Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    यूपी में होली के बाद बनेगी चौधरी की नई टीम:जातीय समीकरण पर फंसा पेंच, वोटबैंक साधने की फ्रंटलाइन टीम कितनी अहम

    5 hours ago

    1

    0

    भारतीय जनता पार्टी की यूपी इकाई में बड़ा संगठनात्मक फेरबदल अब होली के बाद ही होगा। प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी की नई टीम को लेकर पहले दौर का मंथन पूरा हो चुका है। लेकिन, जातीय और क्षेत्रीय संतुलन पर पेंच फंसा है। ऐसे में लखनऊ से लेकर दिल्ली तक दूसरे दौर की बैठकों के बाद ही अंतिम मुहर लगेगी। भाजपा की नई प्रदेश टीम क्या वाकई संगठन में बड़ा बदलाव लाएगी या फिर पुराने चेहरों की कुर्सियां सिर्फ इधर-उधर होंगी? पंकज चौधरी अपनी पहली बड़ी टीम से 2027 की सियासी जंग का मजबूत संदेश दे पाएंगे? या अंदरूनी खींचतान भाजपा के लिए नई मुश्किलें खड़ी करेगी? पढ़िए ये खास खबर… पंकज चौधरी को यूपी अध्यक्ष का कार्यभार संभाले 2 महीने का समय हो गया है। उनके सामने सबसे बड़ी चुनौती विधानसभा चुनाव की है। इससे पहले उन्हें अपनी नई बनानी है। टीम में जातीय और क्षेत्रीय संतुलन बनाते हुए बड़े नेताओं को संतुष्ट करना भी मुश्किल काम है। सूत्रों के मुताबिक, प्रदेश टीम को लेकर पंकज चौधरी और महामंत्री संगठन धर्मपाल सिंह के बीच एक दौर की चर्चा हो चुकी है। इसमें तय हुआ कि प्रदेश टीम में ज्यादा बड़ा बदलाव नहीं किया जाएगा। चुनाव को देखते हुए मौजूदा अनुभवी पदाधिकारियों को बनाए रखा जाएगा। अलबत्ता उनकी जिम्मेदारी में बदलाव हो सकता है। सालों से टीम में शामिल कुछ लोगों की विदाई हो सकती है। लेकिन, उन्हें सरकार या राष्ट्रीय टीम में समायोजित कराने की तैयारी है। जानिए नई टीम की अहमियत क्यों ज्यादा? विधानसभा चुनाव की पूरी जिम्मेदारी अब पंकज चौधरी की नई टीम के हाथ होगी। यह यूपी में चौधरी और संगठन महामंत्री धर्मपाल सिंह का पहला विधानसभा चुनाव होगा। हालांकि, धर्मपाल सिंह को झारखंड चुनाव का अनुभव है। नई टीम ही प्रचार, चुनाव प्रबंधन, सदस्यता अभियान और रैलियों की कमान संभालेगी। केंद्रीय और प्रदेश नेतृत्व के फैसलों को जमीन पर उतारना भी इसी टीम की जिम्मेदारी होगी। राजनीति के जानकारों का कहना है कि चुनावी साल में प्रदेश पदाधिकारी की अहमियत मंत्री जैसी होती है। इसीलिए पुराने पदाधिकारी बने रहना चाहते हैं। नए दावेदार पूरी ताकत से टीम में जगह पाने की कोशिश करेंगे। टीम तय करने का जिम्मा किसका? जानिए संगठन में कहां पदाधिकारी चुने जाने हैं? टीम में कई अहम पदों पर नए पदाधिकारी बनाए जाने हैं। प्रदेश उपाध्यक्ष, महामंत्री और मंत्री पदों में फेरबदल होगा, जिसमें महिलाओं की भागीदारी बढ़ाई जाएगी। 6 संगठनात्मक क्षेत्रों में भी नए अध्यक्ष की नियुक्ति होनी है। ऐसे में पुरानी टीम से कुछ को प्रदेश टीम में जगह मिलेगी। इसके साथ ही 14 जिलों में नए जिलाध्यक्ष नियुक्त होने हैं। युवा मोर्चा और महिला मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष भी बदले जाएंगे। नगर निकायों, आयोगों, निगमों और बोर्डों में राजनीतिक नियुक्तियां भी जल्द शुरू होंगी। अब दावेदारों के बारे में भी जानिए भाजपा की नई प्रदेश टीम में सबसे ज्यादा नजर रक्षामंत्री राजनाथ सिंह की राजनीतिक विरासत पर है। बड़े बेटे पंकज सिंह फिलहाल प्रदेश उपाध्यक्ष हैं, छोटे बेटे नीरज सिंह भी संगठन में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। सवाल यह है कि टीम में पंकज की जगह बरकरार रहेगी या नीरज को मौका मिलेगा। इसका अंतिम फैसला खुद राजनाथ सिंह के हाथ में होगा। युवा मोर्चा अध्यक्ष महिला मोर्चा अध्यक्ष जानिए कहां फंसा पेच, चुनौती क्या? प्रदेश टीम के गठन को लेकर लखनऊ से दिल्ली तक सियासी दौड़ तेज है। दावेदार दिल्ली में शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात कर रहे हैं, वहीं लखनऊ में आरएसएस का समर्थन जुटाने की कोशिश चल रही। सबसे ज्यादा दावेदारी ब्राह्मण और ठाकुर समाज से है, जिससे चयनकर्ताओं के सामने संतुलन साधने की चुनौती है। महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर भी जोर है। भाजपा के एक पदाधिकारी ने बताया कि नाराजगी को देखते हुए पार्टी एक अहम पद ब्राह्मण समाज को देने की रणनीति पर काम कर रही है। जिससे जाति और महिला दोनों समीकरण साधे जा सकें। चुनाव से पहले टीम बनाना चुनौती राजनीतिक विश्लेषक भी मानते हैं कि यूजीसी के मुद्दे ने सवर्ण को भाजपा से नाराज कर दिया है। भाजपा ने कुर्मी समाज से अध्यक्ष बनाया, तो लोध और मौर्य नाराज हो गए। ऐसे में भाजपा अपने कोर सवर्ण वोटबैंक को एडजस्ट करने के साथ पिछड़े वर्ग की जातियों की भी चिंता करनी है। वरिष्ठ पत्रकार अखिलेश बाजपेयी का मानना है, भाजपा की प्रदेश टीम में पिछली बार भी थोड़ा ही बदलाव हुआ था। प्रदेश अध्यक्ष को 2027 के विधानसभा चुनाव के साथ यूजीसी, ब्राह्मणों की नाराजगी, लोध-कुर्मी टकराव सहित अन्य राजनीतिक लाभ-हानि देखते हुए टीम बनानी होगी। यूजीसी के बाद अगले साल 5 राज्यों में चुनाव है। इनमें यूपी न केवल सबसे बड़ा है, बल्कि भाजपा के लिए सबसे महत्वपूर्ण भी है। अखिलेश बाजपेयी का मानना है, बसपा सुप्रीमो मायावती जिस प्रकार दलित और ब्राह्मणों को लेकर सक्रिय हुई है, वह भी भाजपा की चिंता है। भाजपा सबका-साथ सबका विकास की बात करती है, लेकिन अभी तक उसका दलित प्रदेश अध्यक्ष नहीं बना है। विद्यासागर सोनकर, कौशल किशोर, विनोद सोनकर जैसे बड़े दलित नेताओं को एडजस्ट करना होगा। जिससे दलितों के बीच संदेश जाए कि भाजपा उनकी चिंता कर रही। राजनीतिक विश्लेषक वीरेंद्रनाथ भट्ट का कहना है, यूजीसी के बाद बदले सामाजिक समीकरण, ब्राह्मणों की नाराजगी, विधायक और मंत्री विवाद सहित अन्य कारणों से पंकज चौधरी के सामने कई चुनौती हैं। उन्हें अपनी टीम में जातीय और क्षेत्रीय संतुलन बनाना होगा। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद विवाद, अलंकार अग्निहोत्री विवाद समेत अन्य मुद्दे भी हैं। भाजपा को टीम बनाने के साथ इन चुनौतियों का सामना भी करना है। अगर समस्याओं का समय पर समाधान नहीं किया, तो चुनाव में निश्चित तौर पर दिक्कत होगी। ----------------------- ये खबर भी पढ़ें… यूपी में 12 से अधिक मंत्री बदले जा सकते हैं, दूसरा मंत्रिमंडल विस्तार जल्द; गुजरात मॉडल अपनाने की तैयारी यूपी में योगी सरकार 2.0 का दूसरा मंत्रिमंडल विस्तार बहुत जल्द होने जा रहा है। 2027 विधानसभा चुनाव और इस साल होने वाले पंचायत चुनाव को देखते हुए योगी सरकार गुजरात मॉडल की तर्ज पर आधे से अधिक मंत्रियों की छुट्‌टी कर नई टीम भी उतार सकती है। पढ़ें पूरी खबर
    Click here to Read more
    Prev Article
    क्या अखिलेश फिर मायावती को साथ लाना चाहते हैं:नसीमुद्दीन की जॉइनिंग पर बसपा को साधने की कोशिश; देखिए VIDEO
    Next Article
    बेटे ने बनाया नसीमुद्दीन के सपा में जाने का रास्ता:अखिलेश के कॉमन फ्रेंड ने निभाई अहम भूमिका, इनसाइड स्टोरी

    Related न्यूज Updates:

    Comments (0)

      Leave a Comment