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    9 करोड़ के कफ सीरप कारोबार की खुलेगी पूरी कुंडली:आरोपियों की जमीन-मकान और बैंक खातों की होगी जांच, STF ने पकड़ी थीं 30 हजार शीशियां

    4 hours ago

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    बांदा के बिसंडा थाना क्षेत्र में पुनाहुर के पास पकड़ी गई कोडीनयुक्त कफ सीरप की 30 हजार शीशियों के मामले में पुलिस ने आर्थिक जांच तेज कर दी है। अब आरोपियों की संपत्तियों, बैंक खातों और सीरप की खरीद-बिक्री में हुए लेनदेन की कड़ियां जोड़ी जा रही हैं। 3 सितंबर को एसटीएफ ने करीब 3 करोड़ रुपए कीमत की सीरप से भरा मिनी ट्रक पकड़ा था। पूछताछ में सामने आया कि इससे पहले करीब 3-3 करोड़ रुपए की दो खेप और बेची जा चुकी थीं। यानी पुलिस को करीब 9 करोड़ रुपए के अवैध सीरप कारोबार का पता चला है। पांच आरोपी जेल भेजे जा चुके हैं, जबकि नेटवर्क से जुड़े 10 से 15 लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है। पुलिस जांच में पता चला है कि पकड़ी गई खेप से पहले भी करीब 3-3 करोड़ रुपए की दो खेप बेची गई थीं। इनका नेटवर्क बांदा से आगे चित्रकूट, हमीरपुर और मध्य प्रदेश के सतना तक फैला था। अब पुलिस यह पता लगा रही है कि इन खेपों की बिक्री से कितनी रकम मिली और उसे किन लोगों के जरिए ठिकाने लगाया गया। पुलिस सीरप की खरीद से लेकर उसकी बिक्री तक हर कड़ी जोड़ रही है। जांच का मुख्य फोकस इस बात पर है कि करीब 9 करोड़ रुपए के इस कारोबार से कमाई गई रकम आखिर कहां गई। जमीन-मकान खरीदे तो आय से होगा हिसाब पुलिस आरोपियों के नाम दर्ज जमीन, मकान, दुकान और दूसरी संपत्तियों का रिकॉर्ड जुटा रही है। यह भी देखा जा रहा है कि संपत्ति कब खरीदी गई, किसके नाम पर है और उसका भुगतान किस रकम से किया गया। संपत्ति खरीदने के समय आरोपियों की घोषित आय और उनके कारोबार का भी मिलान किया जाएगा। अगर किसी आरोपी के पास उसकी आय से ज्यादा कीमत की संपत्ति मिलती है, तो पुलिस यह पता लगाएगी कि उसे खरीदने के लिए पैसा कहां से आया। दूसरे व्यक्ति के नाम पर संपत्ति खरीदी गई होगी तो उसके भुगतान और बैंक लेनदेन के आधार पर भी कड़ी जोड़ी जाएगी। बैंक खातों से लेकर बैंक की CCTV तक जांच आर्थिक लेनदेन की जानकारी जुटाने के लिए आरोपियों के बैंक खातों की जांच की जा रही है। खातों में रकम जमा होने और निकाले जाने की तारीखों का मिलान संपत्ति खरीद की तारीखों से किया जाएगा। विवेचक गौरव मिश्रा ने अतर्रा स्थित एचडीएफसी बैंक की सीसीटीवी फुटेज भी हासिल की है। फुटेज के जरिए पुलिस उन लोगों की पहचान करने की कोशिश कर रही है, जो आरोपियों के साथ बैंक पहुंचे थे। इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि रकम के लेनदेन में आरोपियों के अलावा और कौन लोग शामिल थे। दिल्ली की कंपनी से खरीद, हमीरपुर के बिल भी जांच में पुलिस दिल्ली की गणेश फार्मा से हुई सीरप की खरीद और हमीरपुर की संबंधित एजेंसी के नाम जारी बिलों की भी जांच कर रही है। सीरप खरीदने में कितनी रकम दी गई, भुगतान किस तरीके से हुआ और किस बैंक खाते से पैसा भेजा गया, इसका मिलान आरोपियों के खातों से किया जाएगा। एसपी पलाश बंसल ने बताया कि आरोपितों की अर्जित संपत्तियों का विवरण जुटाया जा रहा है। संपत्तियों का उनकी आय और कारोबार से मिलान होगा और खरीद में इस्तेमाल रकम के स्रोत की जांच की जाएगी। पुलिस का मकसद अवैध सीरप कारोबार से जुटाई गई रकम की पूरी कड़ी सामने लाना और नेटवर्क में शामिल सभी लोगों की भूमिका तय करना है।
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