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    युवराज मौत मामले में बिल्डर निर्मल सिंह को अग्रिम जमानत:बिना न्यायालय की अनुमति के नहीं छोड़ सकते देश, जांच में करेंगे सहयोग

    9 hours ago

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    सेक्टर-150 स्थित टी प्वाइंट के पास पानी से भरे गड्ढे में कार सहित गिरने से सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज की मौत के मामले में सत्र अदालत ने बिल्डर निर्मल सिंह को अग्रिम जमानत दे दी है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश अतुल श्रीवास्तव की अदालत ने विस्तृत सुनवाई के बाद पाया कि प्रथम दृष्टया आरोपी की प्रत्यक्ष या सचेत भूमिका स्थापित करने वाला ठोस साक्ष्य उपलब्ध नहीं है। उसकी कस्टोडियल पूछताछ आवश्यक प्रतीत नहीं होती। दो साल से निर्माण स्थल पर लगी थी रोक अदालत ने कहा कि वह बिना न्यायालय की अनुमति के देश नहीं छोड़ेंगे। जांच में सहयोग करेंगे। आरोपी के वकील एवं जिला बार एसोसिएशन के सचिव मनोज भाटी बोड़ाकी व सचिव शोभाराम चंदील ने अदालत में दलील दी कि आरोपी वह एक प्रतिष्ठित व्यवसायी और डेवलपर हैं। एफआईआर में उनका नाम स्पष्ट रूप से दर्ज नहीं है और न ही किसी प्रत्यक्ष कृत्य का उल्लेख है। शेयर का हिस्सा पहले किया ट्रांसफर वह संबंधित कंपनी के निदेशक या की-मैनेजरियल पर्सन नहीं रहे हैं। कंपनी के शेयरों का बड़ा हिस्सा पहले ही अन्य कंपनी को हस्तांतरित किया जा चुका था। निर्माण स्थल पर दो साल से अधिक समय से नोएडा प्राधिकरण द्वारा रोक लगी हुई थी। सत्र अदालत ने पाया कि रिकॉर्ड से प्रथम दृष्टया यह स्थापित नहीं होता कि आरोपी का विवादित भूमि पर प्रत्यक्ष या परोक्ष नियंत्रण था। आरोपी के विरुद्ध किसी आपत्तिजनक वस्तु की बरामदगी प्रस्तावित नहीं है। घटना से पूर्व नोएडा प्राधिकरण द्वारा निर्माण गतिविधियों पर रोक लगाई गई थी। कॉर्पोरेट संरचना, लीज, सब-लीज, शेयर ट्रांसफर और एमओयू जैसे लेन-देन के मामलों में केवल स्वामित्व संबंध के आधार पर आपराधिक दायित्व नहीं थोपा जा सकता। जलभराव की समस्या पर दिया था आवेदन वहीं अभियोजन की ओर से दलील दी गई कि आरोपी कंपनी के प्रमोटर हैं और इस नाते जिम्मेदार हैं। इस पर अदालत ने कहा कि प्रमोटर शब्द की स्पष्ट कानूनी परिभाषा और दायित्व का निर्धारण रिकॉर्ड पर उपलब्ध दस्तावेजों से स्थापित नहीं होता। अदालत ने यह भी नोट किया कि जलभराव की समस्या को लेकर विजटाउन प्लानर्स द्वारा 2022 में आवेदन दिया गया था। सिंचाई विभाग द्वारा 2023 में जलनिकासी के लिए प्रस्ताव रखा गया था। आदेश में उल्लेख किया कि नोएडा प्राधिकरण की बोर्ड बैठक में 18 जनवरी 2021 को संबंधित भूखंड पर निर्माण कार्य पर रोक लगा दी गई थी। बाद में सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन में जनवरी 2026 में यह प्रतिबंध हटाया गया।
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