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    25 फीट गहरे बेसमेंट ने खोली सिस्टम की पोल:हजारों मीट्रिक टन मिट्टी का हिसाब नहीं, एडीए-खनन विभाग मौन

    2 hours ago

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    आगरा के भैरों बाजार में नियमों को ताक पर रखकर किए जा रहे निर्माण ने पूरे सिस्टम की पोल खोल दी है। निर्माणाधीन कृष्णा मेट्रो मॉल के लिए बिल्डर ने 25 फीट से ज्यादा गहरा बेसमेंट खोद डाला। नतीजा यह हुआ कि पड़ोस में खड़ी दशकों पुरानी इमारत भरभराकर ढह गई। सबसे बड़ा सवाल खुदाई से निकली हजारों मीट्रिक टन मिट्टी को लेकर है। इस पर खनन विभाग और आगरा विकास प्राधिकरण के पास कोई जवाब नहीं है। नियमानुसार शहर में खुदाई और निर्माण की निगरानी एडीए को करनी थी, लेकिन इंजीनियरों ने मौके पर जाकर गहराई नापने की जहमत तक नहीं उठाई। अफसर कागजों पर नक्शे के अनुसार निर्माण का दावा कर हाथ पर हाथ धरे बैठे रहे। हादसे के बाद एडीए ने एक रिपोर्ट बनाकर जारी की, लेकिन उसमें भी नियमानुसार निर्माण का ही दावा किया गया। रिपोर्ट इस बात पर चुप है कि जब ध्वस्त हुई बिल्डिंग भी उसी निर्माणाधीन स्थल का हिस्सा थी और उसे सेट-बैक एरिया के तौर पर खाली करने के लिए पहले ही गिराया जाना था, तो उसे गिरवाया क्यों नहीं गया। बैंक कर्मचारियों के लंच पर होने से बड़ा हादसा टल गया, वरना जानमाल का भारी नुकसान होता। वहीं खनन विभाग को यह तक नहीं पता कि खुदाई की मिट्टी कहां गई। वरिष्ठ खनन अधिकारी मिथिलेश कुमार पांडेय ने माना कि बिल्डर ने दो बार मिट्टी खोदने की अनुमति ली थी। चूंकि मिट्टी पर कोई रॉयल्टी नहीं लगती, इसलिए विभाग को सरोकार नहीं कि हजारों ट्रॉली मिट्टी कहां खपाई गई। यानी परमिशन तो दी, लेकिन जान-माल के खतरे और अवैध मिट्टी व्यापार से आंखें फेर लीं। एडीए की आख्या के अनुसार भूखंड संख्या-8/390 और 8/390/1 पर 4488.99 वर्गमीटर क्षेत्र में मानचित्र संख्या एडीए/बीपी/24-25/0232 स्वीकृत है। नियमानुसार निर्माणकर्ता किरधा अर्थ डेवलपर्स और कृष्णा भू विकास को सेट-बैक एरिया खाली करने के लिए पुरानी बिल्डिंग पहले ही ध्वस्त करनी थी। सहायक अभियंता प्रमोद कुमार की रिपोर्ट में भी कहा गया है कि बिल्डिंग निर्माणकर्ता को खुद गिरानी थी। सवाल यही है कि जब बिल्डिंग खतरनाक थी और नक्शे में उसे हटाना था, तो निर्माण शुरू होने के बावजूद उसे क्यों नहीं गिराया गया। एडीए अफसर सिर्फ इतना कह रहे हैं कि शिकायतों के चलते जांच हो रही थी और निर्माण नक्शे के अनुरूप था। हादसे के बाद भी कोई जवाबदेही तय नहीं हुई है। लाखों की मिट्टी की होगी तलाश जानकारों की मानें तो 25 फीट गहरे गड्ढे से निकली मिट्टी की कीमत लाखों में है, जिसे कहां ठिकाने लगाया गया, इसके बारे में किसी को कोई जानकारी नहीं है। फिलहाल पुलिस निर्माण के दौरान मानकों के पालन और मिट्टी खनन जैसे विभिन्न मुद्दों पर जांच शुरू कर चुकी है।
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