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    आचार्य प्रमोद कृष्णम ने दिया विवादित बयान:गाजियाबाद में कहा- चितौड़ व भूमि है जहां वीरंगनाओं ने सूकर के बच्चों को अपनी सूरत दिखाना पसंद नहीं किया

    22 hours ago

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    गाजियाबाद के मुरादनगर अंबेडकर पार्क में आरएसएस और आचार्य प्रमोद कृष्णम द्वारा संयुक्त विराट हिंदू सम्मेलन सभा का आयोजन किया गया। जहां पर उन्होंने कहा कि बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ बात सही है लेकिन अपनी बेटी बचाओ, किससे बचाओ। सभा को संबोधित करते हुए आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कहा- आपमें से कितने लोग हैं जो चित्तौड़ गए होंगे, मुझे नहीं लगाता, बहुत कम गए लोग गए होंगे। चित्तौड़ राजस्थान की वह भूमि है, जहां एक दो चार नहीं, दस नहीं, हजारों, रानियों ने हजारों बहनों ने वीरंगनाओं ने जलती हुई आग के लपटों में अपनी जिंदगी को हवन कर दिया। लेकिन सूकर के बच्चों को अपनी सूरत दिखाना पसंद नहीं किया। वो स्थान है चित्तौड़, आज हमें बेटी बचाने की जरुरत पड़ रही है, बेटी बचाने का नारा लगाना पड़ रहा है, चितौड़ जरूर जाइए। कंधे पर पीला पटका, हाथ में थाली। किसी ने पूछा थाल सजाकर किसे पूजने चले प्रात: ही मतवाले, कहां चले तुम राम नाम का पीताम्बार तन पर डाले, इधर प्रयाग न गंगासागर, इधर न रामेश्वर काशी। इधर कहां है तीर्थ तुमारा कहां चले तुम सन्यासी। चले जा रहे अपनी धुन में, क्या अपना पथ आए भूल। कहां तुम्हारा दीप जलेगा कहां चढेगा माला फूल। उस साधू का जो जवाब है वह उत्तर है, इन प्लेकार्ड का है, उत्तर है सदियों पहले हुई गलती का, उत्तर है खंड खंड होने का है। उत्तर है इस राष्ट्र के अस्तित्व का। साधु ने कहा मुझे न जाना गंगासागर, मुझे न रामेश्वर त्यागी, तीर्थराज चित्तौड़ देखने को मेरी आंखे प्यासी। हिंदुत्व को कोई मिटा नहीं सकता आगे कहा हिंदुत्व को कोई मिटा नहीं सकता, मेरा जबाव है हिंदुत्व को कोई मिटा नहीं सकता। यह सम्मेलन क्यों कर रहे हो, लेकिन झंझोड़ना पड़ता है। हिंदुओं को जगाना पड़ता है। छत्रपति शिवाजी महाराज पूरी जिंदगी मुसीबतों को मोल लेते हैं, लेकिन औरंगजेब के सामने सिर झुकाना स्वीकार नहीं करते। घर में पैदा हुआ बालक भारत का प्रधानमंत्री बनकर अयोध्या में प्राण प्रतिष्ठा करता है तब हिंदुत्व जाग खड़ा होता है। स्वामी विवेकानंद शिकागो की धरती पर वसुधेव कुटम्ब का उदघोष करते हैं जब हिंदुत्व जाग्रत होता है। आरएसएस के स्वयं सेवकों के साथ सम्मेलन करते हैं तब हिंदु जाग्रत होता है। इसलिए आज मैं अपनी वाणी को विराम देने से पहले एक बात कहकर जाउंगा। हर दौर को आंखों ने बारीक से देखा है, इतिहास से देखा है। लम्हों से देखा है। लम्हों ने खता की थी सदियों ने सजा पाई, कोई गलती मत कर देना। परेशानी आएंगी, जाएंगी छोटे मोटे संघर्ष से परेशान मत होना। हो सकता है तुम्हारी कोई बात मुझे बुरी लग जाए। मेरी बात तुम्हें बुरी लग जाए। इससे हमारा रिश्ता खत्म नहीं हो जाता। वो रिश्ते खत्म हो भी सकते हैं तो हमने तुमने बनाए हैं। लेकिन वो रिश्तेकभी खत्म नहीं हो सकते जो इस मातृभूमि ने बनाए हैं। हम कहीं भी रहें, हिंदुस्तानी बनकर इस देश में रहना। इस हिंदुत्व की मशाल को अपने कलेजे में जलाए रखना। इसे बुझने मत देना। ईंट उसकी बुनियाद में रखो हमारा संकल्प भी ध्यान में रखो। जन्म से सभी शूद्र पैदा होते हैं आरएसएस के क्षेत्रीय प्रचारक महेंद्र सिंह ने कहा कि जन्म से कोई ऋषि मुनि या ब्राह्मण पैदा नहीं होता है। जन्म से सभी शुद्र पैदा होते हैं, आचार्य प्रमोद कृष्णम से जब यूजीसी पर सवाल किया तो उन्होंने कहा कि सभी को समानता का अधिकार है। यह कानून सही है या गलत इस पर सुप्रीम कोर्ट विचार करेगा, लेकिन जब उनसे उनके सूकर के बच्चे वाले बयान पर पूछा तो उन्होंने कहा कि सूकर के बच्चों को सूकर के बच्चे नहीं कहेंगे तो क्या गाय का बछड़ा कहेंगे।
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