Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt
    15:07
    Long Island City
    -0.79°C
    Stormy
    4.12 km/h
    60%
    0.2h

    Latest

    ममता बनर्जी के वकील की पोशाक में कोर्ट में आने पर विवाद, बार काउंसिल ने मांग ली प्रैक्टिस डिटेल, वकालत पर उठे सवाल

    पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की सुप्रीमो ममता बनर्जी गुरुवार को कलकत्ता उच्च न्यायालय में वकील के गाउन में राज्य में कथित चुनावोत्तर हिंसा से जुड़े एक मामले पर बहस करने के लिए पेश हुईं। वह टीएमसी के वरिष्ठ नेताओं चंद्रिमा भट्टाचार्य और कल्याण बनर्जी के साथ अदालत पहुंचीं। यह मामला अधिवक्ता शिरशन्या बंद्योपाध्याय द्वारा टीएमसी की ओर से दायर जनहित याचिका से संबंधित है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के परिणाम घोषित होने के बाद पार्टी कार्यालयों पर हमले हुए और कई टीएमसी कार्यकर्ताओं को हिंसा का सामना करना पड़ा।याचिका में टीएमसी कार्यकर्ताओं पर हमलों का आरोप लगाया गया हैयाचिका के अनुसार, तृणमूल कांग्रेस से जुड़े होने के कारण कई पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं पर कथित तौर पर हमला किया गया। इसमें यह भी दावा किया गया है कि चुनाव के बाद कई कार्यकर्ताओं को अपने घर छोड़ने के लिए मजबूर किया गया। यह याचिका 12 मई को कलकत्ता उच्च न्यायालय में प्रस्तुत की गई और मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पॉल और न्यायमूर्ति पार्थसारथी सेन की अध्यक्षता वाली खंडपीठ के समक्ष सुनवाई के लिए आई।इसे भी पढ़ें: Suvendu Adhikari का मास्टरस्ट्रोक: Mamata के गढ़ Bhabanipur को चुना, Nandigram सीट छोड़ीन्यायालय परिसर के बाहर अफरा-तफरीसुनवाई समाप्त होने के बाद न्यायालय परिसर के अंदर तनाव की खबर आई। जब ममता बनर्जी उच्च न्यायालय से बाहर निकल रही थीं, तो वकीलों के एक समूह ने कथित तौर पर उन्हें "चोर" कहकर नारे लगाए। टीएमसी नेताओं और वकीलों द्वारा उन्हें परिसर से सुरक्षित बाहर निकालने के प्रयास के दौरान स्थिति कुछ समय के लिए अराजक हो गई। इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कल्याण बनर्जी ने भाजपा से जुड़े वकीलों पर पूर्व मुख्यमंत्री को परेशान करने का प्रयास करने का आरोप लगाया। उन्होंने आगे आरोप लगाया कि यदि एक पूर्व मुख्यमंत्री के साथ ऐसा व्यवहार किया जा सकता है, तो पूरे बंगाल में आम टीएमसी कार्यकर्ताओं को और भी अधिक शत्रुता का सामना करना पड़ रहा होगा।इसे भी पढ़ें: वकील की ड्रेस पहनकर कलकत्ता HC पहुंचीं ममता बनर्जी, चीफ जस्टिस की अदालत में करेंगी बहसबीसीआई ने ममता बनर्जी के नामांकन संबंधी जानकारी मांगीइस बीच, कलकत्ता उच्च न्यायालय में वकील के रूप में उनकी उपस्थिति की खबरों के बाद, बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने पश्चिम बंगाल बार काउंसिल को पत्र लिखकर ममता बनर्जी के नामांकन और कानूनी प्रैक्टिस की स्थिति से संबंधित रिकॉर्ड मांगे हैं। बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने उनके वकील के रूप में नामांकन, प्रैक्टिस के निलंबन या पुनः आरंभ और प्रैक्टिस सर्टिफिकेट के बारे में जानकारी मांगी है। राज्य बार काउंसिल को दो दिनों के भीतर ये रिकॉर्ड उपलब्ध कराने को कहा गया है। 

    Delhi CM का बड़ा हमला: Rahul Gandhi की Income से 5 गुना खर्च, Foreign Trips का हिसाब दें

    दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने गुरुवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी से उनकी विदेश यात्राओं के वित्तपोषण को लेकर सवाल किया और आरोप लगाया कि लोकसभा में विपक्ष के नेता अपनी घोषित आय से पांच गुना अधिक खर्च करते हैं और उन्हें यात्राओं के लिए इस्तेमाल किए गए धन के स्रोत को स्पष्ट करना चाहिए। X पर एक पोस्ट में, गुप्ता ने लोकसभा में विपक्ष के नेता (एलओपी) द्वारा की गई रहस्यमय विदेश यात्राओं पर चिंता व्यक्त की और इन यात्राओं पर हुए खर्च के संबंध में अधिक पारदर्शिता की मांग की। इसे भी पढ़ें: Keralam Congress में बगावत के सुर! CM पद न मिलने से Ramesh Chennithala नाराज़, Rahul Gandhi का फोन भी बेअसरउन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा कि राहुल गांधी की रहस्यमय विदेश यात्राओं का वास्तविक विवरण अब जनता के सामने है। राहुल गांधी, जो अपनी घोषित आय से पांच गुना अधिक खर्च करते हैं, उन्हें देश को यह स्पष्ट करना चाहिए कि इन यात्राओं के लिए धन का वास्तविक स्रोत क्या है। उन्होंने आगे आरोप लगाया कि यदि ये खर्च विदेशी संस्थाओं द्वारा वहन किए गए हैं, तो यह नियमों का उल्लंघन होगा। गुप्ता ने कहा कि यदि इन यात्राओं का खर्च विदेशी संस्थाओं द्वारा वहन किया गया है, तो यह नियमों का सीधा उल्लंघन है।आगे सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि यदि ये खर्च निजी थे, तो इन्हें विधिवत रूप से सार्वजनिक किया जाना चाहिए था। उन्होंने लिखा कि दूसरी ओर, यदि यह खर्च निजी है, तो इसे आधिकारिक घोषणाओं में क्यों छिपाया गया? गुप्ता ने राहुल गांधी की पारदर्शिता के प्रति प्रतिबद्धता पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि उनकी अस्पष्टता गंभीर कानूनी प्रश्न खड़े करती है। पोस्ट में आगे लिखा गया कि पारदर्शिता का दावा करने वाले विपक्ष के नेता की यह अस्पष्टता गंभीर कानूनी प्रश्न खड़े करती है। राहुल गांधी को इन अज्ञात खर्चों का जवाब देना होगा। इसे भी पढ़ें: Prabhasakshi NewsRoom: Haryana में हर जगह खिला कमल, निकाय चुनावों में BJP की प्रचंड जीत, Congress फिर पिछड़ीये टिप्पणियां राहुल गांधी द्वारा प्रधानमंत्री मोदी की सात अपीलों की आलोचना करने के बाद आईं, जिसमें प्रधानमंत्री ने सिकंदराबाद में एक सभा को संबोधित करते हुए नागरिकों से घर से काम करने को प्राथमिकता देने, ईंधन की खपत कम करने, एक साल तक विदेश यात्रा से बचने, स्वदेशी उत्पादों को अपनाने, खाना पकाने के तेल की खपत कम करने, प्राकृतिक खेती की ओर रुख करने और सोने की खरीद पर अंकुश लगाने का आग्रह किया था ताकि देश को अंतरराष्ट्रीय संघर्षों के कारण उत्पन्न वैश्विक आर्थिक दबावों से निपटने में मदद मिल सके।

    Jinping ने Taiwan मुद्दे पर Trump को दी कड़ी चेतावनी

    चीन और अमेरिका के बीच रिश्तों में एक बार फिर तनाव बढ़ता नजर आ रहा है. बीजिंग में हुई अहम बैठक के दौरान ताइवान मुद्दे पर चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को साफ चेतावनी दे दी. चीन ने ताइवान को अपनी ‘लाल रेखा’ बताते हुए कहा कि इस मामले में किसी भी तरह की दखलअंदाजी दोनों देशों के बीच बड़े टकराव की वजह बन सकती है। इस बयान के बाद वैश्विक राजनीति में हलचल तेज हो गई है

    India, Russia और Iran ने मिलाया हाथ, जानिये BRICS Foreign Ministers Meeting में क्या कुछ हुआ खास

    नयी दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों के सम्मेलन में वैश्विक अस्थिरता, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, ऊर्जा सुरक्षा, समुद्री मार्गों की सुरक्षा और बहुपक्षीय सहयोग को मजबूत बनाने जैसे मुद्दे केंद्र में रहे। भारत ने सम्मेलन के दौरान स्पष्ट रूप से कहा कि मौजूदा वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए केवल बयानबाजी नहीं, बल्कि व्यावहारिक और समन्वित प्रयासों की आवश्यकता है।विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि दुनिया अभूतपूर्व भू-राजनीतिक और आर्थिक अनिश्चितताओं के दौर से गुजर रही है। संघर्ष, जलवायु संकट, महामारी के बाद की चुनौतियां, आपूर्ति शृंखला में व्यवधान और बढ़ती महंगाई ने विकासशील देशों की चिंताओं को और गहरा किया है। उन्होंने कहा कि इन परिस्थितियों में ब्रिक्स देशों की एकजुटता विशेष महत्व रखती है और समूह को केवल विचार विमर्श तक सीमित न रहकर प्रभावी तथा समन्वित जवाब तैयार करने होंगे।इसे भी पढ़ें: BRICS Meeting: नई दिल्ली में PM मोदी की रूसी विदेश मंत्री Lavrov से अहम चर्चा, बढ़ी हलचलजयशंकर ने विशेष रूप से पश्चिम एशिया की स्थिति पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में जारी संघर्ष, समुद्री यातायात के लिए खतरे और ऊर्जा ढांचे में व्यवधान वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बन चुके हैं। जयशंकर ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य और लाल सागर जैसे अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में सुरक्षित तथा निर्बाध समुद्री आवाजाही सुनिश्चित करना दुनिया की आर्थिक स्थिरता के लिए बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि शांति टुकड़ों में नहीं हो सकती और अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान, नागरिकों की सुरक्षा तथा सार्वजनिक ढांचे को निशाना बनाने से बचना आवश्यक है।विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि संवाद और कूटनीति ही किसी भी संघर्ष के स्थायी समाधान का मार्ग हैं। उन्होंने संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता को अंतरराष्ट्रीय संबंधों की बुनियाद बताते हुए कहा कि भारत तनाव कम करने और स्थिरता बहाल करने के हर रचनात्मक प्रयास में योगदान देने के लिए तैयार है। उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ सहयोग को भी वैश्विक प्राथमिकता बताया और कहा कि सीमा पार आतंकवाद अंतरराष्ट्रीय संबंधों के मूल सिद्धांतों का उल्लंघन है।हम आपको बता दें कि भारत की अध्यक्षता में आयोजित इस दो दिवसीय सम्मेलन में रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची, ब्राजील के विदेश मंत्री माउरो विएरा, इंडोनेशिया के सुगियोनो और दक्षिण अफ्रीका के रोनाल्ड लामोला सहित कई देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ब्रिक्स देशों के विदेश मंत्रियों से मुलाकात की और वैश्विक सहयोग को मजबूत बनाने पर बल दिया।देखा जाये तो सम्मेलन ऐसे समय में आयोजित हुआ है जब पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बढ़ रहा है और इसका असर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति तथा व्यापार पर दिखाई देने लगा है। अमेरिका की व्यापार और शुल्क संबंधी नीतियों ने भी उभरती अर्थव्यवस्थाओं की चिंताओं को बढ़ाया है। भारत ने इस पृष्ठभूमि में भरोसेमंद आपूर्ति शृंखला और विविध बाजारों की आवश्यकता पर जोर दिया। जयशंकर ने कहा कि कई देश ऊर्जा, खाद्य, उर्वरक और स्वास्थ्य सुरक्षा जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं तथा ब्रिक्स इन देशों को अधिक प्रभावी ढंग से सहायता प्रदान कर सकता है।हम आपको बता दें कि ब्रिक्स समूह, जिसमें शुरुआत में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका शामिल थे, उसका अब तेजी से विस्तार कर रहा है। वर्ष 2024 में मिस्र, इथियोपिया, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात को शामिल किया गया, जबकि 2025 में इंडोनेशिया भी सदस्य बना। आज यह समूह दुनिया की लगभग आधी आबादी, वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद के करीब 40 प्रतिशत और वैश्विक व्यापार के लगभग 26 प्रतिशत का प्रतिनिधित्व करता है।सम्मेलन के दौरान ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची की भारत यात्रा भी विशेष चर्चा में रही। वह ऐसे विमान से दिल्ली पहुंचे जिस पर ‘मिनाब 168’ लिखा था। यह उस घटना का प्रतीक है जिसमें ईरान के अनुसार फरवरी में मिनाब शहर के एक स्कूल पर हमले में 168 बच्चों की मौत हुई थी। इस घटना ने पश्चिम एशिया संघर्ष के मानवीय पहलू को और अधिक संवेदनशील बना दिया है। अराघची और जयशंकर के बीच क्षेत्रीय स्थिरता, ऊर्जा सुरक्षा और संपर्क परियोजनाओं पर चर्चा होने की भी खबरें हैं।वहीं रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने भी भारत के साथ अपने देश के संबंधों को मजबूत और भरोसेमंद बताया। उन्होंने कहा कि बाहरी दबावों और अनुचित प्रतिस्पर्धा के बावजूद रूस भारत को ऊर्जा आपूर्ति संबंधी अपने सभी समझौतों का पालन करेगा। उन्होंने कुडनकुलम परमाणु परियोजना का उल्लेख करते हुए कहा कि रूस और भारत के बीच ऊर्जा, विज्ञान, प्रौद्योगिकी और रक्षा क्षेत्रों में सहयोग लगातार बढ़ रहा है। लावरोव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दुनिया के सबसे ऊर्जावान नेताओं में से एक बताते हुए कहा कि भारत और रूस के संबंध केवल रणनीतिक नहीं बल्कि गहरी मित्रता पर आधारित हैं।हम आपको यह भी बता दें कि ब्रिक्स सम्मेलन में जलवायु परिवर्तन, तकनीकी असमानता और बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार जैसे मुद्दे भी उठाए गए। जयशंकर ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र व्यवस्था को अधिक प्रभावी और प्रतिनिधित्वपूर्ण बनाने की आवश्यकता है तथा सुरक्षा परिषद में सुधार अब और अधिक टाला नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि जलवायु न्याय, वित्तीय सहायता और प्रौद्योगिकी तक समान पहुंच सुनिश्चित करना विकासशील देशों के हित में बेहद जरूरी है।बहरहाल, भारत ने इस सम्मेलन के माध्यम से यह संदेश देने की कोशिश की कि आज की दुनिया में सहयोग, संवाद और सुधार ही स्थिरता का आधार बन सकते हैं। पश्चिम एशिया संकट, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच ब्रिक्स देशों की भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। भारत ने स्पष्ट किया कि उभरती अर्थव्यवस्थाओं की आवाज को मजबूत बनाने और अधिक न्यायपूर्ण वैश्विक व्यवस्था के निर्माण में ब्रिक्स की जिम्मेदारी लगातार बढ़ रही है।

    BRICS Meeting: नई दिल्ली में PM मोदी की रूसी विदेश मंत्री Lavrov से अहम चर्चा, बढ़ी हलचल

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को नई दिल्ली में ब्रिक्स विदेश मंत्रियों के शिखर सम्मेलन के दौरान ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची और रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव से मुलाकात की। यह मुलाकात 14 से 15 मई तक राजधानी में आयोजित ब्रिक्स विदेश मंत्रियों और वरिष्ठ प्रतिनिधियों की दो दिवसीय बैठक के दौरान हुई। प्रधानमंत्री ने सदस्य और सहयोगी देशों के मंत्रियों और प्रतिनिधियों के साथ आधिकारिक ब्रिक्स पारिवारिक तस्वीर में भी भाग लिया।इसे भी पढ़ें: Delhi CM Rekha Gupta का बड़ा फैसला, सरकारी काफिले में 60% Cut, अब Electric Vehicle से चलेंगीजयशंकर ने विदेश मंत्रियों का स्वागत कियाइससे पहले दिन में, विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शिखर सम्मेलन स्थल भारत मंडपम में कई विदेश मंत्रियों और वरिष्ठ राजनयिकों का स्वागत किया। औपचारिक चर्चा से पहले जयशंकर द्वारा स्वागत किए गए पहले नेताओं में रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव भी शामिल थे। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची भी उच्च स्तरीय बैठक के लिए स्थल पर पहुंचे। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चीन यात्रा के दौरान बीजिंग में ही रहे चीनी विदेश मंत्री वांग यी की जगह भारत में चीनी राजदूत जू फीहोंग ने बीजिंग का प्रतिनिधित्व किया।इसे भी पढ़ें: इधर ट्रंप-जिनपिंग की तस्वीर आई, उधर मोदी से मिलने पहुंचे ईरान-रूस के विदेश मंत्रीब्रिक्स और सहयोगी देशों की भागीदारीजयशंकर ने इंडोनेशिया के विदेश मंत्री सुगियोनो, दक्षिण अफ्रीका के विदेश मंत्री रोनाल्ड लामोला और इथियोपिया के विदेश मंत्री गेदियन तिमोथियोस हेसेबोन का भी स्वागत किया। संयुक्त अरब अमीरात के विदेश मंत्रालय में राज्य मंत्री खलीफा शाहीन अल मरार भी शिखर सम्मेलन में उपस्थित थे। बैठक से पहले, जयशंकर ने नई दिल्ली में इंडोनेशिया के विदेश मंत्री सुगियोनो से बातचीत की। इस सम्मेलन में ब्रिक्स सदस्य देशों और पर्यवेक्षक देशों के विदेश मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा के लिए एक साथ आए हैं।

    नेतन्याहू के UAE दौरे पर बवाल! नाहयान से मुलाकात पर बौखलाया ईरान

    ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने यूएई पर इजरायल के साथ गुप्त गठजोड़ का आरोप लगाया है. उन्होंने कहा कि यूएई ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल के युद्ध में सक्रिय साझेदार है और नेतन्याहू की कथित यूएई यात्रा इसका प्रमाण है. हालांकि, यूएई ने नेतन्याहू के दौरे की खबर को खारिज किया है.

    हेरिटेज ट्रेन का स्टार, कई फिल्मों में भी झलक... इस शहर में 'जिंदा' है अकबर!

    Akbar Steam Engine: भारतीय रेलवे का गौरवशाली स्टीम इंजन 'अकबर' 1965 में बनाया गया था और यह रेवाड़ी के लोको शेड में संरक्षित है. यह इंजन अपनी तेज गति और भव्यता के लिए जाना जाता है. कई बॉलीवुड फिल्मों में भी इसकी झलक दिखाई गई है.

    ट्रंप ने जिनपिंग को बताया दोस्त, अमेरिका-चीन बैठक पर टिकी दुनिया की नजरें

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बीजिंग में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से अहम मुलाकात की. ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल में दोनों नेताओं के बीच करीब दो घंटे तक बातचीत हुई जिसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि हमें रिश्तों को सही रास्ते पर ले जाने की जरूरत है. इतना ही नहीं अपने संबोधन के दौरान ट्रंप ने चीनी राष्ट्रपति को अपना दोस्त बताया. बैठक के दौरान जिनपिंग ने कहा कि बदलती दुनिया में अमेरिका और चीन को टकराव नहीं बल्कि साझेदारी के रास्ते पर आगे बढ़ना चाहिए, क्योंकि पूरी दुनिया इस संबंध पर नजर रखे हुए है.

    इधर ट्रंप-जिनपिंग की तस्वीर आई, उधर मोदी से मिलने पहुंचे ईरान-रूस के विदेश मंत्री

    अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बीजिंग में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मिल रहे हैं। जिनपिंग से हाथ मिलाने के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने जो बयान दिया वो भारत के लिए एक बड़े तूफान की चेतावनी हो सकता है। लेकिन जिस वक्त डोनाल्ड ट्रंप शी जिनपिंग के साथ टहल रहे थे उसी वक्त रूस के विदेश मंत्री सरगई लवरोव भारत पहुंच गए और बयान दे दिया कि हिंदी रूसी भाई-भाई। दिल्ली का पारा सिर्फ मौसम की वजह से नहीं बल्कि हाई प्रोफाइल रणनीति की वजह से चढ़ा हुआ है। दुनिया की नजरें इस वक्त नई दिल्ली पर टिकी है क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने खड़े थे रूस के विदेश मंत्री सरगई लावरोव और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराची। लेकिन सवाल यह है कि आखिर युद्ध और वैश्विक तनाव के इस दौर में यह दिग्गज अचानक भारत क्यों खींचे चले आए? दरअसल ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक दिल्ली में शुरू हो चुकी है और माहौल अब और गमा गया जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद इन मंत्रियों से मिलने पहुंचे। रूस, ईरान, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका के विदेश मंत्रियों के साथ पीएम मोदी की यह मुलाकात सिर्फ शिष्टाचार नहीं थी। जब ब्रिक्स फैमिली फोटो के लिए सब एक साथ खड़े हुए तो संदेश साफ था भारत ग्लोबल साउथ की वो आवाज है जिसे कोई नजरअंदाज नहीं कर सकता है। सोचिए एक तरफ रूस यूक्रेन युद्ध में उलझा हुआ है। दूसरी तरफ ईरान और इजराइल के बीच तनाव चरम पर है। इसे भी पढ़ें: BRICS Summit में गूंजा Israel-Palestine का मुद्दा, जयशंकर ने बताया भारत का फाइनल स्टैंडअमेरिका और पश्चिम के प्रतिबंधों का सामना कर रहे यह दोनों देश भारत में आकर पीएम मोदी से मिल रहे हैं। जो दिखाता है कि नई दिल्ली आज के दौर में ग्लोबल पीसमेकर की भूमिका में है। ईरान के विदेश मंत्री का भारत आना यह संकेत देता है कि ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार के लिए भारत उनकी प्राथमिकता है। चाहे पश्चिम का दबाव कितना भी हो। बैठक के पहले दिन विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अपनी बात ट्रेडमार्क शैली में रखी। उन्होंने साफ कहा कि दुनिया भू- राजनीतिक उथल-पुथल और व्यापारिक व्यवधानों से गुजर रही है। जयशंकर ने ब्रिक्स देशों से आग्रह किया कि वे अब व्यावहारिक तरीके खोजें। उनका इशारा साफ था। सिर्फ बातों से काम नहीं चलने वाला है बल्कि युद्ध और संघर्ष के बीच व्यापार को बचाने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे।इसे भी पढ़ें: BRICS का खेल, भारत-रूस की बैठक में दनादन फाइनल हुई डीलजयशंकर ने शांति के लिए संवाद और कूटनीति के महत्व पर जोर देकर फिर से भारत का स्टैंड साफ कर दिया। अब यह सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है जब रेड सी और पश्चिम एशिया में जारी तनाव ने वैश्विक अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ दी है। ईरान और इजराइल के बीच संभावित टकराव से कच्चे तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं। भारत ने इसी मन से दुनिया को आगाह किया कि आर्थिक अनिश्चितताएं और जलवायु चुनौतियां अब हमारे दरवाजे पर आ चुकी हैं। ब्रिक्स को यहां एक स्टेबलाइज फोर्स यानी स्थिरता लाने वाली शक्ति बनना होगा। दरअसल, यह 11 उभरती अर्थव्यवस्थाओं का वह समूह है जो दुनिया की लगभग आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करती है। दुनिया की 40% जीडीपी और 26% वैश्विक व्यापार यहीं से आता है। जब भारत इस समूह की अध्यक्षता करता है तो वह सिर्फ अपना हित नहीं बल्कि पूरी विकासशील दुनिया का नेतृत्व कर रहा होता है। 

    NEET पेपर लीक के बाद यूपी सिपाही भर्ती परीक्षा पर सख्ती, STF ने बढ़ाई निगरानी

    NEET पेपर लीक मामले के बाद उत्तर प्रदेश पुलिस की 32,679 पदों पर होने वाली सिपाही भर्ती परीक्षा को लेकर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है. STF ने सभी यूनिट्स को अलर्ट किया है और सॉल्वर गैंग, पेपर लीक गिरोह तथा ठगी करने वालों पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं. परीक्षा केंद्रों पर कड़ी जांच और ई-वेरिफिकेशन की व्यवस्था लागू की जा रही है.

    Amit Shah से मिलने पहुँचे CM Yogi Adityanath, UP Elections और राजनीतिक नियुक्तियों से जुड़े मुद्दों पर हुई चर्चा!

    भाजपा ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों के लिए कमर कस ली है और इस कड़ी में सबसे पहले पार्टी कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ाने के लिए कई कदम उठाये जाएंगे। बताया जा रहा है कि उत्तर प्रदेश के विभिन्न निगमों और आयोगों में खाली पड़ी राजनीतिक नियुक्तियां जल्द ही की जाएंगी। इसी सिलसिले में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आज दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। हाल ही में अपने मंत्रिमंडल का विस्तार करने के बाद यह योगी की पहली दिल्ली यात्रा थी। बताया जा रहा है कि योगी और शाह की मुलाकात आधे घंटे से ज्यादा समय तक चली। माना जा रहा है कि इस दौरान नये बनाये गये मंत्रियों के विभागों को लेकर भी चर्चा हुई। पार्टी सूत्रों का कहना है कि अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले भाजपा पार्टी संगठन की सारी कमजोरियों को दूर कर लेना चाहती है और पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं की नाराजगी भी दूर करना चाहती है जिसके लिए आने वाले दिनों में तमाम कदम उठाए जाएंगे। बताया जा रहा है कि जल्द ही पार्टी संगठन, निगमों और आयोगों में जो नियुक्तियां होने जा रही हैं उनमें सामाजिक संतुलन, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और सहयोगी दलों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व दिया जायेगा।हम आपको यह भी बता दें कि हाल ही में पश्चिम बंगाल और असम विधानसभा चुनावों में शानदार प्रदर्शन के साथ पूर्वी भारत में अपना वर्चस्व स्थापित करने के बाद भाजपा की नजर अब 2027 में होने वाले सात राज्यों के विधानसभा चुनावों पर है, जिनमें गुजरात, गोवा, मणिपुर, पंजाब, उत्तर प्रदेश और हिमाचल प्रदेश प्रमुख हैं। पार्टी ने इन राज्यों में चुनाव की तैयारियां पहले ही शुरू कर दी हैं और पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन ने अगले वर्ष के चुनावी अभियान के लिए जमीनी स्तर पर काम प्रारंभ कर दिया है। भाजपा के एक सूत्र ने कहा, “पांच राज्यों के चुनाव संपन्न होने के बाद अब पार्टी का ध्यान अगले वर्ष सात राज्यों में होने वाले चुनावों पर केंद्रित हो गया है। कुछ स्तर पर तैयारियां शुरू हो चुकी हैं, जिन्हें अब और तेज किया जाएगा।” पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन गोवा, गुजरात और उत्तर प्रदेश का दौरा कर विभिन्न कार्यक्रमों में भाग ले चुके हैं और इस दौरान उन्होंने पार्टी के प्रमुख पदाधिकारियों व नेताओं के साथ बंद कमरे में बैठकें कर चुनावी रणनीति पर चर्चा की है। वह जल्द ही उत्तराखंड का दौरा करेंगे, जहां अगले वर्ष गोवा, गुजरात, मणिपुर, पंजाब, उत्तर प्रदेश और हिमाचल प्रदेश के साथ चुनाव होने हैं। हम आपको बता दें कि वर्तमान में उत्तर प्रदेश, गुजरात, उत्तराखंड, मणिपुर और गोवा में भाजपा की सरकार है, जबकि पंजाब में आम आदमी पार्टी और हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस सत्ता में है।इसे भी पढ़ें: खर्च कटौती Mission पर PM Modi, अब 4 गाड़ियों के काफिले में चलेंगे, BJP शासित राज्यों में भी लागू हुआ नियमबताया जा रहा है कि आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश भाजपा की गतिविधियों का केंद्र रहने वाला है। प्रधानमंत्री, गृह मंत्री, तमाम केंद्रीय मंत्रियों सहित भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के अब लगातार यूपी के दौरे होते रहेंगे जिससे पार्टी कार्यकर्ताओं में जोश बना रहे। लोकसभा चुनाव 2024 में भाजपा को उत्तर प्रदेश में खासा नुकसान उठाना पड़ा था इसलिए भाजपा नेतृत्व उत्तर प्रदेश के राजनीतिक समीकरणों को लेकर खासा सतर्क है। माना जा रहा है कि यूपी के मामलों को सीधे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह देखेंगे ताकि राज्य विधानसभा चुनावों में भाजपा की हैट्रिक में कोई कमी नहीं रह जाये।

    हाथ में गीता-गले में तुलसी माला, कान्स में सिंगर का सनातनी स्टाइल!

    सिंगर-आर्टिस्ट आरती खेतरपाल ने Cannes Film Festival 2026 में वृंदावन थीम वाला खास लहंगा पहनकर सबका ध्यान खींच लिया. हाथ में भगवद गीता, गले में तुलसी माला और सनातन धर्म पर लिखे उनके भावुक पोस्ट की सोशल मीडिया पर खूब चर्चा हो रही है.