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    आगरा में विजयदशमी पर अस्पतालों में डॉक्टर गायब रहे:दर्द से तड़पते रहे मरीज, घंटों करना पड़ा इंतजार

    1 hour ago

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    विजयदशमी पर आगरा के सरकारी अस्पतालों में स्वास्थ्य सेवाएं बेपटरी नजर आईं। जिला अस्पताल और जिला महिला अस्पताल में डॉक्टरों के समय पर नहीं मिलने से मरीजों को इलाज के लिए घंटों इंतजार करना पड़ा। वार्डों में भर्ती मरीज दर्द से परेशान रहे, लेकिन उन्हें देखने के लिए चिकित्सक समय पर नहीं पहुंचे। दूर-दराज से इलाज कराने आए मरीज और उनके तीमारदार डॉक्टरों की तलाश में एक कमरे से दूसरे कमरे तक भटकते रहे। त्योहार के दिन वैकल्पिक व्यवस्था नहीं होने से मरीजों की मुश्किलें और बढ़ गईं। सबसे ज्यादा परेशानी उन मरीजों को हुई, जिन्हें वार्ड में भर्ती होने के बाद डॉक्टर की जरूरत थी। जिला अस्पताल में मां का इलाज कराने पहुंचीं गीता देवी डॉक्टर को तलाशती रहीं, वहीं जिला महिला अस्पताल के पीएनसी वार्ड में भर्ती जीनत अपने नवजात बच्चे की परेशानी को लेकर चिंतित रहीं। उनका आरोप है कि दोपहर तक डॉक्टर उन्हें देखने नहीं पहुंचे। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि अवकाश के दिनों में भी डॉक्टरों की ड्यूटी लगाई जाती है। मरीजों को परेशानी हुई है तो इसकी जांच कराई जाएगी। मां के पेट में दर्द, डॉक्टर को तलाशती रहीं गीता देवी जिला अस्पताल में अपनी मां का इलाज कराने पहुंचीं गीता देवी ने बताया कि उनकी मां के पेट में अचानक तेज दर्द होने लगा। वह डॉक्टर को दिखाने के लिए दोपहर तक अस्पताल के कमरों के चक्कर काटती रहीं, लेकिन उन्हें कोई चिकित्सक नहीं मिला। ऐसे में मरीज को समय पर इलाज नहीं मिल सका। सामान्य दिनों में जिला अस्पताल की ओपीडी में 2,500 से 3,000 मरीज आते हैं। वहीं, एसएन मेडिकल कॉलेज में करीब 4,000 और जिला महिला अस्पताल में 600 से 700 मरीज रोजाना इलाज के लिए पहुंचते हैं। त्योहार के दिन डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ की अनुपस्थिति के चलते मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा। प्रसव के बाद मां-बच्चे को देखने नहीं पहुंचे डॉक्टर जिला महिला अस्पताल के पीएनसी वार्ड में भर्ती रामनगर निवासी जीनत ने बताया कि सोमवार रात उनका प्रसव हुआ था। वार्ड में बदलाव के बाद दोपहर 12:30 बजे तक कोई डॉक्टर उन्हें देखने नहीं आया। उनका नवजात बच्चा दूध नहीं पी रहा था। बच्चे की परेशानी देखकर वह डॉक्टर के आने का इंतजार करती रहीं। प्रसव के बाद मां और नवजात की नियमित जांच जरूरी होती है। ऐसे में डॉक्टर के समय पर नहीं पहुंचने से जीनत परेशान रहीं। उन्होंने बताया कि बच्चे की स्थिति को लेकर उन्हें चिकित्सकीय सलाह की जरूरत थी, लेकिन काफी देर तक इंतजार करना पड़ा। महिला अस्पताल अधीक्षक बोलीं- वार्डों की ली जाती है जानकारी जिला महिला अस्पताल की अधीक्षक डॉ. पुष्पलता ने बताया कि वार्डों में डॉक्टरों की जांच के बाद फोटो मंगाए जाते हैं। इसके जरिए मरीजों को देखने और वार्डों में चिकित्सकीय व्यवस्था की जानकारी ली जाती है। इसके बावजूद किसी मरीज को ऐसी समस्या आती है तो वह सीधे उनसे संपर्क कर सकता है। जिला अस्पताल अधीक्षक ने जांच कराने की बात कही जिला अस्पताल की अधीक्षक डॉ. सुनीता राठौर ने बताया कि अवकाश के दिनों में भी अन्य डॉक्टरों की ड्यूटी लगाई जाती है। यदि किसी मरीज को डॉक्टर नहीं मिलने की समस्या हुई है तो इसकी जांच कराई जाएगी।
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