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    यूपीपीसीएस में रायबरेली की अनन्या ने दूसरा स्थान हासिल किया:पहले प्रयास में मिली सफलता, पिता किराना स्टोर चलाते हैं, पढ़िए अनन्या से भास्कर की खास बातचीत

    3 hours ago

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    रायबरेली के आनंद नगर निवासी अनन्या त्रिवेदी ने यूपी लोक सेवा आयोग पीसीएस 2024 में दूसरा स्थान हासिल कर अपने परिवार और जिले का नाम रोशन किया। सादगीपूर्ण पारिवारिक पृष्ठभूमि से आने वाली अनन्या की सफलता संघर्ष, अनुशासन और निरंतर मेहनत का प्रेरक उदाहरण बनकर उभरी है। अनन्या के पिता सुशील कुमार त्रिवेदी जनरल स्टोर चलाते हैं, जबकि उनकी मां रेखा रानी बेसिक शिक्षा विभाग में सरकारी शिक्षिका हैं। अनन्या ने अपनी उपलब्धि का श्रेय अपनी मां की कठिन परिश्रम और त्याग को दिया। साथ ही, उन्होंने अपने मामा राजेश कुमार पांडे, एडिशनल एसपी कानपुर देहात के मार्गदर्शन को भी सफलता में महत्वपूर्ण बताया। अनन्या ने प्रारंभिक शिक्षा रायबरेली में पूरी की। हाई स्कूल और इंटरमीडिएट उन्होंने स्वामी जानकी शरण पब्लिक स्कूल से पास किया। इसके बाद 2019 में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) से समाजशास्त्र ऑनर्स में स्नातक की डिग्री हासिल की। आगे की पढ़ाई के लिए उन्होंने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (IGNOU) से पोस्ट ग्रेजुएशन की और NET परीक्षा भी उत्तीर्ण की। अनन्या ने बताया कि यह उनका पहला प्रयास था जिसमें उन्होंने मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू दोनों में सफलता पाई। उनका मानना है कि संतुलित और योजना बद्ध तैयारी, रोजाना छह घंटे पढ़ाई और आत्मविश्वास सफलता की कुंजी रही। संघर्ष और परिवार का योगदान अनन्या के पिता सुशील कुमार त्रिवेदी ने बताया कि पहले परिवार गांव में रहता था और बच्चों को रायबरेली स्कूल भेजने में कठिनाइयां आती थीं। इसी कारण 1995 में आनंद नगर में जमीन खरीदकर मकान बनाया गया, जिससे बच्चों की पढ़ाई बेहतर तरीके से हो सके। अनन्या की मां रेखा रानी ने बताया कि परिवार की पूरी कोशिश थी कि पढ़ाई में कोई व्यवधान न आए। उन्होंने कहा, “बेटा और बेटी घर पर अनुशासन में रहकर मेहनत करते थे। मैं अपने विद्यालय और पिताजी अपने जनरल स्टोर से निकलने के बाद बच्चों की पढ़ाई सुनिश्चित करते थे। ऊपर वाले का शुक्र है कि उन्होंने सही रास्ता और मुकाम दिया।” भविष्य की तैयारी और प्रेरणा अनन्या की इस सफलता से गांव, परिवार और जिले में गर्व का माहौल है। उनका भाई वर्तमान में सेंट्रल गवर्नमेंट के होम मिनिस्ट्री में कार्यरत हैं। अनन्या अब यूपीएससी की तैयारी भी कर रही हैं और भविष्य में देश स्तर पर बड़ी उपलब्धि हासिल करने का लक्ष्य रखती हैं। पढ़िए दैनिक भास्कर की पीसीएस सेकंड रैंक होल्डर अनन्या से खास बाचतीच रायबरेली। उत्तर प्रदेश में पीसीएस परीक्षा में सेकंड रैंक हासिल करने के बाद अनन्या त्रिवेदी के घर में खुशी की लहर है। उनके परिवार में गर्व का माहौल है। हम उनसे और उनके परिवार से बातचीत कर रहे हैं। भास्कर: आपने पीसीएस में सेकंड रैंक हासिल की है। यह सफलता आपके लिए क्या मायने रखती है? अनन्या: सर, शुरुआत में बहुत नई चुनौतियां आईं, लेकिन मेरे पेरेंट्स का सपोर्ट हमेशा रहा। इनिशियलली मैं गाँव के ग्रामीण परिवेश से आती हूं, मेरा जो भरण-पोषण हुआ, वही हुआ। लेकिन बचपन से ही रायबरेली सिटी के एक पब्लिक स्कूल में पढ़ाई की। शुरुआत के कुछ सालों में डेली अपडाउन का स्ट्रगल रहा। गाँव में सुविधाएं कम थीं, इसलिए स्ट्रगल ज्यादा था। भास्कर: इसके बाद आपने कैसे तैयारी शुरू की? अनन्या: उसके बाद एकेडमिक्स अच्छे थे, इसलिए मैंने बीएचयू से सोशियोलॉजी ऑनर्स किया और गोल्ड मेडलिस्ट बनी। इसके बाद मैंने सिविल सर्विस की तैयारी शुरू की। यह मेरा यूपीपीसीएस फर्स्ट मेंस और फर्स्ट इंटरव्यू था। सेकंड रैंक पाना अनबिलीवेबल है। भास्कर: आपने किस फैकल्टी या मार्गदर्शन से मदद ली? अनन्या: मेरा 12वीं में पीसीएम बैकग्राउंड है, लेकिन मुझे कभी ऐसा फील नहीं हुआ कि मेरा ऐपटीट्यूड इंजीनियरिंग या डॉक्टर बनने की तरफ है। सिविल सर्विस में मुझे पब्लिक इंटरैक्शन और डायवर्सिटी पसंद आई। यह कोई एंड गोल नहीं है, बल्कि एक टेक-ऑफ प्लेटफार्म है। भास्कर: आपके मामा जी भी एडिशनल एसपी हैं। क्या उनके अनुभव ने आपको प्रभावित किया? अनन्या: सर, उनकी कहानी इंस्पिरेशनल है—रैक्स टू रिचेस जैसी। लेकिन सिविल सर्विस का गोल मैंने खुद डिसाइड किया। फैमिली मेंबर्स का कोई हस्तक्षेप नहीं था। भास्कर: आपके पिताजी अक्सर बाहर रहते हैं। पढ़ाई में किस तरह सपोर्ट मिला? अनन्या: जी सर, घर खाली रहता था और पढ़ाई के लिए कोई डिस्टर्ब नहीं करता था। कभी-कभी आइसोलेटेड फील होता था, लेकिन फ्रेंड्स का रोल बहुत पॉजिटिव था। जब भी मैं लो फील करती थी, उन्हें कॉल करती और वे मुझे मोटिवेट करते। भास्कर: आपने कोचिंग जॉइन की? अनन्या: नहीं सर, जीएस के लिए कभी कोचिंग नहीं ली। यूपीपीसीएस के लिए एक्सक्लूसिवली सेल्फ स्टडी की। Telegram ग्रुप्स और फ्री इनिशिएटिव जरूर जॉइन किए। मेन रिसोर्सेज के लिए मामा जी ने थोड़ी पर्सनलाइज गाइडेंस दी। आज के टाइम में रिसोर्सेज बहुत हैं, GPT के जमाने में किसी भी टॉपिक का कंटेंट आसानी से मिल जाता है। लेकिन इसे कैसे पढ़ते हैं और एग्जाम में कैसे लिखते हैं, यही सबसे ज्यादा मायने रखता है। अनन्या के माता-पिता से भास्कर की बातचीत भास्कर: आपकी माता-पिता इस सफलता पर क्या कहते हैं? पिता जी: मुझे अत्यंत खुशी है कि मेरी बेटी ने सेकंड रैंक हासिल की। इसमें मेरा और मेरी पत्नी का योगदान रहा कि पढ़ाई में कोई व्यवधान न हो। भास्कर: गांव से रायबरेली आने का कारण क्या था? पिता जी: बिटिया और बेटे को अच्छे वातावरण में पढ़ाई कराना। गाँव से आने-जाने में सुविधाएं कम थीं, इसलिए रायबरेली में सेटल हुए। बिटिया हर क्लास में अच्छी पोजीशन लाती थी, इसलिए पढ़ाई में कोई व्यवधान न हो। भास्कर: आप लाइब्रेरी में कब आए? माता जी: हम 2010 में आए। मैं सरकारी विद्यालय में शिक्षिका हूं, पोस्टिंग 1995 में हुई। यूपीएस राजापुर में सहायक अध्यापक के पद पर कार्यरत हूं। भास्कर: आपके स्कूल में बच्चों की तैयारी कैसे होती है? माता जी: हमारे विद्यालय में भी राष्ट्रीय और योग्यता आधारित परीक्षाएं होती हैं, खासकर गरीब बच्चों के लिए। लगभग हर वर्ष 2-3 बच्चे सफल होते हैं। हमारे और पूरे स्टाफ का सहयोग रहता है। हम चाहते हैं कि बच्चे भी मेहनत करें और आगे बढ़ें। भास्कर: बच्चों की पढ़ाई में कितनी समस्याएं आईं? माता जी: समस्याएं आईं, लेकिन बच्चे अनुशासित थे। घर का माहौल पढ़ाई के लिए फोकस्ड था। बेटी ने स्वयं मेहनत की और आत्मनिर्भर बनी। रैंक सुनकर विश्वास नहीं हुआ। रोल नंबर चेक किया और यकीन हुआ कि ईश्वर ने आशीर्वाद दिया। भास्कर: इस सफलता का मुख्य संदेश क्या है? अनन्या: यदि आप ईमानदारी से किसी भी क्षेत्र में मेहनत करते हैं और परिवार और कार्य के प्रति ईमानदार रहते हैं, तो ईश्वर फल देता है। उत्तर प्रदेश के पीसीएस में सेकंड रैंक पाने के बाद अनन्या त्रिवेदी के घर में खुशी का माहौल है। उनके माता-पिता ने ईश्वर पर भरोसा कर आशीर्वाद लिया।
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