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    Mallikarjun Kharge ने PM Modi को लिखा पत्र, Nepal बाढ़ में फंसे भारतीयों की वापसी की मांग

    कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ पर गहरी चिंता जताते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर पड़ोसी देश को तत्काल मानवीय एवं आपदा राहत सहायता उपलब्ध कराने तथा वहां फंसे भारतीय नागरिकों की सुरक्षित और जल्द वापसी के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने का आग्रह किया है। खरगे ने प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री शाह को 28 अगस्त को अलग-अलग पत्र लिखे। प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि नेपाल में बाढ़ के कारण बड़े पैमाने पर जान-माल का नुकसान हुआ है और हजारों लोग भोजन, दवाइयों, आश्रय तथा अन्य आवश्यक सहायता की तत्काल जरूरत का सामना कर रहे हैं।उन्होंने सरकार से नेपाल के बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए पर्याप्त मानवीय एवं राहत सहायता सुनिश्चित करने तथा नेपाल सरकार के साथ समन्वय कर राहत एवं बचाव अभियान तेज करने का अनुरोध किया। खरगे ने भारतीय नागरिकों की स्थिति को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि वह संबंधित अधिकारियों को बचाव एवं निकासी के प्रयास तेज करने और फंसे भारतीय नागरिकों की सुरक्षित तथा जल्द भारत वापसी के लिए सभी जरूरी इंतजाम करने के निर्देश दें।खरगे ने कहा, ‘‘विदेश मंत्रालय से मिली नवीनतम जानकारी के अनुसार, करीब 320 भारतीय नागरिकों से अभी संपर्क नहीं हो पाया है।’’ गृह मंत्री शाह को लिखे पत्र में खरगे ने नेपाल में आई प्राकृतिक आपदा के कारण जान-माल की क्षति, घरों एवं बुनियादी ढांचे के व्यापक विनाश और बड़ी संख्या में लोगों के विस्थापन का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारत और नेपाल के लोगों के बीच गहरे और स्थायी संबंध हैं तथा इस दुख की घड़ी में भारत को अपने पड़ोसी के साथ मजबूती से खड़ा होना चाहिए और आपदा से प्रभावित लोगों को हरसंभव सहायता देनी चाहिए। कांग्रेस अध्यक्ष ने नेपाल को तत्काल और व्यापक मानवीय एवं आपदा राहत सहायता देने पर विचार करने का आग्रह किया।उन्होंने कहा कि जहां आवश्यक हो और नेपाल सरकार के साथ समन्वय में राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) की टीमों को तैनात करने पर भी विचार किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदाओं से निपटने में एनडीआरएफ की विशेषज्ञता और अनुभव प्रभावित क्षेत्रों में बचाव, निकासी और राहत अभियानों में महत्वपूर्ण मददगार साबित हो सकते हैं तथा इससे लोगों की जान बचाने और संकट में फंसे लोगों तक तत्काल सहायता पहुंचाने में मदद मिलेगी। खरगे ने उम्मीद जताई कि गृह मंत्रालय मामले की गंभीरता और तात्कालिकता को देखते हुए आवश्यक कदम उठाएगा और नेपाल के बाढ़ प्रभावित लोगों तक भारत की सहायता पहुंचाना सुनिश्चित करेगा।इस बीच, कांग्रेस के विदेश विभाग के प्रमुख सलमान खुर्शीद ने नेपाल में विनाशकारी बाढ़ के कारण हुई जनहानि पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए भारत की ओर से नेपाल के लोगों के साथ एकजुटता जताई। खुर्शीद ने कहा कि कांग्रेस नेपाल में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करती है और उन लोगों के साथ खड़ी है जो अभी अपने प्रियजनों की खबर का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने भारत और नेपाल के बीच सदियों पुराने सभ्यतागत संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों देशों के संबंध साझा आस्था, संस्कृति और हिमालयी पारिस्थितिकी पर आधारित हैं।खुर्शीद ने कहा कि भारतीय जनता नेपाल के लोगों की जरूरत के मुताबिक हरसंभव सहायता देने के लिए तैयार है और संकट की इस घड़ी में भारत नेपाल का भरोसेमंद साझेदार बना रहेगा।

    Russia-Ukraine War: Kyiv पर भीषण Air Strike में 37 की मौत, लापरवाही पर Zelenskyy ने दिखाई भारी सख्ती

    क्षेत्रीय गवर्नर टिमुर् तकाचेंको ने शनिवार को बताया कि यूक्रेन की राजधानी कीव पर रात भर चले रूसी हवाई हमले में कम से कम 37 लोग मारे गए और 42 अन्य घायल हो गए। टेलीग्राम पर जानकारी देते हुए टकाचेंको ने बताया कि बुचा ज़िले में हमले से प्रभावित इलाके से 380 से ज़्यादा लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा रहा है। क्षेत्रीय सैन्य प्रशासन के प्रमुख टकाचेंको ने कहा कि रात भर हुए हमले में कम से कम 50 रिहायशी इमारतें क्षतिग्रस्त हो गईं। हमलों के कारण भीषण आग भी लग गई, जो कई घरों और एक रेस्तरां तक ​​फैल गई।इसे भी पढ़ें: BRICS Summit 2026: हंसो, बना रखी है क्यूं ये सूरत रोनी? एक जगह जब जमा होंगे तीनों- मोदी-जिनपिंग और पुतिनज़ेलेंस्की का बयानयूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की ने कहा कि माइला गाँव में एक गोदाम पर हमला हुआ और हमले के बाद वहाँ धमाका हुआ। ज़ेलेंस्की ने कहा कि अधिकारियों ने कथित तौर पर अधिकारियों की लापरवाही को लेकर आपराधिक कार्रवाई शुरू कर दी है। उन्होंने कहा कि गोला-बारूद को रिहायशी इलाकों के पास नहीं रखा जाना चाहिए था। ज़ेलेंस्की ने कहा नियम बने हुए हैं – गोला-बारूद को घरों या अन्य रिहायशी इलाकों के पास नहीं रखा जा सकता। राष्ट्रपति ने आगे कहा कि हमले में रिहायशी इमारतों के साथ-साथ बुज़ुर्गों और दिव्यांगों के लिए बने एक देखभाल केंद्र को भी नुकसान पहुँचा है। उन्होंने कहा, "370 से ज़्यादा लोगों को पहले ही सुरक्षित जगहों पर पहुँचाया जा चुका है और लोगों को निकालने का काम अभी भी जारी है।इसे भी पढ़ें: Vladimir Putin का नया आदेश: Russia में निजी प्रतिष्ठानों का नियंत्रण ले सकती है सरकाररूसी ड्रोन हमले से गोदाम में आग लगीयूक्रेनी अधिकारियों ने शनिवार को बताया कि इससे पहले, कीव के पास एक गोदाम पर रूसी ड्रोन हमले के कारण भीषण आग लग गई और कई धमाके हुए। अभियोजक कार्यालय के अनुसार, यह हमला शुक्रवार को बुचा जिले के माइला गांव में हुआ। यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब हाल के महीनों में रूस और यूक्रेन ने लंबी दूरी के हमले तेज कर दिए हैं, और आम नागरिकों से जुड़े बुनियादी ढांचे - जैसे लॉजिस्टिक्स गोदाम, तेल सुविधाएं और बंदरगाह - लगातार हमलों का शिकार हो रहे हैं। क्षेत्रीय सैन्य प्रशासन के प्रमुख टिमुर तकाचेंको ने बताया कि घटनास्थल पर आग लग गई और उसके बाद कई धमाके हुए।

    Congress के पास नहीं कोई मुद्दा! CM Dhami का राहुल गांधी पर वार: शुद्धिकरण को लेकर सियासत बंद करो

    शुद्धिकरण विवाद पर राहुल गांधी के बयान पर उत्तराखंड के CM पुष्कर सिंह धामी ने पलटवार किया है। धामी ने कहा है कि शुद्धिकरण करने वालों में कोई भी BJP कार्यकर्ता शामिल नहीं था, लेकिन क्या उत्तराखंड में किसी को पता है कि मल्लिकार्जुन खड़गे की जाति क्या है? वहां धार्मिक उन्माद वाले नारे लगाए गए और एक खास धर्म के लोगों ने ऐसा किया। इसके जवाब में कुछ धार्मिक संगठनों ने वहां शुद्धिकरण कार्यक्रम किया। मुझे लगता है कि कांग्रेस पार्टी के पास अब कोई मुद्दा नहीं बचा है, इसलिए वे बेकार के मुद्दों को आगे बढ़ा रहे हैं।  इसे भी पढ़ें: Rahul Gandhi की मांग: Haldwani शुद्धिकरण मामले में PM Modi दर्ज कराएं SC ST Act के तहत FIRधामी ने आगे कहा कि उत्तराखंड में कौन मानेगा कि यहां जाति के आधार पर भेदभाव होता है? प्रधानमंत्री के नेतृत्व में 'सबका साथ-सबका विकास-सबका विश्वास' के मंत्र के साथ काम किया जा रहा है। इससे पहले कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने उत्तराखंड के हल्द्वानी में पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के सभा स्थल के ‘शुद्धिकरण’ को लेकर शनिवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर तीखा हमला बोला और कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से इस मामले में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश देना चाहिए। गांधी ने संवाददाताओं से कहा कि यह घटना एक अपराध है तथा कांग्रेस यह सुनिश्चित करेगी कि ‘शुद्धिकरण’ में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई हो। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने कांग्रेस मुख्यालय इंदिरा भवन में दलित मुद्दे पर आयोजित इस संवाददाता सम्मेलन के दौरान स्क्रीन पर मनुस्मृति की तस्वीर लगाई गई थी। राहुल गांधी ने कहा कि देश में दो विचारधाराओं के बीच लड़ाई चल रही है, एक संविधान की विचारधारा और दूसरी भाजपा-आरएसएस की विचारधारा। कांग्रेस नेता ने कहा कि संविधान लागू होने के बावजूद देश में दलितों के खिलाफ भेदभाव और हिंसा जारी है तथा इस तरह के कृत्य कानूनन अपराध हैं। उन्होंने दावा किया कि देश में दलित समुदाय के साथ विभिन्न स्तरों पर भेदभाव किया जाता है।  इसे भी पढ़ें: मंत्री पद से हटाने की तैयारी पर भड़के Jual Oram, Union Tribal Affairs Minister के आरोप से Odisha BJP में मचा हड़कंप!गांधी ने आरोप लगाया कि ऐसे कृत्यों में भाजपा और आरएसएस से जुड़े लोग शामिल हैं और ये संविधान तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के खिलाफ हैं। उन्होंने कहा कि खरगे के सभास्थल के शुद्धिकरण को 20 दिन हो गए हैं और अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। हमारी मांग है कि उत्तराखंड में शुद्धिकरण करने वाले लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जाए। देशभर की राजनीति, ताज़ा घटनाओं और बड़ी खबरों से जुड़े रहने के लिए पढ़ें  National News in Hindi केवल प्रभासाक्षी पर। 

    इंटरनेशनल क्रिकेट में टूटा 94 साल पुराना वर्ल्ड रिकॉर्ड, यह खिलाड़ी बनी 5 विकेट हॉल लेने वाली सबसे उम्रदराज प्लेयर

    इंटरनेशनल क्रिकेट में 47 साल की उम्र में डेब्यू करने वाली आइल ऑफ मैन की महिला क्रिकेटर जोआन हिक्स ने अब 51 साल की उम्र में 5 विकेट हॉल लेकर 94 साल पुराने वर्ल्ड रिकॉर्ड को ध्वस्त कर दिया है।

    MMDR Act Amendments पर छिड़ा घमासान, Odisha के खनिज अधिकारों के लिए Supreme Court जा सकती है BJD

    पूर्व मंत्री और बीजू जनता दल (BJD) के सीनियर नेता प्रताप जेना ने शुक्रवार को कहा कि अगर विधानसभा में भारतीय जनता पार्टी (BJP) को 'माइंस एंड मिनरल्स (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) एक्ट' में किए गए हालिया बदलावों के खिलाफ मनाने की कोशिशें नाकाम रहती हैं, तो उनकी पार्टी सुप्रीम कोर्ट का रुख कर सकती है। जेना ने कहा कि उनकी पार्टी ओडिशा विधानसभा में इस मामले पर तुरंत चर्चा और MMDR संशोधन के खिलाफ एक प्रस्ताव पास कराने की कोशिश कर रही है।जेना ने कहा अगर ओडिशा विधानसभा इस बारे में कोई प्रस्ताव पास नहीं कर पाती है, तो हम सुप्रीम कोर्ट जाएंगे। यह सिर्फ़ BJP या BJD के फ़ायदे की बात नहीं है। यह ओडिशा के फ़ायदे की बात है। हम राज्य के फ़ायदे के लिए लड़ेंगे।इसे भी पढ़ें: Odisha CM Mohan Majhi बोले: स्वामी लक्ष्मणानंद हत्याकांड में हर हाल में मिलेगा न्यायउन्होंने कहा हम विधानसभा के अंदर लड़ेंगे। हम अपनी पूरी ताक़त से संसद में भी लड़ेंगे। हम दबाव बनाएंगे। ज़रूरत पड़ने पर हम झारखंड और छत्तीसगढ़ जैसे मिनरल से भरपूर दूसरे राज्यों से भी बात करेंगे। अगर कुछ नहीं हुआ, तो हम जो भी ज़रूरी होगा, वह करेंगे, भले ही इसके लिए सुप्रीम कोर्ट जाना पड़े। सुप्रीम कोर्ट का 2024 का फ़ैसला नौ जजों की कॉन्स्टिट्यूशन बेंच ने दिया था, जिसमें कहा गया था कि राज्यों को मिनरल अधिकारों पर टैक्स लगाने का अधिकार है। अगर हम सुप्रीम कोर्ट जाते हैं, तो हमें (पॉज़िटिव फ़ैसले की) उम्मीद है। 13 अगस्त को संसद में पारित 'माइंस एंड मिनरल्स (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) अमेंडमेंट एक्ट, 2026' में राज्यों की उन शक्तियों पर प्रतिबंध लगाने का प्रावधान है, जिनके तहत वे मिनरल राइट्स (खनिज अधिकारों) और खनिजों वाली ज़मीनों पर टैक्स लगा सकते हैं।इसे भी पढ़ें: Odisha CM Mohan Charan Majhi के जाजपुर दौरे पर विवाद: BJD विधायकों ने दर्ज कराई FIRबिल के 'उद्देश्यों और कारणों के बयान' में कहा गया है कि उचित सीमाओं के बिना राज्यों द्वारा टैक्स और अन्य लेवी (शुल्क) असमान रूप से लगाने से कई समस्याएं पैदा हुई हैं। यह एक्ट केंद्र सरकार को खदानों के रेगुलेशन और खनिजों के विकास को नियंत्रित करने का अधिकार देता है। बिल में यह भी जोड़ा गया है कि केंद्र सरकार को खनिज वाली ज़मीनों को रेगुलेट करने का अधिकार भी होगा। खनिज वाली ज़मीन की परिभाषा ऐसी ज़मीन के तौर पर की गई है जिसमें केंद्र सरकार द्वारा तय किए गए पैमानों के अनुसार खनिज मौजूद हों। हालांकि ज़मीन 'स्टेट लिस्ट' की एंट्री 18 के तहत राज्य का विषय है और यह राज्य की विधानसभाओं को ज़मीन पर टैक्स लगाने का अधिकार देती है ('स्टेट लिस्ट' की एंट्री 49), लेकिन संशोधित एक्ट में यह जोड़ा गया है कि खनिज वाली ज़मीनें भी केंद्र सरकार के नियंत्रण में होंगी।

    Rahul Gandhi की मांग: Haldwani शुद्धिकरण मामले में PM Modi दर्ज कराएं SC ST Act के तहत FIR

    कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने उत्तराखंड के हल्द्वानी में पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के सभा स्थल के ‘शुद्धिकरण’ को लेकर शनिवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर तीखा हमला बोला और कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से इस मामले में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश देना चाहिए। गांधी ने संवाददाताओं से कहा कि यह घटना एक अपराध है तथा कांग्रेस यह सुनिश्चित करेगी कि ‘शुद्धिकरण’ में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई हो। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष ने कांग्रेस मुख्यालय इंदिरा भवन में दलित मुद्दे पर आयोजित इस संवाददाता सम्मेलन के दौरान स्क्रीन पर मनुस्मृति की तस्वीर लगाई गई थी।राहुल गांधी ने कहा, ‘‘देश में दो विचारधाराओं के बीच लड़ाई चल रही है, एक संविधान की विचारधारा और दूसरी भाजपा-आरएसएस की विचारधारा।’’ कांग्रेस नेता ने कहा कि संविधान लागू होने के बावजूद देश में दलितों के खिलाफ भेदभाव और हिंसा जारी है तथा इस तरह के कृत्य कानूनन अपराध हैं। उन्होंने दावा किया कि देश में दलित समुदाय के साथ विभिन्न स्तरों पर भेदभाव किया जाता है। गांधी ने आरोप लगाया कि ऐसे कृत्यों में भाजपा और आरएसएस से जुड़े लोग शामिल हैं और ये संविधान तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के खिलाफ हैं।उन्होंने कहा, ‘‘ खरगे के सभास्थल के शुद्धिकरण को 20 दिन हो गए हैं और अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। हमारी मांग है कि उत्तराखंड में शुद्धिकरण करने वाले लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जाए।’’ उनका कहना था कि यह शुद्धिकरण की घटना छुआछूत का मामला भी है। गांधी ने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री मोदी आदेश दें कि शुद्धिकरण करने वाले लोगों के खिलाफ एससी/एसटी अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाए।’’ उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री कहते हैं कि वह हर जाति के हैं, लेकिन उत्तराखंड में भाजपा के प्रदेश नेतृत्व की ओर से कथित तौर पर ‘शुद्धिकरण’ को सही ठहराया जा रहा है।कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘ये सिर्फ कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे जी का मुद्दा नहीं है, बल्कि ये हिंदुस्तान के हर दलित व्यक्ति से जुड़ा मुद्दा है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘अगर हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष के साथ खुलेआम, बिना झिझक के ऐसा व्यवहार किया जा सकता है तो सोचिए... स्कूल में बच्चे के साथ क्या हो रहा होगा?’’ गांधी ने कहा कि दलितों के साथ इस तरह के व्यवहार के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा, ‘‘हमारी लड़ाई भाजपा-आरएसएस की उस विचारधारा के खिलाफ है, जो भेदभाव और असमानता को बढ़ावा देती है।’’ इस मामले पर कांग्रेस के कई नेताओं का समर्थन नहीं मिलने पर खरगे द्वारा 19 अगस्त को कांग्रेस कार्य समिति की बैठक में पीड़ा व्यक्त किए जाने के बारे पूछे जाने पर राहुल गांधी ने इसे तवज्जो नहीं देने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि खरगे ने ज्यादातर नेताओं के बारे में नहीं, बल्कि कुछ नेताओं के बारे में बात की थी।राहुल गांधी ने शुद्धिकरण मामले प्रधानमंत्री मोदी और बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती की चुप्पी से जुड़े सवाल पर कहा कि इन दोनों नेताओं के बोलने या नहीं बोलने में उनकी कोई दिलचस्पी नहीं है, वह सिर्फ यह चाहते हैं कि खरगे और दलित उत्पीड़न के सभी मामलों में कार्रवाई हो। बीते आठ अगस्त को हल्द्वानी के रामलीला मैदान में खरगे ने एक रैली को संबोधित किया था। इसके दो दिन बाद 10 अगस्त को एक दक्षिणपंथी संगठन से जुड़े कुछ लोगों ने वहां शुद्धिकरण अनुष्ठान किया था।बाद में भाजपा की उत्तराखंड इकाई के अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने कथित तौर पर कहा कि उक्त स्थान पर ऐसे नारे लगाए गए थे जो किसी धार्मिक स्थल के लिए उपयुक्त नहीं थे। उन्होंने विपक्ष की ओर से ‘शुद्धिकरण’ की आलोचना को खारिज करते हुए इसे उचित ठहराया।

    Haldwani Shuddhikaran विवाद: राहुल गांधी ने भाजपा की सोच पर उठाए सवाल, PM Modi से मांगा Kharge के लिए न्याय

    कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शनिवार को मांग की कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उन लोगों के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश दें जो हल्द्वानी के रामलीला मैदान के "शुद्धिकरण" में शामिल थे। यह घटना तब हुई जब दलित समुदाय से आने वाले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने वहां एक जनसभा को संबोधित किया था। इसे दो विचारधाराओं संविधान बनाम RSS-BJP की सोच के बीच की लड़ाई बताते हुए गांधी ने कहा कि उनकी पार्टी के अध्यक्ष को न्याय मिलना चाहिए और सरकार से 'अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम' के तहत कार्रवाई करने की मांग की। हमारी मांग है कि जिन लोगों ने 'शुद्धिकरण' किया, उनके खिलाफ जल्द से जल्द FIR दर्ज की जानी चाहिए। प्रधानमंत्री ने कहा है कि वे सभी जातियों के हैं। इसे भी पढ़ें: खरगे के 'शुद्धीकरण' पर Rahul Gandhi का प्रहार, PM Modi से की मामले में FIR दर्ज करने की मांगउत्तराखंड में उनकी पार्टी के प्रमुख ने दावा किया कि 'शुद्धिकरण' सही काम था। हम चाहते हैं कि PM SC/ST एक्ट के तहत FIR दर्ज करने का आदेश दें। इससे BJP और RSS की सोच का पता चलता है। वे नहीं चाहते कि कोई दलित खुशहाल बने और सम्मान के साथ जिए। हम कोई असंभव चीज़ नहीं मांग रहे हैं। संविधान के अनुसार यह एक अपराध है। हम कांग्रेस अध्यक्ष के लिए न्याय की मांग कर रहे हैं। हम इससे ज़्यादा कुछ नहीं मांग रहे हैं। गांधी ने शनिवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, "यह राज्य सरकार और केंद्र सरकार की ज़िम्मेदारी है कि वे सुनिश्चित करें कि खड़गे जी को उत्तराखंड में न्याय मिले।इसे भी पढ़ें: दलित भेदभाव पर Chirag Paswan का Rahul Gandhi पर पलटवार: सालों से राज करने वाले बताएं क्यों नहीं बदला समाज?बीजेपी के उत्तराखंड प्रमुख को 'शुद्धिकरण' का समर्थन करते हुए दिखाने वाला वीडियो दिखाते हुए गांधी ने कहा, "यह प्रधानमंत्री की विचारधारा को दर्शाता है कि वह इस पर कुछ नहीं कह रहे हैं। बीजेपी के उत्तराखंड प्रमुख ने इस काम को सही ठहराकर गैर-कानूनी काम किया है। लेकिन प्रधानमंत्री चुप हैं।

    दिल्ली के लिए मुसीबत बन चुके हैं ये 8 नाले, अधिकारियों ने पहली बार की इनकी पहचान

    दिल्ली में बाढ़ और जलभराव की समस्या से निपटने के लिए अधिकारियों ने पहली बार 8 ‘मुश्किल’ नालों की पहचान की है। अतिक्रमण, कूड़ा, गोबर, सीवर और सफाई मशीनों की पहुंच में बाधा इनकी प्रमुख समस्याएं हैं। मास्टर प्लान-2047 में नालों की सफाई, री-मॉडलिंग और जलनिकासी क्षमता बढ़ाने के उपाय सुझाए गए हैं।

    बड़ी तैयारी... अब रेलवे बिछाएगा 4-लेन ट्रैक, इन 7 रूटों पर चलेगा काम

    यात्रियों के सफर को आसान बनाने और ट्रेन की क्षमता को बढ़ाने के लिए भारतीय रेलवे बड़ी तैयारी कर रहा है. कुछ रूटों पर वह 4 लेन ट्रैक बिछाने जा रहा है. इससे ट्रेन के देरी होने की भी संभावना कम हो जाएगी.

    Kishtwar Case: High Court सोमवार को करेगा नाबालिग से दुष्कर्म व हत्या मामले की सुनवाई

    जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय 15 वर्षीय आदिवासी लड़की का कथित तौर पर उसके स्कूल शिक्षक द्वारा यौन उत्पीड़न करने के बाद उसकी हत्या करने के मामले की जांच अपराध शाखा से कराने का अनुरोध करने वाली याचिका पर सोमवार को सुनवाई करेगा। किश्तवाड़ जिले के छत्रू इलाके निवासी पीड़िता के पिता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता दीपिका पुष्कर नाथ ने शनिवार को यह याचिका दाखिल की। नाथ ने ‘पीटीआई-भाषा’को बताया, ‘‘मामले को सोमवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है।’’ उन्होंने कहा कि याचिका में अनुरोध किया गया है कि 20 अगस्त को नाबालिग की मौत से पहले हुई घटनाओं के पूरे क्रम की स्वतंत्र जांच के लिए मामले को अपराध शाखा को सौंपा जाए।इन घटनाओं में कथित तौर पर पंचायत का दखल और उसके पिता पर समझौता करने के लिए दबाव डालने की कोशिश भी शामिल है। पुलिस ने इस घटना की जांच के लिए एक विशेष जांच टीम (एसआईटी) बनाई है और अब तक छह लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें स्कूल के प्रधानाध्यापक (जो मुख्य आरोपी हैं), एक नर्स और जिला अस्पताल किश्तवाड़ में तैनात दैनिक वेतन भोगी सफाई कर्मी शामिल हैं।सरकार ने शिक्षक को निलंबित कर दिया है, जबकि दिहाड़ी कर्मचारी को बर्खास्त कर दिया गया है। नाथ ने कहा, ‘‘हमने न केवल नाबालिग के साथ कथित दुष्कर्म की, बल्कि उसके बाद हुई उन सभी घटनाओं की भी निष्पक्ष जांच कराने का अनुरोध किया है, जिनकी वजह से उसकी मौत हुई। पंचायत का कथित दखल, मामले में समझौता करने के लिए पीड़िता के पिता पर डाला गया दबाव और उन दूसरे लोगों की भूमिका, जिन्होंने शायद मामले को दबाने में मदद की या कोशिश की, इन सभी की बारीकी से जांच होनी चाहिए।’’ उन्होंने कहा कि पंचायत का कथित दखल एक अहम पहलू है जिस पर तुरंत जांच की आवश्यकता है, विशेषतौर पर उन आरोपों पर कि लड़की के गरीब और अनपढ़ पिता पर मामले में समझौता करने का दबाव डाला गया, चुप रहने के लिए पैसे की पेशकश की गई और कथित तौर पर एक सादे पन्ने पर उनके अंगूठे के निशान लिए गए।उन्होंने कहा, ‘‘इन आरोपों को कोई अलग-थलग या इत्तेफाक से हुई घटना नहीं माना जा सकता, खासकर तब जब ये आरोप नाबालिग के गर्भवती होने का पता चलने के बाद सामने आए।’’ याचिका के मुताबिक गर्भावस्था की जानकारी होने पर मुख्य आरोपी से जुड़े कथित लोग सक्रिय हुए और एक पंचायत बुलाई गई। याचिकाकर्ता का आरोप है कि उसे चुप रहने और समझौता करने के लिए ‘फटकारा गया और दबाव डाला गया’, जबकि बदले में पैसे की पेशकश भी की गई। पीड़िता के पिता के मुताबिक उसने प्रस्तावित समझौते को अस्वीकार कर दिया और इस बात पर ज़ोर दिया कि आरोपी और अन्य लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए।याचिका के मुताबिक बाद में पिता से दबाव डालकर एक सादे पन्ने पर अंगूठे का निशान लगवाया गया, जबकि उन्हें यह पता नहीं था कि उस पर क्या लिखा था या उससे क्या बनाया जाना था। याचिका में पंचायत में मौजूद सभी लोगों की पहचान और उनसे पूछताछ करने, दस्तावेज तैयार करने और अंगूठे का निशान लेने की परिस्थितियों, और पेश किए गए पैसे के कथित स्रोत और मकसद का पता लगाने का अनुरोध किया गया है।

    Motor Vehicle Act और भाषा विवाद: Cab Drivers को फिलहाल राहत, HC ने माना सरकार का स्टैंड

    बॉम्बे हाई कोर्ट ने शनिवार को चार कैब ड्राइवरों की उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें महाराष्ट्र सरकार के मराठी भाषा के आदेश पर रोक लगाने की मांग की गई थी। कोर्ट को बताया गया कि देवेंद्र फडणवीस सरकार ने भाषा सीखने की समय-सीमा को एक साल और बढ़ाने का फैसला किया है। मामले की सुनवाई के दौरान, अतिरिक्त सरकारी वकील ज्योति चव्हाण ने कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवींद्र घुगे और न्यायमूर्ति गौतम अंखाड की बेंच को बताया कि सरकार ने ऑटो-रिक्शा और टैक्सी ड्राइवरों को भाषा सीखने के लिए दी गई समय-सीमा को एक साल और बढ़ाने का निर्णय लिया है।इसे भी पढ़ें: Calcutta High Court का आदेश तोड़ना पड़ा भारी! Mamata Banerjee पर FIR, बढ़ी मुश्किलबॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा कि उसने सरकार का बयान स्वीकार कर लिया बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा कि उसने बयान स्वीकार कर लिया है और याचिका का निपटारा कर दिया है। यह घटनाक्रम तब हुआ जब मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने गुरुवार को एक प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के बाद समय-सीमा बढ़ाने की घोषणा की, जिससे गैर-मराठी ड्राइवरों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई रोक दी गई और उन्हें भाषा सीखने के लिए और समय मिल गया। वकील विवेक शुक्ला के माध्यम से दायर जनहित याचिका (PIL) में कहा गया था कि 12 अगस्त का सरकारी नोटिफिकेशन नागरिकों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है।बॉम्बे हाई कोर्ट में PIL किसने दायर की?याचिकाकर्ताओं - मो. कासिम अहमद, मो. तौसीफ शेख, सियाद अहमद और सादिक नासिर अली खान - ने दावा किया था कि यह नियम संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार), 19 (व्यापार और पेशा करने की आज़ादी) और 21 (जीवन का अधिकार) के तहत उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है। साथ ही, यह मोटर वाहन अधिनियम के भी खिलाफ है, क्योंकि यह अधिनियम ड्राइविंग लाइसेंस के लिए किसी भाषा की जानकारी की शर्त नहीं रखता है। कोर्ट में दायर याचिका में कहा गया कि मोटर वाहन अधिनियम राज्य सरकार को ड्राइवर के लिए किसी भाषा की कामकाजी जानकारी को योग्यता, बैज की शर्त या परमिट की शर्त के तौर पर तय करने का अधिकार नहीं देता है। साथ ही, यह अधिनियम इस आधार पर बैज को सस्पेंड या रद्द करने का अधिकार भी नहीं देता है। याचिका में आगे कहा गया कि मराठी भाषा की "कामकाजी जानकारी" वाले नियम को लागू करने से लाखों गरीब और प्रवासी ड्राइवरों (जिनमें वे खुद भी शामिल हैं) के बैज सस्पेंड होने और परमिट रद्द होने का खतरा पैदा हो गया है, जिससे उनकी आजीविका पर असर पड़ेगा।

    कब है जन्माष्टमी? जानें पूजा और व्रत पारण का सही समय

    Janmashtami 2026: श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 4 सितंबर को मनाई जाएगी. जानें मथुरा में निशीथ पूजा का शुभ मुहूर्त, रोहिणी नक्षत्र का समय, व्रत पारण और मथुरा-वृंदावन में जन्मोत्सव की तारीख.पूजा में लड्डू गोपाल का पंचामृत अभिषेक कर उन्हें नए वस्त्र पहनाए जाते हैं. माखन-मिश्री, फल और सात्विक भोग अर्पित कर आरती की जाती है.