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    9 मानव तस्करों को 8 साल की सजा:लखनऊ कोर्ट ने 5 साल बाद सुनाया फैसला, रोहिंग्या-बांग्लादेशियों की भारत में घुसपैठ कराते थे

    4 hours ago

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    लखनऊ की विशेष अदालत ने बांग्लादेश-म्यांमार से रोहिंग्या को अवैध रूप से भारत लाकर बसाने वाले 9 दोषियों को 8 साल की सजा सुनाई। कोर्ट ने गुरुवार को इसे संगठित अपराध बताते हुए देश की सुरक्षा और मानवाधिकार दोनों के लिए गंभीर खतरा बताया। कोर्ट ने मो. नूर उर्फ नुरुल इस्लाम, रहमत उल्लाह, शबीउर्रहमान उर्फ शबी उल्लाह, इस्माइल, अब्दुल शकूर उर्फ गनी, आले मियां, मो. रफीक उर्फ रफीकुल इस्लाम, बप्पन उर्फ अरशद मियां और मो. हुसैन को जेल भेजने के आदेश दिए। बता दें, 26 जुलाई 2021 को यूपी एटीएस की टीम ने पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन पर छापेमारी कर मानव तस्कर गिरोह के 2 सदस्यों को हिरासत में लिया था। सुबह करीब 4:50 बजे प्लेटफॉर्म नंबर-2 के पास से मो. नुरुल इस्लाम और रहमत उल्लाह को गिरफ्तार किया गया था। इनकी निशानदेही पर दूसरे आरोपियों की भी गिरफ्तारी की गई। 2014 से सक्रिय था नेटवर्क, त्रिपुरा बॉर्डर से होती थी एंट्री पूछताछ में नुरुल इस्लाम ने बताया था कि वह वर्ष 2014-15 से मानव तस्करी के धंधे में सक्रिय है। वह बांग्लादेश का मूल निवासी है और त्रिपुरा में बांग्लादेश सीमा के जरिए सिंडिकेट के साथ मिलकर रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों को भारत में घुसाता था। इसके लिए प्रति व्यक्ति 20-20 हजार रुपए लिए जाते थे। भारत में लाने के बाद इन लोगों को अलग-अलग राज्यों में भेजा जाता था, जहां उन्हें मजदूरी या अन्य काम के नाम पर बेचा जाता था। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी खुद को भारतीय नागरिक साबित करने के लिए फर्जी आधार कार्ड, पैन कार्ड, वोटर आईडी और जन्म प्रमाण पत्र बनवाते थे। इन दस्तावेजों के जरिए वे न सिर्फ खुद को वैध नागरिक के रूप में स्थापित करते थे, बल्कि जिन लोगों को लाया जाता था, उन्हें भी इसी तरह की पहचान देकर देश के अलग-अलग हिस्सों में बसाया जाता था। महिलाओं की तस्करी कर बेचने की थी तैयारी पूछताछ में यह भी सामने आया कि इस गिरोह का नेटवर्क देश के कई राज्यों तक फैला हुआ था। एक आरोपी ने कबूल किया कि एक महिला को अवैध रूप से भारत लाकर जम्मू में बेचने की तैयारी थी। इसके अलावा, कई मामलों में रिश्तेदारों को बुलाने के नाम पर लोगों को भारत लाया जाता था, लेकिन बाद में उन्हें तस्करी के जाल में फंसा दिया जाता था। एटीएस की कार्रवाई में आरोपियों के पास से कई अहम सबूत बरामद हुए थे। इनमें अलग-अलग कंपनियों के मोबाइल फोन, बांग्लादेशी सिम कार्ड, आधार कार्ड, एटीएम कार्ड, रेलवे टिकट और एक बांग्लादेशी पहचान पत्र की कॉपी शामिल थी। इसके अलावा नकद रुपए और विदेशी मुद्रा भी बरामद हुई थी। इन सभी सामानों को मौके पर ही सील कर न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया था। कोर्ट में आरोपियों ने कबूला जुर्म, कहा-पैसे के लिए करते थे तस्करी एक अहम मोड़ तब आया जब 10 मार्च 2026 को सभी आरोपियों ने अदालत में जुर्म स्वीकार करने की अर्जी दी। अदालत ने उन्हें इसके परिणामों से अवगत कराया, जिसके बाद 28 मार्च 2026 को उन्होंने स्वेच्छा से अपना अपराध स्वीकार कर लिया। अदालत ने अपने फैसले में कहा- आरोपियों की स्वीकारोक्ति, गवाहों के बयान और बरामद साक्ष्यों से यह पूरी तरह साबित हो गया है कि यह एक संगठित अंतरराष्ट्रीय मानव तस्करी का मामला है। आरोपी बांग्लादेश और म्यांमार के नागरिक हैं और उन्होंने सुनियोजित षड्यंत्र के तहत भारत में अवैध प्रवेश कर लोगों का शोषण किया। ऐसे मामलों में कड़ी सजा देकर ही तस्करी नेटवर्क पर अंकुश लगाया जा सकता है।
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