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    ईरान पर अगले हमले में अमेरिका गिराएगा 'मदर ऑफ ऑल बॉम्ब'

    अमेरिकी सेना ईरान के ऊर्जा और परमाणु ठिकानों पर हमले में ‘मदर ऑफ ऑल बॉम्ब्स’ (MOAB) के इस्तेमाल पर विचार कर रही है. ट्रंप के आदेश पर यह बड़ा कदम हो सकता है, लेकिन प्रभावशीलता पर संदेह है.

    गिरफ्तारी से सुरक्षा की याचिका पर तुरंत सुनवाई से इनकार, Delhi High Court कल सुनेगा केस

    दिल्ली हाई कोर्ट ने गुरुवार को एक महिला पत्रकार की याचिका को तत्काल सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने से इनकार कर दिया। पत्रकार ने यह याचिका सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) विवेक भगत की शिकायत पर 'अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम' के तहत दर्ज एक मामले में गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा पाने के लिए दायर की थी। कोर्ट ने इस मामले पर शुक्रवार को सुनवाई करने पर सहमति जताई है। यह याचिका कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नितिन वासुदेव साम्ब्रे और न्यायमूर्ति संजय शर्मा की खंडपीठ के समक्ष रखी गई थी। पत्रकार की ओर से पेश वकील ने गुरुवार को ही तत्काल सुनवाई की मांग की और गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा का अनुरोध किया। हालांकि, खंडपीठ ने कहा कि इस मामले को सुनवाई के लिए कल सूचीबद्ध किया जाएगा। यह मामला 3 अक्टूबर को बूटा सिंह राउंडअबाउट पर हुए एक विरोध प्रदर्शन के दौरान, ACP विवेक भगत की शिकायत पर संसद मार्ग पुलिस स्टेशन में दर्ज FIR से जुड़ा है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि प्रदर्शन के दौरान ACP को उनकी जाति को लेकर अपमानित किया गया, डराया-धमकाया गया और उनके सरकारी काम में बाधा डाली गई। इसे भी पढ़ें: दिल्ली प्रदर्शन में NSUI कार्यकर्ता पर हमले को लेकर Kerala Police ने दर्ज की Zero FIRFIR के अनुसार, नई दिल्ली जिले के कनॉट प्लेस सब-डिवीजन में तैनात ACP भगत ने आरोप लगाया है कि भारत निर्वाचन आयोग के खिलाफ हो रहे विरोध प्रदर्शन के दौरान, जब वे कानून-व्यवस्था बनाए रखने की ड्यूटी पर थे, तब एक पत्रकार ने उनकी जाति का जिक्र करते हुए अपमानजनक टिप्पणी की। FIR में रोजी, गजेंद्र और एक अज्ञात व्यक्ति को आरोपी बनाया गया है। अपनी शिकायत में, भगत ने बताया कि वे अनुसूचित जाति (SC) समुदाय से आते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्होंने और उनके ऑपरेटर, कांस्टेबल रवि दहिया ने सुना कि एक पत्रकार उनकी नेमप्लेट और जाति का जिक्र करते हुए, उनकी जाति और ACP के पद पर उनकी नियुक्ति को लेकर अपमानजनक बातें कह रहा था। वहीं, उस पत्रकार ने इस घटना के संबंध में ACP भगत पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है। FIR में भारतीय न्याय संहिता की धारा 221, 356(2) और 3(5) के साथ-साथ SC/ST (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 3(1)(p), 3(1)(q), 3(1)(r) और 3(1)(s) लगाई गई हैं। दोनों पक्षों द्वारा लगाए गए आरोपों की अभी जांच होनी बाकी है और इस पर अदालत द्वारा फैसला लिया जाना है।

    न्यायपालिका को कोई डरा नहीं सकता, 12 अक्टूबर के आचरण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने राहुल गांधी को जमकर लताड़ा

    सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को राहुल गांधी के बर्ताव पर कड़ी आपत्ति जताई और 12 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट तक निकाले गए उनके मार्च को लेकर उन्हें फटकार लगाई। कोर्ट ने विपक्ष के नेता से उनके इस कदम के बारे में स्पष्टीकरण मांगा। राहुल गांधी के विरोध मार्च और उसके बाद मची अफरा-तफरी का जिक्र करते हुए, मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत ने कहा कि "कोई भी न्यायपालिका को डरा-धमका नहीं सकता। सुप्रीम कोर्ट ने SIR प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर 'इंडिया' (INDIA) गठबंधन और AIMIM के असदुद्दीन ओवैसी द्वारा दायर याचिकाओं पर केंद्र और चुनाव आयोग (ECI) को नोटिस जारी किए हैं। इसके अलावा, कोर्ट ने जंतर-मंतर को विरोध-प्रदर्शन स्थल के रूप में डीनोटिफाई (अधिसूचना रद्द) करने के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर भी केंद्र से जवाब मांगा है।इसे भी पढ़ें: Rahul की Poster Girl पर बवाल: Bangladesh मॉडल से Anarchy फैलाने की कोशिश, BJP का सनसनीखेज आरोपCJI ने राहुल गांधी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल से कहा उन्हें (राहुल गांधी को) स्पष्टीकरण देना होगा। CJI ने आगे कहा कोई भी न्यायपालिका पर दबाव नहीं डाल सकता।  कांग्रेस सांसद और 'इंडिया' गठबंधन के शीर्ष नेताओं ने सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च किया। विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को हटाने और SIR को रद्द करने की अपनी मांग को लेकर अभियान तेज कर दिया है। 

    'कौन रील मेकर है और कौन पत्रकार पहचानना मुश्किल', बोले तुषार मेहता

    प्रदर्शन के दौरान महिला पत्रकारों पर हमले और बदसलूकी के मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. इस दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि आज के दौर में मोबाइल से रिकॉर्डिंग करने वाले हर शख्स की पहचान करना मुश्किल है कि वह पत्रकार है या रील मेकर.

    'राहुल गांधी को अपने आचरण के लिए देना होगा जवाब...', सुप्रीम कोर्ट ने नेता प्रतिपक्ष को लगाई फटकार

    भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत ने कहा कि न्यायपालिका को "कोई भी डरा-धमका नहीं सकता." राहुल गांधी के आचरण पर सवाल उठाते हुए चीफ जस्टिस ने नाराजगी जताई कि सुप्रीम कोर्ट मार्च और उसके दौरान हुई अव्यवस्था पर याचिकाकर्ता राहुल गांधी को सफाई देनी होगी. यानी अपनी मंशा स्पष्ट करनी होगी. 

    Mary Millben बोल सकती हैं तो Imran Khan क्यों नहीं? Leave India Notice पर भड़के Abhijeet Dipke

    मुंबई पुलिस द्वारा 'भारत छोड़ो' (लीव इंडिया) का नोटिस जारी किए जाने के बाद, CJP कार्यकर्ता अभिजीत दिपके ने बॉलीवुड अभिनेता इमरान खान के समर्थन में बात कही है। गुरुवार को, दिपके ने अमेरिकी गायिका मैरी मिलबेन और इमरान खान के मामलों के बीच का अंतर उजागर किया। मैरी मिलबेन ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पक्ष में बात की थी, जबकि OCI (ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया) कार्डधारक इमरान खान को पार्टी की आलोचना करने के कारण पाबंदियों का सामना करना पड़ रहा है।इसे भी पढ़ें: आप देश को क्यों बर्बाद कर रहे हैं? जब एयरपोर्ट पर CJP के अभिजीत दिपके को लोगों ने घेरादिपके ने X पर लिखा कि एक अमेरिकी, मैरी मिलबेन, BJP के पक्ष में बोल सकती हैं। लेकिन एक OCI कार्डधारक, इमरान, BJP के खिलाफ कुछ नहीं कह सकते। इमरान खान, जिनके पास अमेरिकी पासपोर्ट है और जो बॉलीवुड अभिनेता आमिर खान के भतीजे हैं, उन्हें 28 अक्टूबर तक भारत छोड़ने का निर्देश दिया गया है। यह नोटिस मुंबई के अगस्त क्रांति मैदान में हुए एक विरोध प्रदर्शन में इमरान खान के शामिल होने के बाद आया है, जहाँ प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की थी। अधिकारियों ने खान के खिलाफ इमिग्रेशन एक्ट की धारा 29 और 7 के तहत कार्रवाई शुरू की है। आरोप है कि भारतीय नागरिक न होने के बावजूद वे इस विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए।शनिवार को विरोध प्रदर्शन के दौरान मुंबई पुलिस ने खान को हिरासत में ले लिया। उन्होंने पुलिस वैन में बैठे हुए अपनी एक तस्वीर शेयर की, जिसके साथ कैप्शन लिखा था कि लगता है मैं ड्राइव पर जा रहा हूँ। पत्रकारों से बात करते हुए खान ने कहा कि मेरी कोई मांग नहीं है। मैं यहाँ एक नागरिक के तौर पर हूँ, एक ऐसे व्यक्ति के रूप में जो इसी शहर में रहता है। मैं यह देखने आया हूँ कि लोगों की आवाजाही की आज़ादी पर रोक क्यों लगाई जा रही है? लोगों की आवाज़ क्यों दबाई जा रही है? बस इसीलिए मैं यहाँ हूँ।इसे भी पढ़ें: Narendra Modi सरकार पर अघोषित आपातकाल का आरोप, Abhijeet Dipke ने साधा निशानाबीजेपी नेता किरीट सोमैया ने खान की तुरंत गिरफ्तारी और उन्हें देश से बाहर निकालने (डिपॉर्ट करने) की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि खान ने राजनीतिक प्रदर्शन में हिस्सा लेकर OCI (ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया) के नियमों और वीज़ा शर्तों का उल्लंघन किया है। सोमैया का दावा है कि उन्होंने पुलिस को विरोध प्रदर्शन के दौरान खान के भाषणों और उनके पहले दिए गए बयानों के सबूत सौंप दिए हैं।

    Delhi Police के फैसले पर Supreme Court का सवाल, पूछा- Jantar Mantar को क्यों 'डीनोटिफाई' किया?

    सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को एक नोटिस जारी किया है। यह नोटिस दिल्ली पुलिस के उस फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर दिया गया है, जिसके तहत जंतर-मंतर को विरोध-प्रदर्शन के लिए तय जगहों की सूची से हटा दिया गया था। कोर्ट ने सरकार से यह भी पूछा है कि जंतर-मंतर को इस सूची से हटाने का फैसला क्या कोर्ट की मौखिक टिप्पणियों के आधार पर लिया गया था, या फिर सार्वजनिक विरोध-प्रदर्शन स्थल के रूप में इस जगह की उपयोगिता के स्वतंत्र मूल्यांकन के आधार पर? सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि यह फैसला सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों पर आधारित नहीं था। उन्होंने कहा कि पहले गठित एक समिति ने इस मामले की जांच की थी और एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपी थी।इसे भी पढ़ें: छात्रः सपनों की उड़ान से सृजन की पहचान तकसुप्रीम कोर्ट ने CCTV फुटेज सुरक्षित रखने का आदेश दियासुप्रीम कोर्ट ने कानून लागू करने वाली एजेंसियों को दिल्ली विरोध प्रदर्शनों से जुड़े सभी CCTV फुटेज और अन्य डिजिटल सामग्री को सुरक्षित रखने का निर्देश दिया है। साथ ही, निजी पक्षों को भी वीडियो सुरक्षित रखने और उन्हें सबूत के तौर पर अदालत में पेश करने की अनुमति दी है। अदालत ने सरकार से यह भी पूछा कि जंतर-मंतर को विरोध प्रदर्शन स्थल के रूप में हटाए जाने का फैसला क्या सुप्रीम कोर्ट की मौखिक टिप्पणियों पर आधारित था, या फिर सार्वजनिक प्रदर्शनों के लिए उस जगह की उपयोगिता का अलग से आकलन किया गया था? सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि यह फैसला सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों पर आधारित नहीं था, बल्कि पहले गठित एक समिति ने इस मामले की जांच की थी और एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपी थी। इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट ने 'भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता' (BNSS) की धारा 172 की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर नोटिस जारी किया है। इस धारा के तहत लोगों को पुलिस अधिकारियों द्वारा दिए गए कानूनी निर्देशों का पालन करना होता है, और जो लोग इन निर्देशों को नहीं मानते, उन्हें पुलिस हिरासत में ले सकती है या गिरफ्तार कर सकती है।

    Assam में मंत्रियों के आश्वासन के बाद Akhil Gogoi ने 13 दिन बाद खत्म किया धरना

    असम के दो मंत्रियों द्वारा मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा की ओर से चार जिलों के बाढ़ प्रभावित लोगों को पर्याप्त मुआवजा देने की मांग स्वीकार करने का आश्वासन दिए जाने के बाद रायजोर दल के विधायक अखिल गोगोई ने बृहस्पतिवार को अपना 13 दिन से जारी धरना समाप्त कर दिया। राज्य मंत्रिमंडल के सदस्य केशव महंत और पीयूष हजारिका ने विधानसभा के बाहर धरनास्थल पर गोगोई से मुलाकात की। इसके बाद गोगोई ने धरना समाप्त किया।गोगोई ने ऊपरी असम के शिवसागर, चराइदेव, जोरहाट और गोलाघाट जिलों के बाढ़ प्रभावित लोगों को पर्याप्त मुआवजा देने की मांग को लेकर दो अक्टूबर को धरना शुरू किया था। विधायक ने सरकार को एक ज्ञापन सौंपकर इन चार जिलों के प्रभावित परिवारों को एकमुश्त अंतरिम सहायता के रूप में 15,000 रुपये और शिवसागर तथा चराइदेव के बाढ़ प्रभावित लोगों को अतिरिक्त 10,000 रुपये देने की मांग की थी। उन्होंने बाढ़ के कारणों की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) से जांच कराने की मांग भी की थी।महंत ने कहा, ‘‘मुख्यमंत्री ने हमें गोगोई से इस मुद्दे पर बातचीत करने और सरकार द्वारा उठाए गए कुछ कदमों की जानकारी उन्हें देने के लिए भेजा है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘रायजोर दल की सूचीमें शामिल 3,068 परिवारों में से प्रत्येक को 15,000 रुपये की अंतरिम वित्तीय सहायता देने के लिए चार करोड़ 60 लाख रुपये से अधिक की जरूरत होगी। सरकार इन परिवारों को यह राशि देने पर सहमत हो गई है।’’ महंत ने बताया कि मुख्यमंत्री ने उच्चस्तरीय जांच कराने का निर्णय लिया है और समिति के बारे में जल्द ही जानकारी दी जाएगी। अतिरिक्त 10,000 रुपये देने की मांग पर मंत्री ने कहा कि सर्वेक्षण कराया जाएगा और उसके आधार पर निर्णय लिया जाएगा।गोगोई ने कहा कि सरकार ने पहले ही 57,000 परिवारों को सहायता देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है और 15,000 रुपये की लंबित राशि के भुगतान का मुद्दा अब सुलझ गया है। रायजोर दल के विधायक ने दावा किया कि बाढ़ प्रभावित कई परिवार, विशेषकर शिवसागर के परिवार, शुरुआती सर्वेक्षण में शामिल नहीं किए गए थे। हालांकि, सरकार इस आकलन में छूट गए परिवारों की पहचान के लिए नए सिरे से सर्वेक्षण कराने और एक नई सूची तैयार करने पर सहमत हो गई है।बैठक के दौरान गोगोई ने सरकार से बाढ़ प्रभावित परिवारों को ओरुनोदोई योजना के तहत दी जाने वाली वित्तीय सहायता दोगुनी करने का आग्रह किया। उन्होंने बाढ़ में घर गंवाने वाले लोगों को सरकारी आवास उपलब्ध कराने की मांग भी की। विधायक ने कहा कि उन्होंने बाढ़ से हुई मौतों और इससे जुड़े अन्य मुद्दों की सीबीआई जांच की मांग की थी।इसके जवाब में राज्य सरकार ने विशेषज्ञ समिति के माध्यम से उच्चस्तरीय जांच कराने की घोषणा की है। गोगोई ने शिवसागर और चराइदेव में प्रदर्शन कर रहे अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं से भी आंदोलन समाप्त करने का आग्रह किया।

    कब है सरस्वती पूजा? नोट करें सही तारीख, शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

    Saraswati Puja 2026: अक्टूबर 2026 में सरस्वती पूजा कब है? जानें मां सरस्वती की पूजा की सही तारीख, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और धार्मिक महत्व। विद्यार्थियों के लिए क्यों खास है यह पर्व, जानें पूरी जानकारी.

    12 की उम्र में बिछड़ा, 24 साल बाद मिला... बेटे को देखते ही रो पड़ी मां

    राजस्थान के राजसमंद जिले के सेंगनवास गांव में एक ऐसा मिलन हुआ, जिसने परिवार के 24 साल के इंतजार को खुशी में बदल दिया. जिस बेटे को मां ने बचपन में खो दिया था, उसकी तस्वीर जब सामने आई तो उन्होंने बिना देर किए उसे पहचान लिया. आंखों से आंसू छलक पड़े. उधर, 12 की उम्र में परिवार से बिछड़ा प्रकाश भी करीब 24 साल बाद अपने अपनों के बीच लौटकर भावुक हो गया.

    यूपी चुनाव में उतरेंगी पूर्व IAS दिव्या मित्तल, नई पार्टी का ऐलान

    Divya Mittal Jan Niti Bharat Party: आईएएस की नौकरी से इस्तीफा देने के बाद पूर्व अधिकारी दिव्या मित्तल ने राजनीति में उतरने का ऐलान कर दिया है. उन्होंने अपनी नई पार्टी 'जन नीति भारत' बनाने की घोषणा की है, जो आगामी चुनाव भी लड़ेगी. 2013 बैच की पूर्व आईएएस अधिकारी ने 13 साल के प्रशासनिक करियर के बाद यह कदम उठाया है.

    राजपाल जा पाएंगे कनाडा, SC ने कहा- पैसे कमाएं, कर्ज चुकाएं

    सुप्रीम कोर्ट ने राजपाल यादव का पासपोर्ट जारी करने का आदेश दिया है ताकि वह कनाडा में फिल्म की शूटिंग कर सकें. कोर्ट ने राजपाल यादव से कहा कि वे पैसे कमाकर अपने लेनदारों को वापस चुकाएं.