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    27 साल पुराने फर्जी वाहन परमिट केस में आरोपी बरी:पुलिस गवाह पेश न कर सकी, अदालत ने राजेंद्र, सुनील, जसविंदर को दोषमुक्त किया

    4 hours ago

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    आगरा में 27 साल पुराने फर्जी वाहन परमिट बनाने के मामले में अदालत ने तीन आरोपियों को बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष पर्याप्त साक्ष्य और गवाह पेश करने में असफल रहा। मामले में कई बार आदेश दिए जाने के बावजूद पुलिस अन्य गवाहों को अदालत में पेश नहीं कर सकी, जिसके चलते आरोप सिद्ध नहीं हो पाए। मामला थाना एत्मादुद्दौला क्षेत्र का है। 9 मई 1998 को तत्कालीन थानाध्यक्ष एस.एन. सिंह पुलिस टीम के साथ क्षेत्र में गश्त कर रहे थे। इसी दौरान मुखबिर से सूचना मिली कि भाटिया पेट्रोल पंप के पास कुछ लोग ट्रकों के लिए फर्जी कागजात और परमिट बनाकर चालकों को दे रहे हैं, जिससे सरकार को राजस्व का नुकसान हो रहा है। सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर राजेंद्र सिंह और जसविंदर उर्फ काके को गिरफ्तार किया। उनके पास से दिल्ली, हरियाणा, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश के फर्जी वाहन परमिट और अन्य दस्तावेज बरामद किए गए। पूछताछ के आधार पर पुलिस ने कमला नगर स्थित एक मकान पर छापा मारकर सुनील चौहान समेत पांच अन्य आरोपियों—बलदेव राज, आशा सिंह, रूपचंद और बलवीर सिंह—को भी हिरासत में लिया। आरोपियों के पास से परिवहन अधिकारियों की फर्जी मोहरें और बड़ी मात्रा में फर्जी परमिट बरामद हुए थे। मुकदमे की सुनवाई के दौरान चार आरोपियों- आशा सिंह, बलदेव राज, रूपचंद और बलवीर सिंह-की मृत्यु हो गई, जिसके बाद अदालत ने उनके खिलाफ कार्यवाही समाप्त कर दी। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से कई पुलिसकर्मियों और अधिकारियों को गवाह बताया गया था, लेकिन लंबे समय में अदालत में केवल एफआईआर दर्ज करने वाले मुंशी राजकुमार दीक्षित ही गवाही देने पहुंचे। अन्य गवाहों के पेश न होने के कारण अदालत में आरोप साबित नहीं हो सके। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट-8 कन्हैया जी ने साक्ष्यों के अभाव में आरोपी राजेंद्र सिंह, सुनील चौहान और जसविंदर उर्फ काके को बरी करने का आदेश दिया। बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता राजा बाबू शर्मा, राम शर्मा और अंशुल भारद्वाज ने अदालत में पैरवी की।
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