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    यूपी विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा का अति–पिछड़ा दांव:निषाद समाज की बेटी साध्वी निरंजन ज्योति ने राष्ट्रीय पिछड़ा आयोग का पद संभाला

    3 hours ago

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    भाजपा ने अति पिछड़ा और महिला कार्ड खेलते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति को राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग (NCBC) की अध्यक्ष बनाकर बड़ा दांव चला है। बुधवार को उन्होंने नई दिल्ली में पदभार भी ग्रहण किया। साध्वी निरंजन ज्योति, निषाद (मल्लाह) समाज से आती हैं। हमीरपुर जिले के पत्योरा गांव की रहने वाली हैं। कथावाचक के तौर पर उनकी यात्रा शुरू हुई थी। राम मंदिर आंदोलन में सक्रिय रहीं और निरंजनी अखाड़े में महामंडलेश्वर भी हैं। तीसरे प्रयास में चुनी गईं थी विधायक 2002 में पहली बार हमीरपुर विधानसभा सीट से भाजपा ने टिकट दिया, लेकिन हार गईं। ये क्रम 2007 में भी चला। 2012 में तीसरी कोशिश में वे विधायक बनीं। फिर मोदी लहर में 2014 में पार्टी ने उन्हें फतेहपुर से सांसद का टिकट दिया। दो बार वे सांसद चुनी गईं और केंद्रीय राज्यमंत्री भी रहीं। 2024 लोकसभा चुनाव में वे हार गईं थी। बीच में उनके यूपी प्रदेश अध्यक्ष बनने की भी चर्चा छिड़ी थी। हालांकि इस रेस में वे कभी नहीं रहीं। अब पार्टी ने यूपी विधानसभा चुनाव से पहले साध्वी निरंजन ज्योति को राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग का अध्यक्ष बनाकर एक बड़ा संदेश देने की कोशिश की है। पदभार ग्रहण करने पर साध्वी ने पोस्ट कर लिखा– सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके। शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणि नमोस्तुते। नई दिल्ली में राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष का पदभार ग्रहण किया। पिछड़े समाज के सम्मान, अधिकारों की रक्षा और उनके समग्र विकास के लिए समर्पित यह दायित्व प्रदान करने के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का हृदय से आभार। साध्वी ने आगे लिखा कि "राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग का यह संकल्प है कि पिछड़े समाज को न्याय, सुरक्षा, सम्मान और विकास के समान अवसर प्राप्त हों। इसी भावना के साथ आयोग कार्य करने के लिए प्रतिबद्ध है।" यूपी चुनाव से पहले इस नियुक्ति के राजनीतिक मायने यह नियुक्ति ठीक ऐसे समय हुई है जब यूपी में विधानसभा चुनाव में एक साल से भी कम का समय रह गया है। सपा एक ओर पीडीए की राग अलाप रही है। ऐसे में अति पिछड़े निषाद समाज से आने वाली साध्वी निरंजन ज्योति को ये पद देकर भाजपा ने इस वर्ग को साधने की कोशिश की है। पूर्वांचल में निषाद समाज एक बड़ा वोट बैंक है। इसी समाज पर आधारित निषाद पार्टी वर्तमान में एनडीए की सहयोगी है। हालांकि 2024 लोकसभा में कई सीटों पर निषाद सपा के साथ चले गए थे। भाजपा ने इस नियुक्ति के जरिए निषादों को साधने की कोशिश की है। भाजपा इस नियुक्ति से ओबीसी-अति पिछड़ा वोट बैंक को मजबूत करने और महिला सशक्तिकरण का संदेश देने की कोशिश में जुटी है। साध्वी निरंजन ज्योति का अति पिछड़ा (निषाद) बैकग्राउंड और महिला होने का फैक्टर पार्टी के लिए डबल बेनिफिट साबित हो सकता है। राजनीति सफर यूपी में निषाद वोट बैंक की ताकत भी समझ लें उत्तर प्रदेश में निषाद समाज का 4.5%के लगभग वोट बैंक है। लोकसभा की 15 और विधानसभा की 120–130 सीटों पर निषाद वोटर्स प्रभावी भूमिका में हैं। प्रदेश में गोरखपुर, वाराणसी, आजमगढ़, बलिया, मऊ, गाजीपुर, मिर्जापुर, भदोही, जौनपुर, प्रयागराज, सुल्तानपुर, फतेहपुर आदि जिलों में निषाद बड़ी संख्या में हैं। 2022 विधानसभा में NDA गठबंधन में निषाद पार्टी ने 16 सीटों पर लड़ा था। तब 11 सीटों पर उसे जीत मिली थी। इसमें से 6 उसने अपने सिंबल पर जीती थी। अन्य पांच सीटों पर उसके प्रत्याशी भाजपा के सिंबल पर जीते थे। ---------------- ये खबर भी पढ़ें- अखिलेश के PDA को ऐसे मात देगी भाजपा:'ट्रिपल S' फॉर्मूला, संघ देगा फीडबैक; योगी ने 6 बैठकें कीं सपा के PDA की काट भाजपा ट्रिपल-S से करेगी। ट्रिपल-S मतलब है, संगठन-सरकार-संघ। आम लोगों तक यह मैसेज कैसे पहुंचाना है? इसके लिए भाजपा संगठन, सरकार और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की समन्वय बैठक 28 फरवरी से 7 मार्च, 2026 के बीच 6 शहरों में हुईं। सवाल उठा कि सभी लीडर एक जगह जुटे क्यों? दरअसल, 2024 लोकसभा चुनाव में माना गया था कि तालमेल कमजोर होने से भाजपा की चुनावी गाड़ी पटरी से उतर गई। 2027 के विधानसभा चुनाव में ऐसा न हो, इसलिए समन्वय बैठकें हुईं। 4 बैठकों में संघ प्रमुख मोहन भागवत भी शामिल हुए थे।
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