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    Varanasi Zone में अवैध पटाखों पर बड़ा एक्शन, 48 लोग अरेस्ट और 130 क्विंटल माल जब्त

    लखनऊ, सात नवंबर वाराणसी जोन की पुलिस ने अवैध रूप से पटाखों का कारोबार करने वालों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत अब तक 35 मामले दर्ज कर 48 लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने शनिवार को यह जानकारी दी। उत्तर प्रदेश पुलिस ने ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा, ‘‘वाराणसी जोन के सभी जिलों में अवैध तरीके से पटाखों के निर्माण, भंडारण, परिवहन और बिक्री के खिलाफ विशेष अभियान चलाया जा रहा है जिसके तहत अब तक 35 मामले दर्ज किए गए हैं और 48 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।’’ उसने कहा कि इस दौरान एक करोड़ 25 लाख रुपये से अधिक मूल्य के करीब 130 क्विंटल अवैध पटाखे भी बरामद किए गए हैं।पुलिस ने कहा कि गिरफ्तार लोगों के खिलाफ विस्फोटक पदार्थ अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की गई है। यह अभियान देव दीपावली तक जारी रहेगा। पुलिस ने पटाखा कारोबारियों से बिना अनुज्ञापत्र पटाखों का निर्माण, भंडारण और बिक्री नहीं करने की अपील की है।साथ ही, निर्धारित मानकों और अनुज्ञापत्र की शर्तों का पालन करते हुए केवल सुरक्षित एवं चिह्नित खुले स्थानों पर ही पटाखे बेचने तथा दुकानों में आग बुझाने के पर्याप्त साधन रखने की सलाह दी है।

    War Room से लेकर Ground Zero तक एक्शन मोड में Railway Minister Ashwini Vaishnaw, 28 स्टेशनों पर Live नजर, हजारों Special Trains दौड़ रहीं

    त्योहारों के मौसम में रेलवे स्टेशनों पर उमड़ने वाली यात्रियों की भारी भीड़ और उससे पैदा होने वाली अव्यवस्थाओं को लेकर इस बार रेल मंत्रालय पूरी तरह एक्शन मोड में नजर आ रहा है। यात्रियों को ट्रेनों के इंतजार में परेशान न होना पड़े, स्टेशन पर भगदड़ जैसी स्थिति न बने और हर यात्री सुरक्षित तरीके से अपनी मंजिल तक पहुंच सके, इसके लिए रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव खुद मोर्चा संभाले हुए हैं। खास बात यह है कि रेल मंत्री केवल रेल भवन में बैठकर अधिकारियों से रिपोर्ट नहीं ले रहे, बल्कि वार रूम में तकनीकी व्यवस्थाओं की निगरानी से लेकर रेलवे स्टेशनों पर पहुंचकर जमीनी हकीकत भी परख रहे हैं।आज मीडिया से बातचीत में रेल मंत्री ने रेलवे के वार रूम की कार्यप्रणाली और त्योहारों के दौरान भीड़ प्रबंधन की तैयारियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वार रूम के जरिए देश के 28 प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों की भीड़ की लगातार निगरानी की जा रही है। लाइव डैशबोर्ड के माध्यम से अधिकारियों को यह पता चल रहा है कि किस स्टेशन पर कितनी भीड़ है और कहां अतिरिक्त इंतजाम करने की जरूरत है।इसे भी पढ़ें: Ashwini Vaishnaw ने किया ऐलान, भीड़भाड़ दूर करने Golden Quadrilateral रूट्स होंगे 4 लेनरेल मंत्री ने साफ किया कि इस बार त्योहारों के दौरान यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए रेलवे ने पिछले अनुभवों से सबक लिया है। पिछले वर्ष लगभग 12 हजार विशेष ट्रेनें चलाई गई थीं, जबकि इस बार दुर्गा पूजा, दीपावली और छठ को ध्यान में रखते हुए 18 हजार से अधिक विशेष ट्रेनों की व्यवस्था की गई है। अचानक यात्रियों की संख्या बढ़ने की स्थिति से निपटने के लिए नई दिल्ली, आनंद विहार और हजरत निजामुद्दीन सहित प्रमुख स्टेशनों पर अतिरिक्त ट्रेनें भी तैयार रखी गई हैं।देखा जाये तो रेलवे का वार रूम इस पूरी रणनीति का महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभरा है। स्टेशन स्तर से लेकर मंडल, जोन और रेलवे बोर्ड तक चार स्तरों पर वार रूम सक्रिय हैं। यहां सीसीटीवी कैमरों से मिलने वाले लाइव फुटेज, यात्रियों की आवाजाही और ट्रेनों की स्थिति पर नजर रखी जा रही है। जरूरत पड़ने पर अधिकारी तत्काल हस्तक्षेप कर सकते हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से भीड़ के पैटर्न को समझने और संभावित दबाव वाले क्षेत्रों की पहचान करने पर जोर दिया जा रहा है।साथ ही रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव की सक्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 6 नवंबर को वह खुद नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पहुंचे थे। उन्होंने प्रवेश और निकास व्यवस्था, यात्री होल्डिंग एरिया, सुरक्षा इंतजाम और यात्रियों की सुविधाओं का जायजा लिया। यात्रियों से सीधे बातचीत कर उनकी प्रतिक्रिया भी जानी। हम आपको बता दें कि दिल्ली के पांच प्रमुख रेलवे स्टेशनों पर सामान्य दिनों में प्रतिदिन करीब पांच लाख यात्री आते हैं, जबकि त्योहारों के दौरान यह संख्या बढ़कर लगभग आठ लाख तक पहुंच रही है।हम आपको बता दें कि सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए 700 अतिरिक्त AI कैमरे लगाए गए हैं। रेलवे सुरक्षा बल की तैनाती बढ़ाई गई है। आरक्षित और अनारक्षित यात्रियों के लिए अलग-अलग होल्डिंग एरिया बनाए गए हैं, ताकि प्लेटफॉर्म पर अनावश्यक भीड़ जमा न हो। सामान की जांच के लिए एक्स-रे स्कैनर भी स्टेशन के बाहरी हिस्से में स्थानांतरित किए गए हैं। आनंद विहार टर्मिनल भी रेलवे की इस रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यहां लगभग सात हजार यात्रियों की क्षमता वाला यात्री सुविधा केंद्र विकसित किया जा रहा है। इसके अलावा अचानक भीड़ बढ़ने की स्थिति से निपटने के लिए स्टेशन पर अतिरिक्त ट्रेनें तैयार रखने की व्यवस्था है।दरअसल, त्योहारों के दौरान रेलवे के सामने सबसे बड़ी चुनौती लाखों यात्रियों को सुरक्षित उनके घरों तक पहुंचाने की होती है। ऐसे समय में रेल मंत्री का वार रूम में बैठकर लाइव निगरानी करना और स्टेशनों पर पहुंचकर व्यवस्थाओं को परखना यह संकेत देता है कि मंत्रालय इस बार किसी भी तरह की लापरवाही का जोखिम नहीं लेना चाहता। देखा जाये तो रेल मंत्री की यह सक्रियता बताती है कि यात्री सुविधाओं को लेकर जिम्मेदारी केवल अधिकारियों पर छोड़ने के बजाय शीर्ष स्तर पर भी निगरानी की जा रही है। रेलवे के लिए असली परीक्षा केवल अतिरिक्त ट्रेनें चलाना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि किसी यात्री को स्टेशन पर घंटों भटकना न पड़े, परिवार के साथ यात्रा करने वालों को असुविधा न हो और हर व्यक्ति सुरक्षित अपनी मंजिल तक पहुंचे।

    Karnataka में E20 की टेस्टिंग पर केंद्र ने जताई चिंता, OMC नियमों के उल्लंघन का आरोप

    केंद्र ने शनिवार को कर्नाटक सरकार के उन आरोपों को खारिज कर दिया, जिनमें कहा गया था कि राज्य के पेट्रोल पंपों पर बेचे जा रहे ईंधन में इथेनॉल की मात्रा तय सीमा (20 प्रतिशत) से अधिक है। केंद्र ने इस प्रक्रिया के दौरान अपनाई गई सैंपलिंग और टेस्टिंग के तरीकों पर चिंता जताई है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने एक आधिकारिक विज्ञप्ति में फिर से स्पष्ट किया है कि कर्नाटक सहित पूरे देश में इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOCL), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (HPCL) द्वारा सप्लाई किया जाने वाला E20 पेट्रोल, ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स के मानक IS 17021 के अनुरूप है। मंत्रालय ने बताया कि इन तीनों तेल विपणन कंपनियों (OMCs) ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित कानूनी और तकनीकी प्रक्रियाओं के तहत किए गए परीक्षणों में लगाए गए आरोपों की पुष्टि नहीं हुई है। कंपनियों ने अक्टूबर 2026 की प्रक्रिया के दौरान अपनाई गई सैंपलिंग (नमूना लेने) की प्रक्रियाओं और परीक्षण के तरीकों पर भी चिंता जताई है।केंद्र ने कर्नाटक द्वारा E20 की गलत टेस्टिंग पर सवाल उठाए हैं।इसे भी पढ़ें: ई20 पेट्रोल में ज्यादा मिलावट का आरोप, Rahul Gandhi ने केंद्र से वास्तविक आंकड़े मांगेमंत्रालय के अनुसार, पेट्रोल की टेस्टिंग के तय नियमों के तहत एक-एक लीटर के छह सैंपल लिए जाने चाहिए। इनमें से दो सैंपल डीलर को रसीद (पावती) लेकर सौंपे जाने चाहिए, दो सैंपल तेल कंपनी या संबंधित विभाग के पास रखे जाने चाहिए, और बाकी दो सैंपल 'कंट्रोल ऑर्डर' की अनुसूची III (Schedule III) में बताई गई या सरकारी गजट में अधिसूचित किसी प्रयोगशाला में भेजे जाने चाहिए। संबंधित अधिकारियों को सैंपल के लेबल पर संयुक्त रूप से हस्ताक्षर करने चाहिए, और टेस्टिंग के नतीजे तय समय-सीमा के भीतर डीलर और तेल कंपनी दोनों को बता दिए जाने चाहिए। मंत्रालय ने आगे बताया कि सितंबर 2026 की प्रक्रिया के दौरान लिए गए सैंपल, 'स्टेट लेवल कोऑर्डिनेटर' के माध्यम से OMC (तेल विपणन कंपनियों) की तय प्रयोगशालाओं में भेजे गए थे। वहां MDG 2024 के तहत तय गुणवत्ता मानकों के आधार पर इनकी टेस्टिंग की गई थी। हालांकि, इसके बाद अक्टूबर में हुई प्रक्रिया के दौरान लिए गए सैंपल, OMC प्रतिनिधियों की मौजूदगी के बिना लिए गए थे। कंपनियों का यह भी कहना है कि 'स्टेट लेवल कोऑर्डिनेटर' से अनुरोध करने के बावजूद, उन्हें अपने पास रखने के लिए सैंपल (रिटेंशन सैंपल), आउटलेट-वार पूरी जानकारी या प्रयोगशाला की रिपोर्ट नहीं मिली।विवाद क्या है?इसे भी पढ़ें: E20 विवाद के बीच इंडियन ऑयल की सफाई, 56 सैंपलों में 19-21% इथेनॉल की पुष्टिलोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने शनिवार को आरोप लगाया कि कुछ पेट्रोल कंपनियां तय सीमा से अधिक इथेनॉल मिला हुआ ईंधन सप्लाई कर रही हैं। कर्नाटक के सात जिलों से लिए गए नमूनों की लैब जांच का हवाला देते हुए, गांधी ने दावा किया कि एक मान्यता प्राप्त लैब में जांचे गए 14 पेट्रोल नमूनों में से 11 में इथेनॉल की मात्रा 20 प्रतिशत से अधिक थी। एक्स पर एक पोस्ट में कांग्रेस नेता ने IOCL और HPCL की जांच रिपोर्ट का जिक्र किया, जिसमें कथित तौर पर इथेनॉल की मात्रा क्रमशः 31.2 प्रतिशत और 30.5 प्रतिशत पाई गई। उन्होंने लिखा कि आपकी कार इतने अधिक इथेनॉल को झेलने के लिए नहीं बनी है। इसका मतलब है कि माइलेज कम मिलेगी और आपको बार-बार मैकेनिक के पास जाना पड़ेगा। जिस कार को आपने इतने उत्साह से खरीदा था, वह बर्बाद हो रही है।

    PM Modi ने दी Diwali की शुभकामनाएं, इस साल भी जवानों के संग मनेगा त्योहार

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को देशवासियों को दिवाली की शुभकामनाएं दीं और उनके जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। एक्स पर पोस्ट किए गए एक वीडियो संदेश में प्रधानमंत्री ने कहा कि रोशनी का यह त्योहार अंधेरे से लड़ने के भारत के संकल्प का प्रतीक है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा यह त्योहार और आने वाला समय आपके जीवन में खुशियां, शांति और समृद्धि लेकर आए। प्रधानमंत्री ने भारतीय सशस्त्र बलों के जवानों के साथ दिवाली मनाने की अपनी सालाना परंपरा के बारे में भी बात की और कहा कि वह इस साल भी इस परंपरा को जारी रखेंगे। उन्होंने कहा कि आपकी तरह, मैं भी दिवाली बहुत उत्साह के साथ मनाता हूँ। जैसा कि आप जानते हैं, यह मेरी एक नियमित परंपरा बन गई है कि मैं इस समय को हमारे जवानों के बीच बिताऊँ। इस साल भी मैं इस परंपरा को जारी रखूँगा। इसे भी पढ़ें: Sonia Gandhi के बयानों पर BJP का पलटवार, देश की प्रगति देखने के लिए इतालवी चश्मा उतारेंप्रधानमंत्री मोदी ने देश के सशस्त्र बलों के जवानों के साथ त्योहार मनाने के अपने संकल्प को दोहराया। उन्होंने जवानों के साथ दिवाली मनाने की अपनी परंपरा का जिक्र किया और साथ ही देशवासियों को त्योहार की शुभकामनाएँ दीं।Have a great Diwali! https://t.co/YbFVq7tHmx— Narendra Modi (@narendramodi) November 7, 2026

    ट्रंप का ईरानी हवाई सुरक्षा प्रणाली तबाह करने का दावा; देखें दुन‍िया आजतक

    अमेरिकी राष्ट्रपत‍ि डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान की हवाई सुरक्षा प्रणाली को तबाह करने का दावा क‍िया. ट्रंप ने कहा क‍ि 15 म‍िनट के मामूली हमले में ईरान के सैन्य ठ‍िकानों को न‍िशाना बनाया गया. उन्होंने ईरान के साथ बातचीत की भी बात कही. वहीं ईरान की हवाई सुरक्षा नेटवर्क ने फारस की खाड़ी में केशम द्वीप में अमेरिकी ड्रोन मार ग‍िराने का दावा क‍िया. देखें दुन‍िया आजतक.

    Emergency लगाना भूल थी, Sonia Gandhi बोलीं- बाद में Indira Gandhi को भी इसका अहसास हुआ था

    (फाइल फोटो के साथ) नयी दिल्ली, सात नवंबर कांग्रेस नेता सोनिया गांधी ने आपातकाल लागू करने के फैसले को एक गलती करार दिया और कहा कि उनका मानना है कि उनकी सास और तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को भी बाद में ऐसा ही महसूस हुआ था। कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने अपनी आगामी पुस्तक ‘बिलॉन्गिंग : अ जर्नी ऑफ लव’ में यह भी लिखा है कि अगर संजय गांधी को ‘नियंत्रण में’ रखा गया होता तो आपातकाल लागू होने के बाद हुए नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकता था। अखबार ‘द गार्डियन’ की रिपोर्ट से यह जानकारी मिली।अपने संस्मरण के विमोचन से पहले ब्रिटिश दैनिक को दिए एक साक्षात्कार में सोनिया गांधी ने कहा, ‘‘मुझे हमेशा लगता है कि श्रीमती (इंदिरा) गांधी दिल से लोकतांत्रिक थीं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘मुझे पता है कि कई लोग इस बात पर हंसेंगे, लेकिन मेरा मानना है कि वह आपातकाल के दौरान अपनाए गए रास्ते को लेकर कभी सहज नहीं थीं। मुझे लगता है कि यह बात उन्हें भीतर ही भीतर परेशान कर रही थी।’’ ब्रिटिश दैनिक के अनुसार, सोनिया गांधी ने कहा कि इंदिरा गांधी का आपातकाल लगाने का फैसला एक गलती थी और उनका मानना है कि उनकी सास को भी बाद में ऐसा ही महसूस हुआ था। सोनिया गांधी के मुताबिक, आपातकाल लगाने के फैसले को लेकर परिवार में मतभेद थे।उनके पति राजीव गांधी इस फैसले के खिलाफ थे और उन्होंने अपनी मां से अगले चुनाव तक इंतजार करने को कहा था। वहीं, उनके छोटे बेटे संजय गांधी ने आपातकाल लगाने पर जोर दिया था। ‘द गार्डियन’ की खबर के अनुसार, संजय गांधी ने परिवार के साथ एक रात्रिभोज के दौरान तर्क दिया था कि विपक्ष उनकी मां को बर्बाद कर देगा और कहा था, ‘‘उन्हें रोकना ही होगा।’’ सोनिया गांधी के अनुसार, इस फैसले से परिवार के भीतर भी तनाव बढ़ गया था।राजीव गांधी ने अपनी मां से इस मुद्दे पर बात करने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने उनकी बात सुनने से इनकार कर दिया। ‘द गार्डियन’ के अनुसार गांधी ने अपनी पुस्तक में लिखा है, ‘‘अगर संजय गांधी को नियंत्रण में रखा गया होता तो उसके बाद हुए नुकसान को काफी हद तक रोका जा सकता था।’’ अपनी पुस्तक के विमोचन से पहले शनिवार को ‘द हिंदू’ में प्रकाशित एक अन्य साक्षात्कार में भी सोनिया गांधी ने आपातकाल के उथल-पुथल भरे दौर के बारे में बात की। उन्होंने कहा कि समय बीतने के बाद लोग घटनाओं को बेहतर परिप्रेक्ष्य में देख पाते हैं।उन्होंने यह भी कहा कि इंदिरा गांधी ने बाद में स्वयं सार्वजनिक रूप से आपातकाल के दौरान हुई ज्यादतियों पर खेद जताया था और इसके लिए माफी मांगी थी। सोनिया गांधी से पूछा गया था कि संजय गांधी का नाम आपातकाल का पर्याय कैसे बन गया और क्या इंदिरा गांधी ने अपने बड़े बेटे राजीव गांधी एवं अन्य लोगों की बात सुनी होती तो उस दौरान हुई ज्यादतियों को रोका जा सकता था। उन्होंने जवाब दिया, ‘‘इसमें केवल संजय की भूमिका नहीं थी, हालांकि आम लोगों की नजर में उनका नाम अक्सर आपातकाल से जुड़ा रहा है।इंदिरा गांधी पर उनके कुछ वरिष्ठ सहयोगियों का भी काफी दबाव था। मुझे लगता है कि उनके आसपास राजीव जैसे बहुत कम लोग थे, जो अलग राय रखते थे।’’ कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष ने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि आखिरकार मेरी सास ने अपनी समझ से स्थिति को पहचानना शुरू किया और उसे सुधारने के लिए कदम उठाए।’’ उन्होंने कहा, ‘‘आपातकाल समाप्त होने के बाद ही मुझे उस दौरान की घटनाओं की गंभीरता का पूरी तरह एहसास हुआ। हां, लोकतांत्रिक अधिकारों में कटौती की गई थी और बंदी प्रत्यक्षीकरण के अधिकार पर रोक लगा दी गई थी, लेकिन यह सब संवैधानिक तरीके से किया गया था।’’ सोनिया गांधी ने कहा, ‘‘फिर भी जब मैं उस दौर को याद करती हूं और इंदिरा गांधी के नजरिये से हालात को समझने की कोशिश करती हूं तो मुझे लगता है कि वह तेजी से बिगड़ती परिस्थितियों से निपटने के लिए संघर्ष कर रही थीं।हिंसक प्रदर्शन हो रहे थे, सरकारी कार्यालयों एवं सार्वजनिक परिवहन के वाहनों में आग लगाई जा रही थी, व्यापक स्तर पर संगठित अशांति थी और यहां तक कि नौकरशाही एवं सशस्त्र बलों से आदेशों की अवहेलना करने का आह्वान भी किया जा रहा था।’’ उन्होंने कहा कि बीते समय की घटनाओं को आज बेहतर परिप्रेक्ष्य में समझा जा सकता है। सोनिया गांधी ने कहा कि इंदिरा गांधी ने खुद भी उस समय के हालात को समझा और मार्च 1977 में चुनाव कराने का फैसला किया। कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष ने कहा, ‘‘और आप अच्छी तरह जानते हैं कि बाद में उन्होंने खुद आपातकाल के दौरान हुई ज्यादतियों पर सार्वजनिक रूप से खेद जताया था और माफी मांगी थी।’’ तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने 25 जून, 1975 की आधी रात से कुछ पहले देश में आपातकाल लागू किया था।राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद ने इंदिरा गांधी के अनुरोध पर आपातकाल की घोषणा की थी जिसे बाद में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंजूरी दी थी। इंदिरा गांधी ने 18 जनवरी, 1977 को नए चुनाव कराने की घोषणा की और सभी राजनीतिक बंदियों को रिहा कर दिया। इंदिरा गांधी और उनके बेटे संजय गांधी 16 मार्च, 1977 को लोकसभा चुनाव हार गए और उसी साल 21 मार्च को आधिकारिक रूप से आपातकाल समाप्त हो गया।भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) आपातकाल को लेकर कांग्रेस की कड़ी आलोचना करती रही है और इसे ‘‘लोकतंत्र की हत्या’’ बताती रही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार भारतीय लोकतंत्र के उस ‘‘काले दौर’’ की याद में ‘संविधान हत्या दिवस’ मनाती रही है।

    घर में घुसकर मां-बहन पर तलवार से हमला, फिर सिरफिरे आशिक ने किया युवती का अपहरण, पुलिसवालों को भी नहीं बख्‍शा

    महाराष्ट्र के धाराशिव में युवती के अपहरण की सनसनीखेज वारदात सामने आई है. बोराड़ा गांव में एक युवक अपने साथियों के साथ युवती के घर में घुस गया और उसकी मां व बहन पर तलवार से हमला कर दिया. इसके बाद युवती को अर्टिगा कार में जबरन बैठाकर आरोपी फरार हो गए. भागते समय कार से कई लोगों को टक्कर मारी गई, जिसमें दो लोग गंभीर घायल हुए. पुलिस ने अंबाजोगाई के पास कार को घेर लिया. यहां मुख्य आरोपी ने युवती की गर्दन पर कोयाता रखकर उसे और खुद को खत्म करने की धमकी दे दी.

    लगातार दूसरी हार के बाद NZ कप्तान मिचेल सेंटनर का छलका दर्द

    बारिश के कारण दूसरा वनडे मैच एक घंटे की देरी से शुरू हुआ था. 47-47 ओवर के इस मुकाबले के अंत में भी बारिश ने खलल डाला. जिसका नतीजा भारत के पक्ष में आया और टीम इंडिया ने चार रन से मुकाबले को अपने नाम कर लिया.

    Kerala आबकारी विभाग में भ्रष्टाचार का आरोप, पूर्व आयुक्त Sreeram Sambasiva Rao ने सौंपी रिपोर्ट

    तिरुवनंतपुरम, सात नवंबर पूर्व आबकारी आयुक्त सीराम संबाशिव राव ने कार्यमुक्त किए जाने से कुछ समय पहले राज्य सरकार को एक रिपोर्ट सौंपी, जिसमें आबकारी विभाग के दो वरिष्ठ अधिकारियों पर भ्रष्टाचार और रिश्वत लेने का आरोप लगाया गया है। अधिकारियों ने शनिवार को यह जानकारी दी। राव आबकारी आयुक्त और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग में विशेष सचिव के पद पर कार्यरत थे।उनका तबादला करके उन्हें अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति विकास विभाग में विशेष सचिव नियुक्त किया गया है। शुक्रवार को सरकार को सौंपी गई रिपोर्ट में राव ने यह भी उल्लेख किया कि आबकारी मंत्री एम. लिजू कथित लेनदेन में शामिल बार के एक मालिक के परिचित हैं। रिपोर्ट के अनुसार, संयुक्त आबकारी आयुक्त (जेईसी) के पद पर कार्यरत रहे एस. विनोद के कथित तौर पर मुवाट्टुपुझा स्थित गंगा बार के मालिक से करीबी संबंध होने और बार लाइसेंस से जुड़े मामलों में प्रतिष्ठान के लिए मध्यस्थ के रूप में काम करने का आरोप लगाया गया है।इसमें दावा किया गया है कि एक मुखबिर ने आरोप लगाया कि विनोद ने बार मालिक से हर महीने 30,000 रुपये की मांग की और बार की अवधि तथा लाइसेंस के नवीनीकरण से संबंधित मंजूरी दिलाने के लिए 50,000 रुपये भी लिए। रिपोर्ट में अलप्पुझा के उप आबकारी आयुक्त अजय के खिलाफ लगे आरोपों का भी उल्लेख किया गया है। इसमें कहा गया है कि राव को मिली जानकारी के अनुसार, कायमकुलम के कट्टाचिरा स्थित रोमा सेंटर बार के मालिक को उपायुक्त के निरीक्षण के दौरान कथित तौर पर 30,000 रुपये देने को कहा गया।रिपोर्ट में बार मालिक की पहचान रथीश के रूप में की गई है और कहा गया है कि वह आबकारी मंत्री का परिचित है। इसमें इस साल ओणम के बाद अप्रैल में बार लाइसेंस के नवीनीकरण से संबंधित मंजूरी के लिए कथित तौर पर 20,000 रुपये दिए जाने का भी उल्लेख किया गया है। राव ने सिफारिश की कि विनोद और अजय को तत्काल वर्तमान तैनाती से हटाकर आबकारी अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो या ताड़ी बोर्ड जैसे कार्यालयों में स्थानांतरित किया जाए।इस बीच, माकपा के प्रदेश सचिव एम.वी. गोविंदन ने आरोप लगाया कि पूर्व आयुक्त की रिपोर्ट में किए गए खुलासे विभाग में व्याप्त कथित भ्रष्टाचार में आबकारी मंत्री की संलिप्तता की ओर इशारा करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इन खुलासों से भ्रष्टाचार के आरोपी अधिकारियों और कथित तौर पर भुगतान में शामिल बार मालिकों, दोनों के साथ मंत्री के संबंधों पर सवाल खड़े होते हैं। गोविंदन ने कहा, ‘‘मंत्री को इन आरोपों पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए।’’

    जय श्रीराम के उद्घोष से गूंज उठी अयोध्या, रामपथ पर साकार हुई त्रेतायुग की रामायण, 21 भव्य झांकियों ने श्रद्धालुओं को किया भावविभोर

    रामनाम की गूंज, भक्ति का उत्साह और लाखों दीपों की अलौकिक रोशनी... दसवें दीपोत्सव पर रामनगरी अयोध्या एक बार फिर ऐसी दिव्य छटा से नहा उठी, मानो त्रेतायुग की अयोध्या धरती पर उतर आई हो। सरयू के पावन तट पर दीप प्रज्ज्वलन के साथ आस्था का ऐसा विराट दृश्य साकार हुआ, जिसने दीपोत्सव को एक बार फिर ऐतिहासिक बना दिया। सरयू की लहरों के किनारे टिमटिमाते दीप, मंदिरों की जगमगाहट और आकाश में गूंजते जय श्रीराम के उद्घोष ने हर श्रद्धालु को रामभक्ति के भाव में सराबोर कर दिया।दसवें दीपोत्सव में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी ने आयोजन को विशेष गरिमा प्रदान की। भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण के स्वरूपों के स्वागत, राजतिलक, पुष्पवर्षा और दीप प्रज्ज्वलन के कार्यक्रमों के माध्यम से रामनगरी ने अपनी आध्यात्मिक विरासत का भव्य प्रदर्शन किया। राम की पैड़ी पर सरयू आरती के साथ दीपों की रोशनी ने ऐसा दृश्य उपस्थित किया, जिसे देखकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। हर ओर दीपों की कतारें थीं और हर हृदय में प्रभु श्रीराम के प्रति अटूट श्रद्धा।इसे भी पढ़ें: अयोध्या Deepotsav की शुरुआत, 56 घाटों पर 30 लाख दीयों से बनेगा नया कीर्तिमानइस बार दीपोत्सव की भव्यता केवल दीपों तक सीमित नहीं रही। रामपथ पर निकली शोभायात्रा ने रामायण के सातों कांडों को जीवंत कर दिया। साकेत महाविद्यालय से पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने हरी झंडी दिखाकर शोभायात्रा रवाना की। लगभग तीन किलोमीटर का सफर तय करके यह रामकथा पार्क पहुंची। शोभायात्रा में शामिल 21 भव्य झांकियों में सात झांकियां रामायण के सातों कांडों पर आधारित थीं, जबकि 14 झांकियों के माध्यम से योगी सरकार की विकास यात्रा को प्रदर्शित किया गया।बालकांड में प्रभु श्रीराम के जन्म और बाल लीलाओं से लेकर अयोध्याकांड के वनगमन, अरण्यकांड के वनवास, किष्किन्धाकांड में हनुमान-सुग्रीव मिलन, सुंदरकांड में बजरंगबली के अद्भुत पराक्रम और लंकाकांड में रावण के साथ युद्ध के प्रसंगों ने श्रद्धालुओं को रामकथा का सजीव दर्शन कराया। उत्तरकांड की झांकी ने इस आध्यात्मिक यात्रा को पूर्णता प्रदान की।ढोल-नगाड़ों की गूंज ने उत्सव में चार चांद लगा दिए। महिला कलाकारों ने कंधों पर ढोल रखकर ऐसी थाप दी कि पूरा रामपथ झूम उठा। विभिन्न राज्यों से आए लोक कलाकारों के नृत्य और पारंपरिक प्रस्तुतियों ने अयोध्या को सांस्कृतिक एकता के विराट मंच में बदल दिया। कहीं रामभक्त हाथ जोड़कर प्रभु के स्वरूपों के दर्शन कर रहे थे तो कहीं श्रद्धालुओं की आंखें भक्ति के भाव से नम दिखाई दे रही थीं।झांकियों में जल जीवन मिशन, आयुष्मान योजना, मिशन शक्ति, प्रधानमंत्री आवास योजना, पीएम सूर्य घर योजना, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ और डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर सहित विभिन्न योजनाओं को भी स्थान दिया गया।शाम को राम की पैड़ी पर सरयू आरती, दीप प्रज्ज्वलन, प्रोजेक्शन मैपिंग, लेजर शो और ड्रोन शो ने उत्सव को आधुनिक तकनीक के रंगों से सजाया। सरयू पुल के निकट हरित आतिशबाजी और रामकथा पार्क में रामलीला के आयोजन ने दीपोत्सव की दिव्यता को और बढ़ाया।पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि दीपोत्सव अब केवल उत्तर प्रदेश का आयोजन नहीं, बल्कि पूरे विश्व का पर्व बन चुका है। हर वर्ष दीपोत्सव अपना ही पिछला रिकॉर्ड तोड़ता है और इस बार भी नया कीर्तिमान स्थापित किया गया।दसवें दीपोत्सव ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि अयोध्या केवल एक नगर नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था, संस्कृति और सनातन परंपरा का केंद्र है। सरयू के तट पर प्रज्ज्वलित हर दीप मानो प्रभु श्रीराम के आदर्शों, मर्यादा और प्रकाश का संदेश दे रहा था। दीपों की इस दिव्य श्रृंखला में अयोध्या ने दुनिया को दिखा दिया कि रामभक्ति की ज्योति समय के साथ और अधिक प्रखर होती जा रही है।

    CJP protest LIVE: ज्ञानेश कुमार के खिलाफ लड़ाई जारी रहेगी, SIR-विरोध प्रदर्शन के लिए कोच्चि पहुंचे अभिजीत दिपके

    केरल के कोच्चि में कॉकरोच जनता पार्टी ने आज एसआईआर के खिलाफ विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया है, इसके लिए पार्टी के नेता कोच्चि पहुंच गए हैं। सीजेपी ने कहा है, सीईसी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ लड़ाई जारी रहेगी।