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    बच्ची की गणेश वंदना सुनते रहे PM मोदी और सूर्या, प्रधानमंत्री ने शेयर किया वीडियो

    पीएम नरेंद्र मोदी ने सूर्यकुमार यादव के साथ एक बच्ची का वीडियो शेयर किया है. इसमें बच्ची कन्नड़ भाषा में भगवान गणेश की स्तुति करती सुनाई दे रही है. गीत में गणपति को विघ्ननाशक और विवेकदायक बताया गया है.

    रामायण का 'छोटा रावण' बन छाया ये बच्चा, कौन है राघव? प्रोड्यूसर से कनेक्शन

    'रामायण' में युवा रावण का किरदार निभाने वाले राघव मल्होत्रा कौन हैं? जानिए यश से उनकी समानता, एक्टिंग ट्रेनिंग और फिल्म के प्रोड्यूसर नमित मल्होत्रा से उनका रिश्ता.

    त्रिपुरा में फर्जी सरकारी टेंडर के नाम पर 44 करोड़ की ठगी, 13 ठिकानों पर छापे

    त्रिपुरा के फर्जी सरकारी टेंडर घोटाले में ED ने तीन राज्यों के 13 ठिकानों पर छापेमारी की. सस्पेंड IAS अधिकारी से जुड़े मामले में 44 करोड़ से ज्यादा की ठगी का आरोप है. जानें क्या है पूरा मामला.

    Himanta Biswa Sarma ने आवास घेराव की धमकी को बताया परिवार के लिए खतरा, सुप्रीम कोर्ट जाएगी सरकार

    गुवाहाटी, छह नवंबर असम के मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने शुक्रवार को कहा कि जुबीन गर्ग की मौत के मामले में दो मुख्य आरोपियों को जमानत मिलने पर उनके आवास का घेराव करने की एक समूह की धमकी को राज्य सरकार उच्चतम न्यायालय और गुवाहाटी उच्च न्यायालय के संज्ञान में लाएगी। यहां एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि एक विधायक के नेतृत्व वाले समूह की ओर से दी गई यह धमकी उनके परिवार के लिए खतरा है और हत्या की सीधी कोशिश भी हो सकती है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार अदालतों के आदेशों का सम्मान करती है, जबकि उन पर सवाल उठाने वाले लोग राज्य में अशांति पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं।उन्होंने बताया कि मामले के मुख्य आरोपी श्यामकानु महंत और सिद्धार्थ शर्मा की जमानत याचिकाओं पर उच्चतम न्यायालय में 30 नवंबर को सुनवाई होगी। शर्मा ने कहा, अदालतें न्याय सुनिश्चित करेंगी। मैं उन लोगों से कहना चाहता हूं जो किसी आरोपी को जमानत दिए जाने के संबंध में मुझसे सवाल कर रहे हैं कि वे याद रखें कि विधानसभा में मैंने जो कहा था, उसका उल्लेख आरोपपत्र में भी है।गुवाहाटी उच्च न्यायालय ने जुबीन गर्ग की मौत के मामले में आरोपी गायिका अमृतप्रभा महंत को नौ अक्टूबर को 50,000 रुपये के मुचलके और इतनी ही राशि की दो जमानतदारों की शर्त पर जमानत दी थी। अदालत ने इस मामले में संदीपन गर्ग को भी जमानत दी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अमृतप्रभा महंत को जमानत देते हुए उच्च न्यायालय के आदेश में उल्लेख है कि सुनवाई के दौरान 160 गवाहों ने उनका नाम नहीं लिया, जबकि विशेष जांच दल (एसआईटी) की जांच के दौरान उन्होंने उनका नाम लिया था।शर्मा ने कहा, लोगों को मुझसे नहीं, बल्कि गवाहों से सवाल करना चाहिए। अदालत को अपना काम करने देना चाहिए। उन्होंने कहा कि एक विधायक के नेतृत्व वाले समूह की ओर से, श्यामकानु महंत और सिद्धार्थ शर्मा को जमानत मिलने पर मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने की धमकी गंभीर मामला है।उन्होंने विधि विभाग को इस मामले को अदालत के संज्ञान में लाने का निर्देश दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा, वे मुख्यमंत्री कार्यालय के पास प्रदर्शन करने की बात नहीं कह रहे हैं, बल्कि मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने की धमकी दे रहे हैं। यह मेरे परिवार के लिए खतरा है और हत्या की सीधी कोशिश भी हो सकती है।रायजोर दल के विधायक अखिल गोगोई के नेतृत्व वाली जुबीन गर्ग न्याय समिति ने बृहस्पतिवार को कहा था कि यदि श्यामकानु महंत और सिद्धार्थ शर्मा को जमानत मिलती है या राज्य सरकार उनकी जमानत का प्रभावी कानूनी विरोध करने में विफल रहती है, तो समिति मुख्यमंत्री आवास का घेराव करेगी। जुबीन गर्ग की पिछले साल 19 सितंबर को सिंगापुर में समुद्र में तैरते समय मौत हो गई थी। सिंगापुर पुलिस ने कहा था कि उनकी मौत में किसी तरह की साजिश की भूमिका नहीं थी।गर्ग सिंगापुर में नॉर्थ ईस्ट इंडिया फेस्टिवल (एनईआईएफ) के चौथे संस्करण में शामिल होने गए थे। इस मामले में अमृतप्रभा महंत और शेखर ज्योति गोस्वामी के अलावा एनईआईएफ के मुख्य आयोजक श्यामकानु महंत, गायक के प्रबंधक सिद्धार्थ शर्मा, उनके चचेरे भाई एवं निलंबित पुलिस उपाधीक्षक संदीपन गर्ग तथा उनके निजी सुरक्षा अधिकारी नंदेश्वर बोरा और प्रबीन बैश्य भी आरोपी हैं।

    Farooq Abdullah ने 15 असंतुष्ट MLAs संग की बैठक, National Conference में टूट की बात नकारी

     नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) के नेतृत्व ने शुक्रवार को यहां विधायकों के एक समूह के साथ बैठक के बाद एकजुटता का प्रदर्शन किया और जम्मू-कश्मीर की सत्तारूढ़ पार्टी के भीतर किसी भी तरह के मतभेद की अटकलों को खारिज कर दिया। नेकां अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने पार्टी के भीतर किसी भी तरह की टूट की अटकलों को ‘‘निराधार अफवाह’’ बताते हुए खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि पार्टी एकजुट है तथा ‘‘कभी नहीं टूटेगी।’’ नेकां नेतृत्व ने शुक्रवार सुबह यह बैठक मंत्रिपरिषद में शामिल न किए जाने से कथित तौर पर असंतुष्ट पार्टी विधायकों की नाराजगी दूर करने के लिए आयोजित की थी। बैठक के लिए पार्टी के लगभग 15 विधायक यहां गुपकार स्थित अब्दुल्ला परिवार के आवास पर पहुंचे थे। बैठक के बाद फारूक अब्दुल्ला ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और सभी 15 विधायक की मौजूदगी में संवाददाताओं से कहा, ‘‘बिना आधार यह अफवाह फैलाई जा रही है कि नेशनल कॉन्फ्रेंस गुटों में बंट गई है, जो पूरी तरह से गलत है।’’ अब्दुल्ला ने कहा, ‘‘यह पार्टी एकजुट और संगठित है। और जो लोग सोचते हैं कि वे इस पार्टी को रोक सकते हैं तो यह पार्टी न तो कभी टूटी है और न ही कभी टूटेगी, इंशाल्लाह।’’ उन्होंने कहा कि पार्टी नेतृत्व ने असंतुष्ट विधायकों से बात की। ‘‘उनकी चिंताएं वाजिब हैं, और उन पर बहुत गहराई से विचार किया गया। सभी की बात सुनी गई।’’ उन्होंने कहा, ‘‘इंशाल्लाह, पार्टी और सरकार को मजबूत करने के लिए कुछ कदम तुरंत उठाए जाएंगे, जबकि अन्य कदम धीरे-धीरे उठाए जाएंगे।’’ नेकां अध्यक्ष ने कहा कि लोगों की समस्याओं का समाधान किया जाएगा, और पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की लड़ाई के साथ-साथ ‘‘अनुच्छेद 370 और 35ए के लिए संघर्ष जारी रहेगा... और इसे इसकी तार्किक परिणति तक पहुंचाया जाएगा।’’ असंतुष्ट विधायकों में से एक, नजीर गुरेजी ने कहा कि विधायक समय-समय पर अपनी समस्याओं को लेकर नेतृत्व के पास पहुंचते हैं। गुरेजी ने कहा, ‘‘कुछ दिन पहले हम एक जगह साथ बैठे थे, और वहीं से सोशल मीडिया पर इसे इस तरह बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया जैसे मानो नेकां से एक अलग गुट बन गया हो। कोई अलग गुट या पार्टी नहीं बनी है।’’ उन्होंने कहा कि कुछ मसले थे जिन्हें विधायकों ने मुख्यमंत्री और पार्टी अध्यक्ष के सामने रखा। गुरेजी ने कहा, ‘‘उन्होंने हमें राजनीतिक मामलों और अन्य मुद्दों को लेकर आश्वासन दिया है। कुछ मुद्दों का तुरंत समाधान किया जाएगा, और अन्य पर धीरे-धीरे काम किया जाएगा।’’ यह घटनाक्रम छह बार के विधायक मुबारक गुल सहित कई वरिष्ठ नेताओं के बीच 27 अक्टूबर को हुए कैबिनेट विस्तार के बाद बढ़ते असंतोष की पृष्ठभूमि में आया है। उस विस्तार में चार नए मंत्रियों को शामिल किया गया था, जिससे मंत्रिपरिषद की संख्या नौ की अधिकतम स्वीकार्य वैधानिक सीमा तक पहुंच गई। असंतोष व्यक्त करने वाले विधायकों ने शीर्ष नेतृत्व के समक्ष कई संगठनात्मक और प्रशासनिक चिंताएं उठाई थीं तथा अपनी बात रखने के लिए औपचारिक मुलाकात का समय मांगा था।

    धनतेरस पर इन 5 जगहों पर जरूर जलाएं दीपक, पैसों से भर जाएगी झोली!

    Dhanteras 2026: आज धनतेरस की रात दीपक जलाने का खास महत्व है. मान्यता है कि घर की इन 5 जगहों पर दीया जलाने से मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है. जानें कौन-सी हैं ये जगहें.

    आधार नहीं, अब ये डॉक्यूमेंट्स जरूरी? बदल सकता है योजनाओं का नियम

    सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए आधार कार्ड की अनिवार्यता में आने वाले समय में बदलाव हो सकता है. केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ने संकेत दिया है कि लाभार्थियों को भुगतान के लिए अब आधार की जगह बायोमेट्रिक पहचान और वोटर आईडी (EPIC) नंबर का इस्तेमाल किया जा सकता है.

    पटियाला: कर्मभूमि एक्सप्रेस ट्रेन के चार डिब्बों में लगी आग, हर तरफ धुआं-धुआं, डरकर उतरे यात्री

    पटियाला: कर्मभूमि एक्सप्रेस ट्रेन के चार डिब्बों में लगी आग, हर तरफ धुआं-धुआं, डरकर उतरे यात्री

    धनतेरस पर क्या खरीदें? जानें क्या है आपके लिए शुभ

    धनतेरस के साथ ही पांच दिनों तक चलने वाले दिवाली पर्व की शुरुआत हो गई है. इस दिन सोना, चांदी और बर्तन खरीदना शुभ माना जाता है. लेकिन ज्योतिष के मुताबिक, हर राशि के लिए खरीदारी की वस्तुएं अलग हो सकती हैं. मेष राशि वालों के लिए तांबा, वृषभ और कर्क राशि वालों के लिए चांदी, जबकि सिंह राशि वालों के लिए सोना खरीदना शुभ माना गया है. जानिए सभी 12 राशियों के लिए क्या है खास.

    ASI फायरिंग केस में पीड़ित परिवार से मिले तेजस्वी

    बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव गुरुवार को मधुबनी के बलिराजगढ़ गांव पहुंचे और ASI की फायरिंग में जान गंवाने वाले व्यक्ति के परिवार से मुलाकात की. इसके बाद उन्होंने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और पुलिस प्रशासन पर निशाना साधा.

    'अब वोटर ID देखकर मिलेगा योजनाओं का लाभ', राहुल ने कसा तंज

    राहुल गांधी ने केंद्रीय मंत्री लल्लन सिंह का एक वीडियो शेयर कर सरकारी योजनाओं के लाभ को वोटर ID से जोड़ने का मुद्दा उठाया है. राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि मोदी सरकार अब आधार के बजाय वोटर कार्ड के आधार पर योजनाओं का लाभ देने की तैयारी कर रही है.

    भारत में TFR घटकर 1.9 पहुंचा, बढ़ती बुजुर्ग आबादी पर विशेषज्ञों ने चेताया

    (कोमल शर्मा) नयी दिल्ली, छह नवंबर दो से अधिक संतान होने पर दंड का प्रावधान करने वाले कानूनों की प्रासंगिकता पर उच्चतम न्यायालय की टिप्पणी ने देश में जनसंख्या नीति को लेकर नयी बहस छेड़ दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के पास अपनी युवा आबादी के दम पर आर्थिक विकास को गति देने यानी ‘जनसांख्यिकीय लाभांश’ का फायदा उठाने का अवसर तेजी से सिमट रहा है। विशेषज्ञों ने आगाह किया है कि भारत को भविष्य की दो बड़ी चुनौतियों से निपटने के लिए अभी से तैयारी करनी होगी।एक ओर बुजुर्गों की आबादी बढ़ेगी, तो दूसरी ओर कामकाजी उम्र में पहुंचने वाले युवाओं का अनुपात घटता जाएगा। उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को कहा कि भारत की कुल प्रजनन दर (टीएफआर) 2003 में तीन थी, जो घटकर अब 1.9 रह गई है। न्यायालय ने इस बात पर जोर दिया कि जनसंख्या वृद्धि को नियंत्रित करने के उद्देश्य से बनाए गए कानून अब प्रासंगिक नहीं रह गए हैं।न्यायालय ने कहा, ‘‘हमारी स्पष्ट राय है कि दो से अधिक बच्चों पर जुर्माना लगाने वाले कानूनों ने अपनी प्रासंगिकता खो दी है। पिछले कुछ दशकों में जनसांख्यिकीय बदलावों के कारण ऐसे कानूनों का आधार यानी अत्यधिक जनसंख्या का डर अब खत्म हो चुका है।’’ ‘पॉपुलेशन फाउंडेशन ऑफ इंडिया’ की कार्यकारी निदेशक पूनम मुटरेजा ने इन टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि भारत के सामने एक ओर शेष जनसांख्यिकीय लाभांश का फायदा उठाने और दूसरी ओर तेजी से बुजुर्ग होते समाज की जरूरतों के लिए तैयारी करने की दोहरी चुनौती है। उन्होंने कहा कि इस स्थिति को देखते हुए देश की जनसंख्या नीति और उसे लागू करने के तरीकों पर नए सिरे से विचार करना बेहद जरूरी है।मुटरेजा ने कहा, ‘‘इसका अर्थ है युवाओं को कौशल प्रशिक्षण देना, अधिक महिलाओं को सार्थक रूप से कार्यबल का हिस्सा बनने के लिए प्रोत्साहित करना और बुजुर्गों के लिए सामाजिक सुरक्षा तथा देखभाल की व्यवस्था विकसित करना। भारत का आर्थिक भविष्य काफी हद तक इस बात पर निर्भर करता है कि वह महिलाओं को कामकाजी आबादी का हिस्सा बनाने में कितना सफल होता है।’’ ‘ट्रांसफॉर्म रूरल इंडिया’ की विशेषज्ञ सीमा भास्करन ने कहा कि भारत की जनसंख्या नीति में महिलाओं की प्रजनन क्षमता और मातृत्व संबंधी फैसलों को नियंत्रित करने पर जोर दिया गया, जिसके कारण देश की प्रजनन दर में भारी गिरावट आई है। उन्होंने कहा, ‘‘इस जनसांख्यिकीय बदलाव के कारण बुजुर्गों की आबादी बढ़ेगी और कामकाजी आबादी का अनुपात घटेगा।भारत को अपने वरिष्ठ नागरिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा और स्वास्थ्य संबंधी कार्यक्रम तैयार करने होंगे।’’ भास्करन ने कहा, ‘‘हालांकि, जनसांख्यिकीय गति के कारण भारत की आबादी कुछ समय तक बढ़ती रहेगी। शुरुआती दौर में कामकाजी आबादी भी बड़ी संख्या में उपलब्ध होगी, जिससे आर्थिक विकास के नए अवसर पैदा होंगे।’’ मुटरेजा ने भी कहा कि भारत की आबादी अगले कुछ दशकों तक बढ़ती रहेगी, लेकिन असल बदलाव आबादी की आयु संरचना में हो रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘हमारे अनुमान के मुताबिक, कुल आबादी में कामकाजी उम्र के लोगों का अनुपात 2031 के आसपास लगभग 66 प्रतिशत के उच्चतम स्तर पर पहुंच जाएगा और इसके बाद इसमें गिरावट आने लगेगी।भारत के पास अपने जनसांख्यिकीय लाभांश का फायदा उठाने के लिए बहुत कम समय बचा है और यह अवसर तेजी से हाथ से निकल रहा है।’’ भास्करन ने राज्यों की सांस्कृतिक, आर्थिक और सामाजिक परिस्थितियों के अनुरूप जनसंख्या नीतियां बनाने की भी अपील की। उन्होंने कहा कि बढ़ती बुजुर्ग आबादी से पैदा होने वाली चुनौतियों का सामना करने के लिए भारत फिलहाल पर्याप्त रूप से तैयार नहीं है। स्थानीय निकायों के चुनाव लड़ने और सरकारी योजनाओं का लाभ पाने की पात्रता के लिए कुछ राज्यों में दो बच्चों की अनिवार्यता के नियम पर मुटरेजा ने कहा कि ऐसा कोई विश्वसनीय प्रमाण नहीं है, जिससे साबित हो कि इन नियमों के कारण लोगों के प्रजनन संबंधी व्यवहार में कोई बदलाव आया है।उन्होंने कहा, ‘‘जिन राज्यों में दो बच्चों की नीति लागू नहीं थी, वहां भी प्रजनन दर में उतनी ही तेजी से गिरावट आई। इसके विपरीत, इन नियमों के हानिकारक परिणामों के प्रमाण जरूर मिले हैं। महिलाएं, दलित, आदिवासी और गरीब परिवार इनसे असमान रूप से प्रभावित होते हैं...।’’ मुटरेजा ने कहा कि ये कानून उन लोगों को ही दंडित करते हैं जिनके पास अपने प्रजनन संबंधी फैसले लेने की सबसे कम स्वतंत्रता होती है।उन्होंने इन कानूनों को तत्काल समाप्त करने की मांग की।