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    5-साल सेवा दी, अब कह रहे बैग उठाओ, निकल जाओ:लखनऊ में संविदाकर्मियों का छलका दर्द, बोले- प्राइवेट करने से शादी टूटी

    1 day ago

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    ‘हमने महाकुंभ के दौरान सेवा दी, श्रीराममंदिर दर्शन कराने के लिए भी खूब ड्यूटी की। 5 साल की नौकरी में कभी शिकायत नहीं की। कोई मांग नहीं रखी। अब अचानक हमें प्राइवेट कंपनी में भेजा जा रहा है। ये कंपनी हमें जल्द ही निकाल देगी। अभी संविदा पर काम का ही पिछले 3 महीने से सैलरी नहीं आई। प्राइवेट कंपनी में विलय होने से ऐसा नुकसान हुआ है कि तय शादी टूट गई है। प्राइवेट न करने की मांग लेकर एमडी के पास गए तो उन्होंने कहा कि काम करना है तो करो, वर्ना बैग उठाकर निकल जाओ।’ यह कहना है 2021 से रोडवेज में संविदा पर नौकरी करते आ रहे कंडक्टर (परिचालकों) का। लखनऊ सिटी ट्रांसपोर्ट के दुबग्गा डिपो में करीब 200 परिचालक हैं। उनके आरोपों के अनुसार, प्राइवेट कंपनी एसएस इंटरप्राइजेज में उनकी जॉइनिंग कराई जा रही है। इससे उनकी नौकरी पर खतरा तो बढ़ ही गया है, बल्कि अब उनकी कई तरह की पारिवारिक-सामाजिक समस्याएं भी सामने आ गई हैं। इस रिपोर्ट में पढ़िए और किन परिचालकों ने अपनी क्या कहानी सुनाई… 3 तस्वीरें देखिए- पहले पूरा मामला जान लीजिए- लखनऊ सिटी ट्रांसपोर्ट के दुबग्गा डिपो के रोडवेज संविदा कंडक्टर पिछले 8 दिनों से कार्य बहिष्कार करके हड़ताल पर हैं। इस दौरान उन्होंने तीन दिनों तक दुबग्गा डिपो पर विरोध प्रदर्शन किया। उसके बाद तीन दिन तक हजरतगंज स्थित गांधी प्रतिमा पर प्रदर्शन किया। 2 जून को 4 कर्मियों ने खुद पर पेट्रोल छिड़ककर आग लगाने की कोशिश की। फिलहाल, सभी संविदाकर्मी इको गार्डन में अपनी मांगों को लेकर धरने पर बैठे हुए हैं। अब पढ़िए परिचालकों ने जो कहा- संविदा पर रहते हुए शादी तय हुई, अब टूट गई परिचालक शुभम पटेल ने कहा- संविदा कर्मचारी के पद पर नौकरी करते हुए मेरी शादी तय हुई थी। अब हम लोगों को प्राइवेट कंपनी में भेजने की खबर मीडिया में आने के बाद शादी टूट गई। लड़कीवालों कहना है कि संविदा में होते तो तरक्की हो सकती थी, अब प्राइवेट कंपनी से क्या ही कर पाओगे? सबसे ज्यादा दुख इस बात का है कि प्राइवेट किए जाने की बात मैंने अभी अपने परिवार में नहीं बताई। जैसे ही माताजी यह बात सुनेंगी, उन्हें सदमा लग जाएगा। यह कहते हुए शुभम का गला भर आया। 5 साल से दे सेवा रहे थे, अब नकारा गया इको गार्डन में प्रदर्शन करने वाले सत्येंद्र ने बताया कि 2021 में हमारी भर्ती संविदा कर्मचारियों के रूप में हुई थी। पिछले 5 साल से हम लोग लगातार सामान्य रूप से कम कर रहे थे। इन 5 साल में हमने अपनी कोई मांग नहीं रखी। फिर अचानक हम सभी लोगों के कागजात एक निजी कंपनी के पास पहुंच गए। हमारे पास 13 मई 2026 को पहला मैसेज आया, फिर 18 मई को दूसरा मैसेज आया कि हम सब लोगों को संविदा कर्मी के पद से हटाकर निजी कंपनी SS इंटरप्राइजेज के साथ विलय किया जा रहा है। 200 परिचालक कर रहे हैं विरोध परिचालक सतेंद्र ने कहा- फैसले से हम लोग बिल्कुल संतुष्ट नहीं थे। तत्काल हमने एमडी से बात करने की कोशिश की, वहां से जवाब मिला काम करना है तो करो वरना बैग उठाओ और निकल जाओ। हमने जब लिखित में मांगा तो कोई जवाब नहीं मिला। हम शालीनता से अपना काम कर रहे थे। यह तो हम लोगों को भड़काने की कोशिश की गई। 326 परिचालकों की एक साथ भर्ती हुई थी। उनमें से कुछ लोगों को दूसरी जगह नौकरी मिल गई तो वो छोड़कर चले गए। अब भी लगभग 200 परिचालक हैं, जो यहां काम कर रहे थे। ये सभी लोग 120 बसों में सेवाएं देते थे, जो शहर की 22 प्रमुख रोड पर दौड़ती हैं। अगर ऐसा हुआ तो हम लोग सड़क पर आ जाएंगे। हम लोग जान देने पर मजबूर होंगे। जवानी का क्रीम टाइम संविदा की नौकरी में निकला अयोध्या के रहने वाले रोहित पांडे ने कहा कि आज हम बिल्कुल बेबस हो चुके हैं। पिछले 5 साल से हम लोग सेवा दे रहे हैं। जो जवानी का क्रीम टाइम था, वह धीरे-धीरे संविदा की नौकरी में निकल गया। महाकुंभ के समय हम सभी परिचालकों ने 24 घंटे सेवाभाव से काम किया। राम मंदिर उद्घाटन के समय भी हमने पूरी श्रद्धा और आस्था के साथ दिन-रात काम किया। जिसके परिणाम स्वरूप हमको यह मिल रहा है कि संविदा से हटाकर निजी कंपनी के साथ भेजा जा रहा है। यह हमको बर्दाश्त नहीं हो रहा है। फिलहाल, संविदा वाला पैसा भी 3 महीने से नहीं आया। ‘निजी कंपनियों में भविष्य सुरक्षित नहीं’ प्रदर्शन में शामिल बाराबंकी के पंकज यादव ने कहा कि निजी कंपनी है, इसलिए स्वीकार नहीं है। इन कंपनियों की बात का कोई भरोसा नहीं होता और ये मनमानी ढंग से काम कराती हैं। बहुत सारी जगह पर हमने देखा है कि जो लोग निजी कंपनियों के अधीन हो गए, उन्हें बाद में अपनी नौकरी से अभी हाथ धोना पड़ा। ये कंपनी जब चाहती हैं तभी अपने कर्मचारियों को बाहर कर देती हैं। इनके कर्मचारियों को सरकार की तरफ से भी कोई सहयोग नहीं मिलता है। संविदा से हमें भविष्य में स्थायी होने और प्रमोशन के भी अवसर मिलेंगे मगर प्राइवेट कंपनी में यह सब कुछ भी नहीं मिलता है। ₹2.60 प्रति किलोमीटर के हिसाब से मिलता है पेमेंट परिचालकों को ₹2.60 प्रति किलोमीटर के हिसाब से पेमेंट मिलता है। रोजाना करीब 180 किलोमीटर बस की ड्यूटी करते हैं। वहीं, दूसरी तरफ ऐसी भी सूचना है कि इनके विरोध और हड़ताल से बस के ड्राइवर ही टिकट भी काट रहे हैं। प्रदर्शनकारी परिचालकों ने बताया कि स्थिति यह हो गई है कि बस ड्राइवर पहले स्टॉप पर बस खड़ी करके सवारी बैठा रहे हैं। उनका टिकट बनाते हैं। उसके बाद गाड़ी चलाते हैं। ---------------------- ये खबर भी पढ़िए- लालबत्ती चौराहे पर सुसाइड की कोशिश : 4 संविदाकर्मियों ने खुद पर पेट्रोल छिड़का; बोले- हमारा निजीकरण किया जा रहा लखनऊ में लालबत्ती चौराहे पर सोमवार को रोडवेज के 4 संविदाकर्मियों ने सुसाइड की कोशिश की। चारों बॉटल में पेट्रोल लेकर पहुंचे और खुद पर उड़ेलने लगे। इस दौरान पुलिस ने उन्हें पकड़कर बचा लिया। पुलिस के पूछने पर बताया कि हमारी बात नहीं सुनी जा रही है। एक निजी कंपनी में सभी संविदा चालकों-परिचालकों का विलय किया जा रहा है। (पूरी खबर पढ़िए)
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