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    84 कोसी परिक्रमा: साधु-संत अगले पड़ाव के लिए रवाना:जन्मेजय कुंड का पौराणिक महत्व, राजा परीक्षित ने कराया था नाग यज्ञ

    8 hours ago

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    अयोध्या धाम की 84 कोसी परिक्रमा शुक्रवार सुबह सिडसिड में रात्रि विश्राम के बाद अगले पड़ाव के लिए रवाना हो गई।इस दौरान 'जय श्री राम' के नारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा। विश्व हिंदू परिषद के हनुमान मंडल द्वारा आयोजित यह परिक्रमा दोपहर तक अमरगंज बाजार पहुंचेगी। जिस स्थान पर साधु-संतों ने रात्रि विश्राम किया था, वह जन्मेजय कुंड (आस्तीक ऋषि तपस्थली) पौराणिक महत्व रखता है। कथाओं के अनुसार, यहां राजा परीक्षित की तक्षक नाग के काटने से हुई मृत्यु के प्रतिशोध में उनके पुत्र जन्मेजय ने 'नाग यज्ञ' का संकल्प लिया था। ऋषि आस्तीक ने बाद में इस यज्ञ को शांत कराया था। यहां आस्तीक ऋषि का एक मंदिर और एक पवित्र सागर भी है, जहां लोग सर्प भय से मुक्ति पाने के लिए आते हैं। दोपहर में अमरगंज बाजार पहुंचने पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के जिला बौद्धिक प्रमुख अरविंद पाण्डेय के नेतृत्व में दर्जनों लोगों द्वारा परिक्रमार्थियों का स्वागत किया जाएगा। इसके लिए तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। दोपहर भोजन और विश्राम के बाद, परिक्रमार्थियों का जत्था शाम चार बजे 'जय श्री राम' के उद्घोष के साथ अगले रात्रि विश्राम स्थल पक्का तालाब, अमानीगंज के लिए रवाना होगा। विभिन्न स्थानों से होते हुए यह जत्था शाम सात बजे तक अपने पड़ाव स्थल पर पहुंचेगा। आस्था की यह डगर अत्यंत कठिन होने के बावजूद, हजारों की संख्या में साधु-संत और गृहस्थ राम नाम का भजन करते हुए परिक्रमा कर रहे हैं। परिक्रमा में अयोध्या के अलावा मथुरा, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान, झारखंड, महाराष्ट्र, पड़ोसी देश नेपाल और उत्तर प्रदेश के कई जिलों से लोग शामिल हैं। पड़ाव स्थल पर पहुंचने के बाद परिक्रमार्थी राम नाम संकीर्तन में लीन हो जाते हैं। कई साधु-संत अपनी पुस्तिकाओं में राम नाम अंकित करते रहते हैं। हनुमान मंडल की परिक्रमा का नेतृत्व कर रहे सुरेंद्र सिंह ने बताया कि परिक्रमा मार्ग पर शौचालय, पानी और यात्री शेड का उचित प्रबंध न होने से कहीं-कहीं मुश्किलें आती हैं। इसके बावजूद, भगवान राम के प्रति लोगों की अगाध श्रद्धा के कारण प्रत्येक वर्ष परिक्रमार्थियों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है।
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