद्र रावत बाराबंकी से हैं। अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष बैद्यनाथ रावत भी बाराबंकी से हैं। अब राज्यसभा चुनाव में भी बाराबंकी की प्रियंका रावत को टिकट दिया है। प्रियंका भाजपा की प्रदेश उपाध्यक्ष भी हैं। प्रदेश सरकार में राज्यमंत्री सतीश शर्मा भी बाराबंकी जिले से ही हैं। भाजपा के प्रदेश मंत्री अवधेश श्रीवास्तव भी बाराबंकी से ही हैं। जानिए वोटिंग होने पर कैंडिडेट जिताने का अंकगणित क्या है? यूपी विधानसभा में कुल सीटों की संख्या 403 है। मौजूदा समय में 7 सीटें खाली हैं। यानी, मौजूदा समय में 396 विधायक हैं। राज्यसभा की 10 सीटों पर चुनाव के लिए जो फॉर्मूला अपनाया जाएगा, वह 396/11+1 होगा। यानी 396 को 11 से भाग देने पर जो संख्या आएगी, उसमें एक जोड़ा जाएगा। यानी एक सदस्य को चुनने के लिए 37 प्रथम वरीयता वोट की जरूरत पड़ेगी। अगर किसी ने एक्स्ट्रा कैंडिडेट नहीं उतारे तो बीजेपी 8 और सपा 2 प्रत्याशी निर्विरोध जिताने में सफल होगी। लेकिन अगर चुनाव हुए तो दोनों खेमों में किसी एक का गणित बिगड़ सकता। दरअसल, सपा के पास मौजूदा समय में 100 विधायक ही हैं। इसमें से भी रमाकांत यादव जेल में बंद हैं। यानी संख्या घटकर 99 रह जाती है। वह दो प्रत्याशी तो आराम से जिता सकती लेकिन तीसरे प्रत्याशी को उतारती है तो वोटिंग होना तय है। ऐसे में सपा को तीसरे प्रत्याशी को जिताने के लिए कम से कम 12 और एक्स्ट्रा वोटों की जरूरत पड़ेगी। इस स्थिति में भाजपा को 8वां कैंडिडेट जिताने के लिए कम से कम 6 एक्स्ट्रा वोटों की जरूरत पड़ेगी। अगर वोटिंग होती है तो क्रास वोटिंग का भी खतरा मंडराने लगेगा। ऐसे में दूसरी और तीसरी वरीयता के वोटों की गिनती अहम हो जाती है। इसके लिए विधायकों को बकायदा प्रशिक्षण दिया जाता है। उन्हें बताया जाता है कि किस विधायक को किस कैंडिडेट के लिए प्रथम वरीयता पर रखना है और किसे दूसरी व तीसरी वरीयता पर। इसी तरह गिनती में निर्धारित कोटे तक पहुंचने पर संबंधित प्रत्याशी को विजयी घोषित कर दिया जाता है। अब जानिए सपा प्रत्याशियों के बारे में… सपा प्रत्याशी धनराज परिमल नथवानी रिलायंस इंडस्ट्रीज के ग्रुप प्रेसिडेंट हैं। उन्हें जाने-माने बिजनेसमैन मुकेश अंबानी का करीबी माना जाता है। वह गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन के प्रेसिडेंट भी हैं। पिता परिमल नथवानी झारखंड से निर्दलीय राज्यसभा सांसद हैं। 3 महीने पहले NDA के समर्थन से राज्यसभा पहुंचे थे। जबकि सपा के दूसरे प्रत्याशी प्रो.रामगोपाल यादव, अखिलेश यादव के चाचा हैं। वह 90 के दशक से लगातार राज्यसभा में सपा की ओर से जा रहे हैं। एक बार लोकसभा सांसद भी रह चुके हैं। वर्तमान में राम गोपाल यादव पार्टी के प्रमुख महासचिव भी हैं।
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