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    'यूपी में ईमानदारी से काम करना सेफ नहीं':एयरफोर्स कैंपस में CWE की हत्या हुई थी, पत्नी बोलीं- आज भी इंसाफ के लिए भटक रहे

    5 hours ago

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    प्रयागराज में एयरफोर्स के हाई सिक्योरिटी कैंपस में मिलिटरी इंजीनियरिंग सर्विस (MES) के कमांडर वर्क इंजीनियर (CWE) एस.एन. मिश्रा की हत्या को आज एक साल पूरा हो गया है। लेकिन अब तक इस हत्याकांड की गुत्थी पूरी तरह नहीं सुलझ सकी है। इंसाफ की आस में भटक रहे परिवार का दर्द एक बार फिर सामने आया है। दैनिक भास्कर से बातचीत में उनकी पत्नी वत्सला मिश्रा ने अपनी पीड़ा जाहिर की। उन्होंने कहा- पिछले एक साल से मैं और मेरा परिवार लगातार इंसाफ की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक न तो कोई ठोस कार्रवाई हुई है और न ही हमारे सवालों के जवाब मिले हैं।। परिवार अब भी न्याय की उम्मीद लगाए बैठा है, लेकिन लंबा समय बीतने के बाद भी मामले का खुलासा न होने से उनकी चिंता और बढ़ती जा रही है। पढ़िए पूरी रिपोर्ट…. हाई सिक्योरिटी कैंपस में हुई थी हत्या 29 मार्च 2025 को सेंट्रल एयर कमांड के हेड ऑफिस स्थित एयरफोर्स कैंपस, बमरौली में उनके सरकारी आवास के भीतर घुसकर अज्ञात हमलावर ने गोली मारकर CWE की हत्या कर दी थी। यह इलाका बेहद संवेदनशील और हाई सिक्योरिटी जोन माना जाता है, जहां सुरक्षा के कड़े इंतजाम रहते हैं। कोई जवाब नहीं देता...जांच चल रही, बस यही कहते हैं इस मामले में उनका परिवार पहली बार सामने आया। दैनिक भास्कर से ऑन कैमरा बातचीत करते हुए उनकी पत्नी ने कहा- एक साल से हम इंसाफ के लिए दर-दर भटक रहे हैं। मुझे अब तक यह जवाब नहीं मिला कि मेरे पति की हत्या क्यों की गई। देशभक्ति की सजा उन्हें जान देकर चुकानी पड़ी वत्सला ने कहा- ईमानदारी, देशभक्ति और अपने काम के प्रति डेडिकेशन की सजा उन्हें अपनी जान देकर क्यों चुकानी पड़ी? साल भर का वक्त बीत गया और कोई सही जवाब नहीं देता। बहुत पीछे पड़ने पर जवाब मिलता है कि जांच चल रही है। जांच कब तक चलेगी, इसका जवाब किसी के पास नहीं। न एयरफोर्स की ओर से और न ही पुलिस की ओर से कोई संतोषजनक जानकारी दी जा रही है। उन्होंने कहा- इस मामले में मैं सीएम के साथ ही डीजीपी तक से मिलीं। इस पर एसआईटी बना दी गई। जानकारी मिली कि एसआईटी ने कुछ प्वाइंट उठाए और इन पर फिर से विवेचना के निर्देश दिए। इसके बाद क्या हुआ, कुछ पता नहीं। कोई जवाब देने वाला भी नहीं। CBI से कराई जाए जांच वत्सला ने कहा- इस मामले की निष्पक्ष जांच के लिए CBI जांच कराई जानी चाहिए। उनका मानना है कि बिना किसी बड़े नेटवर्क या अंदरूनी मदद के इस तरह की घटना को अंजाम देना संभव नहीं है। मेरे पति कभी किसी से दबे नहीं। कभी किसी गलत चीज का सपोर्ट नहीं किया। वह दिल्ली, असम, मेघालय, राजस्थान जैसी कई जगहों पर रहे। अपने काम के बूते चीफ ऑफ एयरस्टॉफ और सेना के जनरल जैसे अफसरों से भी प्रशस्ति पाई। ऐसे व्यक्ति की हत्या, वह भी एयरफोर्स हेडक्वॉर्टर जैसी हाईली सेंसेटिव कैंपस में कोई बड़ी साजिश है। सिक्योरिटी ऑफिसर पर क्या कार्रवाई हुई वत्सला ने कहा- इस मामले में वह डिफेंस मिनस्टर राजनाथ सिंह से भी मिलीं। उनसे सीबीआई जांच की मांग के साथ यह भी मांग की कि परिवार को बताया जाए कि एयरफोर्स कैंपस की सिक्योरिटी में इतना बड़ा लूपहोल मिलने पर सिक्योरिटी ऑफिसर पर क्या कार्रवाई हुई। ठीक 15 दिन पहले उनके घर पर वही लड़का अपने एक दोस्त के साथ आता है और कुछ देर बाद वहां से भाग निकलता है। अगले ही दिन इस मामले की लिखित शिकायत मेरे पति ने ग्रुप कैप्टन रोमिल शर्मा से की लेकिन कोई एक्शन नहीं लिया गया। उल्टा उनके पति को टेम्प्रेरी ड्यूटी पर भेज दिया गया। इसकी जांच होनी चाहिए कि उसी दिन एयरफोर्स ऑफिसर्स क्यों नहीं एक्टिव हुए। लोगों ने समझाया था, UP मत जाओ सीडब्ल्यूई की पत्नी जब यह बातें कह रही थीं तो उनकी आंखों में आंसू आ गए। उन्होंने कहा- पति के ट्रांसफर पर कई लोगों ने कहा था कि यूपी मत जाओ। वहां ईमानदारी से काम करने वाले सेफ नहीं। एक नहीं, कई-कई बार समझाया। नहीं पता था कि इस स्टेट में आकर मेरा सबकुछ छिन जाएगा। पुलिस का दावा- चोरी की नीयत से आया था आरोपी इस मामले में पुलिस ने दावा किया था कि हत्या को अंजाम देने वाला आरोपी कैंपस के पास रहने वाला ही सौरभ उर्फ बाबू है। पुलिस के अनुसार, आरोपी अपने भाई की जमानत के लिए 50 हजार रुपये की जरूरत के चलते चोरी करने गया था। चोरी में नाकाम रहने पर उसने CWE की गोली मारकर हत्या कर दी। पुलिस ने आरोपी के साथ उसके माता-पिता शिवकुमार, सुनीता और जेल में बंद भाई हनी उर्फ गौतम को भी आरोपी बनाया था।फिलहाल माता-पिता को जमानत मिल चुकी है, जबकि मुख्य आरोपी अभी जेल में बंद है। पुलिस की थ्योरी पर परिवार के सवाल पुलिस ने क्या कहा इस मामले में मौजूदा विवेचक एसएचओ पूरामुफ्ती मनोज कुमार सिंह ने कहा, "एसआईटी ने जिन प्वाइंटों को उठाया, उस पर भी जांच की गई। हालांकि अब तक की जांच में ऐसा कोई नया तथ्य सामने नहीं आया, जिससे केस प्रभावित हो। मुकदमे में चारों आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट लगाई जा चुकी है। न्यायालय इसका संज्ञान ले चुका है और अब मुकदमा गवाही पर आ गया है।' उधर हमने इस मामले में प्रयागराज के आला पुलिस अफसरों से भी बात करने की कोशिश की लेकिन जवाब नहीं मिला।
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