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    कडप्पा में लाल चंदन की तस्करी का भंडाफोड़, 1.98 टन लकड़ी जब्त

    आंध्र प्रदेश के कडप्पा में लाल चंदन की तस्करी का भंडाफोड़ हुआ है. पुलिस ने 8 आरोपियों को गिरफ्तार कर 1.984 टन लकड़ी, तीन वाहन और कॉफी पाउडर के 643 कार्टन जब्त किए. जब्त सामान की कीमत करीब 1.30 करोड़ रुपये है. जानें पूरी कहानी.

    Varahamihira Biography |नासा भी हैरान! प्राचीन भारत के इस ऋषि ने 1500 साल पहले ही सब लिया था जान|Matrubhoomi

    जब दुनिया के पास न टेलिस्कोप था, न कंप्यूटर... न अंतरिक्ष की तस्वीरें थीं... तब क्या कोई इंसान सिर्फ अपनी आंखों, गणना और असाधारण बुद्धि के दम पर आसमान के रहस्यों को समझ सकता था? ज हम मंगल ग्रह पर पानी खोजने के लिए अरबों रुपये के मिशन भेजते हैं। ग्रहों की गति जानने के लिए सुपरकंप्यूटर का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन करीब 1500 साल पहले, भारत की धरती पर एक ऐसा विद्वान हुआ, जिसने आकाश को सिर्फ देखा नहीं। उसे गणना में उतारने की कोशिश की। नाम था- वराहमिहिर। गुप्तकाल के उस स्वर्णिम दौर में, जब भारत गणित, खगोल विज्ञान और ज्ञान-विज्ञान की नई ऊंचाइयों को छू रहा था, वराहमिहिर ने खगोलीय घटनाओं, ग्रहों की गति, मौसम, वर्षा और प्रकृति के संकेतों को समझने के लिए अपने समय की उपलब्ध ज्ञान-परंपराओं को एक साथ जोड़ा। उनकी सबसे बड़ी खासियत सिर्फ उनका ज्ञान नहीं था बल्कि सवाल पूछने का उनका तरीका था। आखिर बिना टेलिस्कोप, बिना कंप्यूटर और बिना आधुनिक वैज्ञानिक उपकरणों के वराहमिहिर ने इतना कुछ कैसे समझ लिया था? क्या यह सिर्फ असाधारण गणितीय प्रतिभा थी, या प्राचीन भारत के पास आसमान को पढ़ने की ऐसी कोई वैज्ञानिक परंपरा थी, जिसके बारे में हम आज भी बहुत कम जानते हैं? आज मातृभूमि में खोलेंगे इसी प्राचीन वैज्ञानिक रहस्य की परतें। वराहमिहिर की कहानी- उस जीनियस की, जिसने सदियों पहले आसमान को पढ़ने की कोशिश की थी।इसे भी पढ़ें: SpaceX का Starship पहली बार कक्षा में पहुंचा, इंजन की खराबी से उड़ान जल्दी रोकीवराहमिहिर के बारे में जानें505 ईस्वी में अवंती जिसे आज हम उज्जैन कहते हैं वहां उनका जन्म हुआ था। असल में उनका मूल नाम सिर्फ मिहिर था। उनके पिता नागावल खुद एक जाने-माने ज्योतिषी थे तो शुरुआती ज्ञान उन्हें वहीं से मिला। लेकिन उन्हें सही दिशा उनके गुरु वराह से मिली। बस इसी अपार ज्ञान और लगन के कारण उनका नाम पड़ गया वराहमिहिर । इसके बाद 550 ईसवी के आसपास वे चंद्रगुप्त द्वितीय के दरबार के प्रतिष्ठित नवरत्नों में शामिल हो गए। यह बात बहुत ही खूबसूरती से दिखाती है कि नवरत्नों का वह समूह कितनी विविधताओं से भरा था। एक तरफ हमारे पास कालिदास हैं जो प्रेम, रोमांस और कला के बिल्कुल शिखर पर थे और ठीक दूसरी तरफ हैं वराहमिहिर  जो पूरी तरह से ऑब्जेक्टिव, साइंटिफिक और एक प्योर खगोल शास्त्री थे। मतलब जब एक कवि अपनी भावनाओं को शब्दों में पिरो रहा था। तब दूसरा आसमान में तारों की चाल का सटीक गणित सुलझा रहा था। अब इस नंबर 505 पर गौर करते हैं। दिलचस्प बात यह है कि यह सिर्फ उनके जन्म का साल नहीं है। इतिहास में एक बहुत ही रोचक किवदंती दर्ज है कि बचपन में वराह मिहिर की दृष्टि और कुशाग्रता इतनी गजब की थी कि उन्होंने आसमान में एक ही बार में 505 ग्रहों या खगोलीय पिंडों को देख लिया था। हम यहां इसकी साइंटिफिक एक्यूरेसी पर बहस नहीं कर रहे हैं। लेकिन यह तथ्य साफ बताता है कि उस समय के लोग उनके विजन और उनकी बौद्धिक क्षमता को किस जादुई स्तर का मानते थे। 'बृहत् संहिता' वराहमिहिर की सबसे मशहूर रचनाओं में से एक थी। यह वास्तुकला, मंदिरों, ग्रहों की चाल, ग्रहण, समय की गणना, ज्योतिष, मौसम, बादलों के बनने, बारिश, खेती, गणित, रत्न-विज्ञान, इत्र और कई अन्य विषयों पर एक विस्तृत अध्ययन है। वराहमिहिर का कहना है कि हालाँकि उन्होंने खगोल विज्ञान, शिल्प शास्त्र और मंदिर निर्माण पर पहले के कामों का कुछ श्लोकों में सार दिया है, लेकिन डिज़ाइन के कई सिद्धांतों और मॉडलों पर उनकी व्याख्या उन शुरुआती ग्रंथों में से है जो आज भी मौजूद हैं। फ़ारसी यात्री और विद्वान अल-बिरूनी ने 'बृहत् संहिता' के अंशों और वराहमिहिर की बातों का ज़िक्र किया है। इसके अलावा, ज्योतिष और खगोल विज्ञान पर कई प्रतिष्ठित रचनाएँ लिखने का श्रेय भी वराहमिहिर को जाता है। उन्होंने ग्रीक भाषा का अध्ययन किया और अपनी रचनाओं में यूनानियों (यवनों) की तारीफ़ की कि वे "विज्ञान में बहुत निपुण" थे, भले ही धार्मिक रीति-रिवाजों के मामले में वे अशुद्ध माने जाते थे। कुछ विद्वानों के अनुसार, राशि-चिह्नों, ज्योतिषीय गणनाओं और शुभ अनुष्ठानों के लिए भविष्यवाणियों को समझने और लोकप्रिय बनाने में उनकी अहम भूमिका रही है।पंचसिद्धान्तिका अर्थात पाँच खगोलीय सिद्धांतों पर ग्रंथ वराहमिहिर की सबसे महत्वपूर्ण रचना है, जिसे लगभग 575 ईस्वी (CE) में लिखा गया था। यह ग्रंथ उन प्राचीन भारतीय खगोलशास्त्रीय रचनाओं का सार प्रस्तुत करता है जो आज विलुप्त हो चुकी हैं। यह पाँच अलग-अलग पूर्ववर्ती ग्रंथों का संकलन है, जिनमें हेलेनिस्टिक (यूनानी), मिस्र (Egyptian), रोमन और वेदांग ज्योतिष के तत्व शामिल हैं। वराहमिहिर इतिहास के पहले ऐसे खगोलशास्त्री थे जिन्होंने यह बताया था कि विषुव (Equinox) हर साल 50.32 आर्क सेकंड (या अयाना) की गति से खिसकता है।भारतीय ज्योतिष के पाँच प्रमुख सिद्धांतसूर्य-सिद्धांत:इसे सूर्य का सिद्धांत माना जाता है। पारंपरिक रूप से ऐसा माना जाता था कि इसकी रचना लतादेव ने की थी, परंतु ग्रंथ के अपने उल्लेख के अनुसार इसकी रचना मय असुर (जिन्हें मामूनी मयन भी कहा जाता है) ने की थी।वशिष्ठ-सिद्धांत :इसकी रचना विष्णुचंद्र ने की थी। इस सिद्धांत का नाम सप्तर्षि मंडल (Great Bear) के एक प्रमुख तारे 'वशिष्ठ' के नाम पर रखा गया है।पौलिश-सिद्धांत (Paulisa-Siddhanta):इसकी रचना पौलिश द्वारा की गई थी, और इसका नाम 'सैंत्रा के पौलिश' के नाम पर आधारित है।रोमक-सिद्धांत:'रोमक' नाम श्रीषेण के 'रुम' (रोमन साम्राज्य/क्षेत्र) से संबंधित है।पितामह-सिद्धांत:यह प्राचीन भारतीय खगोलीय गणनाओं पर आधारित उन शुरुआती सिद्धांतों में से एक है, जिसमें सूर्य की गति और चंद्रमा के संचरण (चन्द्र संचार) की गणनाओं का उल्लेख मिलता है।   महाग्रंथ और खगोलीय चमत्कारवराहमिहिर सिर्फ आसमान को निहारते नहीं थे बल्कि वे उसे डिकोड करके पन्नों पर उतारते थे। उन्होंने पांच प्रमुख खगोलीय सिद्धांतों पर पूरी तरह से महारत हासिल की। तीन विशाल महाग्रंथों की रचना की और ब्रह्मांड के ऐसे ऐसे रहस्य खोले जो उस समय की दुनिया सोच भी नहीं सकती थी। इन तीन महाग्रंथों का स्केल इतना बड़ा था कि इनमें दिए गए गणित और खगोल विज्ञान के फार्मूले आज भी हैरान कर देते हैं। सीधे उनके ग्रंथों से निकले इन सात चमत्कारों को देखिए। मंगल ग्रह पर पानी होने का संकेत भूकंप की बिल्कुल सटीक भविष्यवाणी करना बारिश का पूर्वानुमान ग्रहों की चाल का कॉम्प्लेक्स गणित ग्रहण लगने के पीछे का असली लॉजिक औरतों और मृदा विज्ञान यानी मिट्टी की स्टडी सोचिए जरा 1500 साल पहले बिना किसी सेटेलाइट के इतने सटीक ऑब्जरवेशंस यह कोई तुक्का नहीं था बल्कि इसके पीछे बहुत ही सॉलिड डाटा और भारी-भरकम कैलकुलेशंस मौजूद थी।बृहत्संहितावराहमिहिर की 'बृहत्संहिता' एक और महत्वपूर्ण रचना है। हालाँकि यह किताब मुख्य रूप से भविष्य बताने की विद्या पर केंद्रित है, लेकिन इसमें कई अन्य विषयों को भी शामिल किया गया है। इसमें खगोल विज्ञान, ग्रहों की चाल, ग्रहण, बारिश, बादल, वास्तुकला, फसल विकास, इत्र बनाना, विवाह और घरेलू जीवन-व्यवहार जैसे इंसानी दिलचस्पी के कई विषय शामिल हैं। यह किताब गरुड़ पुराण में बताए गए रत्नों की परख के तरीकों और उसी ग्रंथ में वर्णित नौ पवित्र मोतियों के बारे में विस्तार से बताती है। इसे "महान संकलन" कहा जाता है क्योंकि इसमें 106 अध्याय हैं।खगोल विज्ञान (Astronomy)उन्होंने बताया कि चंद्रमा और ग्रहों का अपना कोई प्रकाश नहीं होता, वे सूर्य की रोशनी के परावर्तन (reflection) से चमकते हैं।भूजल विज्ञान (Hydrology)बृहत्संहिता में उन्होंने दीमक की बांबियों, चट्टानों और विशेष पेड़ों (जैव-सूचक) को देखकर जमीन के नीचे पानी का सटीक पता लगाने के नियम दिए।कृषि एवं वनस्पति विज्ञान (Botany & Agriculture)उन्होंने बीजों के उपचार, पौधों की बीमारियों की रोकथाम और कलम बांधने (grafting) की प्रारंभिक तकनीकों का उल्लेख किया।मौसम विज्ञान (Meteorology)हवा की दिशा, बादलों के रूप और जानवरों के व्यवहार को देखकर बारिश का पूर्वानुमान लगाने के तरीके विकसित किए।इतिहास के पन्नों से सीधा 1500 साल आगे आज के समय में आते हैं। यह फैक्ट सच में दिमाग घुमा देने वाला है कि नासा जैसी दुनिया की सबसे एडवांस स्पेस एजेंसी आज भी अंतरिक्ष की स्टडी के लिए वराहमीर की बनाई गई प्राचीन त्रिकोणमिति की साइन टेबल्स का अध्ययन करती है। यह इस बात का अल्टीमेट प्रूफ है कि सच्चा विज्ञान कभी पुराना नहीं होता। सदियों पहले लिखे गए उन्हीं ग्रंथों ने आज के स्पेस मिशंस के लिए एक बेहद मजबूत नींव रखी है। मंगल पर पानी का अनुमान, लौह स्तंभ की वह अजैय तकनीक या फिर भूकंप की सटीक भविष्यवाणी। ? वराहमिहिर की यह कहानी हमें मजबूर करती है कि हम अपने इतिहास को एक बिल्कुल नए और साइंटिफिक नजरिए से देखें।  

    मुस्कान-साहिल को फांसी की सजा से परिवार संतुष्ट, मां का दर्द अब भी कम नहीं

    मेरठ के चर्चित नीले ड्रम हत्याकांड में मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को मौत की सजा सुनाए जाने से सौरभ का परिवार संतुष्ट है. हालांकि, परिजनों का कहना है कि असली तसल्ली दोषियों को फांसी पर लटकते देखने के बाद ही मिलेगी. परिवार हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट तक कानूनी लड़ाई के लिए तैयार है. वहीं, एसएसपी ने केस से जुड़े पुलिसकर्मियों को प्रशस्ति पत्र और नकद पुरस्कार देने की बात कही है.

    10 दिन तक हवा-पानी से डरता रहा, 11वें दिन थम गई सांसें, मौत का वीडियो

    बागपत में कुत्ते के काटने के करीब एक महीने बाद किशोर साहिल की रेबीज से मौत हो गई. परिजनों के मुताबिक, कुत्ते ने उसके सिर में काटा था, लेकिन समय पर इलाज नहीं कराया गया. बाद में वह हवा और पानी से डरने लगा और मुंह से लार टपकने लगी. उसकी हालत का वीडियो भी सामने आया है.

    वैशाली के Raghopur में नाव हादसे पर Chirag Paswan सख्त, दोषियों पर होगी कार्रवाई

    केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने बिहार के वैशाली ज़िले में नाव पलटने की घटना में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई की चेतावनी दी। इस हादसे में 15 साल या उससे कम उम्र के कम से कम 13 बच्चों की मौत हो गई। यह दुखद घटना राघोपुर दियारा इलाके में हुई और बुधवार को मारे गए बच्चों के शवों को अंतिम संस्कार के लिए ले जाया जा रहा था। पासवान ने कहा कि केंद्र और बिहार सरकारें यह सुनिश्चित करेंगी कि प्रभावित परिवारों को जल्द से जल्द हर संभव मदद मिले।इसे भी पढ़ें: Top 10 Breaking News 14 October 2026 | Air India Hijack Scare | Parvinder Singh Jhotta Murder | Bihar Ganga Accident | देश-विदेश से जुड़ी आज की मुख्य सुर्खियाँ यहां विस्तार से पढ़ेंनालंदा मेडिकल कॉलेज अस्पताल का दौरा करते हुए, उन्होंने बचाए गए बच्चों से मुलाक़ात की और उनके परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की। उन्होंने इस मुश्किल समय में सही इलाज और मदद के महत्व पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि हम इस पक्के इरादे के साथ यहाँ आए हैं कि भर्ती बच्चों के इलाज में कोई कमी न रहे। हमने बुरे से बुरे सपने में भी कभी नहीं सोचा था कि ऐसी दिल दहला देने वाली घटना होगी, जिसमें इतने सारे मासूम बच्चों की जान चली जाएगी।हाजीपुर के सांसद ने कहा कि सोमवार देर रात घटना की खबर मिलने के बाद से ही वे स्थानीय प्रशासन और प्रभावित परिवारों के संपर्क में हैं। उन्होंने इस बात की जांच की ज़रूरत पर भी ज़ोर दिया कि क्या इसमें कोई लापरवाही हुई है, क्योंकि ऐसी शिकायतें मिली हैं कि नाव की मांग की गई थी लेकिन वह उपलब्ध नहीं कराई गई। उन्होंने कहा कि अगर ऐसा हुआ है, तो ज़िम्मेदार अधिकारियों को बख्शा नहीं जाएगा।पासवान ने इस बात पर ज़ोर दिया कि यह समझना ज़रूरी है कि इतने सारे बच्चे बिना किसी प्रशासनिक निगरानी के देर रात नदी क्यों पार कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सच्चाई सामने आने के बाद दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने माना कि बचाव कार्यों में ज़्यादा से ज़्यादा बच्चों को बचाने पर ध्यान दिया गया, लेकिन अफ़सोस जताया कि जिन लोगों की जान चली गई, उन्हें वापस नहीं लाया जा सकता। उन्होंने कहा कि हम इस मुश्किल समय में उनके परिवारों को हिम्मत और हौसला देने के लिए यहां आए हैं।इसे भी पढ़ें: बिहार में CM Samrat Choudhary ने किसानों को Krishi Input Subsidy की राशि ट्रांसफर कीउन्होंने घायलों के इलाज और परिवारों की मदद सुनिश्चित करने में दोनों सरकारों की त्वरित ज़िम्मेदारी पर ज़ोर देते हुए कहा कि चाहे केंद्र सरकार हो या राज्य सरकार, दोनों को अपनी भूमिका पूरी तत्परता से निभानी चाहिए। मेरी कोशिश यही रहेगी। पासवान ने यह भी बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को घटना की जानकारी दे दी गई है और उन्होंने इस त्रासदी पर दुख और संवेदना व्यक्त की है।

    आखिर इस आग में ऐसा क्या है? पूरी दुनिया मोदी-पुतिन के सामने झुक गई?

    रूस में लगी आग ने अचानक पूरी दुनिया का ध्यान भारत की तरफ खींच दिया है। यह आग भारत के सबसे अच्छे मित्र देश रूस में लगी है। लेकिन इसी आग का फायदा पुतिन को मिला और ताकत पीएम मोदी को। बहरहाल अब सवाल यह है कि आखिर इस आग में ऐसा क्या है कि पूरी दुनिया पीएम मोदी और पुतिन के सामने झुक गई है? इस बड़े और पेचीदा सवाल का जवाब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुद दे दिया है। अमेरिका ने भारत और रूस पर बहुत बड़े बयान दिए हैं। दरअसल यह आग यूक्रेन के हमले के बाद रूस की ऑयल रिफाइनरी में लगी है। यूक्रेन पिछले कई महीनों से लगातार रूस की ऑयल रिफाइनरीज पर ड्रोन से हमले कर रहा है। जिसकी वजह से रूस की डीजल उत्पादन क्षमता में लगभग 30 से 40% की गिरावट आ गई है। अभी तक तो अमेरिका भी यह देखकर हंस रहा था। लेकिन अचानक दुनिया में डीजल सप्लाई कम होने की वजह से सबसे बुरा असर भी अमेरिका पर पड़ गया। दुनिया में डीजल सप्लाई काफी कम हो गई है। रूस की रिफाइनरीज जल रही है तो दूसरी तरफ सऊदी अरब पिट रहा है। इसी बवाल के बीच अमेरिका में 3 नवंबर को मिड टर्म चुनावों के लिए वोटिंग होनी है। इसी वोटिंग से पहले अमेरिका में डीजल की कीमतें अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई हैं।इसे भी पढ़ें: US रेगुलेटर्स ने Bank of America पर $1.2 बिलियन का जुर्माना क्यों लगाया? जानें वजहअमेरिका में डीजल की औसत कीमत $6.2 से लेकर $6.27 प्रति गैलन के आसपास पहुंच गई है। जो पिछले साल के मुकाबले करीब 65% ज्यादा है। कैलिफोर्निया में तो डीजल की कीमत 8.21 प्रति गैलन है। डीजल के लिए इतना पैसा देना अमेरिका के मिडिल क्लास की हैसियत से बाहर हो गया है। ट्रंप ने कहा है कि यूक्रेन को अब नए राष्ट्रपति की जरूरत है। जेलस्की रूस की ऑयल रिफाइनरीज पर हमला नहीं कर सकते क्योंकि इसकी वजह से पूरी दुनिया परेशान हो रही है। नुकसान भले ही हो रहा है लेकिन जेलस्की के सत्ता परिवर्तन की तैयारी भी शुरू हो गई है। करवाने वाला भी अमेरिका है। यह रूस के लिए बहुत पॉजिटिव खबर है। रूस की ऑयल रिफाइनरीज में आग जरूर लग गई है, लेकिन रूस इसकी भरपाई भारत की मदद से कर रहा है। रूस ने भारत को जमकर कच्चा तेल देने के साथ ही भारत से डीजल लेना भी शुरू कर दिया है। ऑयल रिफाइनरीज ठप पड़ने के बावजूद रूस ने अपने डीजल स्टॉक को जबरदस्त तरीके से बढ़ा लिया है और यह सब कुछ भारत की मदद से हो रहा है। जलती हुई रिफाइनरीज के बावजूद रूस के पास अब इतना डीजल है कि ट्रंप को भी अब रूस से डीजल खरीदने के लिए डील करनी पड़ गई है।इसे भी पढ़ें: Donald Trump ने रूस से डीजल सौदे का किया बचाव, बताया वैश्विक बाजार की जरूरतइस आग का फायदा भारत को क्या हुआ है। ऑयल रिफाइनरीज ठप होने के बाद रूस अपने ही कच्चे तेल को रिफाइन करके डीजल नहीं बना पा रहा। ऑयल रिफाइनरीज ठप होने के बाद रूस दुनिया को डीजल नहीं बेच पा रहा है। ऐसे में यह काम भारत की रिफाइनरीज ने शुरू कर दिया। आज भारत रूस को तो डीजल दे ही रहा है। लेकिन भारत पहली बार अमेरिका को पछाड़ते हुए यूरोप का भी सबसे बड़ा डीजल सप्लायर बन गया है। इसी को देखते हुए अमेरिका ने भारत पर बहुत बड़ा ऐलान किया है। अमेरिकी विदेश मंत्री भारत के दौरे पर आ रहे हैं और वह गुजरात के शहर जामनगर जाएंगे। आपको बता दें कि भारत की सबसे बड़ी ऑयल रिफाइनरीज जामनगर में ही हैं। जामनगर से ही भारत पूरी दुनिया को डीजल और पेट्रोल सप्लाई कर रहा है। यानी आग रूस में लगी। फायदा पुतिन को मिला और ताकत भारत को।

    ED Action: Reliance Power की 2000 करोड़ से अधिक की संपत्ति FEMA के तहत जब्त

    प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बुधवार को कहा कि उसने अनिल अंबानी समूह की कंपनी रिलायंस पावर लिमिटेड (आरपीएल) के खिलाफ विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के तहत जांच के सिलसिले में कंपनी की 2,000 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति जब्त की है। केंद्रीय जांच एजेंसी ने एक बयान में कहा कि जब्त की गई संपत्ति में आरपीएल के बैंक खातों में जमा राशि और सासन पावर लिमिटेड में उसकी हिस्सेदारी शामिल है। ईडी ने 12 अक्टूबर को फेमा की धारा 37ए के तहत 2,032.81 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त करने का आदेश जारी किया था।कंपनी ने मंगलवार को नियामकीय सूचना में ईडी की कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह एजेंसी के आरोपों को ‘‘विवादित’’ मानती है और अपने हितों के साथ-साथ सभी शेयरधारकों तथा अन्य हितधारकों के हितों की रक्षा के लिए कानूनी सलाह के अनुसार सभी उचित कदम उठाएगी। ईडी की जांच भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) की उस कार्रवाई से शुरू हुई जो आरपीएल की लेखा में 2,101.46 करोड़ रुपये की राशि को बट्टे खाते में डालने या उसके लिए प्रावधान करने से संबंधित थी। एजेंसी के अनुसार, यह राशि ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स (बीवीआई) और केमैन आइलैंड्स की कंपनियों में किए गए विदेशी निवेश तथा उन्हें दिए गए अग्रिम भुगतान से संबंधित थी।ईडी ने कहा कि रिलायंस नेचुरल रिसोर्सेज लिमिटेड (जिसका बाद में आरपीएल में विलय हो गया) ने 2006 में विदेशी मुद्रा में परिवर्तनीय बॉण्ड जारी कर 30 करोड़ अमेरिकी डॉलर जुटाए थे। इसमें से 27.5 करोड़ अमेरिकी डॉलर का निवेश उसकी पूर्ण स्वामित्व वाली सिंगापुर की अनुषंगी कंपनी रिलायंस नेचुरल रिसोर्सेज (सिंगापुर) प्राइवेट लिमिटेड (आरएनआरएल-एस) में किया गया था। ईडी ने आरोप लगाया, ‘‘आरएनआरएल-एस ने यह राशि जिनेवा स्थित डॉयचे बैंक (स्विस) एसए में जमा कराई थी।इस जमा राशि का इस्तेमाल ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स में पंजीकृत कंपनियों को दिए गए ऋण के लिए जमानत के रूप में किया गया था।’’ एजेंसी ने दावा किया कि जांच में पता चला कि इन बीवीआई कंपनियों का नियंत्रण और प्रबंधन भारत से रिलायंस अनिल अंबानी समूह (आरएएजी) द्वारा ऐसे लोगों के माध्यम से किया जाता था जो समूह के निर्देशों के अनुसार काम करते थे। ईडी की जांच में यह भी सामने आया कि ऋण से प्राप्त राशि का इस्तेमाल विभिन्न उद्देश्यों के लिए किया गया, जिनमें मॉरीशस स्थित विदेशी कंपनियों के माध्यम से धन को अस्थायी रूप से भारत वापस लाना भी शामिल था। एजेंसी ने आरोप लगाया कि इस धन से रिलायंस अनिल अंबानी समूह को लाभ हुआ।

    बैग नहीं छोड़ा तो स्कूटी से 50 मीटर घसीटते ले गए बदमाश! गुवाहाटी में महिला के साथ खौफनाक वारदात CCTV में कैद

    असम के गुवाहाटी में झपटमारी की कोशिश का एक खौफनाक मामला सामने आया है. यहां काहिलीपाड़ा इलाके में स्कूटी सवार दो युवकों ने सड़क पर पैदल जा रही एक महिला का बैग छीनने की कोशिश की. महिला ने बैग नहीं छोड़ा तो वह स्कूटी के साथ करीब 50 मीटर तक सड़क पर घिसटती चली गई. घटना का सीसीटीवी फुटेज सामने आया है, जिसमें महिला को अपना सामान बचाने के लिए संघर्ष करते देखा जा सकता है.

    मेरठ के नीले ड्रम हत्याकांड में साहिल-मुस्कान को सजा-ए-मौत, इससे पहले आखिरी बार किसे दी गई थी फांसी?

    मेरठ के सौरभ राजपूत हत्याकांड में मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को 14 अक्टूबर 2026 को फांसी की सजा सुनाई गई। इससे भारत में मृत्युदंड पर फिर चर्चा शुरू हो गई है। जानते हैं कि आखिरी बार भारत में किसे फांसी दी गई थी।

    स्पीच दे रहे थे सऊदी मंत्री, फोन में बजा सायरन, बोले- इंशाअल्लाह...

    मानव संसाधन और सामाजिक विकास मंत्री अल-राजही ने मोबाइल का सायरन बजने के बावजूद शांति से अपना भाषण जारी रखा. हालांकि कुछ सेकेंड्स के लिए वह गंभीर हो गए. उन्होंने कहा भी कि हम पूरी दुनिया के मालिक की सुरक्षा में हैं. इंशाअल्लाह उनकी साजिश को उन्हीं पर पलट देगा.

    कंगना का फूटा गुस्सा, वीडियो शेयर कर बोलीं- ये देश की सच्चाई

    पर्यावरण वॉलंटियर बिट्टू तबाही के उस वीडियो पर कंगना रनौत ने रिएक्शन दिया है, जिसमें दिखाया गया है कि आठ महीने की सफाई कोशिशों के बावजूद अजणार नदी में कचरा वापस आ गया है.

    मुस्कान-साहिल को फांसी की सजा सुनाने वाले जज कौन हैं?

    मेरठ के सनसनीखेज नीले ड्रम कांड में मुस्कान और साहिल को फांसी की सजा सुनाने वाले जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार मिश्रा की हर तरफ चर्चा हो रही है. इस ऐतिहासिक फैसले के ल‍िए उनकी खूब तारीफ भी हो रही है. आइए जानते हैं उनके अब तक के कार्यकाल में वो कहां कहां रहे. मेरठ तो वो अभी पांच महीने पहले ही आए थे.