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    ‘आध्यात्मिकता ही सबसे बड़ा साइंस’:वाराणसी में IIT-BHU पहुंचे शिकागो से आए अखंड स्वामी, छात्रों को दिए अहम टिप्स

    4 hours ago

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    अमेरिका के शिकागो में पले-बढ़े और वहां के इलिनोइस विश्वविद्यालय से न्यूरो सर्जरी में डिग्री हासिल करने के बाद संन्यास धारण करने वाले अखंड स्वामी काशी पहुंचे थे। यहां IIT-BHU के छात्रों से सीधे संवाद भी किए। वह यहां पर ‘इनसाइड दी ब्रेन बीयांड दी माइंड’ विषय पर संबोधित भी किए। उन्होंने कहा, जब परमात्मा की कृपा होती है, जब वो आपके लिए कुछ अलग सोचते हैं तो आपको कुछ भी छोड़ना मुश्किल नहीं लगता है। छोड़ना तब मुश्किल लगता है जब आके सामने कोई विजन नहीं होता है। उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा, कोई व्यक्ति एक लाख रुपये की जाॅब करता है, उसी के बदले में और उसी जिम्मेदारी के बदले में उसे एक करोड़ रुपये दिया जाता है तो एक लाख रुपये वाली जॉब छूट जाती है, सामने एक करोड़ वाली जाब दिखने लगती है। ऐसे में आपको यह छोड़ना नहीं पड़ता बल्कि छूट जाता है, इसी तरह आपको समृद्धि, सुख, विलासता छाेड़ना नहीं पड़ता वह भी खुद छूट जाता है। उन्होंने कहा, हमारे जीवन में भी ऐसा ही हुआ है। जब परमात्मा की कृपा हुई तो उन्होंने एक बड़ा विजन दिखाया मुझे कि क्या करना है। अब उनकी कृपा से सब छूट गया। उन्होंने कहा, अध्यात्मिकता सबसे बड़ा साइंस है। यह कोई नहीं कह सकता है कि साइंस और आध्यात्मिकता अलग है। यदि कोई सबसे बड़ा आध्यात्मिक है तो वह साइन्टिफिक भी होगा। यदि आप आध्यात्म की गहराई में चले जाते हैं तो विश्व के सभी साइंस से जुड जाते हैं। सबके जीवन में आती है विपत्तियां, घबराएं नहीं छात्रों को संबाेधित करते हुए उन्होंने कहा कि कोई ऐसा नहीं है जिसके जीवन में विपत्तियां न आती हो, लेकिन इन विपत्तियों से जो घबराए न वही सफलता हासिल करता है। आगे उन्हाेंने कहा, कई शास्त्रों को हमने पढ़ी, कई संतों की संगति मिली, उनके आशीर्वाद मिले। हमारे गुरु ने दीक्षा दिया। अध्यात्म में अपने कर्म को ही भक्ति बनाना पड़ेगा। ऐसा नहीं है कि आप अलग से पूजा पाठ करो। डॉक्टर, इंजीनियर जिस भी पेशे में हो उसको ईमानदारी से निभाना वही सबसे बड़ी भक्ति है।
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