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    असम में बाढ़, जम्मू-कश्मीर में लैंडस्लाइड... कई राज्यों में बढ़ा खतरा

    बारिश की हर नई बौछार के साथ खतरा बढ़ता जा रहा है. असम में बाढ़ ने हजारों घरों को घेर लिया है, जबकि जम्मू-कश्मीर और नागालैंड में लैंडस्लाइड लोगों की जान पर भारी पड़ रहा है.

    'घड़ियाली आंसू बहा रही सपा-क्रांगेस, नकलमाफियां इन्हीं की देन', CM योगी

    फतेहपुर में सीएम योगी ने पिछली सरकारों पर निशाना साधा है. नीट पेपर लीक के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर छात्रों का सर्मथन कर रहे कांग्रेस-सपा पर सीेएम ने कहा कि नकल माफियां इनकी ही सरकारों की देन हैं. कांग्रेस-सफा झूठा सर्मथन कर घड़ियाली आंसू बहा रही है.

    शिक्षा व्यवस्था पर Rahul Gandhi की हुंकार: Dharmendra Pradhan का इस्तीफा पहला कदम, PM Modi अब भी माफी मांगें

    विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने शनिवार को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े को भारत की शिक्षा व्यवस्था को फिर से बनाने की दिशा में एक प्रतीकात्मक और अहम कदम बताया। साथ ही, उन्होंने छात्रों पर की गई कार्रवाई के लिए ज़िम्मेदार अधिकारियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से माफ़ी की मांग की। धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफ़े की घोषणा की। यह एक दुर्लभ मामला है जब मोदी सरकार के किसी वरिष्ठ मंत्री ने लगातार हो रहे विरोध-प्रदर्शनों और राजनीतिक दबाव के बीच अपने पद से इस्तीफ़ा दिया है। इसे भी पढ़ें: बिट्टू की एंट्री से बदली पंजाब की चुनावी बिसात, नया समीकरण गढ़ने में भाजपा कामयाबराहुल गांधी ने कहा कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफ़ा हमारी शिक्षा व्यवस्था को फिर से बनाने की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम है। यह एक प्रतीकात्मक कदम है क्योंकि वे खुद एक प्रतीक थे, लेकिन फिर भी यह एक बड़ा कदम है। मैं हर उस छात्र और युवा को बधाई देना चाहता हूँ जो सड़कों पर उतरे और लोकतंत्र के लिए, देश के भविष्य के लिए और संविधान की रक्षा के लिए लड़े। मुझे आप पर गर्व है। बहुत बढ़िया... मैं सरकार को याद दिलाना चाहता हूँ: अभी भी दो माँगें बाकी हैं।उन्होंने विरोध प्रदर्शनों में शामिल होने वाले छात्रों और युवाओं को बधाई देते हुए कहा कि मैं हर उस छात्र और युवा को बधाई देना चाहता हूँ जो सड़कों पर उतरे और लोकतंत्र के लिए लड़े, देश के भविष्य के लिए लड़े और संविधान की रक्षा की। मुझे आप पर गर्व है। बहुत बढ़िया। गांधी ने कहा कि इस्तीफ़े से समाज के दूसरे वर्गों को भी एक संदेश गया है। उन्होंने कहा कि यह समाज के दूसरे हिस्सों - किसानों, मज़दूरों, ग़रीबों और उन सभी लोगों के लिए भी एक संकेत है जिन पर यह सरकार हमला कर रही है और उनका दमन कर रही है। डटकर खड़े होने में ही समझदारी और हिम्मत है। आइए, इस सरकार से छुटकारा पाएं - यह सरकार जो भारत पर हमला कर रही है, हमारे संविधान को नष्ट कर रही है और हमारी सभी संस्थाओं पर कब्ज़ा कर रही है। इसे भी पढ़ें: मोदी सरकार के 'मिस्टर डिपेंडेबल', आखिर क्यों धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देंगे? वजह समझिए!कांग्रेस नेता ने कहा कि प्रधान के इस्तीफ़े के बावजूद दो मांगें अभी भी पूरी होनी बाकी हैं। गांधी ने कहा कि मैं सरकार को याद दिलाना चाहता हूँ कि अभी भी दो मांगें बाकी हैं। पहली और सबसे अहम मांग यह है कि जिन लोगों ने भी हमारे छात्रों पर उंगली उठाई, उन्हें पीटा या उन पर गोली चलाई, उन्हें ज़िम्मेदार ठहराया जाना चाहिए। जिन लोगों ने इसे आयोजित किया और जिन्होंने इसे अंजाम दिया, उन सभी को सज़ा मिलनी चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री से माफ़ी की भी मांग की। देशभर की राजनीति, ताज़ा घटनाओं और बड़ी खबरों से जुड़े रहने के लिए पढ़ें  National News in Hindi केवल प्रभासाक्षी पर। 

    चेन्नई: मेंटल हॉस्पिटल में कत्ल के आरोपी की पीट-पीटकर हत्या

    तमिलनाडु के चेन्नई स्थित किलपॉक इंस्टीट्यूट ऑफ मेंटल हेल्थ में कोर्ट के आदेश पर भर्ती हत्या के आरोपी जाकिर की साथी मरीज अरविंदसामी ने कथित तौर पर पीट-पीटकर हत्या कर दी. पुलिस ने हत्या का केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है. पढ़ें पूरी कहानी.

    23 साल बाद सावन के सोमवार पर नागपंचमी का शुभ संयोग, जानें मुहूर्त

    ज्योतिषविदों के अनुसार, श्रावण शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि यानी नागपंचमी इस वर्ष 17 अगस्त, सोमवार को मनाई जाएगी. सावन सोमवार पर नागपंचमी का संयोग करीब 23 वर्ष पहले बना था. इससे पहले वर्ष 2003 में भी नागपंचमी सोमवार को पड़ी थी. अब लगभग 23 वर्ष बाद यह संयोग दोबारा बन रहा है, इसलिए इसे विशेष फलदायी माना जा रहा है.

    Iran-US के बीच मध्यस्थता कराने की कोशिश कर रहा Pakistan बुरा फँसा, Asim Munir की Secret Deal के खुलासे से चारों ओर हड़कंप

    पश्चिम एशिया में लगभग पाँच महीने से भड़की ईरान-अमेरिका जंग अब वैश्विक ऊर्जा, समुद्री व्यापार और महाशक्तियों की प्रतिष्ठा की निर्णायक लड़ाई बन चुकी है। इसी बीच पाकिस्तान एक बार फिर स्वयं को मध्यस्थ के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहा है, लेकिन उसका यह नया दांव शुरू से ही कमजोर दिखाई देता है। पहले भी अनेक कूटनीतिक मोर्चों पर संतुलन साधने में विफल रहा इस्लामाबाद अब चीन के इशारे पर ईरान और अमेरिका के बीच रुकी हुई वार्ता को पुनर्जीवित करने की कवायद कर रहा है। ईरान के गृह मंत्री इस्कंदर मोमेनी की हालिया पाकिस्तान यात्राएं और शीर्ष नेतृत्व के साथ हुई बैठकों ने इस प्रयास को गति तो दी है, लेकिन ज़मीनी हालात इसके बिल्कुल विपरीत हैं। एक ओर ईरान समर्थित हूती संगठन सऊदी अरब के खिलाफ मोर्चा खोल चुका है, दूसरी ओर अमेरिका लगातार सैन्य दबाव बढ़ा रहा है। ऐसे में सऊदी अरब, चीन, ईरान और अमेरिका, चारों के परस्पर विरोधी हितों के बीच फंसा पाकिस्तान किसी भी पक्ष का भरोसा पूरी तरह नहीं जीत पा रहा। पाकिस्तान भले मध्यस्थता का प्रयास कर रहा है, लेकिन संघर्ष की लगातार बढ़ती तीव्रता, समुद्री नाकाबंदी और क्षेत्रीय ध्रुवीकरण को देखते हुए यह पहल सफल होने की संभावना बेहद क्षीण दिखाई देती है।दिलचस्प बात यह भी है कि पाकिस्तान की यह नई कूटनीतिक सक्रियता ऐसे समय सामने आई है, जब उसके सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर को लेकर एक और बड़ा दावा चर्चा में बना हुआ है। हम आपको बता दें कि एक अंतरराष्ट्रीय समाचार रिपोर्ट के अनुसार, मुनीर ने इसी वर्ष मार्च में सऊदी अरब और ईरान के बीच एक कथित गुप्त युद्धविराम समझौता कराने में भूमिका निभाई थी। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि यह समझौता ईरानी तेल के अनौपचारिक निर्यात को सुगम बनाए रखने के बदले कराया गया, जिसमें ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड से जुड़े शीर्ष अधिकारियों और पाकिस्तानी सैन्य प्रतिष्ठान से जुड़े लोगों के आर्थिक हित भी जुड़े बताए गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, इस कथित समझौते के बाद कई महीनों तक सऊदी अरब पर ईरानी हमले लगभग थम गए थे, लेकिन हाल में फिर मिसाइल हमला होने के बाद मुनीर ने कथित तौर पर तेहरान को अपने साझा तेल कारोबार पर असर पड़ने की चेतावनी दी, जिसके बाद हमले रुक गए। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित पक्षों ने सार्वजनिक रूप से इन्हें स्वीकार भी नहीं किया है, लेकिन यदि इन रिपोर्टों में दम है तो यह संकेत मिलता है कि पाकिस्तान की मध्यस्थता केवल शांति स्थापना तक सीमित नहीं, बल्कि उसके पीछे सामरिक, आर्थिक और ऊर्जा हितों का जटिल ताना-बाना भी मौजूद है। यही कारण है कि इस्लामाबाद की मौजूदा कूटनीतिक पहल को कई विश्लेषक निष्पक्ष शांति प्रयास की बजाय क्षेत्रीय शक्ति संतुलन और अपने रणनीतिक हितों को साधने की कोशिश के रूप में भी देख रहे हैं।इसे भी पढ़ें: Analysis Pakistan Nuclear History: पाकिस्तान के परमाणु इतिहास का US-सऊदी अरब न्यूक्लियर डील पर क्या पड़ेगा असर?वैसे हम आपको बता दें कि पाकिस्तान की कूटनीतिक कवायद बेहद कठिन संतुलन की मांग करती है। एक ओर वह सऊदी अरब की आर्थिक सहायता पर निर्भर है, वहीं दूसरी ओर चीन उसका सबसे बड़ा रणनीतिक और आर्थिक साझेदार है। उधर, ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के विरुद्ध नौसैनिक नाकाबंदी की घोषणा कर दी है और तेल टैंकरों को निशाना बनाकर पूरे क्षेत्र में तनाव कई गुना बढ़ा दिया है। ऐसे में पाकिस्तान यदि ईरान के अधिक निकट दिखाई देता है तो सऊदी अरब नाराज हो सकता है, जबकि चीन चाहता है कि किसी भी कीमत पर क्षेत्र में शांति स्थापित हो ताकि उसके व्यापारिक और ऊर्जा हित सुरक्षित रह सकें।हम आपको बता दें कि चीन की सबसे बड़ी चिंता ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार है। होर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ते संकट और लाल सागर में अस्थिरता ने वैश्विक तेल आपूर्ति को गंभीर खतरे में डाल दिया है। चीन ईरान का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार और उसके कच्चे तेल का प्रमुख खरीदार है। यदि होर्मुज और लाल सागर दोनों मार्ग बाधित होते हैं तो चीन की अर्थव्यवस्था और उसकी वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर सीधा असर पड़ सकता है। यही कारण है कि बीजिंग पाकिस्तान की मध्यस्थता का खुलकर समर्थन कर रहा है और क्षेत्र में तनाव कम कराने के लिए सक्रिय कूटनीतिक प्रयासों में जुटा हुआ है।दूसरी ओर अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव लगातार तेज होता जा रहा है। अमेरिकी हवाई हमलों के जवाब में ईरान ने क्षेत्र में स्थित अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान और हूती विद्रोहियों को कड़ी सैन्य कार्रवाई की चेतावनी देते हुए ऊर्जा प्रतिष्ठानों, रणनीतिक ठिकानों और अन्य महत्वपूर्ण लक्ष्यों पर हमले की संभावना भी जताई है। इसके बावजूद उन्होंने यह भी संकेत दिया है कि यदि गंभीर वार्ता की संभावना बनती है तो समझौते का रास्ता अब भी खुला है। यही विरोधाभास इस पूरे संकट को और अधिक जटिल बना रहा है।सऊदी अरब पर बढ़ते हमलों ने स्थिति को और विस्फोटक बना दिया है। यमन से दागी गई बैलिस्टिक मिसाइलों को वायु रक्षा प्रणाली ने नष्ट कर दिया, जबकि हूती विद्रोहियों ने तेल टैंकरों और सामरिक ढांचे को निशाना बनाकर स्पष्ट संदेश दिया है कि वे लाल सागर में भी दबाव बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। यदि लाल सागर और होर्मुज दोनों समुद्री मार्ग लंबे समय तक बाधित रहते हैं तो वैश्विक तेल बाजार में भारी उथल-पुथल मचना तय है। पहले ही कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया जा चुका है, जिसका असर विश्व अर्थव्यवस्था और महंगाई पर पड़ सकता है।उधर, यमन भी एक बार फिर व्यापक युद्ध की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। वर्षों से ठहरे संघर्ष में अब नई सैन्य तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। हूती लड़ाके और सरकारी बल आमने-सामने तैनात हैं। संयुक्त राष्ट्र, ओमान और पाकिस्तान की मध्यस्थता के बावजूद समझौते की उम्मीद कमजोर पड़ती जा रही है। विश्लेषकों का मानना है कि हूती संगठन अब ईरान के साथ मिलकर सऊदी अरब और अमेरिका पर दबाव बढ़ाने के लिए समुद्री मार्गों को रणनीतिक हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहा है। यदि सऊदी अरब दोबारा बड़े पैमाने पर सैन्य हस्तक्षेप करता है तो पूरा क्षेत्र फिर से भीषण युद्ध की चपेट में आ सकता है।देखा जाये तो इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा सामरिक महत्व यह है कि समुद्री व्यापार मार्ग अब आधुनिक युद्ध का सबसे प्रभावी हथियार बनते जा रहे हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य और बाब-अल-मंदेब जैसे समुद्री मार्गों पर नियंत्रण का अर्थ केवल नौसैनिक बढ़त नहीं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, तेल की कीमतों और अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर प्रभावी पकड़ भी है। चीन इन मार्गों को खुला रखना चाहता है, अमेरिका ईरान के प्रभाव को सीमित करना चाहता है, जबकि ईरान और उसके सहयोगी इन समुद्री रास्तों को दबाव की रणनीति के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। पाकिस्तान इस पूरे शक्ति-संघर्ष में एक ऐसे मध्यस्थ के रूप में उभरने की कोशिश कर रहा है, जिसे एक साथ बीजिंग, तेहरान और रियाद, तीनों के हितों का संतुलन साधना है। यदि यह प्रयास विफल होता है तो पश्चिम एशिया का यह संघर्ष केवल क्षेत्रीय युद्ध नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और विश्व अर्थव्यवस्था को झकझोर देने वाले बहुआयामी संकट में बदल सकता है।

    ईरान युद्ध पर आया ट्रंप का नया बयान, देखें दुनिया की बड़ी खबरें

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और ईरान अपने झगड़े को खत्म करने के लिए बातचीत कर रहे हैं...लेकिन तेहरान अभी किसी समझौते के लिए तैयार नहीं हैं... देखते हैं क्या होता है. देखें दुनिया की बड़ी खबरें.

    110 विकेट, IPL में कमाल..., अब टीम इंडिया के लिए डेब्यू, कौन हैं यश ठाकुर?

    जिम्बाब्वे के खिलाफ दूसरे टी20 मुकाबले में भारत के लिए डेब्यू करने वाले तेज गेंदबाज यश ठाकुर ने घरेलू क्रिकेट, आईपीएल और इंडिया ए में शानदार प्रदर्शन के दम पर टीम इंडिया तक का सफर तय किया. जानिए विदर्भ के इस तेज गेंदबाज के करियर, आंकड़ों और संघर्ष की पूरी कहानी.

    Dharmendra Pradhan के पास कितनी संपत्ति है? जानें..

    केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफे के बाद धर्मेंद्र प्रधान की घोषित संपत्ति भी चर्चा में है. वर्ष 2024 के चुनावी हलफनामे के अनुसार उनके परिवार की कुल घोषित संपत्ति करीब 6.92 करोड़ रुपये थी. दस्तावेज में बैंक जमा, म्यूचुअल फंड, बीमा निवेश, सोना, चांदी, वाहन और ओडिशा व गाजियाबाद स्थित अचल संपत्तियों का भी उल्लेख किया गया है.

    लंदन में शाहरुख, स्टूडेंट प्रोटेस्ट पर चुप्पी को लेकर यूजर्स ने साधा निशाना

    शाहरुख खान अपने परिवार के साथ लंदन में छुट्टियां मना रहे हैं. उनकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर छाई हुई हैं. लेकिन कई लोग सुपरस्टार के वेकेशन से खुश नहीं हैं क्योंकि उन्होंने अभी तक NEET आंदोलन पर कोई टिप्पणी नहीं की है.

    प्रियंका गांधी ने Dharmendra Pradhan के इस्तीफे को बताया 'युवाओं की जीत', Rahul Gandhi को दिया पूरा श्रेय

    कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने शनिवार को केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े का स्वागत किया। उन्होंने इसे देश के युवाओं की जीत बताया और पेपर लीक व शिक्षा सुधारों का मुद्दा लगातार उठाने के लिए कांग्रेस नेता राहुल गांधी की तारीफ़ की। वायनाड में पत्रकारों से बात करते हुए प्रियंका ने कहा कि कांग्रेस परीक्षा में गड़बड़ियों के ख़िलाफ़ विरोध कर रहे छात्रों के साथ मज़बूती से खड़ी रही और शिक्षा सुधारों के लिए देशव्यापी आंदोलन खड़ा करने का काम किया। इसे भी पढ़ें: बिट्टू की एंट्री से बदली पंजाब की चुनावी बिसात, नया समीकरण गढ़ने में भाजपा कामयाबउन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी में हमने उन्हें हर संभव तरीके से मज़बूती से समर्थन देने की पूरी कोशिश की है। राहुल गांधी लंबे समय से पेपर लीक और परीक्षा सुधारों के मुद्दे पर बात करते रहे हैं। मुझे लगता है कि दो-तीन साल से ज़्यादा समय हो गया है जब से वह लगातार यह मुद्दा उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के अभियान ने कांग्रेस, NSUI और यूथ कांग्रेस को देश भर में छात्रों के लिए समर्थन जुटाने के लिए प्रेरित किया।प्रियंका ने कहा कि उन्होंने पार्टी, NSUI और यूथ कांग्रेस के हम बाकी लोगों को न सिर्फ़ छात्रों का समर्थन करने के लिए, बल्कि छात्रों के अधिकारों और हमारी शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए पूरे देश में आंदोलन खड़ा करने के लिए भी प्रेरित किया। प्रधान के इस्तीफ़े को सिर्फ़ शुरुआत बताते हुए प्रियंका ने माना कि यह ख़बर सुनकर वह भावुक हो गई थीं। मैं सचमुच बहुत खुश हूँ। यह खबर सुनकर मैं थोड़ा भावुक हो गया क्योंकि पिछले 10-12 सालों में मैंने कई बार खुद से पूछा है: हमारे युवा कब जागेंगे? इसे भी पढ़ें: मोदी सरकार के 'मिस्टर डिपेंडेबल', आखिर क्यों धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देंगे? वजह समझिए!कांग्रेस नेता ने BJP और RSS पर देश की शिक्षा व्यवस्था को कमज़ोर करने और विरोध करने वालों के ख़िलाफ़ ज़बरदस्ती करने का आरोप लगाया। RSS पूरी शिक्षा व्यवस्था में अपनी पैठ बना रहा है... हमारे पूर्वजों की विचारधारा को कमज़ोर किया जा रहा है। युवाओं और विरोध में आवाज़ उठाने वाले किसी भी व्यक्ति के ख़िलाफ़ ज़बरदस्ती का इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस्तीफ़ा देशव्यापी छात्र आंदोलन की मज़बूती को दर्शाता है। देशभर की राजनीति, ताज़ा घटनाओं और बड़ी खबरों से जुड़े रहने के लिए पढ़ें  National News in Hindi केवल प्रभासाक्षी पर। 

    श्रीलंका टूर से पहले BCCI की मीटिंग, ENG-IRE से हार का होगा हिसाब

    श्रीलंका दौरे से पहले बीसीसीआई की अहम रिव्यू मीटिंग होने जा रही है. श्रीलंका टूर के लिए टीम इंडिया के चयन के साथ-साथ गौतम गंभीर के सपोर्ट स्टाफ की भी समीक्षा होगी. इंग्लैंड और आयरलैंड दौरे के प्रदर्शन पर भी मंथन किया जाएगा.