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    PM Narendra Modi 25 Years In Governance | शासन के 25 साल पूरे होने पर पीएम मोदी ने दिया 'हम यह करेंगे' का नया नारा, 2047 तक 'विकसित भारत' के बताए 3 बड़े लक्ष्य!

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को नई दिल्ली के इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में आयोजित 'सेवा ज्योति' कार्यक्रम को संबोधित करते हुए देश की विकास यात्रा को नई ऊर्जा देने के लिए "हम यह करेंगे" (We will do it) का नया नारा दिया। सार्वजनिक पद (सरकार के प्रमुख) पर अपने सफल 25 साल पूरे होने के अवसर पर आयोजित इस भव्य समारोह में प्रधानमंत्री ने वर्ष 2047 तक 'विकसित भारत' के निर्माण का संकल्प दोहराया। स्टेडियम में मौजूद हजारों लोगों की भारी भीड़ ने पीएम मोदी के हर आह्वान पर एक सुर में "हम यह करेंगे" का नारा लगाकर पूरे माहौल को देशभक्ति और उत्साह से भर दिया।दिल्ली में 'सेवा ज्योति' कार्यक्रम को संबोधित करते हुए, प्रधानमंत्री ने 'सेवा ज्योति यात्रा' में शामिल नागरिकों का आभार व्यक्त किया और कहा कि उन्होंने हमेशा जनसेवा को अपनी ज़िम्मेदारी माना है।उन्होंने कहा, "लोगों ने हमेशा मुझे अपनी सेवा करने के लिए चुना है। आज, मैं भारत के लोकतंत्र और इसके संविधान को नमन करता हूँ। मैं 'सेवा ज्योति यात्रा' में भाग लेने वाले सभी नागरिकों का भी दिल से आभार व्यक्त करता हूँ।"पीएम मोदी ने बताया कि उन्होंने दिन की शुरुआत में श्री विनायक मंदिर का दौरा किया और देश, इसके 1.4 अरब लोगों और खुद के लिए प्रार्थना की। उन्होंने कहा कि उन्होंने देश की और भी अधिक ऊर्जा के साथ सेवा करने की शक्ति और क्षमता के लिए प्रार्थना की।पीएम मोदी ने सार्वजनिक पद पर अपने 25 वर्षों का ज़िक्र कियापीएम मोदी ने कहा, "देश ने मुझे बहुत कुछ दिया है। इसलिए, देश के प्रति मेरी ज़िम्मेदारी भी सबसे बड़ी है।" उन्होंने कहा कि उनका मानना ​​है कि हर नागरिक का उन पर सबसे पहला अधिकार है और साथ ही उन्होंने 2047 तक 'विकसित भारत' का लक्ष्य हासिल करने का अपना संकल्प दोहराया। उन्होंने जन-विश्वास और अनुभव के अपने 25 वर्षों को एक "अमूल्य धरोहर" बताया और कहा कि यह अनुभव केवल उनका नहीं, बल्कि देश का है।उन्होंने कहा, "और यह धरोहर केवल मोदी की नहीं है; यह धरोहर देश की है। भारत माता की हर संतान का इस धरोहर पर अधिकार है।" उन्होंने स्वयंसेवकों और कार्यकर्ताओं के योगदान को भी सराहा और कहा कि जनसेवा की अपनी यात्रा में उन्होंने कभी खुद को अकेला महसूस नहीं किया। उन्होंने कहा, "मुझे कभी अकेलापन महसूस नहीं हुआ। ऐसे अनगिनत स्वयंसेवक हैं जो भारत की सांस्कृतिक आत्मा के रक्षक हैं और जिनका एकमात्र मकसद है - भारत की सेवा करना।" उन्होंने कहा कि स्वयंसेवक सेवा की भावना से काम करते हैं और हमेशा खुद को याद दिलाते हैं, "हम सेवक हैं। हम मानवता के सेवक हैं।"पीएम मोदी का 'हम यह करेंगे' (We will do it) मंत्रअपने संबोधन में आगे बढ़ते हुए, पीएम मोदी ने देश की तरक्की की महत्वाकांक्षाओं में नई ऊर्जा भरने के लिए एक नया नारा दिया -- "हम यह करेंगे" (We will do it)। प्रधानमंत्री ने देश के मुख्य लक्ष्यों के बारे में बताया और हर बार भीड़ ने ज़ोरदार आवाज़ में जवाब दिया - "हम यह करेंगे"।पीएम मोदी ने "2047 तक विकसित भारत" का लक्ष्य हासिल करने, "आत्मनिर्भर भारत" बनाने, भारत को ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने, ओलंपिक की मेज़बानी करने और देश को अंतरिक्ष के क्षेत्र में और आगे ले जाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, "यह ऊर्जा और आत्मविश्वास अद्भुत है।"Read Latest National News in Hindi only on Prabhasakshi  

    UN में OIC पर बरसा भारत, Biplab Deb बोले पीड़ित और दोषी में फर्क समझे संगठन

    (योषिता सिंह) संयुक्त राष्ट्र, सात अक्टूबर भारत ने जम्मू-कश्मीर और पाकिस्तान में आतंकवादी ढांचे के खिलाफ उसकी कार्रवाई को लेकर इस्लामी सहयोग संगठन (ओआईसी) की टिप्पणियों को खारिज करते हुए कहा है कि यह समूह ‘‘पीड़ित और दोषी के बीच फर्क करने में असमर्थ’’ है। पश्चिम त्रिपुरा से लोकसभा सदस्य बिप्लब कुमार देब ने यहां संयुक्त राष्ट्र महासभा की छठी समिति में ‘अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद के उन्मूलन के उपाय’ विषय पर मंगलवार को भारत का राष्ट्रीय वक्तव्य दिया। देब 15 सांसद के उस प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा हैं जो संयुक्त राष्ट्र की कार्यप्रणाली से परिचित होने के लिए आयोजित एक सप्ताह के कार्यक्रम में भाग लेने यहां पहुंचा है।त्रिपुरा के पूर्व मुख्यमंत्री देब ने अपने संबोधन में जम्मू-कश्मीर का उल्लेख करने वाले ओआईसी के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, ‘‘अब मैं ओआईसी के अध्यक्ष की ओर से दिए गए उस बयान का भी जवाब देना चाहता हूं जिसमें पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकवादी ढांचे के खिलाफ भारत की लक्षित और संयमित कार्रवाई का उल्लेख किया गया है। भारत के खिलाफ आतंकवादी हमलों की इन्हीं स्थानों से योजना बनाई गई और उन्हें निर्देशित किया गया।’’ देब ने कहा, ‘‘यह खेदजनक है कि यह बयान देने वाले लोग तथ्य और कल्पना के बीच तथा पीड़ित और दोषी के बीच फर्क नहीं कर पा रहे।’’ उन्होंने कहा कि भारत को पाकिस्तान से होने वाले सीमा पार आतंकवाद से अपने लोगों की रक्षा करने का अधिकार है और आतंकवाद में शामिल होने वालों को इसके परिणाम भुगतने होंगे। देब ने ओआईसी द्वारा केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर का ‘‘अनुचित उल्लेख’’ किए जाने भी आलोचना करते हुए कहा, ‘‘ओआईसी के अध्यक्ष के लिए बेहतर होगा कि वह पाकिस्तान द्वारा, खासकर रावलकोट में किए गए अवैध कब्जे पर ध्यान दें जहां अंधाधुंध हत्याएं, बर्बर हिंसा और वहां रहने वाले लोगों को बुनियादी अधिकारों से वंचित किया जाना साफ दिखाई देता है।इस तरह जानबूझकर आंखें मूंदना केवल कट्टरता और असहिष्णुता को दर्शाता है।’’ पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में पिछले कई महीनों से 12 विवादित शरणार्थी सीट को लेकर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं जिनके खिलाफ सुरक्षा बलों ने कार्रवाई की और हाल में तथाकथित विधानसभा के लिए हुए चुनावों में धांधली के आरोप भी लगे। संयुक्त राष्ट्र महासभा की कानूनी मामलों से संबंधित छठी समिति में ओआईसी की ओर से सऊदी अरब ने यह बयान दिया था। ओआईसी ने ‘‘दक्षिण एशिया में सैन्य तनाव बढ़ने’’ और ‘‘पाकिस्तान में कई स्थानों पर किए गए अनुचित हमलों’’ का उल्लेख किया लेकिन उसने भारत का नाम नहीं लिया।भारत ने पिछले साल मई में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू कर पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकवादी ढांचे को निशाना बनाया था। यह कार्रवाई जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में पिछले साल 22 अप्रैल को हुए जघन्य आतंकवादी हमले के जवाब में की गई थी जिसमें 26 आम नागरिक मारे गए थे। यह हमला ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ ने किया था, जो पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का मुखौटा संगठन है।ओआईसी के बयान में जम्मू-कश्मीर पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों का भी उल्लेख किया गया। देब ने कहा कि भारत अपने ‘‘कड़वे अनुभव’’ से इस बात को समझता है कि आतंकवाद का खतरा केवल सैद्धांतिक नहीं, बल्कि ‘‘लगातार और रोजमर्रा की वास्तविकता’’ है। उन्होंने कहा, ‘‘हमारे लोग सीमा पार आतंकवाद का दशकों से सामना कर रहे हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘पहलगाम आतंकवादी हमला हमारी संप्रभुता पर सोची-समझी चोट था।इसकी योजना बनाने और इसे अंजाम देने का काम उन नेटवर्क ने किया जिन्हें हमारी पश्चिमी सीमा के पार से अब भी सरकारी संरक्षण, सुरक्षित ठिकाने और सामग्री एवं साजो-सामान संबंधी सहायता मिलती है।’’ देब ने कहा कि सीमा पार आतंकवाद समेत आतंकवाद का हर रूप मानवता के लिए सबसे गंभीर खतरों में से एक है और इसका अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा, आर्थिक प्रगति, लोकतांत्रिक व्यवस्था तथा मानवाधिकारों पर असर पड़ता है। उन्होंने कहा, ‘‘यह हर मनुष्य के सबसे बुनियादी मानवाधिकार-जीवन के अधिकार- पर हमला करता है। आतंकवाद संयुक्त राष्ट्र के मूल्यों के विपरीत है।आम नागरिकों को जानबूझकर निशाना बनाए जाने को किसी भी तरह उचित नहीं ठहराया जा सकता। अच्छे और बुरे आतंकवाद के बीच कोई फर्क नहीं है।’’ देब ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की उस टिप्पणी का उल्लेख किया कि भारत के लिए आतंकवाद की एक घटना भी अस्वीकार्य है और इसमें एक व्यक्ति की जान जाना भी बहुत बड़ी क्षति है। उन्होंने कहा कि भारत आतंकवादी हमलों को मानवता पर हमला मानता है।उन्होंने कहा कि आतंकवादी संगठन भर्ती करने, कट्टरपंथ फैलाने, दुष्प्रचार करने, हमलों की योजना बनाने और आतंकवाद के वित्तपोषण के लिए उभरती प्रौद्योगिकियों का तेजी से इस्तेमाल कर रहे हैं। देब ने कहा, ‘‘इन प्रौद्योगिकियों के जरिए पहचान छिपाना आसान होता है और इनकी वैश्विक पहुंच तथा तेज गति आतंकवादियों को कानून प्रवर्तन एजेंसियों से बच निकलने और कमजोर युवाओं को निशाना बनाने में मदद करती है।’’ भारत ने वैश्विक आतंकवाद-रोधी प्रयासों में एक ‘‘प्रमुख कमी’’ की ओर भी ध्यान दिलाते हुए कहा कि 1996 में भारत द्वारा मसौदा पेश किए जाने के बावजूद अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक सम्मेलन (सीसीआईटी) अब तक अस्तित्व में नहीं आया है। देब ने कहा, ‘‘भारत दोहराता है कि सीसीआईटी को शीघ्र अंतिम रूप दिए जाने से आतंकवाद का व्यापक रूप से मुकाबला करने के लिए अंतरराष्ट्रीय कानूनी ढांचा मजबूत होगा।

    PM मोदी ने कैप्टन स्मित मछार की बहादुरी को सराहा, बोले- दुनिया 'Made in India' प्लेन की चर्चा भी करेगी

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने नेतृत्व के 25 साल पूरे होने के मौके पर भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मछार की बहादुरी की तारीफ की. उन्होंने कहा कि आज पूरी दुनिया एक भारतीय पायलट की चर्चा कर रही है और वह दिन भी आएगा, जब दुनिया ‘Made in India’ प्लेन की चर्चा करेगी.

    तमिलनाडु में CM विजय का 'कामराज दांव'! DMK को सीधी चुनौती, दक्षिण में नाडर समुदाय पर नजर और BJP समर्थकों को दिखा बड़ा अवसर

    तमिलनाडु की राजनीति में बड़े उलटफेर के संकेत मिल रहे हैं. अभिनेता से राजनेता बने और राजनीति में आने के महज दो साल के भीतर सत्ता में पहुंचे मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने एक बड़ा राजनीतिक दांव खेला है। उनकी सरकार द्वारा राज्य की महत्वपूर्ण नाश्ता योजना (Breakfast Scheme) का नाम बदलकर पूर्व मुख्यमंत्री व कांग्रेस के दिग्गज नेता के. कामराज के नाम पर रखने का फैसला सिर्फ एक प्रशासनिक रीब्रांडिंग नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक गहरी और सोची-समझी रणनीति छिपी है।द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) द्वारा शुरू की गई इस फ्लैगशिप योजना के केंद्र में नाडर समुदाय और शिक्षा सुधारों के आइकन कामराज को लाकर, विजय द्रविड़ राजनीति के स्थापित गढ़ पर सीधा प्रहार कर रहे हैं। इसके साथ ही वे दक्षिणी तमिलनाडु में मजबूत चुनावी प्रभाव रखने वाले नाडर समुदाय के बीच अपनी पैठ बना रहे हैं।इन घटनाक्रमों पर नज़र रखने वाले भारतीय जनता पार्टी (BJP) समर्थकों के लिए, यह कदम पार्टी को कामराज को सिर्फ़ एक तमिल राजनीतिक आइकन से बदलकर एक बड़े OBC प्रतीक के तौर पर पेश करने और 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले उनके इर्द-गिर्द एक गठबंधन बनाने का मौका भी देता है। BJP के एक ऐसे ही समूह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से केंद्र सरकार की किसी योजना का नाम के. कामराज के नाम पर रखने की अपील भी की है।22 सितंबर को, CM विजय के नेतृत्व वाली तमिलनाडु सरकार ने 'मुख्यमंत्री ब्रेकफास्ट स्कीम' का नाम बदलकर 'पेरुंथलैवर कामराजर ब्रेकफास्ट स्कीम' करने का आदेश जारी किया। इस प्रोग्राम को पिछली DMK सरकार (एम.के. स्टालिन के नेतृत्व में) ने सितंबर 2022 में सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में कक्षा 1 से 5 तक के छात्रों के लिए शुरू किया था।अभिनेता से राजनेता बने विजय की पार्टी 'तमिलगा वेट्री कषगम' (TVK) के नेतृत्व वाली सरकार के सत्ता में आने के बाद, 15 जुलाई को कामराज की जयंती पर इस योजना का विस्तार कक्षा 6 से 8 तक के छात्रों के लिए किया गया। इसके बाद योजना के साथ कामराज का नाम जोड़ने का फ़ैसला, पहले से चल रही कल्याणकारी योजना में एक राजनीतिक पहलू भी जोड़ता है। 1956 में, कामराज ने मद्रास राज्य में स्कूल मील प्रोग्राम (मिड-डे मील जैसी योजना) का पूरे राज्य में विस्तार करने की पहल की थी, जिसके तहत गरीब प्राइमरी स्कूल के बच्चों को दोपहर का मुफ़्त भोजन दिया जाता था।'टीम RD मोदीजी फॉर 2029' का नेतृत्व करने वाले रवींद्रन दुरईसामी के लिए, विजय का कामराज को चुनने का फ़ैसला कोई इत्तेफ़ाक नहीं, बल्कि सोच-समझकर लिया गया कदम है। "अंबा शंकर कमीशन (1982–1985) के अनुसार, नादर [तमिलनाडु में] दूसरी सबसे बड़ी OBC कम्युनिटी है। आज लगभग 40% नादर ईसाई हैं। यह कम्युनिटी CM विजय की ओर आकर्षित है, जो खुद एक ईसाई हैं। अब अपनी ब्रेकफ़ास्ट स्कीम का नाम कामराज- जो नादर कम्युनिटी के नेता और तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री थे- के नाम पर रखकर, विजय DMK को चिढ़ाने और साथ ही हिंदू नादरों को लुभाने की कोशिश कर रहे हैं," दुरईसामी ने इंडिया टुडे डिजिटल को बताया।रवींद्रन दुरईसामी 'टीम RD मोदीजी फॉर PM 2029' के कन्वीनर हैं, जो गुजरात के 'भारत पदक' की एक अधिकृत यूनिट है। 21 सदस्यों वाली यह टीम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सामाजिक समस्याओं और अन्य राजनीतिक घटनाक्रमों के बारे में जानकारी और सलाह देने का काम करती है।दुरईसामी ने इंडिया टुडे डिजिटल को बताया कि उनकी 'टीम RD मोदीजी फॉर PM 2029' ने PM मोदी से कर्नाटक में जनता दल (सेक्युलर) के साथ गठबंधन करने और 2024 का लोकसभा चुनाव मिलकर लड़ने का आग्रह किया था। उनका तर्क था कि इस तरह का गठबंधन कांग्रेस के खिलाफ BJP की चुनौती को मजबूत कर सकता है। आखिरकार, BJP और JD(S) ने 2024 के लोकसभा चुनाव के लिए चुनाव-पूर्व गठबंधन किया, जिसमें JD(S) ने कर्नाटक में तीन सीटों पर चुनाव लड़ा।CM विजय कामराज का इस्तेमाल राजनीतिक संदेश के तौर पर कर रहे हैंकामराज का राजनीतिक महत्व सिर्फ़ तमिलनाडु में कांग्रेस का नेतृत्व करने वाले मुख्यमंत्री के तौर पर उनके रिकॉर्ड से कहीं ज़्यादा है। वे नादर कम्युनिटी और द्रविड़ियन पार्टियों से अलग राजनीतिक परंपरा से गहराई से जुड़े रहे हैं; द्रविड़ियन पार्टियों का दशकों से तमिलनाडु पर दबदबा रहा है।कामराज की राजनीतिक विरासत कांग्रेस, ग्रामीण विकास, शिक्षा और कल्याण के इर्द-गिर्द बनी थी। राज्य में उनकी छवि का एक खास राजनीतिक फ़ायदा भी है। द्रविड़ियन आंदोलन की विचारधारा वाली शब्दावली को सीधे अपनाए बिना भी उनका ज़िक्र किया जा सकता है। इससे वह विजय के लिए खास तौर पर अहम हो जाते हैं, जो पारंपरिक DMK-AIADMK ढांचे से हटकर TVK की राजनीतिक पहचान बनाने की कोशिश कर रहे हैं। इस ढांचे पर पूरी तरह से द्रविड़ राजनीति का दबदबा रहा है।दुरईसामी ने इंडिया टुडे डिजिटल को बताया, "विजय 'द्रविड़-विरोधी' एजेंडे पर काम कर रहे हैं। तमिलनाडु की राजनीति में, जब कामराज मुख्यमंत्री थे और करुणानिधि व MGR ने DMK शुरू की थी, तब पूरी राजनीति 'द्रविड़ बनाम द्रविड़-विरोधी' के इर्द-गिर्द घूमती थी। DMK द्रविड़ राजनीति में अपना दबदबा बनाने में पूरी तरह सफल रही और उसने कामराज को हाशिए पर धकेल दिया। अब विजय DMK के खिलाफ़ वही दांव खेलने की कोशिश कर रहे हैं।"यह तमिलनाडु के मुख्यमंत्री का एक बड़ा राजनीतिक दांव है, जो राजनीति में आने के दो साल के भीतर ही सत्ता में आ गए थे। DMK लंबे समय से तमिलनाडु में द्रविड़ विचारधारा की प्रमुख राजनीतिक ताकत रही है। विजय के पास कांग्रेस के दौर के कामराज जैसा संगठनात्मक इतिहास या वैचारिक विरासत नहीं है, लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री का ज़िक्र करने से उन्हें राज्य के स्थापित राजनीतिक ढांचे के सामने खुद को पेश करने का एक तरीका मिल जाता है।इससे विजय को द्रविड़ दिग्गजों का मुकाबला करने में मदद मिलती है; वे यह बता सकते हैं कि तमिलनाडु का राजनीतिक इतिहास द्रविड़ आंदोलन से शुरू नहीं हुआ था और कल्याणकारी राजनीति को एक वैकल्पिक विरासत से भी जोड़ा जा सकता है।TVK की राजनीतिक छवि उन पांच हस्तियों से प्रेरित है जो तमिलनाडु और भारत के सामाजिक और राजनीतिक इतिहास के अलग-अलग पहलुओं का प्रतिनिधित्व करती हैं। ये हस्तियां हैं - पेरियार ईवी रामासामी, के. कामराज, बीआर अंबेडकर, रानी वेलु नचियार और अंजालाई अम्मल। अपनी पार्टी की स्थापना के बाद से ही विजय ने कामराज को साफ-सुथरे शासन और शिक्षा पर उनके ज़ोर के लिए अपना आदर्श माना है।तमिलनाडु में नाडर समुदाय का गणित क्यों अहम है?विजय के नाडर समुदाय से जुड़े गणित का एक खास पहलू दक्षिणी तमिलनाडु से जुड़ा है। TVK का आधार मुख्य रूप से चेन्नई और राज्य के मध्य हिस्सों में है।राजनीतिक जानकारों का अनुमान है कि कई दक्षिणी ज़िलों - खासकर कन्याकुमारी, तिरुनेलवेली, थूथुकुडी, तेनकासी और विरुधुनगर - में नाडर समुदाय की आबादी मतदाताओं का एक बड़ा हिस्सा है। हर चुनाव क्षेत्र में इनका प्रभाव अलग-अलग होता है, और कुछ इलाकों में इनकी आबादी बहुत ज़्यादा है।दुरईसामी का कहना है कि राज्य भर में इस समुदाय का चुनावी वज़न लगभग 6% से 8% है, साथ ही वे दक्षिणी तमिलनाडु में इनकी ज़्यादा आबादी पर भी ज़ोर देते हैं।विजय के लिए, यह समुदाय एक दिलचस्प राजनीतिक संभावना पेश करता है। वे खुद ईसाई हैं, और ईसाई नाडर इस समुदाय का एक अहम हिस्सा हैं। साथ ही, कामराज हिंदू नाडरों के साथ एक पुल का काम करते हैं; हो सकता है कि वे धर्म के आधार पर विजय से न जुड़ें, लेकिन उनके कल्याणकारी एजेंडे का समर्थन ज़रूर करें। यहीं पर स्कूल-मीट (मिड-डे मील) योजना का नाम बदलना, महज़ एक श्रद्धांजलि देने से कहीं ज़्यादा राजनीतिक रूप से दिलचस्प हो जाता है। मोदी के समर्थक विजय से खतरा और OBC को एकजुट करने का मौका देख रहे हैंदुरईसामी का संगठन, 'टीम RD मोदीजी फॉर 2029', कामराज को एक राष्ट्रीय OBC नेता के तौर पर पेश कर रहा है, जो BJP को एक बड़ा सामाजिक गठबंधन बनाने में मदद कर सकते हैं।दुरईसामी ने इंडिया टुडे डिजिटल को बताया, "सिर्फ़ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ही कामराज को एक महान नेता के तौर पर पहचाना।"दुरईसामी ने कहा कि टीम ने मोदी के सामने केंद्र सरकार की किसी योजना का नाम कामराज के नाम पर रखने का प्रस्ताव भी रखा है। प्रधानमंत्री को भेजे गए संदेश में, समूह ने तर्क दिया कि ऐसा कदम BJP को तमिलनाडु से बाहर के OBC समुदायों से जोड़ने में मदद कर सकता है।यह प्रस्ताव काफी व्यापक है। इसमें नादर, एझावा, भंडारी, जायसवाल, अहलूवालिया, गौड़ और इडिगा जैसे समुदायों को कामराज की विरासत के इर्द-गिर्द एकजुट करने का सुझाव दिया गया है। तर्क यह है कि कामराज की विरासत अलग-अलग OBC समुदायों को जोड़ने वाले पुल का काम कर सकती है।BJP, जो तमिलनाडु और केरल में अपनी पैठ बढ़ाने की कोशिश कर रही है, दक्षिणी राज्यों में अलग-अलग OBC समुदायों तक पहुँचकर अपने सामाजिक आधार को व्यापक बनाने की कोशिश कर रही है।यह एक महत्वाकांक्षी प्रस्ताव है, क्योंकि राज्यों और समुदायों के बीच जातिगत पहचान और राजनीतिक झुकाव में काफी अंतर होता है। लेकिन यह प्रस्ताव दिखाता है कि कैसे मोदी के कुछ समर्थक विजय की कामराज से जुड़ी पहल को OBC को एकजुट करने की व्यापक रणनीति के नज़रिए से देख रहे हैं। अगर विजय DMK के वैचारिक दबदबे को चुनौती देने के लिए कामराज का इस्तेमाल कर रहे हैं, तो BJP समर्थक उसी आइकन को DMK-विरोधी और OBC का एक बड़ा गठबंधन बनाने के संभावित ज़रिया के तौर पर देखते हैं।विजय के लिए, कामराज DMK को चिढ़ाने का एक तरीका हैं। वहीं, BJP में मोदी के समर्थकों के लिए, कामराज 2029 तक पहुँचने के लिए एक संभावित राजनीतिक पुल बन सकते हैं। Read Latest National News in Hindi only on Prabhasakshi

    '250 रुपये में बढ़ेगी पॉवर', कमजोर मर्दों को निशाना बनाने की कहानी 

    बरेली पुलिस ने नकली यौनवर्धक दवाएं बेचने वाले गिरोह का खुलासा किया है. पुलिस के मुताबिक कक्षा 8 तक पढ़ा आरोपी खुद को डॉक्टर बताकर Instagram पर ‘Herbal and Jari Booti’ नाम से ग्राहकों को फंसाता था. दो आरोपी गिरफ्तार हैं, जबकि एक फरार है. पुलिस ने कंप्यूटर, मोबाइल, कथित नकली दवाएं, फर्जी लाइसेंस और 1.99 लाख रुपये बरामद किए हैं.

    Delhi Weather: न्यूनतम पारा सामान्य से ऊपर चढ़कर 25 डिग्री पहुंचा, AQI 134 दर्ज

    नयी दिल्ली, सात अक्टूबर दिल्ली में बुधवार को न्यूनतम तापमान 25 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो इस मौसम के सामान्य तापमान से 2.7 डिग्री सेल्सियस अधिक है। अधिकतम तापमान 36.8 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने की संभावना है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के अनुसार सफदरजंग केंद्र में न्यूनतम तापमान 25 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 2.7 डिग्री सेल्सियस अधिक है।पालम में न्यूनतम तापमान 22.5 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से 0.2 डिग्री सेल्सियस अधिक है। मौसम विभाग के मुताबिक, लोधी रोड में न्यूनतम तापमान 23.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 2.8 डिग्री सेल्सियस अधिक है। रिज में न्यूनतम तापमान 20 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से 2.5 डिग्री सेल्सियस कम है, जबकि आया नगर में यह 23.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 1.5 डिग्री सेल्सियस अधिक है।केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के अनुसार, बुधवार को दिल्ली का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 134 दर्ज किया गया, जो ‘मध्यम’ श्रेणी में आता है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के अनुसार, एक्यूआई को शून्य से 50 के बीच ‘अच्छा’, 51 से 100 के बीच ‘संतोषजनक’, 101 से 200 के बीच ‘मध्यम’, 201 से 300 के बीच ‘खराब’, 301 से 400 के बीच ‘बहुत खराब’ और 401 से 500 के बीच ‘गंभीर’ माना जाता है।

    श्रेयस अय्यर ने रच दिया नया इतिहास, कोहली का रिकॉर्ड ध्वस्त

    श्रेयस अय्यर ने वेस्टइंडीज के खिलाफ पहले T20I में शानदार शतक लगाकर विराट कोहली का बड़ा रिकॉर्ड तोड़ दिया. अय्यर लक्ष्य का पीछा करते हुए T20I शतक लगाने वाले पहले भारतीय कप्तान बन गए हैं.

    Prabhasakshi NewsRoom: Operation Firewall से बड़ा खुलासा, Indian Navy की जानकारी Pakistan तक पहुँचाई जा रही थी, 13 नौसैनिक जाँच के घेरे में

    आंध्र प्रदेश में पाकिस्तान से जुड़े एक संदिग्ध जासूसी नेटवर्क का बड़ा खुलासा हुआ है। इसके बाद सुरक्षा एजेंसियों ने देशभर में विदेशी जासूसी गतिविधियों को पकड़ने और रोकने के लिए बड़ा अभियान शुरू किया है। आंध्र प्रदेश के काउंटर इंटेलिजेंस विभाग ने ‘ऑपरेशन फायरवॉल-2026’ के तहत 10 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में एक साथ छापेमारी की है। इस मामले में 18 लोग जांच के घेरे में हैं, जिनमें 13 नौसेना से जुड़े बताए जा रहे हैं। अब तक दो संदिग्धों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि बाकी लोगों की भूमिका की जांच जारी है। मामला इसलिए बेहद गंभीर माना जा रहा है क्योंकि जांच की कड़ियां विशाखापत्तनम स्थित महत्वपूर्ण पूर्वी नौसैनिक कमान और वहां मौजूद रक्षा प्रतिष्ठानों से जुड़ी हैं।जांच एजेंसियों को संदेह है कि संवेदनशील और गोपनीय रक्षा सूचनाएं पाकिस्तान से जुड़े खुफिया अधिकारियों तक पहुंचाई गईं। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि संदिग्धों के बीच संपर्क के लिए गोपनीय संचार माध्यमों, सोशल मीडिया और अन्य डिजिटल साधनों का इस्तेमाल किया गया। तलाशी के दौरान कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण भी जब्त किए गए हैं। आंध्र प्रदेश पुलिस ने इस मामले में 2 सितंबर को विजयवाड़ा के काउंटर इंटेलिजेंस थाने में मामला दर्ज किया था। इसमें भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के साथ गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम और आधिकारिक गोपनीयता कानून की धाराएं लगाई गई हैं। जांचकर्ताओं का कहना है कि मामला केवल सूचनाओं के आदान-प्रदान तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी संभावित कड़ियां राष्ट्रीय सुरक्षा, संप्रभुता और देश की अखंडता से जुड़ी हुई हैं।बताया जा रहा है कि पहली गिरफ्तारी विशाखापत्तनम से हुई। नौसेना अधिकारियों के लिए अनुबंध पर वाहन चालक के रूप में काम करने वाले अन्नम साई वरप्रसाद को गिरफ्तार किया गया है। आरोप है कि उसने नौसेना और रक्षा प्रतिष्ठानों से संबंधित संवेदनशील जानकारी पाकिस्तान से जुड़े एक खुफिया अधिकारी तक पहुंचाई और इसके बदले धन प्राप्त किया। उसे अदालत में पेश किए जाने के बाद 14 अक्टूबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया और वह विशाखापत्तनम जिला जेल में है।दूसरी गिरफ्तारी तमिलनाडु के कोयंबटूर में हुई। 31 वर्षीय नौसेना कर्मी प्रदीप मुखर्जी को तीन अक्टूबर को नौसेना के प्रशिक्षण प्रतिष्ठान आईएनएस अग्रणी से पकड़ा गया। प्रदीप मुखर्जी वर्ष 2014 में नौसेना में शामिल हुआ था और विशाखापत्तनम स्थित पूर्वी नौसैनिक कमान से जुड़ा था। अधिकारियों के अनुसार वह सोशल मीडिया के जरिए एक महिला पाकिस्तानी खुफिया संचालक के संपर्क में आया था। जांच एजेंसियों का आरोप है कि इसी संपर्क का इस्तेमाल संवेदनशील नौसैनिक सूचनाएं हासिल करने के लिए किया गया।इसके अलावा, जांच में इस मामले का एक और गंभीर पहलू सामने आया है। अधिकारियों के अनुसार, संदिग्धों को फंसाने के लिए झूठी सोशल मीडिया पहचान, दोस्ती और रिश्तों का जाल तथा पैसों का लालच जैसे तरीके अपनाए गए। इसके अलावा भारतीय मोबाइल नंबरों और मैसेजिंग एप चालू करने के लिए मिलने वाले ओटीपी पासवर्ड का भी इस्तेमाल किया गया। कुछ लेन-देन में वर्चुअल करेंसी और बिचौलियों की भूमिका की भी जांच हो रही है। प्रदीप मुखर्जी पर आरोप है कि उसने पाकिस्तान से जुड़े एक संचालक के लिए मैसेजिंग सर्विस वाला अकाउंट चालू कराने के लिए ओटीपी पासवर्ड शेयर किया और उसके साथ संवेदनशील सूचनाओं का आदान-प्रदान किया।बताया जा रहा है कि ‘ऑपरेशन फायरवॉल-2026’ के तहत 12 विशेष दलों ने आंध्र प्रदेश के अलावा केरल, महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात, गोवा, दिल्ली, तमिलनाडु, छत्तीसगढ़ और बिहार में कार्रवाई की। इन दलों ने संबंधित राज्यों के आतंकवाद निरोधक दस्तों, स्थानीय पुलिस और नौसेना अधिकारियों के साथ समन्वय किया। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि 18 संदिग्धों में से कितने लोग वास्तव में इस कथित जासूसी तंत्र का हिस्सा थे और कितनी संवेदनशील सूचनाएं विदेशी खुफिया तंत्र तक पहुंचीं। पुलिस ने साफ किया है कि दो आरोपियों की भूमिका प्रथम दृष्टया स्थापित होने के बाद गिरफ्तारी की गई है, जबकि बाकी 16 लोगों के डिजिटल संपर्क, आर्थिक लेनदेन, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और विदेशी खुफिया संचालकों से संभावित संबंधों की जांच जारी है। बहरहाल, राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े इस मामले में आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां तथा चौंकाने वाले खुलासे सामने आने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।

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