Search…

    Saved articles

    You have not yet added any article to your bookmarks!

    Browse articles

    GDPR Compliance

    We use cookies to ensure you get the best experience on our website. By continuing to use our site, you accept our use of cookies, Privacy Policies, and Terms of Service.

    Top trending News
    bharathunt
    bharathunt

    Latest

    AMU की 500 करोड़ की जमीन Aligarh नगर निगम ने कब्जे में ली, विवाद गहराया

    अलीगढ़ नगर निगम ने लगभग 500 करोड़ रुपये की कीमत वाली 3.8 एकड़ से ज्यादा वह जमीन अपने कब्जे में ले ली है जिस पर अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) दावा करता है। निगम की इस कार्रवाई से दोनों पक्षों के बीच नया विवाद खड़ा हो गया है। नगर निगम के अधिकारियों ने बृहस्पतिवार शाम को उस जगह पर साइन बोर्ड लगाना और जमीन की घेराबंदी करना शुरू कर दिया।इसके बाद, कुलपति प्रो. नईमा खातून के नेतृत्व में एएमयू अधिकारियों की एक टीम स्थिति का जायज़ा लेने के लिए मौके पर पहुंची। खातून ने इस कार्रवाई को गैर-ज़रूरी और अस्वीकार्य कदम बताया और कहा कि विश्‍वविद्यालय इसे उच्चतम न्यायालय में चुनौती देगा। उन्होंने कहा, यह उस जमीन पर जबरदस्ती कब्जा करने जैसा है, जो जमीन कानूनी तौर पर देश के उच्च शिक्षा के एक ऐतिहासिक केंद्र की है।हमारे पास अपनी मिल्कियत साबित करने के लिए एक सदी से भी पुराने सभी कानूनी दस्तावेज़ मौजूद हैं। कुलपति ने विश्‍वविद्यालय को कोई नोटिस दिए बिना ज़मीन पर कब्ज़ा करने के नगर निगम के फैसले पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि जिन मामलों में ज़मीन पर कथित तौर पर अवैध कब्जा होता है, वहां भी अधिकारी कार्रवाई करने से पहले कब्जा करने वाले को नोटिस जारी करते हैं।नगर आयुक्त प्रेम प्रकाश मीणा ने कहा कि नगर निगम के पास ऐसे रिकॉर्ड हैं जिनसे पता चलता है कि यह भूखंड पिछले 40 सालों से उनके पास है। मीणा ने पत्रकारों से कहा, हमारे रिकॉर्ड के अनुसार, पिछले चालीस सालों से यह जमीन हमारी है। उन्होंने यह भी कहा कि नगर निगम जल्द ही इस ज़मीन पर अहम शहरी परियोजनाओं का निर्माण शुरू करने की योजना बना रहा है।एएमयू के प्रॉक्टर नावेद खान ने कहा कि मालिकाना हक का विवाद 2023 से कोल के उप जिलाधिकारी (एसडीएम) के पास लंबित है और विश्‍वविद्यालय ने सभी ज़रूरी दस्तावेज़ जमा कर दिए हैं। खान ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, यह मामला 2023 से स्थानीय एसडीएम के पास लंबित है और हमने यूनाइटेड प्रोविंस सरकार की 13 जून 1923 की आधिकारिक अधिसूचना (जब यह जमीन आधिकारिक तौर पर हमें आवंटित की गई थी) सहित सभी दस्तावेज़ और अन्य आधिकारिक रिकॉर्ड पेश कर दिए हैं। उन्होंने कहा कि जिले के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बातचीत के आधार पर उन्हें उम्मीद है कि जल्द ही कोई शांतिपूर्ण समाधान निकल आएगा।इस बीच, इस घटनाक्रम पर चर्चा करने के लिए एएमयू टीचर्स एसोसिएशन की एक आपातकालीन बैठक बुलाई गई। एसोसिएशन के अध्यक्ष तुफैल अहमद ने कहा कि विश्‍वविद्यालय समूह इस मामले को गंभीरता से ले रहा है और न्याय के लिए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत वरिष्ठ अधिकारियों से संपर्क किया जाएगा। उन्होंने कहा, अगर जरूरत पड़ी तो हम ऊपरी अदालतों का दरवाजा खटखटाएंगे।एएमयू के जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज की रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन ने भी एक प्रस्ताव पास करके केंद्र सरकार से मालिकाना हक के विवाद की उच्च-स्तरीय जांच की मांग की है।

    सितंबर में बारिश का ब्रेक! देश के बड़े हिस्से में मौसम रहेगा सूखा

    अगले चार हफ्तों में बारिश का पैटर्न बदल सकता है. पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में बारिश जारी रहने के बाद 5-10 सितंबर से देश के बड़े हिस्से में मॉनसून की गतिविधि कम होने के संकेत मिल रहे हैं.

    Vishwakhabram: 60 घंटे तक लगातार Pakistan को हथियारों से लैस करते रहे China-Turkey के Military Aircraft, भारत की तैयारी भी तेज

    भारत के साथ पिछले सैन्य टकराव और ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान की सैन्य तैयारियों पर लगातार नजर रखी जा रही है। इसी बीच चीन और तुर्किये के भारी सैन्य परिवहन विमानों की पाकिस्तान में करीब 60 घंटे तक असामान्य आवाजाही ने नई चिंता पैदा कर दी है। सवाल यह है कि आखिर ये विमान पाकिस्तान में क्या लेकर पहुंचे? क्या चीन और तुर्किये पाकिस्तान के हथियारों और सैन्य संसाधनों को फिर से मजबूत करने में जुट गए हैं? अगर ऐसा है, तो भारत के लिए इसके सामरिक और रणनीतिक मायने बेहद गंभीर हो सकते हैं।मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सुरक्षा सूत्रों ने लगभग 60 घंटे के दौरान चीन और तुर्किये के भारी सैन्य परिवहन विमानों की पाकिस्तान में लगातार आवाजाही को असामान्य बताया है। चीनी सैन्य परिवहन विमान रावलपिंडी के पास स्थित नूर खान एयरबेस और कराची के मसरूर एयरबेस पर उतरते देखे गए। रिपोर्ट में तुर्किये के एक सैन्य परिवहन विमान TUAF526 का भी उल्लेख है। सूत्रों का दावा है कि इन विमानों के जरिए ड्रोन और अन्य सैन्य साजो-सामान पाकिस्तान पहुंचाया गया। हालांकि विमानों में मौजूद वास्तविक कार्गो की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। लेकिन जिस पैमाने, एकाग्रता और समयबद्ध तरीके से भारी सैन्य परिवहन विमानों की आवाजाही हुई, उसने इसे सामान्य सैन्य गतिविधि मानने की गुंजाइश कम कर दी है। यह किसी समन्वित लॉजिस्टिक ऑपरेशन का संकेत हो सकता है।इसे भी पढ़ें: Modi ने पिछले साल China जाने से पहले चली थी तगड़ी चाल, अब Xi Jinping के India आने से पहले खेल दिया बड़ा दाँवपाकिस्तान के पीछे खड़े हैं चीन और तुर्किये?भारत के लिए इस घटनाक्रम का महत्व इसलिए और बढ़ जाता है क्योंकि पाकिस्तान की सैन्य मशीन पहले से ही चीन पर भारी निर्भर है। लड़ाकू विमान हों, एयर डिफेंस सिस्टम हों या मानव रहित युद्ध प्रणाली हो, इस्लामाबाद की रक्षा क्षमता में चीन की भूमिका लगातार बढ़ी है। खासतौर पर भारत-पाकिस्तान के पिछले सैन्य संघर्ष के बाद यह साझेदारी और खुलकर सामने आई। चीन ने स्वयं स्वीकार किया था कि उसके विमानन उद्योग से जुड़े कर्मियों ने पाकिस्तान को तकनीकी सहायता दी थी। हम आपको याद दिला दें कि भारतीय सेना के उप प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल राहुल आर सिंह ने पिछले साल एक सेमिनार में साफ कहा था कि मई 7 से 10 के बीच हुए संघर्ष के दौरान पाकिस्तान को चीन और तुर्किये दोनों का समर्थन मिला था। उन्होंने कहा था कि भारत को एक सीमा पर नहीं, बल्कि वास्तव में “दो, बल्कि तीन विरोधियों” की चुनौती का सामना करना पड़ा था। सामने पाकिस्तान था और पीछे से चीन हर संभव मदद दे रहा था। उन्होंने पाकिस्तान को मिलने वाले लगभग 81 प्रतिशत सैन्य उपकरणों के चीनी मूल का होने की ओर भी इशारा किया था।भारतीय आकलन के मुताबिक पाकिस्तान ने पिछले साल सैन्य संघर्ष के दौरान चीन निर्मित J-10 लड़ाकू विमान, PL-15 एयर-टू-एयर मिसाइल और HQ-9 एयर डिफेंस सिस्टम जैसे प्लेटफॉर्म इस्तेमाल किए। राहुल सिंह ने यह भी चेतावनी दी थी कि वास्तविक संघर्ष चीन के लिए अपने हथियारों की क्षमता को परखने का अवसर बन सकता है यानी भारत-पाकिस्तान के बीच युद्ध जैसी स्थिति चीन के लिए एक तरह की “लाइव लैब” भी बन सकती है।ड्रोन से KAAN तक: तुर्किये-पाकिस्तान की बढ़ती सैन्य धुरीउधर, तुर्किये अब केवल पाकिस्तान का राजनीतिक समर्थक नहीं, बल्कि तेजी से उसका प्रमुख रक्षा साझेदार बनता जा रहा है। दोनों देशों के बीच ड्रोन, नौसैनिक प्लेटफॉर्म, एयरोस्पेस टेक्नोलॉजी और उभरती सैन्य प्रणालियों पर सहयोग बढ़ रहा है। पिछले वर्ष मई में पाकिस्तान के एयर चीफ ने तुर्किये में उच्चस्तरीय बैठकों के दौरान रक्षा सहयोग, एयरोस्पेस इनोवेशन, मानव रहित प्रणालियों और नई तकनीकों पर चर्चा की थी। इसके बाद दोनों देशों ने लड़ाकू विमान विकास में भी सहयोग बढ़ाने के संकेत दिए। तुर्किये ने इसी महीने कहा था कि उसके KAAN पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान कार्यक्रम में लगभग 200 पाकिस्तानी इंजीनियर और अधिकारी पहले से जुड़े हुए हैं। पाकिस्तान को औपचारिक रूप से इस परियोजना में शामिल करने पर भी चर्चा शुरू होने की बात कही गई है।यानी एक तरफ पाकिस्तान चीन से तैयार सैन्य प्लेटफॉर्म और तकनीक हासिल कर रहा है, दूसरी तरफ तुर्किये के साथ भविष्य के फाइटर जेट और उन्नत एयरोस्पेस कार्यक्रमों में अपनी जगह बना रहा है। ऐसे में तुर्की सैन्य परिवहन विमानों की यह नई गतिविधि महज एक अलग-थलग घटना नहीं, बल्कि पाकिस्तान की तेजी से बनती बहुस्तरीय रक्षा आपूर्ति श्रृंखला का हिस्सा हो सकती है।ऑपरेशन सिंदूर के बाद ड्रोन युद्ध की नई तैयारी?ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान द्वारा तुर्किये निर्मित ड्रोन के इस्तेमाल ने भारत के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत दिया था। भारतीय आकलन के अनुसार पाकिस्तान ने Baykar Yiha III कामिकाजे ड्रोन और Asisguard Songar जैसे तुर्की मूल के सिस्टम का इस्तेमाल किया। देखा जाये तो यदि अब चीन और तुर्किये से पाकिस्तान की ओर कथित रूप से ड्रोन और अन्य सैन्य सामग्री की नई खेप पहुंच रही है, तो इसके रणनीतिक निहितार्थ बेहद गंभीर हैं। आधुनिक युद्ध में ड्रोन केवल निगरानी का साधन नहीं रह गए हैं। वे सस्ते लेकिन घातक हमले, झुंड आधारित आक्रमण, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध, सीमा पार निगरानी और संवेदनशील सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने की क्षमता रखते हैं।भारत के लिए चुनौती यह है कि पाकिस्तान की संभावित पुनःपूर्ति केवल पारंपरिक हथियारों तक सीमित नहीं हो सकती। चीन की तकनीक और तुर्किये के ड्रोन अनुभव का संयोजन पाकिस्तान को कम लागत वाले लेकिन बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किए जा सकने वाले मानव रहित हथियारों की दिशा में तेजी से आगे बढ़ा सकता है।मक्का समझौता और नया क्षेत्रीय समीकरणदेखा जाये तो इस पूरी गतिविधि का समय भी बेहद महत्वपूर्ण है। 7 अगस्त को पाकिस्तान, तुर्किये और सऊदी अरब ने मक्का में संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए। समझौते के अनुसार तीनों देशों में से किसी एक पर सशस्त्र हमला तीनों के खिलाफ हमला माना जाएगा। आधिकारिक तौर पर इसे रक्षात्मक समझौता बताया गया है और कहा गया है कि यह किसी विशेष देश के खिलाफ नहीं है। लेकिन रणनीति केवल दस्तावेजों में लिखे शब्दों से नहीं समझी जाती। पाकिस्तान और तुर्किये पहले ही सऊदी समर्थित समुद्री सुरक्षा सहयोग के प्रति समर्थन जता चुके हैं, जिसका उद्देश्य समुद्री मार्गों और ऊर्जा आपूर्ति लाइनों की सुरक्षा है। ऐसे में चीन से सैन्य प्लेटफॉर्म, तुर्किये से ड्रोन और एयरोस्पेस सहयोग, तथा सऊदी अरब के साथ गहराता सुरक्षा ढांचा, ये सभी अलग-अलग घटनाएं नहीं, बल्कि पाकिस्तान के आसपास बन रहे एक बड़े रणनीतिक नेटवर्क की ओर इशारा करते हैं।पाकिस्तान सिर्फ खरीदार नहीं, चीन का ‘शोकेस’ भीदूसरी ओर, इस पूरे समीकरण का एक और महत्वपूर्ण पहलू है। पाकिस्तान केवल चीन से हथियार खरीदने वाला ग्राहक नहीं रह गया है। वह चीन के रक्षा उद्योग का साझेदार और संभावित प्रदर्शन मंच भी बन रहा है। दोनों देश संयुक्त रूप से JF-17 लड़ाकू विमान बनाते हैं और पाकिस्तान पहले से HQ-9 तथा विभिन्न चीनी मानव रहित प्रणालियों का उपयोग कर रहा है। वास्तविक संघर्ष में इन हथियारों का इस्तेमाल चीन के लिए तकनीकी परीक्षण और अंतरराष्ट्रीय रक्षा बाजार के लिहाज से भी महत्वपूर्ण हो सकता है। इसलिए पाकिस्तान की सैन्य क्षमता में निवेश को केवल भारत-पाकिस्तान संबंधों के संकुचित दायरे में देखना भूल होगी। इसके पीछे चीन की रक्षा-औद्योगिक महत्वाकांक्षाएं और दक्षिण एशिया में उसकी दीर्घकालिक रणनीतिक उपस्थिति भी जुड़ी हुई है।भारत के लिए चेतावनी साफ हैउधर, करीब 60 घंटे के भीतर भारी सैन्य परिवहन विमानों की असामान्य गतिविधि, नूर खान और मसरूर जैसे महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों पर चीनी विमानों की लैंडिंग, तुर्किये के परिवहन विमान की मौजूदगी, ड्रोन और रक्षा सामग्री पहुंचने के दावे, इन सबकी स्वतंत्र पुष्टि भले अभी बाकी हो, लेकिन इन्हें नजरअंदाज करना रणनीतिक भूल होगी। असल चुनौती केवल यह नहीं है कि पाकिस्तान को कितने ड्रोन या कौन से हथियार मिले। चुनौती यह है कि भारत के सामने एक ऐसा विरोधी खड़ा है, जिसकी सैन्य क्षमता को चीन तकनीकी और औद्योगिक समर्थन दे सकता है, तुर्किये ड्रोन और एयरोस्पेस सहयोग से मजबूत कर सकता है और व्यापक क्षेत्रीय सुरक्षा समझौते पाकिस्तान को नई कूटनीतिक तथा सामरिक गहराई दे सकते हैं।ऑपरेशन सिंदूर ने भारत को यह दिखा दिया कि भविष्य का युद्ध केवल टैंक, लड़ाकू विमान और मिसाइलों से तय नहीं होगा। अगली लड़ाई अंतरिक्ष से मिलने वाली जानकारी, ड्रोन स्वार्म, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध, एयर डिफेंस नेटवर्क, लंबी दूरी की मिसाइलों और रियल-टाइम सैन्य डेटा की होगी। और यही कारण है कि चीन और तुर्किये से पाकिस्तान की ओर कथित सैन्य एयरलिफ्ट को केवल “कुछ विमानों की आवाजाही” मानकर खारिज नहीं किया जा सकता। यदि इन उड़ानों के पीछे वास्तव में समन्वित सैन्य पुनःपूर्ति अभियान है, तो संदेश स्पष्ट है कि पाकिस्तान अपनी सैन्य क्षमता को फिर से भरने में जुटा है, और उसके पीछे खड़े सहयोगियों का नेटवर्क पहले से कहीं ज्यादा सक्रिय दिखाई दे रहा है। बहरहाल, भारत के लिए यह समय सिर्फ निगरानी का नहीं, बल्कि तैयारियों को और तेज करने का है।-नीरज कुमार दुबे

    नृपेंद्र मिश्रा के फैसले के बिना कोई काम नहीं होता था, चंपत राय ने जारी की 20 पेज की चिट्ठी

    अयोध्या राम मंदिर का संचालन करने वाले ट्रस्ट के जनरल सेक्रेटरी पद से दान में अनियमितताओं के आरोपों के बीच हटने को मजबूर हुए चंपत राय ने एक खुला पत्र लिखा है। इसमें उन्होंने कहा है कि नृपेंद्र मिश्र की अध्यक्षता वाली मंदिर निर्माण समिति ने सभी फैसलों को मंज़ूरी दी और उनकी मदद के लिए नियुक्तियां कीं। उन्होंने कहा कि मिश्रा ने अपनी पसंद के लोगों को श्री राम जन्मभूमि मंदिर निर्माण समिति में शामिल किया। राय ने बताया कि उनमें से एक व्यक्ति छह साल में सिर्फ़ दो बार अयोध्या आया, और दूसरे से सिर्फ़ सुरक्षा से जुड़े सुझाव ही मांगे गए। राय ने कहा कि तीसरा सदस्य नियमित था और हमेशा मिश्रा के साथ बैठकों में शामिल होता था। उन्होंने आगे कहा कि बैठकें हर महीने और कभी-कभी हर 15 दिन में होती थीं। राय ने ज़ोर देकर कहा कि समिति के पास पूरा अधिकार था। उन्होंने कहा कि समिति की मंज़ूरी के बिना कोई भी काम नहीं किया गया। राय ने उस पत्र में कहा अगर बाहर कोई फ़ैसला लिया गया, तो उसे स्वीकार नहीं किया गया। अगर कुछ किया गया, तो उसे हटा दिया गया। यह पत्र वायरल हो गया है और समिति के कामकाज को लेकर नई बहस छिड़ गई है।इसे भी पढ़ें: शिखा है, जनेऊ पहनते हैं? PM ने राम के मर्म को अयोध्या में समझाया, वो क्या इंटरव्यूअर्स को समझ नहीं आया, मंदिर का नया CEO ब्राह्मण ही बनेगा?राय का कहना था कि मिश्रा ने निर्माण से जुड़े सभी मामलों में खुद को एकमात्र अधिकारी के तौर पर पेश किया, हालांकि उन्होंने यह भी माना कि मंदिर उन्हीं की वजह से हकीकत बन पाया है। राय ने 2020 में कोविड महामारी के दौरान मंदिर का निर्माण शुरू होने के बाद उसके उद्घाटन को सुनिश्चित करने का श्रेय मिश्रा को दिया। राय ने लिखा यह पूरी तरह से नृपेंद्र जी के काम का नतीजा है। राय ने कहा कि जब भी निर्माण कार्य में कोई तकनीकी या लॉजिस्टिकल बाधा आती, तो मिश्रा तुरंत सबसे काबिल लोगों से संपर्क करते, उन्हें अयोध्या लाते और समस्याओं का समाधान करवाते। राय ने यह भी बताया कि विद्वानों और विशेषज्ञों ने सेवा की भावना से योगदान दिया और कोई पारिश्रमिक नहीं लिया।इसे भी पढ़ें: Ram Mandir Trust: सूत्रों का दावा, Champat Rai को UP SIT की पहली रिपोर्ट में Clean Chitयह चिट्ठी राम मंदिर के लिए चंदा इकट्ठा करने में गड़बड़ी के आरोपों की जांच करने वाली स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की आखिरी रिपोर्ट आने के कुछ दिनों बाद लिखी गई थी। SIT की रिपोर्ट में ट्रस्ट के कामकाज में "बड़ी खामियां" तो बताई गई थीं, लेकिन उसने उन्हें और एक पूर्व ट्रस्टी को आरोपों से बरी कर दिया था। मिश्रा ने कमेटी के अंदरूनी मतभेद की खबरों को खारिज कर दिया और कहा कि उन्होंने राय की चिट्ठी नहीं देखी है। "जब तक मैं चिट्ठी नहीं देख लेता, तब तक मैं बस यही कहूंगा कि यह आपकी [मीडिया की] मनगढ़ंत कहानी है। ऐसी कोई चिट्ठी नहीं है और न ही ऐसी कोई आलोचना की गई है, भले ही वह नौ पन्नों की ही क्यों न हो। उन्होंने ऐसी कोई आलोचना नहीं की है। यह सिर्फ़ एक मनगढ़ंत कहानी है। 

    छत्तीसगढ़: BSc का पेपर लीक, व्हाट्सऐप पर आए 70% सवाल मैच

    छत्तीसगढ़ की इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय में बीएससी (कृषि) द्वितीय वर्ष की एंटोमोलॉजी परीक्षा का पर्चा लीक होने के बाद हड़कंप मच गया है. व्हाट्सएप पर वायरल प्रश्नपत्र के सवाल असली पेपर से 70% तक मेल खाने के बाद प्रशासन ने परीक्षा रद्द कर दी है. छात्र संगठनों के हंगामे के बीच मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने 5 सदस्यीय जांच समिति का गठन कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई के आदेश दिए हैं.

    Jaipur में CJP टीम पर हमला! अभिजीत दिपके बोले - BJP का डर है, स्कूल सुधार से डरते हैं

    जयपुर में CJP सदस्यों पर हुए हमले पर इसके फाउंडर अभिजीत दिपके का बड़ा बयान सामने आया है। अभिजीत दिपके ने कहा कि आशुतोष पर हुआ हमला BJP के डर को दिखाता है। उन्हें डर है कि अगर गरीब बच्चों के स्कूलों में सुधार हुआ, तो लोग उनकी सरकार से सवाल पूछने लगेंगे। आशुतोष और उनकी टीम को तब निशाना बनाया गया जब वे एक सरकारी स्कूल की हालत दिखाने के लिए वहां गए थे; कहा जाता है कि यह स्कूल एक गौशाला में चल रहा था। टीम पर पत्थर फेंके गए, गाड़ियों को नुकसान पहुंचाया गया और एक वॉलंटियर घायल हो गया।  इसे भी पढ़ें: BJP और JDS विधायकों ने Vidhana Soudha तक निकाला मार्च, मंत्री नागेंद्र का मांगा इस्तीफाअभिजीत दिपके ने कहा कि जब सरकारी स्कूलों में पीने के पानी और टॉयलेट जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी होती है, तो कोई चिंता नहीं करता, लेकिन जैसे ही कोई सरकार की नाकामियों को उजागर करता है, उन पर हमला किया जाता है। हम गरीब बच्चों के लिए बेहतर स्कूलों और बेहतर भविष्य की बात करते रहेंगे। बीजेपी ने उन आरोपों से इनकार किया है कि उसके कार्यकर्ताओं ने शुक्रवार को जयपुर के बगरू विधानसभा क्षेत्र में 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) की टीम पर हमला किया। CJP के सह-संयोजक आशुतोष रांका और वॉलंटियर्स का दावा है कि रामपुरा कंवरपुरा गांव में एक जर्जर सरकारी स्कूल का निरीक्षण करने जाते समय उन पर हमला किया गया।रांका और CJP के फाउंडर अभिजीत दिपके ने कहा कि इस हमले के पीछे BJP के गुंडे थे। रंका ने X पर कहा कि CJP सदस्यों की हत्या करने के लिए बाहर से BJP के गुंडे भेजे गए थे। यह घटना रामपुर कंवरपुरा गांव के पास हुई, जहां CJP की टीम एक सरकारी प्राइमरी स्कूल का निरीक्षण करने और वहां के इंफ्रास्ट्रक्चर व सुविधाओं का जायजा लेने वाली थी। इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी। इसे भी पढ़ें: ‘ऐसे समझौते...’: Harsimrat Badal ने SAD-BJP Alliance की अटकलों को फिर दी हवा, Punjab में होगी वापसी?राजस्थान बीजेपी मंत्री जवाहर सिंह बेढम ने आरोप लगाया कि कांग्रेस कार्यकर्ता CJP की आड़ में काम कर रहे हैं। बेढम ने ANI से कहा कि कांग्रेस के लोग अलग-अलग मुखौटे पहनकर गांवों में जाते हैं और वहां शांति भंग करना चाहते हैं। लोग उन्हें जवाब दे रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि कांग्रेस के लोग CJP का मुखौटा पहने हुए हैं... कांग्रेस की कोई परवाह नहीं करता, इसलिए वे किसी और का मुखौटा पहन रहे हैं। देशभर की राजनीति, ताज़ा घटनाओं और बड़ी खबरों से जुड़े रहने के लिए पढ़ें  National News in Hindi केवल प्रभासाक्षी पर। 

    टीचर की डांट से बच्चे की मौत! डॉक्टरों ने बताया असली कारण

    विशाखापट्टनम में 6 साल के बच्चे की टीचर की डांट और थप्पड़ के बाद कथित तौर पर हार्ट अटैक से मौत हो गई, जिससे सवाल उठ रहे हैं कि इतनी कम उम्र में हार्ट अटैक कैसे हो सकता है. विशेषज्ञों ने इस बारे में बताया है.

    BJP और JDS विधायकों ने Vidhana Soudha तक निकाला मार्च, मंत्री नागेंद्र का मांगा इस्तीफा

    भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और जनता दल (सेक्युलर) के विधायकों ने राज्य संचालित निगम में करोड़ों रुपये के कथित गबन के मामले में आरोपी मंत्री बी. नागेंद्र के इस्तीफे की मांग को लेकर शुक्रवार को यहां विधान सौध तक मार्च निकाला। विधायकों ने विधानसभा में प्रवेश करने की भी कोशिश की और वे मार्शलों के अवरोध को तोड़कर सदन में घुस गए। इन विधायकों ने काले रंग की टी-शर्ट पहनी हुई थी और उन्हें रोक रहे मार्शलों ने कहा कि सदन के अंदर काले रंग की टी-शर्ट पहनना प्रतिबंधित है।विपक्ष के नेता आर. अशोक और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बी. वाई. विजयेंद्र के नेतृत्व में प्रदर्शनकारियों ने महर्षि वाल्मीकि की प्रतिमा के सामने विरोध प्रदर्शन किया। भाजपा और जद (एस) पिछले कई दिनों से नागेंद्र के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं, इससे पहले भी उन्होंने काली पट्टी बांधकर विरोध प्रदर्शन किया था। प्रदर्शनकारियों ने नारे लगाए, ‘‘मंत्री नागेंद्र को हटाया जाए, उन्हें बर्खास्त किया जाए।’’ विधानसभा के प्रवेश द्वार पर काले रंग की टी-शर्ट पहने भाजपा और जद(एस) के विधायकों को मार्शलों ने रोक दिया।मार्शलों द्वारा रोके जाने पर विधायकों ने आपत्ति जताई और उनकी मार्शलों से तीखी बहस हुई। आर. अशोक ने नागेंद्र को लगातार समर्थन देने को लेकर कांग्रेस पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, ‘‘सबूत होने के बावजूद, क्या सिर्फ एक व्यक्ति (नागेंद्र) को बचाने के लिए कांग्रेस द्वारा पूरे विधानसभा सत्र को बाधित किया जाना उचित है?क्या यह न्यायसंगत है? कांग्रेस नेताओं को मुझे जवाब देना चाहिए।’’ उन्होंने नागेंद्र को निर्दोष बताने संबंधी उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर के बयान पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि नागेंद्र के खिलाफ 31 आपराधिक मामले दर्ज हैं। उन्होंने कहा, मैंने सीबीआई के आरोपपत्र सहित कई दस्तावेज सार्वजनिक किए हैं।क्या आपको अब भी इस पर कोई संदेह है? उन्हें (नागेंद्र को) तुरंत बर्खास्त करें और विधानसभा की कार्यवाही होने दें। पत्रकारों को संबोधित करते हुए विजयेन्द्र ने कांग्रेस सरकार पर भ्रष्टों की, भ्रष्टों द्वारा और भ्रष्टों के लिए सरकार होने का आरोप लगाया।उन्होंने आरोप लगाया कि कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि अनुसूचित जनजाति विकास निगम के धन को कांग्रेस के लाभ और 2024 के लोकसभा चुनाव में उसके प्रचार के लिए अवैध रूप से स्थानांतरित किया गया था। विपक्षी दल भाजपा ने नागेंद्र को हटाने की मांग को लेकर कर्नाटक विधानमंडल के दोनों सदनों की कार्यवाही को कई दिनों तक बाधित किया है। कर्नाटक महर्षि वाल्मीकि एसटी विकास निगम से धन के गबन के आरोपों के बाद सिद्धरमैया के नेतृत्व वाली पिछली कैबिनेट से इस्तीफा देने वाले नागेंद्र को तीन अगस्त को शिवकुमार के नेतृत्व वाले मंत्रिमंडल में शामिल किया गया था।वह वर्तमान में योजना और सांख्यिकी मंत्री हैं।

    शनि 49 दिन बाद बदलेंगे नक्षत्र, दशहरा से पहले 6 राशियों पर बरसेगा पैसा!

    Shani Nakshtra Parivartan: 9 अक्टूबर 2026 को शनि नक्षत्र परिवर्तन करेंगे. दशहरा से पहले शनि की चाल 6 राशियों के लिए शुभ मानी जा रही है. जानें किन राशियों को नौकरी, कारोबार और धन के मामले में लाभ मिलेगा.

    Amit Shah ने Siliguri में कहा- बिना सुरक्षित सीमाओं के भारत नहीं रह सकता सुरक्षित

    केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को कहा कि जब तक सीमाएं सुरक्षित नहीं होंगी, तब तक न तो पश्चिम बंगाल और न ही भारत सुरक्षित रह सकता है। शाह ने कहा कि उनके कई बार अनुरोध करने के बावजूद पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य में भारत-बांग्लादेश सीमा पर बाड़ लगाने के लिए जरूरी जमीन उपलब्ध नहीं कराई। शाह ने कहा कि राज्य के किसी भी पूर्व मुख्यमंत्री ने सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) या सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के कार्यक्रमों में कभी हिस्सा नहीं लिया।उन्होंने इस परंपरा को तोड़ने के लिए पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी को बधाई दी। शाह ने सिलीगुड़ी स्थित एसएसबी फ्रंटियर मुख्यालय में विभिन्न परियोजनाओं के भूमि पूजन और शिलान्यास कार्यक्रम में कहा, ‘‘मैंने बीएसएफ द्वारा सीमा पर बाड़ लगाए जाने के लिए जमीन देने की कई बार गुहार लगाई लेकिन (पूर्व मुख्यमंत्री) ममता बनर्जी ने इसे अनसुना कर दिया। मैं सीमा सुरक्षा मजबूत करने के लिए 1,129 एकड़ जमीन की मांग 2014 से कर रहा था।राज्य में शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली सरकार बनने के बाद ही हमें यह जमीन मिली।’’ शाह ने कहा कि एसएसबी कोई राजनीतिक संगठन नहीं है और सीमावर्ती बलों के समारोहों से पूर्व मुख्यमंत्रियों की दूरी ने गलत संदेश दिया। गृह मंत्री ने कहा कि वह आजादी के बाद देश में बनीं पूर्ववर्ती सरकारों द्वारा राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ को उचित सम्मान नहीं दिए जाने से दुखी थे। उन्होंने कहा, ‘‘इस साल स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान लाल किले में ‘वंदे मातरम्’ का पूरा संस्करण गाया गया लेकिन इससे पहले भारत में ‘वंदे मातरम्’ का पूरा संस्करण कभी नहीं गाया गया था।मुझे इस बात की तसल्ली है कि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा इसकी रचना के 150वें वर्ष में देश ने इस गीत को आखिरकार उचित मान्यता दी है।

    अमेरिका में हुआ भीषण विमान हादसा, जांच में जुटी NTSB

    अमेरिका के अलास्का में एक चार्टर विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें सवार सभी आठ लोगों की मौत हो गई. हादसा केप न्यूएनहम लॉन्ग रेंज रडार साइट एयरपोर्ट के पास हुआ. विमान में दो पायलट और छह यात्री सवार थे. सूचना मिलते ही खोज और बचाव दल मौके पर पहुंचा, लेकिन कोई जीवित नहीं मिला. दुर्घटना के कारणों की जांच एनटीएसबी और एफएए कर रहे हैं, जबकि मृतकों की पहचान अभी सार्वजनिक नहीं की गई है.

    विकेट लिया और फिर किया 'Gen-Z' सेलिब्रेशन, ये क्रिकेटर VIRAL

    विमेंस दिल्ली प्रीमियर लीग 2026 (WDPL) में विकेट लेने के बाद एक महिला क्रिकेटर का अनोखा सेलिब्रेशन सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है. जर्सी नंबर 67 और Gen-Z स्टाइल के इस खास जश्न ने क्रिकेट फैन्स का ध्यान खींचा है.