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    19 सितंबर से होगी मॉनसून की विदाई, कई राज्यों में अलर्ट!

    मानसून की विदाई करीब है, लेकिन देश के कई हिस्सों में बारिश का दौर जारी है. 16 सितंबर को दिल्ली एनसीआर, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश और पूर्वोत्तर राज्यों में बारिश का अलर्ट है. कई जगह भारी बारिश के साथ गरज-चमक, बिजली और तेज हवाओं का खतरा रहेगा. उत्तर प्रदेश में बारिश के साथ बाढ़ की चिंता बढ़ सकती है. पश्चिमी राजस्थान से 19 सितंबर के आसपास मानसून वापसी संभव है.

    20 साल बाद सूर्या-ज्योतिका ने दोबारा की शादी, इमोशनल हुए बच्चे

    सूर्या और ज्योतिका ने अपनी शादी की 20वीं सालगिरह पर एक बार फिर शादी के वचन दोहराए. इस खास मौके पर परिवार और करीबी दोस्त मौजूद थे. वे शादी के वचन लेेते वक्त इमोशनल भी हुए.

    बाढ़ ने बदला जंगल का रास्ता, गांवों में घुसे तेंदुए और मगरमच्छ

    कतर्नियाघाट के जंगलों में बाढ़ का पानी पहुंचा तो जंगली जानवर भी सुरक्षित जमीन की तलाश करने लगे. अब तेंदुए और मगरमच्छ जैसे हिंसक जानवर आबादी वाले इलाकों में पहुंच रहे हैं. हालांकि वन विभाग लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर इन्हें जंगल के सुरक्षित हिस्सों में पहुंचा रहा है.

    दुनिया भर में चमके भारतीय शहर, लेकिन क्वालिटी ऑफ लाइफ में पीछे

    रिपोर्ट से साफ है कि भारत के सामने अब बड़ी चुनौती सिर्फ शहरों की अर्थव्यवस्था को तेजी से बढ़ाना नहीं है, बल्कि इस आर्थिक विकास का फायदा लोगों के जीवन स्तर में सुधार और अधिक समान विकास के रूप में पहुंचाना भी है.

    पश्चिम बंगाल में बड़ा राजनीतिक संकट: दल-बदल मामले में 10 बागी TMC विधायकों को अयोग्यता नोटिस, 7 दिनों में मांगा जवाब

    पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर शुरू हुआ अंदरूनी सत्ता संघर्ष अब औपचारिक दल-बदल विरोधी कानूनी कार्यवाही में बदल चुका है। पश्चिम बंगाल विधानसभा सचिवालय ने बागी TMC गुट के 10 प्रमुख विधायकों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इन विधायकों से ममता बनर्जी गुट द्वारा दायर अयोग्यता याचिका पर 7 दिनों के भीतर अपना आधिकारिक जवाब प्रस्तुत करने को कहा गया है। यह कदम वरिष्ठ TMC विधायक सोवनदेब चट्टोपाध्याय द्वारा सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने के ठीक एक दिन बाद उठाया गया है। चट्टोपाध्याय ने बागी गुट के नेता और विपक्ष के नेता रिताब्रत बनर्जी समेत 10 विधायकों को दल-बदल विरोधी कानून के तहत अयोग्य घोषित करने की मांग की है।यह विवाद अब विधानसभा, अदालतों, संसद और चुनाव आयोग समेत कई मंचों पर चल रहा है। ये नोटिस रिताब्रत बनर्जी, अरूप रॉय, फिरहाद हकीम, संदीपन साहा, अखरुज़्ज़मान अंसारी, शिउली साहा, सबीना यास्मीन, बिप्लब मित्रा, जावेद खान और रथिन घोष को जारी किए गए। विधानसभा सूत्रों ने बताया कि उनसे सात दिनों के भीतर जवाब देने को कहा गया है।यह मामला मंगलवार देर रात सामने आया, जब अंसारी ने नोटिस मिलने की पुष्टि की। उन्होंने कहा, "हम पार्टी के भीतर इस मामले पर चर्चा करेंगे और समय पर उसी के अनुसार जवाब देंगे।" चट्टोपाध्याय, जो विधानसभा में विपक्ष के नेता पद के लिए ममता बनर्जी गुट के उम्मीदवार हैं, ने 7 जुलाई को स्पीकर रथिन बोस को पत्र लिखकर 10 विधायकों को अयोग्य घोषित करने की मांग की थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि इन विधायकों ने पार्टी के हितों के खिलाफ काम किया है।विपक्ष के नेता की नियुक्ति का मुद्दा पहले से ही कलकत्ता हाई कोर्ट में है, जहां चट्टोपाध्याय ने इस पद के लिए रिताब्रत बनर्जी को मान्यता देने के स्पीकर के फैसले को चुनौती दी है। दल-बदल विरोधी कार्यवाही उन घटनाओं के बाद शुरू हुई जब ममता बनर्जी गुट द्वारा चट्टोपाध्याय को नामित किए जाने के बावजूद रिताब्रत बनर्जी को विपक्ष का नेता चुन लिया गया। बागी गुट ने पार्टी के 80 में से 65 विधायकों के समर्थन का दावा किया है। बाद में उन्होंने अंसारी को मुख्य सचेतक (चीफ़ व्हिप) चुना और पार्टी नेतृत्व के अधिकार को चुनौती देते हुए समानांतर संगठनात्मक गतिविधियां शुरू कीं।यह संकट मई में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में TMC की हार के बाद पैदा हुआ था। यह टकराव संसद तक भी पहुँच गया है, जहाँ बागी गुट के 20 लोकसभा सांसदों ने TMC छोड़कर 'नेशनलिस्ट सिटिज़न्स पार्टी ऑफ़ इंडिया' जॉइन कर ली है, जो BJP के नेतृत्व वाले NDA के साथ है।लोकसभा सचिवालय ने भी दल-बदल विरोधी कानून के तहत अयोग्य ठहराने की याचिकाओं पर इन 20 बागी सांसदों को नोटिस जारी किए हैं। ये नोटिस सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले के बाद जारी किए गए, जिसमें लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से अयोग्यता याचिकाओं पर जल्द फैसला लेने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करने का निर्णय लिया गया था।ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट का तर्क है कि बागी विधायकों की हरकतें दल-बदल के बराबर हैं और इसके लिए उन्हें विधानसभा से अयोग्य ठहराया जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट में चट्टोपाध्याय की याचिका में रिताब्रत बनर्जी और नौ अन्य विधायकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई है, और TMC की कानूनी टीम का कहना है कि पार्टी नेतृत्व के खिलाफ काम करने के लिए उन्हें नतीजे भुगतने होंगे।पार्टी नेता और वकील कल्याण बनर्जी ने कहा है कि याचिका में विधायकों को अयोग्य ठहराने की मांग उसी आधार पर की गई है, जैसा बागी सांसदों के खिलाफ कार्यवाही में बताया गया था। हालाँकि, बागी गुट ने इस कदम को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया है और विधानसभा सचिवालय के नोटिस को सामान्य प्रक्रिया करार दिया है।इसे भी पढ़ें: SRK Confirms King Release Date | अफवाहों पर शाहरुख खान ने लगाया पूर्णविराम! 24 दिसंबर को ही सिनेमाघरों में होगी रिलीज किंगरिताब्रत बनर्जी के साथ वाले TMC गुट के प्रवक्ता रिजु दत्ता ने कहा, "स्पीकर ने सामान्य प्रक्रिया के तहत 10 विधायकों से जवाब मांगा है। ममता बनर्जी के TMC गुट के लिए जश्न मनाने जैसा कुछ नहीं है।" उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग इस घटनाक्रम का जश्न मना रहे हैं, उन्हें स्थिति साफ होने तक बस कुछ दिन इंतजार करना होगा।इसे भी पढ़ें: ये हथकंडे...मसूद अजहर पर पाकिस्तान के 70 लाख वाले इनामी 'खेल' की भारत ने खोली पोलइसके अलावा, TMC का नाम और घास पर दो फूलों वाला चुनाव चिह्न चुनाव आयोग के सामने विवाद का विषय बना हुआ है, और दोनों गुट पार्टी की पहचान, चुनाव चिह्न और संगठनात्मक संसाधनों पर अपना दावा ठोक रहे हैं। चुनाव आयोग ने शनिवार को दोनों पक्षों के साथ बातचीत की और अब उसके फैसले का इंतजार है।इस बीच, ममता बनर्जी गुट के एक विधायक ने संकेत दिया कि अयोग्यता की कार्यवाही के पहले दौर के लिए इन 10 विधायकों को चुनना जानबूझकर किया गया था। उन्होंने कहा कि बाकी विधायकों को अपनी स्थिति पर पुनर्विचार करने और ममता बनर्जी गुट में लौटने के लिए "कुछ समय" दिया जा रहा है, साथ ही चेतावनी दी कि जो ऐसा नहीं करेंगे, उन्हें गंभीर राजनीतिक परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।Read Latest National News in Hindi only on Prabhasakshi 

    लोगों को किताबें पढ़ने का पैसा दे रहा ये देश, क्यों पड़ी इसकी जरूरत?

    ट्रेन का इंतजार कर रहे हों या किसी कैफे में अकेले बैठे हों, हर किसी में जो चीज सबसे कॉमन दिखेगी वह है फोन स्क्रॉल करना. दक्षिण-पूर्व एशिया का एक छोटा सा देश अपने लोगों को तेजी से कम होती जा रही पढ़ने की आदत को दोबारा से शुरू करने के लिए एक अभियान चला रहा है. इसे लेकर सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रिया आ रही है.

    'दुश्मन मारे जा रहे', बॉर्डर पर हूती-सऊदी सेना में ताबड़तोड़ गोलीबारी

    हूती समर्थित मीडिया ने एक वीडियो जारी कर अल-जौफ के पूर्व में सऊदी समर्थित बलों के साथ सीधी भिड़ंत और सैन्य जमावड़ों पर हमले का दावा किया है. यह वीडियो ऐसे समय आया है, जब यमन में पश्चिमी तट से लेकर सऊदी सीमा तक जमीनी लड़ाई, हवाई हमले, ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइलों के साथ संघर्ष तेजी से फैल रहा है.

    Iran War रोकने के लिए US House में प्रस्ताव पारित, Donald Trump के अधिकारों पर रोक की तैयारी

    ईरान में जारी युद्ध को खत्म करने के लिए अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में तीसरी बार मतदान किया गया। सदन ने युद्ध शक्तियों संबंधी एक प्रस्ताव को मंजूरी दी, जिसके तहत राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कांग्रेस की मंजूरी के बिना सैन्य कार्रवाई जारी रखने की क्षमता पर रोक लगाई जा सकेगी। मंगलवार देर रात हुए मतदान में प्रस्ताव 220-204 मतों से पारित हुआ।इस बार पहले की तुलना में कुछ और रिपब्लिकन सांसद भी अधिकतर डेमोक्रेट सांसदों के साथ युद्ध समाप्त करने के पक्ष में शामिल हुए। हालांकि, इनमें से कोई भी प्रस्ताव राष्ट्रपति की मेज तक नहीं पहुंचा है और वहां पहुंचने पर ट्रंप द्वारा इसे वीटो किए जाने की लगभग पूरी संभावना है। मैसाचुसेट्स के डेमोक्रेट सांसद सेथ मौल्टन, जो इराक युद्ध के दौरान नौसैनिक के रूप में सेवाएं दे चुके हैं और इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाने में सक्रिय रहे, ने कहा, ‘‘याद कीजिए, डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि यह युद्ध केवल कुछ हफ्तों तक चलेगा?’’ उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि कांग्रेस संविधान के निर्देश के अनुसार ‘‘वास्तव में कठिन सवाल पूछे, बजाय इसके कि वह एक और युद्ध समर्थक प्रशासन के अधीन हो जाए।’’ फ्लोरिडा के रिपब्लिकन सांसद और ‘हाउस फॉरेन अफेयर्स कमेटी’ के अध्यक्ष ब्रायन मैस्त ने सवाल उठाया कि डेमोक्रेट क्षेत्र से किन सैन्य संसाधनों को हटाना चाहते हैं, जहां उनके अनुसार ईरान अब भी खतरा बना हुआ है।मैस्त ने कहा कि ट्रंप ‘‘हमेशा चलने वाले युद्धों के खिलाफ हैं और वे ईरान के साथ दशकों से चले आ रहे टकराव को समाप्त कर रहे हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘वे (ईरान) लगातार अमेरिका के लिए खतरा बने हुए हैं। अब बहुत हो गया।’’ यह मध्यावधि चुनावों से पहले ईरान युद्ध पर प्रतिनिधि सभा का आखिरी मतदान हो सकता है। विदेशों में चल रहा संघर्ष आगामी चुनावों में, राजनीतिक अभियानों में महत्वपूर्ण मुद्दा बना हुआ है।ट्रंप की ओर से 28 फरवरी को शुरू किया गया युद्ध लगभग सात महीने से जारी है। इस दौरान रुक-रुककर घातक मिसाइल हमले होते रहे हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में भारी उथल-पुथल मची हुई है। सांसद इस सप्ताह के अंत में चुनाव प्रचार के लिए अपने गृह क्षेत्रों में लौट रहे हैं।चुनाव में कांग्रेस पर नियंत्रण किस पार्टी का रहेगा, यह तय होगा और इसमें अब 50 दिन से भी कम समय बचा है। डेमोक्रेट्स रिपब्लिकन पार्टी से सत्ता वापस लेने की कोशिश कर रहे हैं। ईरान संघर्ष के कारण होर्मुज़ जलडमरूमध्य से तेल की आपूर्ति प्रभावित होने के कारण मतदाताओं को विशेष रूप से पेट्रोल की ऊंची कीमतों का सामना करना पड़ रहा है।ट्रंप ने खुद व्हाइट हाउस में दूसरा कार्यकाल जीतने के दौरान अमेरिका को विदेशी युद्धों में शामिल न करने का वादा किया था। ईरान के खिलाफ उनकी कार्रवाइयों का असर उस रिपब्लिकन पार्टी पर भी पड़ रहा है, जिसका प्रतिनिधि सभा और सीनेट दोनों में नियंत्रण है। जुलाई में किए गए एक सर्वेक्षण से यह सामने आया कि अधिकतर अमेरिकियों का कहना है कि ईरान से युद्ध उचित नहीं था।

    UPI पेमेंट पर MDR... इससे मिले पैसों का सरकार कहां करेगी इस्तेमाल?

    UPI Payment MDR: 2000 रुपये से ज्यादा के यूपीआई ट्रांजैक्शन पर लगने वाले कुल एमडीआर के 5 फीसदी का इस्तेमाल एक फंड द्वारा UPI इकोसिस्टम को सिर्फ सरकारी सब्सिडी पर निर्भर रखने के बजाय आत्मनिर्भर बनाने के लिए होगा.

    P Chidambaram Birthday: Harvard से लेकर 7 बार संसद में Budget पेश करने तक, ऐसा रहा P Chidambaram का सफर

    पूर्व वित्त मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम का आज 16 सितंबर को अपना 81वां जन्मदिन मना रहे हैं। वह कांग्रेस के सबसे अनुभवी और वरिष्ठ नेताओं में शामिल हैं। वर्तमान समय में पी चिदंबरम राज्यसभा के सांसद हैं और पार्टी के रणनीतिक और नीतिगत मामलों में अहम भूमिका निभाते हैं। केंद्र सरकार में यूपीए के समय चिदंबरम देश के वित्त मंत्री और गृहमंत्री जैसे पद भी संभाल चुके हैं। वहीं कांग्रेस के लिए वह कई बार संकटमोचन तो कई बार किरकिरी की वजह भी बने हैं। तो आइए जानते हैं उनके जन्मदिन के मौके पर पी चिदंबरम के जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातों के बारे में...जन्म और परिवारतमिलनाडु के कनाडुकथन गांव में 16 सितंबर 1945 को पी. चिदंबरम का जन्म हुआ था। इनका पूरा नाम पलानीअप्पन चिदंबरम है। उन्होंने अपनी शुरूआती शिक्षा चेन्नई के मद्रास क्रिश्चियन सेकेंडरी स्कूल से पूरी की थी। फिर चेन्नई के प्रेसीडेंट कॉलेज से साइंस में सांख्यिकी से स्नातक की डिग्री प्राप्त की। वहीं चिदंबरम ने बोस्टन के हार्वर्ड यूनिवर्सिटी से बिजनेस मैनेजमेंट में मास्टर की डिग्री प्राप्त की।  सियासी सफरमई 2004 से लेकर नवंबर 2008 तक चिदंबरम ने वित्त मंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभाली। इसके बाद मुंबई आतंकी हमले के बाद पी चिदंबरम को देश का गृहमंत्री बनाया गया। करीब साढ़े तीन साल तक गृह मंत्रालय का पद संभालने के बाद वह मनमोहन सरकार में फिर दोबारा वित्त मंत्री बने।आर्थिक मामलों के जानकारपी. चिदंबरम की देश की आर्थिक नीतियों और वित्तीय मामलों पर पकड़ बेहद मजबूत मानी जाती है। वह करीब 7 बार देश का आम बजट संसद में पेश कर चुके हैं। जिनमें से उन्होंने 5 बजट संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार में बतौर वित्त मंत्री के रूप में पेश किया था।आर्थिक विशेषज्ञता के साथ-साथ वरिष्ठ वकील होने के नाते वह पार्टी के लिए मजबूत आर्थिक, कानूनी और संवैधानिक मामलों में रणनीति भी तैयार करते हैं। संसद का सदन हो या मीडिया का मंच वह पार्टी की बात को बेबाकी से रखने वाले नेताओं में गिने जाते हैं। इसके अलावा वह वित्त समिति के साथ-साथ वित्त मंत्रालय सलाहकार समिति के सदस्य हैं। वह भारत-इटली संसदीय मैत्री समूह के अध्यक्ष की जिम्मेदारी के फरवरी 2026 से संभाल रहे हैं।पार्टी से हो जाता है वैचारिक मतभेदपी चिदंबरम अपनी बेबाक शैली और स्वतंत्र सोच के लिए भी जाने जाते हैं। हालांकि कई बार चिदंबरम के व्यक्तिगत विचार पार्टी से अलग दिखते हैं। जिस वजह से कांग्रेस को राजनीतिक रूप से डैमेज कंट्रोल की भी जरूरत पड़ती है। अभी हाल ही में हुए BRICS सम्मेलनों के औचित्य पर सवाल उठाने की वजह से काफी विवाद खड़ा हो गया था।विवादों से रहा नाताचिदंबरम अपने राजनीतिक जीवन में कई मौके पर अपने तीखे बयानों की वजह से चर्चा में रहे हैं। पीएम मोदी की 'दिमागी नक्सल' वाली टिप्पणी पर पलटवार करते हुए चिदंबरम ने कहा था कि अगर विरोधियों को ऐसा कहा जाता है, तो वह खुद को 'दिमागी नक्सल' कहने में गर्व महसूस करेंगे।वहीं साल 2019 में जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाए जाने के दौरान चिदंबरम ने कहा था कि अगर कश्मीर हिंदू बाहुल राज्य होता, तो सरकार द्वारा ऐसा कदम नहीं उठाया जाता। उनके इस बयान पर काफी राजनीतिक बवाल हुआ था।

    आकिब नबी ने काउंटी क्रिकेट में गेंद से मचाया तहलका, ग्लेमोर्गन के खिलाफ मुकाबले में झटके पारी में 4 विकेट

    भारतीय टीम के तेज गेंदबाज आकिब नबी जिनको न्यूजीलैंड दौरे के लिए काफी अहम माना जा रहा है, उनको बीसीसीआई की तरफ से तैयारी के लिए काउंटी क्रिकेट में खेलने के लिए भेजा गया है, जिसमें ग्लेमोर्गन के खिलाफ मुकाबले में नबी एक पारी में 4 विकेट लेने में कामयाब रहे।

    घर में पुराने कपड़ों से पोछा लगाना शुभ या अशुभ, जान लें वास्तु नियम

    Vastu Tips: अक्सर लोग घर में रखे पुराने, फटे या बेकार हो चुके कपड़ों (जैसे पुरानी टी-शर्ट, तौलिया आदि) को पोछा बनाकर फर्श साफ करने लगते हैं. लेकिन वास्तु शास्त्र के अनुसार ऐसा करना बेहद अशुभ माना जाता है. आइए जानते हैं क्यों.